12th Geography Book 2 chapter 12 भौगोलिक परिपेक्ष्य में चयनित कुछ मुद्दे एवं समस्याएँ Subjective
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)
प्रश्न 1. प्रदूषण और प्रदूषकों में क्या भेद है?
उत्तर: प्रदूषण और प्रदूषक में मुख्य अंतर निम्नलिखित है:
प्रदूषण (Pollution): इंसानों के गलत कामों या गतिविधियों से निकलने वाले कचरे के कारण जब पानी, हवा और जमीन की असली क्वालिटी (गुणवत्ता) खराब हो जाती है, तो उसे प्रदूषण कहते हैं। जैसे- जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण आदि।
प्रदूषक (Pollutants): वे बेकार चीजें या पदार्थ जो पानी, हवा या मिट्टी में मिलकर उन्हें गंदा और नुकसानदायक बनाते हैं, 'प्रदूषक' कहलाते हैं। जैसे- फैक्ट्रियों का गंदा पानी, प्लास्टिक, जहरीली गैसें, लाउडस्पीकर का शोर आदि।
प्रश्न 2. वायु प्रदूषण से क्या समझते हैं?
उत्तर: जब हवा (वायु) में ऐसे बाहरी और हानिकारक तत्व या गैसें मिल जाती हैं जो इंसानों, जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होती हैं, तो इस स्थिति को वायु प्रदूषण कहा जाता है।
प्रश्न 3. वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: हवा को गंदा करने वाले मुख्य स्रोत (वजहें) निम्नलिखित हैं:
कोयला, पेट्रोल, डीजल और प्राकृतिक गैस का जलना।
फैक्ट्रियों और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला जहरीला धुआँ।
गाड़ियों और वाहनों से निकलने वाला धुआँ।
खदानों (खनन कार्य) से उड़ने वाली धूल।
खेतों में फसलों के अवशेष (पराली) जलाने से निकलने वाला धुआँ।
इन सब से हवा में सल्फर, नाइट्रोजन के ऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और सीसा जैसी जहरीली गैसें और तत्व मिल जाते हैं।
प्रश्न 4. भारत में जल प्रदूषण से होने वाली दो बीमारियों के नाम लिखिए।
उत्तर: गंदा या प्रदूषित पानी पीने से इंसानों में कई तरह की संक्रामक बीमारियाँ हो जाती हैं। इनमें से प्रमुख बीमारियाँ निम्नलिखित हैं (आप कोई भी दो याद रख सकते हैं):
हैजा (Cholera)
पीलिया (Jaundice)
पेचिस या डायरिया (Dysentery / Diarrhea)
मियादी बुखार (टाइफाइड) और पेट में कीड़े होना।
प्रश्न 5. स्मॉग या शहरी धूम कोहरा क्या होता है?
उत्तर: शहरों या औद्योगिक क्षेत्रों में जब हवा की निचली परत में मौजूद जहरीली गैसें और प्रदूषण के कण (जैसे धुआँ) सर्दियों के सामान्य कोहरे के साथ मिल जाते हैं, तो उसे स्मॉग (Smog) या शहरी धूम-कोहरा कहते हैं। यह गहरे धुंध जैसा दिखता है और हमारे फेफड़ों तथा स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक होता है।
प्रश्न 6. जल प्रदूषण की रोकथाम के लिए चार महत्वपूर्ण सुझाव दीजिए।
उत्तर: पानी को गंदा होने से बचाने के लिए चार आसान और जरूरी उपाय निम्नलिखित हैं:
शहरों और नालियों की गंदगी को आस-पास के तालाबों, नदियों या जल स्रोतों में सीधे नहीं गिरने देना चाहिए।
सीवेज (शौचालय आदि) के गंदे पानी को साफ किए बिना नदियों में बहाने पर रोक लगानी चाहिए।
फैक्ट्रियों से निकलने वाले कैमिकल और कचरे को पहले वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में साफ (शोधित) करना चाहिए, उसके बाद ही विसर्जित करना चाहिए।
घरों के कूड़े-कचरे को पानी में फेंकने के बजाय उसके निपटारे (Disposal) की सही व्यवस्था करनी चाहिए।
प्रश्न 7. मृदा प्रदूषण क्या है? मृदा प्रदूषण के छ: कारण बताइए।
उत्तर: मृदा प्रदूषण (मिट्टी का प्रदूषण): जब मिट्टी में हानिकारक चीजें जैसे प्लास्टिक, केमिकल, गंदा पानी या कचरा मिल जाता है और उसकी उपजाऊ शक्ति (फसल उगाने की क्षमता) कम हो जाती है, तो उसे मृदा प्रदूषण कहते हैं।
मृदा प्रदूषण के 6 मुख्य कारण:
घरों के कूड़े-कचरे और प्लास्टिक का मिट्टी में मिलना।
फैक्ट्रियों से निकलने वाले रासायनिक कचरे को खुले में फेंकना।
खेतों में बहुत ज्यादा रासायनिक खाद (उर्वरक) और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करना।
गंदे या दूषित पानी से फसलों की सिंचाई करना।
परमाणु कचरे या रेडियोधर्मी पदार्थों का मिट्टी में मिल जाना।
अम्लीय वर्षा (Acid Rain) का होना, जिससे मिट्टी की प्रकृति खराब हो जाती है।
प्रश्न 8. भू-निम्नीकरण से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: भू-निम्नीकरण (Land Degradation) का सीधा मतलब है मिट्टी या भूमि की उपजाऊ शक्ति और उसकी क्वालिटी (गुणवत्ता) में कमी आना। जब मिट्टी का कटाव (अपरदन) होता है, खेतों में बहुत ज्यादा पानी जमा हो जाता है (जलक्रांतता), या मिट्टी में खारापन (लवणता) बढ़ जाता है, तो भूमि कमजोर हो जाती है। इसके कारण जमीन पर फसल उगाने की क्षमता हमेशा के लिए या कुछ समय के लिए बहुत कम हो जाती है।
प्रश्न 9. ध्वनि प्रदूषण के चार स्रोतों का उल्लेख करें।
उत्तर: वातावरण में आवाज का स्तर जब इंसान के बर्दाश्त करने की क्षमता से ज्यादा हो जाता है, तो उसे ध्वनि प्रदूषण कहते हैं। इसके चार मुख्य स्रोत निम्नलिखित हैं:
लाउडस्पीकर, रेडियो, टेलीविजन और संगीत का बहुत तेज आवाज में बजना।
कारखानों और फैक्ट्रियों में चलने वाली बड़ी-बड़ी ऑटोमैटिक मशीनों की तेज आवाज।
समुद्री बंदरगाहों (पत्तनों) पर बड़े-बड़े पानी के जहाजों के आने-जाने से होने वाला शोर।
हवाई अड्डों पर उड़ते और उतरते समय हवाई जहाजों से निकलने वाली बहुत तेज आवाज (जो लगभग 120 से 180 डेसिबल तक होती है)।
प्रश्न 10. भारत में नगरीय अपशिष्ट से जुड़ी प्रमुख समस्याओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: भारत के शहरों में बढ़ती आबादी के कारण पैदा होने वाला सूखा और गीला कचरा (नगरीय अपशिष्ट) एक बड़ी समस्या बन गया है:
शहरों में जगह-जगह ठोस कचरे के बड़े-बड़े ढेर लग गए हैं।
इस कचरे में प्लास्टिक, पुराने इलेक्ट्रॉनिक सामान, काँच, कागज और मकान टूटने का मलबा शामिल होता है।
इस कचरे का सही समय पर निपटारा न होने के कारण शहरों का वातावरण और हवा-पानी प्रदूषित हो रहे हैं।
प्रश्न 11. मानव स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के क्या प्रभाव पड़ते हैं?
उत्तर: गंदी हवा (वायु प्रदूषण) का इंसानों के शरीर पर बहुत बुरा और सीधा असर पड़ता है। इससे निम्नलिखित प्रणालियों को नुकसान पहुँचता है:
श्वसन तंत्र (Respiratory System): साँस लेने में तकलीफ, दमा (अस्थमा) और खाँसी जैसी बीमारियाँ होती हैं।
तंत्रिका तंत्र (Nerve System): दिमाग और नसों पर बुरा असर पड़ता है।
रक्तसंचार तंत्र (Blood Circulation): खून की सफाई और बहाव में रुकावट आती है, जिससे दिल से जुड़ी बीमारियाँ हो सकती हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)
प्रश्न 1. विकासशील देशों में नगरीकरण से उत्पन्न समस्याओं का वर्णन करें।
उत्तर: विकासशील देशों (जैसे भारत) में शहरों की आबादी बहुत तेजी से बढ़ रही है (नगरीकरण हो रहा है)। लेकिन बिना किसी सही प्लानिंग (योजना) के शहर बसने के कारण निम्नलिखित गंभीर समस्याएँ पैदा हो रही हैं:
आबादी का भारी दबाव: गाँवों से लोग काम और अच्छी सुविधाओं की तलाश में शहरों की तरफ भाग रहे हैं, जिससे शहरों में भीड़ बहुत बढ़ गई है।
झुग्गी-झोपड़ियों का विस्तार: रहने के लिए घरों की कमी के कारण गरीब लोग मजबूरन गंदी बस्तियों और झुग्गी-झोपड़ियों (Slums) में रहने लगते हैं, जहाँ बुनियादी सुविधाएँ नहीं होतीं।
सुविधाओं की कमी: शहरों में सभी लोगों के लिए पीने का साफ पानी, बिजली, सड़कों और साफ-सफाई की भारी कमी हो जाती है।
बेरोजगारी और ट्रैफिक: आबादी के मुकाबले रोजगार कम होने से बेरोजगारी बढ़ती है और सड़कों पर गाड़ियों की संख्या बढ़ने से ट्रैफिक जाम की समस्या आम हो जाती है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य को नुकसान: कचरे और गाड़ियों के धुएँ से प्रदूषण बढ़ता है। पानी जमा होने (जलभराव) से बीमारियाँ फैलती हैं और लोगों का स्वास्थ्य खराब होता है।
प्रश्न 2. ध्वनि प्रदूषण पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) आज के समय की एक बड़ी अनचाही समस्या है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
कारण: सड़कों पर वाहनों का शोर, शादियों और त्योहारों में बजने वाले लाउडस्पीकर, फैक्ट्रियों की मशीनें और पटाखों की तेज आवाज इसकी सबसे बड़ी वजहें हैं।
इंसानों पर असर: बहुत ज्यादा शोर में रहने से इंसान चिड़चिड़ा हो जाता है। उसे नींद न आने (अनिद्रा), सिरदर्द, हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप), मानसिक तनाव और कम सुनने की बीमारी हो सकती है।
पशु-पक्षियों पर असर: यह केवल इंसानों को ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों को भी डराता है। इसके डर से कई पक्षी अपने घोंसले छोड़कर दूसरी जगहों पर चले जाते हैं।
रोकथाम के उपाय: ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए लाउडस्पीकर की आवाज और समय की सीमा तय होनी चाहिए, कारखानों में साइलेंसर (ध्वनि रोधक यंत्र) लगाने चाहिए और गाड़ियों के हॉर्न का बेवजह इस्तेमाल बंद होना चाहिए।
प्रश्न 3. जल प्रदूषण पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: जब हमारी नदियों, तालाबों और जमीन के अंदर के पानी (भूजल) में हानिकारक चीजें मिल जाती हैं, तो उसे जल प्रदूषण (Water Pollution) कहते हैं। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
कारण: फैक्ट्रियों का जहरीला कैमिकल, शहरों के गंदे नालों का पानी, प्लास्टिक और खेतों में इस्तेमाल होने वाली कीटनाशक दवाएँ पानी को गंदा करती हैं।
बीमारियाँ: गंदा पानी पीने या उससे खाना बनाने से हैजा, दस्त (डायरिया), टाइफाइड और हेपेटाइटिस (पीलिया) जैसी जानलेवा बीमारियाँ फैलती हैं।
जलीय जीवों को नुकसान: पानी में प्रदूषण बढ़ने से उसमें ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है, जिससे मछलियाँ और पानी में रहने वाले अन्य जीव मरने लगते हैं।
समाधान: जल प्रदूषण को रोकने के लिए कारखानों और गंदे नाले के पानी को नदियों में डालने से पहले साफ (Filter) करना जरूरी है। प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगानी चाहिए और नदियों की नियमित सफाई होनी चाहिए, क्योंकि साफ पानी ही एक स्वस्थ समाज की पहचान है।
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