12th Political science Book 2 विदेश संबंध Subjective
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. भारत के विदेश नीति के उद्देश्यों का उल्लेख करें।
उत्तर:- भारत की विदेश नीति के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
विश्व में शांति और सुरक्षा: पूरी दुनिया में शांति बनाए रखना और लड़ाई-झगड़ों को रोकना।
गुलामी या कब्जे का विरोध (साम्राज्यवाद का विरोध): किसी भी बड़े देश द्वारा छोटे या कमजोर देशों को दबाने या उन पर कब्जा करने का विरोध करना।
भेदभाव के खिलाफ: रंग, जाति या नस्ल के आधार पर होने वाले हर तरह के भेदभाव का विरोध करना।
बातचीत से आपसी विवाद सुलझाना: देशों के बीच के झगड़ों को युद्ध के बजाय शांति से और बातचीत के जरिए हल करना।
मिलकर रहना (सह-अस्तित्व): सभी देशों के साथ मिलजुलकर और शांति से रहने की भावना को बढ़ावा देना।
किसी गुट में शामिल न होना: दुनिया के शक्तिशाली देशों के किसी भी सैन्य समूह (गुट) में शामिल न होना।
प्रश्न 2. विदेश नीति से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:- कोई भी देश दूसरे देशों के साथ अपने संबंध (रिश्ते) बनाने और उन्हें निभाने के लिए जो नियम या नीतियां बनाता है, उसे उस देश की विदेश नीति कहते हैं। आसान शब्दों में, यह दूसरे देशों के साथ व्यवहार करने का एक तरीका है।
प्रश्न 3. भारत के विदेश के दो सैद्धांतिक आधार लिखें-
उत्तर:- भारत की विदेश नीति के दो मुख्य आधार इस प्रकार हैं:
अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा: दुनिया भर में शांति का माहौल बनाए रखने में मदद करना।
गुटनिरपेक्षता की नीति: किसी भी बड़े और शक्तिशाली सैन्य गुट का हिस्सा न बनकर अपनी स्वतंत्र नीति चलाना।
प्रश्न 4. गुटनिरपेक्षता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:- गुटनिरपेक्षता का अर्थ है दुनिया के ताकतवर देशों के किसी भी सैन्य गुट या ग्रुप में शामिल न होना। इसके तहत कोई भी देश किसी के दबाव में आए बिना, पूरी तरह आजाद रहकर अपनी नीतियां तय करता है और सही को सही व गलत को गलत कहने की आजादी रखता है।
प्रश्न 5. भारतीय विदेश नीति के चार अनिवार्य कारक बताइए।
उत्तर:- भारतीय विदेश नीति को तय करने वाले चार मुख्य कारक निम्नलिखित हैं:
राष्ट्रीय हित: देश की सुरक्षा और तरक्की को सबसे पहले देखना।
पड़ोसी देशों से संबंध: अपने आस-पास के देशों (जैसे नेपाल, श्रीलंका आदि) के साथ अच्छे और शांतिपूर्ण रिश्ते बनाए रखना।
देश की राजनीतिक स्थिति: देश के अंदर की सरकार और राजनीति का मजबूत होना।
अंतरराष्ट्रीय माहौल: पूरी दुनिया में चल रही राजनीति और बदलावों को ध्यान में रखना।
प्रश्न 6. मैक मोहन रेखा क्या है?
उत्तर:- भारत और चीन के बीच की सीमा (Border) को तय करने वाली लाइन को मैक मोहन रेखा (McMahon Line) कहा जाता है।
प्रश्न 7. 1954 में हुई भारत चीन संधि के विशेषता बताइए। अथवा, पंचशील क्या हैं? अथवा, पंचशील का सूत्र बताइए-
उत्तर:- 29 अप्रैल 1954 को भारत और चीन के बीच एक समझौता हुआ था, जिसे पंचशील समझौता कहते हैं। इसमें मिलकर रहने के 5 बड़े नियम (सिद्धांत) तय किए गए थे, जो इस प्रकार हैं:
एक-दूसरे का सम्मान: दोनों देश एक-दूसरे की जमीन और आजादी का सम्मान करेंगे।
आक्रमण न करना: कोई भी देश एक-दूसरे पर हमला नहीं करेगा।
अंदरूनी मामलों में दखल न देना: एक-दूसरे के घरेलू या अंदरूनी मामलों में कोई हस्तक्षेप (टांग अड़ाना) नहीं करेगा।
बराबरी और फायदा: दोनों देश आपस में बराबरी का व्यवहार करेंगे और एक-दूसरे के फायदे के लिए काम करेंगे।
शांति से मिलकर रहना: दोनों देश बिना किसी लड़ाई के शांतिपूर्ण तरीके से मिलजुलकर रहेंगे।
प्रश्न 8. ताशकंद और शिमला समझौता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:- * ताशकंद समझौता: भारत और पाकिस्तान के बीच 1965 के युद्ध के बाद, 10 जनवरी 1966 को एक शांति समझौता हुआ जिसे ताशकंद समझौता कहते हैं। यह समझौता भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच हुआ था।
शिमला समझौता: भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 के युद्ध के बाद, 3 जुलाई 1972 को एक और समझौता हुआ जिसे शिमला समझौता कहते हैं। यह समझौता भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के नेता जुल्फिकार अली भुट्टो के बीच हुआ था।
प्रश्न 9. तिब्बत का पठार भारत और चीन के बीच तनाव का मुद्दा कैसे बना।
उत्तर:- चीन ने 1950 में तिब्बत पर जबरन कब्जा कर लिया था। इससे भारत और चीन के बीच जो तिब्बत एक बफर स्टेट (बीच का सुरक्षित क्षेत्र) था, वह खत्म हो गया और चीन सीधे भारत की सीमा पर आ गया। जब चीन ने तिब्बत के लोगों को प्रताड़ित किया, तो वहाँ के धार्मिक नेता दलाई लामा ने 1959 में भारत से मदद मांगी और भारत ने उन्हें शरण (रहने की जगह) दे दी। इस बात से चीन नाराज हो गया और उसने आरोप लगाया कि भारत चीन-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है। इसी वजह से तिब्बत दोनों देशों के बीच विवाद की वजह बन गया।
प्रश्न 10. कारगिल युद्ध का कारण बताइए-
उत्तर:- कारगिल युद्ध का मुख्य कारण यह था कि पाकिस्तान के सैनिकों और आतंकवादियों ने छुपकर भारत की कारगिल पहाड़ियों की चोटियों पर कब्जा कर लिया था। जब भारतीय सेना को इसकी भनक लगी, तो अपनी जमीन को वापस पाने के लिए भारत ने अभियान चलाया। इसी वजह से 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच कारगिल का युद्ध हुआ।
प्रश्न 11. भारत के परमाणु नीति का मुख्य सिद्धांत क्या हैं?
उत्तर:- भारत की परमाणु नीति (Nuclear Policy) के मुख्य नियम निम्नलिखित हैं:
भारत अपने बचाव और सुरक्षा के लिए परमाणु हथियार रखेगा।
पहले प्रयोग नहीं (No First Use): भारत किसी भी देश पर पहले परमाणु हमला नहीं करेगा।
भारत ने दुनिया के भेदभावपूर्ण परमाणु नियमों (परमाणु अप्रसार संधि) का विरोध किया है।
भारत परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल विनाश के लिए नहीं, बल्कि शांति और विकास (जैसे बिजली बनाने) के लिए करेगा।
अगर दुनिया के सभी देश अपने हथियार नष्ट करने को तैयार हों, तो भारत भी हथियारों को खत्म करने के पक्ष में है।
प्रश्न 12. NPT क्या हैं?
उत्तर:- NPT का पूरा नाम Nuclear Non-Proliferation Treaty (परमाणु अप्रसार संधि) है। इसे संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) द्वारा 1968 में लाया गया था। इस नियम के अनुसार केवल वही देश परमाणु हथियार रख सकते हैं जिन्होंने 1968 से पहले इसका टेस्ट (परीक्षण) कर लिया था, बाकी देशों को यह हक नहीं था। भारत ने इस संधि पर दस्तखत नहीं किए क्योंकि यह भेदभाव से भरी थी और बड़े देशों को बढ़ावा देती थी।
प्रश्न 13. सहयोगी संघवाद क्या हैं?
उत्तर:- जब दो या दो से अधिक स्वतंत्र राज्य या सरकारें आपस में मिलकर, एक-दूसरे का सहयोग करते हुए एक बड़ी और मजबूत व्यवस्था (देश) का निर्माण करती हैं, तो उसे सहयोगी संघवाद कहते हैं। इसमें मिलकर काम करने पर जोर दिया जाता है।
प्रश्न 14. पंचशील समझौता क्या है।
उत्तर:- पंचशील समझौता भारत और चीन के बीच 1954 में हुआ एक ऐतिहासिक समझौता है। इसमें पाँच ऐसे नियम तय किए गए थे जिनके आधार पर दो देश आपस में बिना लड़े, शांति और सम्मान के साथ मिलजुलकर रह सकते हैं (इन पाँच नियमों की पूरी जानकारी ऊपर प्रश्न संख्या 7 में दी गई है)।
यह समझौता भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और चीन के प्रधानमंत्री चाऊ-एन-लाई के बीच 29 अप्रैल 1954 को हुआ था।
प्रश्न 15. ताशकन्द समझौते का वर्णन कीजिए। (Mention the Tashkent Agreement.)
उत्तर:- ताशकंद समझौते की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
शांतिपूर्ण समाधान: भारत और पाकिस्तान दोनों देश अपने आपसी विवादों को बिना लड़ाई के, शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाएंगे।
दखल न देना: दोनों देश एक-दूसरे के अंदरूनी या घरेलू मामलों में कोई हस्तक्षेप (टांग अड़ाना) नहीं करेंगे।
युद्ध-विराम का पालन: दोनों देश लड़ाई रोकने (सीज़फायर) की शर्तों का पूरी तरह पालन करेंगे और अपनी सेनाएं पुरानी जगह वापस ले जाएंगे।
कैदियों की रिहाई: युद्ध के दौरान पकड़े गए दोनों देशों के युद्धबंदियों (सैनिकों) को रिहा किया जाएगा और उन्हें अपने देश वापस भेजा जाएगा।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. भारत-चीन सम्बन्ध पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:- भारत और चीन के संबंधों का इतिहास उतार-चढ़ाव से भरा रहा है, जिसे हम निम्नलिखित बिंदुओं से समझ सकते हैं:
शुरुआती दोस्ती: चीन में 1949 की क्रांति के बाद जब कम्युनिस्ट सरकार बनी, तो भारत उसे मान्यता देने वाले शुरुआती देशों में से था। शुरू में दोनों देशों में बहुत अच्छी दोस्ती थी और "हिंदी चीनी भाई-भाई" का नारा गूँजता था। 1954 में दोनों के बीच 'पंचशील समझौता' भी हुआ।
विवाद की शुरुआत: चीन ने 1950 में तिब्बत पर कब्जा कर लिया। जब चीनी अत्याचारों के कारण तिब्बत के धार्मिक नेता दलाई लामा 1959 में भागकर भारत आए, तो भारत ने उन्हें शरण दे दी। इस बात से चीन नाराज हो गया। इसके अलावा, चीन ने भारत के दो हिस्सों—जम्मू-कश्मीर के 'अक्साई चीन' और 'अरुणाचल प्रदेश' पर अपना दावा ठोक दिया, जिससे 1957 से 1959 के बीच दोनों सेनाओं में झड़पें हुईं।
1962 का युद्ध: अक्टूबर 1962 में चीन ने भारत पर अचानक बड़ा हमला कर दिया। चीनी सेना अरुणाचल प्रदेश और असम के मैदानी इलाकों के करीब तक पहुँच गई। बाद में चीन ने खुद ही एकतरफा युद्धविराम (लड़ाई रोकने) की घोषणा की और अपनी सेना पीछे हटा ली। इस संकट के समय भारत को अमेरिका और ब्रिटेन से सैन्य मदद मांगनी पड़ी थी।
सुधार के प्रयास: इस युद्ध के बाद दोनों देशों के रिश्ते टूट गए थे, जो 1976 में जाकर दोबारा शुरू हुए। 1979 में अटल बिहारी वाजपेयी (विदेश मंत्री के रूप में), 1988 में राजीव गांधी और 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी (प्रधानमंत्री के रूप में) चीन यात्रा पर गए ताकि आपसी रिश्तों और व्यापार को सुधारा जा सके।
प्रश्न 2. भारत की विदेश नीति का वर्णन कीजिए। अथवा, भारतीय विदेश नीति का मुख्य आधार क्या है? अथवा, समकालीन विश्व में भारत की विदेशी नीति के निर्धारण तत्व बताएं-
उत्तर:- भारत की विदेश नीति के मुख्य आधार और सिद्धांत निम्नलिखित हैं, जो पूरी दुनिया में भारत के व्यवहार को तय करते हैं:
विश्व शांति: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए हर संभव कोशिश करना।
बातचीत से हल: दो देशों के आपसी झगड़ों को मध्यस्थता (तीसरे पक्ष की मदद या बातचीत) द्वारा शांति से सुलझाना।
आपसी सम्मान: दुनिया के सभी छोटे-बड़े देशों के साथ सम्मानजनक और बराबरी का रिश्ता रखना।
अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन: दुनिया के नियमों, कानूनों और आपस में की गई संधियों (समझौतों) का पूरी निष्ठा से पालन करना।
गुटनिरपेक्षता: दुनिया के किसी भी शक्तिशाली और सैन्य गुट में शामिल न होकर अपनी स्वतंत्र नीति अपनाना।
गुलामी का विरोध (उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद का विरोध): किसी भी देश को गुलाम बनाने या उस पर जबरन कब्जा करने की नीति का कड़ा विरोध करना।
पीड़ितों की मदद: दुनिया के जो भी देश या जनता रंगभेद, जातिवाद या गुलामी से परेशान हैं, उनका खुलकर समर्थन और सहायता करना।
पंचशील का पालन: शांति से मिलकर रहने के पाँच सिद्धांतों (पंचशील) पर चलना।
हथियारों की होड़ पर रोक (निशस्त्रीकरण): दुनिया में घातक हथियारों को कम करने या खत्म करने की वकालत करना ताकि युद्ध का खतरा टल सके।
प्रश्न 3. भारत-पाक सम्बन्धों पर संक्षिप्त लेख लिखिए।
उत्तर:- भारत और पाकिस्तान के संबंध आजादी के बाद से ही तनावपूर्ण रहे हैं। इनके बीच के मुख्य विवाद और घटनाएं निम्नलिखित हैं:
शुरुआती विवाद (1947): 1947 में देश के बँटवारे के तुरंत बाद कश्मीर को लेकर दोनों देशों के बीच लड़ाई (छाया-युद्ध) छिड़ गई। बाद में इस मामले को संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) में ले जाया गया।
सिंधु जल संधि (1960): नदियों के पानी के बँटवारे के लिए 1960 में दोनों देशों के बीच 'सिंधु जल समझौता' हुआ।
1965 का युद्ध और ताशकंद समझौता: 1965 में दोनों देशों के बीच बड़ा युद्ध हुआ। संयुक्त राष्ट्र के दखल से लड़ाई रुकी और 10 जनवरी 1966 को दोनों देशों के बीच 'ताशकंद समझौता' हुआ।
1971 का युद्ध और बांग्लादेश का जन्म: 1971 में पाकिस्तान के अंदरूनी संकट के कारण पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के लोगों ने आजादी की लड़ाई शुरू की। भारत ने उनकी मदद की, जिससे भारत-पाक के बीच सीधा युद्ध छिड़ गया। भारतीय सेना ने पाकिस्तान के लगभग 90 हजार सैनिकों को आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद 3 जुलाई 1972 को दोनों देशों के बीच 'शिमला समझौता' हुआ।
1999 का कारगिल युद्ध: 1999 में पाकिस्तानी घुसपैठियों और सैनिकों ने कारगिल की पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया था। भारतीय सेना ने उन्हें खदेड़कर 26 जुलाई 1999 को कारगिल पर दोबारा तिरंगा फहराया। इसीलिए हर साल 26 जुलाई को 'कारगिल विजय दिवस' मनाया जाता है।
प्रश्न 4. भारत के विदेश नीति के निर्माण में नेहरू के भूमिका स्पष्ट कीजिए-
उत्तर:- भारत के पहले प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को भारतीय विदेश नीति का मुख्य निर्माता माना जाता है। उनकी भूमिका के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
गुटनिरपेक्षता की नीति: नेहरू जी ने भारत को दुनिया के ताकतवर देशों के सैनिक गुटों से दूर रखा और स्वतंत्र नीति अपनाई।
एशियाई एकता: उन्होंने एशिया के देशों को एकजुट करने के लिए 1947 में दिल्ली में 'एशियाई संबंध सम्मेलन' कराया और 1949 में इंडोनेशिया की आजादी का समर्थन किया।
पंचशील समझौता (1954): नेहरू जी और चीन के प्रधानमंत्री चाऊ एन लाई के बीच 29 अप्रैल 1954 को पंचशील समझौता हुआ, जिसमें शांति से रहने के 5 नियम तय किए गए:
a) एक-दूसरे पर हमला नहीं करना।
b) एक-दूसरे के अंदरूनी मामलों में दखल न देना।
c) एक-दूसरे की आजादी और अखंडता का सम्मान करना।
d) बराबरी और आपसी दोस्ती की भावना रखना।
e) शांति के साथ मिलजुलकर रहना।
नेहरू की विदेश नीति के मुख्य लक्ष्य: * a) कठिन संघर्ष से मिली देश की आजादी (प्रभुसत्ता) को बचाए रखना।
b) देश की सीमाओं को सुरक्षित रखना।
c) देश का तेजी से आर्थिक विकास करना।
प्रश्न 5. कश्मीर समस्या पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर:- कश्मीर समस्या भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का सबसे बड़ा कारण है। इसे आसान शब्दों में इस तरह समझ सकते हैं:
विवाद की शुरुआत (1947): 1947 में बँटवारे के समय पाकिस्तान ने कश्मीर पर अपना दावा किया और वहाँ जबरन हमला कर दिया। तब कश्मीर के राजा हरी सिंह ने भारत से मदद मांगी। भारत ने मदद के बदले कश्मीर को भारत में मिलाने की शर्त रखी।
विलय पत्र पर हस्ताक्षर: 26 अक्टूबर 1947 को राजा हरी सिंह ने विलय पत्र पर दस्तखत करके कश्मीर को कानूनी रूप से भारत का हिस्सा बना दिया। इसके बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तानी हमलावरों को पीछे खदेड़ा।
कश्मीर का बँटवारा: इस लड़ाई के कारण कश्मीर के दो हिस्से हो गए। एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में चला गया जिसे 'पाक अधिकृत कश्मीर' (PoK) कहते हैं, और दूसरा हिस्सा भारत के पास रहा जो भारत का जम्मू-कश्मीर राज्य बना। दोनों हिस्सों के बीच की सीमा को नियंत्रण रेखा (LoC) कहा जाता है।
मुख्य विवाद: पाकिस्तान आज भी यह दलील देता है कि वहाँ मुस्लिम आबादी ज्यादा है, इसलिए कश्मीर उसका हिस्सा होना चाहिए, जबकि भारत का साफ कहना है कि राजा हरी सिंह के हस्ताक्षर के बाद पूरा कश्मीर कानूनी रूप से भारत का अभिन्न अंग है।

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