12th History Chapter 10 उपनिवेशवाद और देहात subjective
प्रश्न 1. प्लासी का युद्ध कब और किसके मध्य हुआ था?
उत्तर: प्लासी का प्रसिद्ध युद्ध 23 जून 1757 ईस्वी को हुआ था। यह युद्ध बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला और अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी (जिसका नेतृत्व रॉबर्ट क्लाइव कर रहा था) के बीच लड़ा गया था। इस युद्ध में अंग्रेजों की जीत हुई थी और इसी जीत के बाद भारत में ब्रिटिश शासन की नींव पड़ी।
प्रश्न 2. प्लासी युद्ध के दो कारणों को लिखिए।
उत्तर: प्लासी के युद्ध के दो सबसे प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:
व्यापारिक छूट का दुरुपयोग: अंग्रेजों को बंगाल में बिना टैक्स दिए व्यापार करने की जो विशेष छूट मिली थी, वे उसका गलत इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे बंगाल के खजाने को भारी नुकसान हो रहा था।
कोलकाता की किलेबंदी: नवाब सिराजुद्दौला के मना करने के बावजूद अंग्रेजों ने कोलकाता में अपने कारखाने (फोर्ट विलियम) की चारों तरफ से घेराबंदी और किलेबंदी करना शुरू कर दिया था, जिसे नवाब ने अपनी संप्रभुता को चुनौती माना।
प्रश्न 3. उपनिवेशवाद का क्या अर्थ है?
उत्तर: जब कोई ताकतवर या शक्तिशाली देश किसी कमजोर देश पर आर्थिक और राजनीतिक रूप से अपना कब्जा जमा लेता है और उस देश के सभी संसाधनों (जैसे धन-दौलत, जमीन और कच्चे माल) का इस्तेमाल सिर्फ अपने फायदे के लिए करने लगता है, तो इस पूरी व्यवस्था को उवेनिशवाद कहते हैं। (जैसे- आजादी से पहले भारत, ब्रिटेन का एक उपनिवेश था)।
प्रश्न 4. भारत में उपनिवेशों की स्थापना के चार कारण लिखें।
उत्तर: अंग्रेजों द्वारा भारत को अपना उपनिवेश बनाने (कब्जा करने) के चार मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
कच्चे माल की जरूरत: ब्रिटेन के कारखानों के लिए भारत से सस्ते दामों पर कच्चा माल (जैसे- कपास, नील, पटसन) हासिल करना।
तैयार माल को बेचने के लिए बाजार: ब्रिटेन की फैक्ट्रियों में मशीनों से बने सामान को महंगे दामों पर बेचने के लिए भारत को एक बड़े बाजार के रूप में इस्तेमाल करना।
ईसाई धर्म का प्रचार: भारत में अपने धर्म और संस्कृति को फैलाना तथा लोगों को ईसाई बनाना।
अमीर बनने की चाह (समृद्धि की लालसा): भारत को 'सोने की चिड़िया' कहा जाता था, यहाँ की धन-दौलत को लूटकर अपने देश को और ज्यादा अमीर बनाना।
प्रश्न 5. बंगाल में स्थाई बंदोबस्त के दो विशेषताओं को लिखिए।
उत्तर: लॉर्ड कॉर्नवॉलिस द्वारा 1793 ईस्वी में बंगाल में लागू की गई स्थाई बंदोबस्त (जमींदारी व्यवस्था) की दो मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार थीं:
जमींदार बना मालिक: इस व्यवस्था के तहत जमीन का असली मालिक हमेशा के लिए जमींदार को मान लिया गया। जब तक जमींदार सरकार को टैक्स देता रहता, जमीन उसकी रहती थी।
टैक्स की रकम हुई निश्चित: सरकार को दिया जाने वाला लगान (टैक्स) हमेशा के लिए तय (फिक्स) कर दिया गया। भविष्य में फसल अच्छी हो या खराब, जमींदारों को तय की गई रकम ही तय समय पर सरकारी खजाने में जमा करनी होती थी।
प्रश्न 6. स्थायी बंदोबस्त से कंपनी को क्या लाभ हुए?
उत्तर: स्थायी बंदोबस्त लागू करने से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को निम्नलिखित बड़े फायदे हुए:
निश्चित आमदनी: सरकार (कंपनी) की सालाना आय पूरी तरह तय और निश्चित हो गई, जिससे उन्हें अपना बजट बनाने में आसानी हुई।
समय और मेहनत की बचत: हर कुछ सालों बाद नया बंदोबस्त करने और टैक्स की दरें तय करने के झंझट से कंपनी को हमेशा के लिए छुटकारा मिल गया।
वफादार जमींदार मिले: इस व्यवस्था से जमींदारों को बहुत फायदा हुआ, जिससे वे ब्रिटिश सरकार के पक्के चेले (स्वामिभक्त) बन गए। इसी वफादारी के कारण जमींदारों ने 1857 के विद्रोह में क्रांतिकारियों के खिलाफ जाकर अंग्रेजों का पूरा साथ दिया।
प्रशासनिक सुविधा: बार-बार टैक्स वसूलने के काम से मुक्ति मिलने के कारण सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों का समय बचा, जिसका उपयोग वे शासन चलाने के अन्य कार्यों में करने लगे।
प्रश्न 7. रैयतवाड़ी व्यवस्था की विशेषताओं को लिखें।
उत्तर: रैयतवाड़ी व्यवस्था (जहाँ 'रैयत' का मतलब किसान होता है) की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित थीं:
किसान बना मालिक: इस व्यवस्था में जमींदारों को हटाकर सीधे किसान को ही जमीन का असली मालिक मान लिया गया।
सीधा टैक्स: किसान बिना किसी बिचौलिए (जमींदार) के अपने हिस्से का लगान (टैक्स) सीधे कंपनी के पास जमा कराते थे।
प्रश्न 8. महालवाड़ी बंदोबस्त से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
अर्थ: 'महाल' का मतलब होता है पूरा गाँव या जागीर। इस व्यवस्था के तहत टैक्स वसूलने के लिए किसी एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे गाँव को एक इकाई (महाल) माना गया।
नियम: इसमें लगान इकट्ठा करके कंपनी को सौंपने की पूरी जिम्मेदारी गाँव के मुखिया को दी गई थी।
कब और कहाँ: यह व्यवस्था 1822 ईस्वी में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रांत (मध्य प्रदेश) और पंजाब के इलाकों में लागू की गई थी।
प्रश्न 9. संथाल विद्रोह पर एक टिप्पणी लिखें। अथवा, संथालों ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह क्यों किया?
उत्तर:
विद्रोह का कारण: जब ब्रिटिश अधिकारियों, जमींदारों, चालाक व्यापारियों और सूदखोर महाजनों ने मिलकर संथाल जनजाति के लोगों पर तरह-तरह के अत्याचार किए और उनका भारी आर्थिक शोषण किया, तो उनके सब्र का बांध टूट गया। अपने हक के लिए संथालों ने अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठा लिए, जिसे संथाल विद्रोह कहा जाता है।
समय और नेतृत्व: यह ऐतिहासिक विद्रोह 1855 - 1856 ईस्वी में शुरू हुआ था, जिसका नेतृत्व दो सगे भाइयों सिद्धू और कान्हू ने किया था।
प्रश्न 10. झूम खेती के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर: झूम खेती (जिसे स्थानांतरित कृषि या काटो और जलाओ खेती भी कहते हैं) की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
इस खेती में पहाड़ी जनजातियों के लोग सबसे पहले जंगल के एक हिस्से के पेड़-पौधों को काटकर उन्हें जला देते हैं।
इसके बाद उस राख से साफ हुई जमीन पर कुछ सालों तक पारंपरिक तरीके से खेती की जाती है।
जब दो-तीन सालों में उस जमीन की उपजाऊ शक्ति (उर्वरा शक्ति) खत्म हो जाती है, तो वे उस जगह को छोड़ देते हैं और किसी दूसरी जगह जाकर फिर से जंगल साफ करके नई खेती शुरू कर देते हैं।
प्रश्न 11. पांचवी रिपोर्ट पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
क्या थी यह रिपोर्ट: यह ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत में चल रहे प्रशासन और उनके कामकाज की जांच करने के लिए ब्रिटिश संसद द्वारा 1810 में बनाई गई एक प्रवर समिति (सेलेक्ट कमेटी) द्वारा तैयार किया गया एक बहुत बड़ा और प्रसिद्ध दस्तावेज था।
मुख्य बातें: यह कुल 1002 पन्नों की एक भारी-भरकम रिपोर्ट थी, जिसे 1813 में ब्रिटिश संसद (पार्लियामेंट) के सामने पेश किया गया था।
शामिल जानकारी: इस रिपोर्ट में भारतीय जमींदारों और किसानों द्वारा टैक्स माफी के लिए भेजी गई अर्जियाँ (प्रार्थना पत्र), अलग-अलग जिलों के कलेक्टरों की रिपोर्ट और भारत से राजस्व (टैक्स) इकट्ठा करने से जुड़े सरकारी आंकड़े और जानकारियां शामिल थीं।
प्रश्न 12. स्थायी बंदोबस्त कब और किस क्षेत्र में लागू किया गया?
उत्तर:
कब और किसने: स्थायी बंदोबस्त 1793 ईस्वी में गवर्नर जनरल लॉर्ड कॉर्नवॉलिस द्वारा शुरू किया गया था।
कहाँ: इसे मुख्य रूप से बिहार, बंगाल और उड़ीसा के क्षेत्रों में लागू किया गया था।
नियम: इस व्यवस्था में जमींदार किसानों से टैक्स वसूल कर कंपनी को देते थे और इसमें सरकार का हिस्सा हमेशा के लिए निश्चित था।
प्रश्न 13. दकन दंगा आयोग का गठन क्यों किया गया?
उत्तर:
गठन का कारण: 1875 में दकन (महाराष्ट्र के पुणे और अहमदनगर) के इलाकों में किसानों ने सूदखोर मारवाड़ी और गुजराती साहूकार-महाजनों के खिलाफ एक बहुत बड़ा विद्रोह कर दिया था, जिसे दकन दंगा कहा जाता है। इस दंगे के कारणों का पता लगाने के लिए बंबई सरकार द्वारा 1875 में दकन दंगा आयोग बनाया गया था।
जांच और रिपोर्ट: आयोग ने दंगा प्रभावित जिलों में जाकर जांच-पड़ताल की, किसानों (रैयत), साहूकारों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए। साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों में कर्ज के ब्याज, फसलों की कीमतों और टैक्स की दरों के आंकड़े जुटाए। आयोग ने अपनी पूरी रिपोर्ट 1878 में ब्रिटिश पार्लियामेंट को भेजी थी।
प्रश्न 14. सूर्यास्त कानून क्या है?
उत्तर: सूर्यास्त कानून (Sunset Law) स्थायी बंदोबस्त व्यवस्था का ही एक बहुत सख्त नियम था। इसके तहत जमींदारों के लिए सरकार को टैक्स चुकाने की एक निश्चित तारीख तय कर दी जाती थी। अगर कोई जमींदार उस तय किए गए दिन के सूर्यास्त (सूरज ढलने) से पहले सरकारी खजाने में लगान जमा नहीं कर पाता था, तो बिना कोई देरी किए उसकी जमींदारी को छीनकर नीलाम कर दिया जाता था।
भाग 2: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Question)
प्रश्न 1. स्थायी बंदोबस्त से आप क्या समझते हैं? इसके लाभ एवं हानियों का वर्णन करें। (या स्थायी व्यवस्था के गुण-दोषों की विवेचना कीजिये / स्थायी बंदोबस्त पर एक लघु निबंध लिखें।)
उत्तर:
स्थायी बंदोबस्त का अर्थ:
स्थायी बंदोबस्त (जमींदारी व्यवस्था) ईस्ट इंडिया कंपनी और बंगाल के जमींदारों के बीच टैक्स वसूलने का एक पक्का समझौता था। इसे 1793 ईस्वी में गवर्नर जनरल लॉर्ड कॉर्नवॉलिस द्वारा बंगाल में लागू किया गया था। उस समय के बंगाल में आज का पूरा पश्चिम बंगाल, बिहार और उड़ीसा का क्षेत्र शामिल था। इस व्यवस्था के तहत जमीन का मालिकाना हक जमींदारों को दे दिया गया और किसानों से वसूल किए जाने वाले लगान में सरकार (कंपनी) का हिस्सा हमेशा के लिए तय (फिक्स) कर दिया गया। जमींदार किसानों से टैक्स वसूल कर उसका एक निश्चित भाग कंपनी को देते थे।
इसके प्रमुख लाभ (गुण) और हानियाँ (दोष) निम्नलिखित थे:
लाभ (गुण): कंपनी की आय निश्चित होने से उनका बजट दुरुस्त हुआ, बार-बार बंदोबस्त करने का खर्च और समय बचा, और अंग्रेजों को जमींदारों के रूप में भारत में एक वफादार और मददगार अमीर वर्ग मिल गया।
हानियाँ (दोष): इस व्यवस्था से सबसे ज्यादा नुकसान गरीब किसानों का हुआ। जमींदार ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए किसानों पर कोड़े बरसाते थे और उनका बेरहमी से शोषण करते थे। फसल खराब होने पर भी टैक्स में कोई छूट नहीं मिलती थी, जिससे किसान कर्ज के जाल में डूब गए। साथ ही, सूर्यास्त कानून के कड़े नियमों के कारण कई पुराने जमींदारों की जमीनें भी नीलाम हो गईं।
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