12th Geography Book 2 chapter 11 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार Subjective

 12th Geography Book 2 chapter 11 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार Subjective

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार क्या है?

उत्तर: जब दो या दो से अधिक देशों के बीच वस्तुओं (सामान) और सेवाओं का खरीद-फरोख्त (लेन-देन) होता है, तो उसे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कहते हैं। इसमें मुख्य रूप से दो चीजें शामिल होती हैं: आयात (बाहर से सामान मंगाना) और निर्यात (अपने यहाँ से सामान बाहर भेजना)।

प्रश्न 2. व्यापार संतुलन क्या है?

उत्तर: एक निश्चित समय (जैसे एक साल) में किसी देश द्वारा किए गए कुल आयात (मंगाए गए सामान की कीमत) और कुल निर्यात (बेचे गए सामान की कीमत) के बीच के अंतर को व्यापार संतुलन कहा जाता है।

  • यदि निर्यात ज्यादा हो तो इसे अनुकूल (अच्छा) व्यापार संतुलन कहते हैं।

  • यदि आयात ज्यादा हो तो इसे प्रतिकूल (घाटे का) व्यापार संतुलन कहते हैं।

प्रश्न 3. पृष्ठप्रदेश के अर्थ को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: पृष्ठप्रदेश (Hinterland) किसी समुद्री पत्तन (बंदरगाह) के पीछे का वह भूमि क्षेत्र होता है जो रेल, सड़क या नदियों के माध्यम से उस बंदरगाह से अच्छी तरह जुड़ा होता है।

  • इस क्षेत्र में पैदा होने वाली वस्तुएं निर्यात के लिए बंदरगाह तक भेजी जाती हैं।

  • बाहर से आयात होकर आने वाला सामान भी इसी क्षेत्र के बाजारों और लोगों तक पहुँचाया जाता है।

प्रश्न 4. उन महत्वपूर्ण मदों के नाम बताइए जिन्हें भारत विभिन्न देशों से आयात करता है?

उत्तर: भारत मुख्य रूप से निम्नलिखित वस्तुओं का विदेशों से आयात (खरीददारी) करता है:

  • पेट्रोलियम और कच्चा तेल (Crude Oil)

  • पेट्रोलियम से बने अन्य उत्पाद

  • सोना, चाँदी और कीमती रत्न

  • मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक सामान और उपकरण

  • रासायनिक उत्पाद (Chemicals) और उर्वरक (खाद)

  • अधात्विक खनिज और अलौह धातुएँ

प्रश्न 5. भारत के पूर्वी तट पर स्थित पत्तनों के नाम बताइए।

उत्तर: भारत के पूर्वी तट (बंगाल की खाड़ी की तरफ) पर स्थित मुख्य समुद्री पत्तन (बंदरगाह) निम्नलिखित हैं:

  1. पारादीप (ओडिशा)

  2. हल्दिया (पश्चिम बंगाल)

  3. कोलकाता (पश्चिम बंगाल)

  4. विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश)

  5. चेन्नई (तमिलनाडु)

  6. तूतीकोरिन (तमिलनाडु)

प्रश्न 6. पत्तन और पोताश्रय में अंतर बताइए।

उत्तर: पत्तन (Port) और पोताश्रय (Harbor) में मुख्य अंतर निम्नलिखित है:

बिन्दु

पत्तन (Port)

पोताश्रय (Harbor)

अर्थ

यह समुद्र तट पर जहाजों के रुकने का वह व्यावसायिक स्थान है जहाँ व्यापारिक काम होते हैं।

यह समुद्र तट या खाड़ी पर एक ऐसा प्राकृतिक या मानव-निर्मित सुरक्षित स्थान है जहाँ पानी गहरे होते हैं।

कार्य

यहाँ जहाजों पर सामान लादने, उतारने और यात्रियों के आने-जाने की पूरी सुविधा होती है।

इसका मुख्य काम जहाजों को समुद्री लहरों, तूफानों और तेज हवाओं से सुरक्षा देना है।

सुविधाएं

यहाँ बड़े-बड़े गोदाम और सामान रखने की व्यावसायिक सुविधाएं होती हैं।

यहाँ मुख्य रूप से जहाज लंगर डालकर आराम या मरम्मत के लिए रुकते हैं।

प्रश्न 7. भारत के दो अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों के नाम बताइए।

उत्तर: भारत के प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे निम्नलिखित हैं (आप कोई भी दो याद रख सकते हैं):

  1. नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा – कोलकाता

  2. सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा – अहमदाबाद

  3. चेन्नई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा – चेन्नई

  4. त्रिवेंद्रम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा – तिरुवनंतपुरम

प्रश्न 8. पत्तनों को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का प्रवेश द्वार क्यों कहते हैं?

अथवा भारत के विदेशी व्यापार में हुई बढ़ोतरी में समुद्री पत्तन के महत्व की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: समुद्री पत्तनों (बंदरगाहों) को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का प्रवेश द्वार इसलिए कहा जाता है क्योंकि:

  • भारत का अधिकांश विदेशी व्यापार (वजन के हिसाब से लगभग 95%) समुद्री रास्तों से ही होता है।

  • ये पत्तन विदेशों से आने वाले बड़े-बड़े जहाजों को रुकने, सामान उतारने, चढ़ाने और उन्हें सुरक्षित रखने (गोदाम की) सुविधा देते हैं।

  • पत्तन अपने आस-पास के क्षेत्रों (पृष्ठप्रदेशों) से सामान इकट्ठा करके विदेशों को भेजते हैं और बाहर से आए सामान को देश के अंदरूनी हिस्सों तक पहुँचाते हैं। इनके बिना भारी मात्रा में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार करना असंभव है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1. भारत में निर्यात और आयात व्यापार के संयोजन का वर्णन कीजिए।

उत्तर: भारत के विदेशी व्यापार के संयोजन (Composition of Trade) का मतलब है कि भारत किन-किन वस्तुओं का विदेशों को निर्यात (बेचता) करता है और किन वस्तुओं का आयात (मँगाता) करता है। समय के साथ इसमें काफी बदलाव आया है:

1. भारत का निर्यात व्यापार (Export):

भारत से विदेशों को बेची जाने वाली मुख्य वस्तुएं निम्नलिखित हैं:

  • कृषि उत्पाद: चाय, कॉफी, मसाले, चावल और तंबाकू आदि।

  • निर्मित वस्तुएं (Manufactured Goods): सूती और तैयार कपड़े, रत्न और आभूषण (Jewellery), हस्तशिल्प (Handicraft) का सामान और चमड़े से बने उत्पाद।

  • इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग सामान: भारत अब सॉफ्टवेयर, आईटी उत्पाद और मशीनरी का भी बड़े पैमाने पर निर्यात कर रहा है।

  • अयस्क और खनिज: लोहा और अन्य कच्चे खनिज।

2. भारत का आयात व्यापार (Import):

भारत द्वारा विदेशों से खरीदी जाने वाली मुख्य वस्तुएं निम्नलिखित हैं:

  • पेट्रोलियम और ईंधन: भारत अपनी जरूरत का सबसे ज्यादा पेट्रोलियम (कच्चा तेल) बाहर से मँगाता है, जिस पर सबसे अधिक पैसा खर्च होता है।

  • पूंजीगत वस्तुएं: बड़ी-बड़ी मशीनें, औद्योगिक उपकरण और परिवहन के साधन।

  • सोना और कीमती धातुएँ: भारत में सोने और चांदी की भारी मांग के कारण इनका बड़े पैमाने पर आयात होता है।

  • अन्य वस्तुएं: रासायनिक उत्पाद, खाद (उर्वरक), कोयला और दवाइयाँ (चिकित्सीय उत्पाद) आदि।

व्यापार संतुलन की स्थिति (उदाहरण):

अगर हम आंकड़ों के नजरिए से देखें (जैसे वर्ष 2016-17 में), तो भारत का कुल आयात मूल्य लगभग 25,77,422 करोड़ रुपये था, जबकि कुल निर्यात मूल्य केवल 18,52,340 करोड़ रुपये था। इससे साफ पता चलता है कि भारत बाहर से सामान ज्यादा मँगाता है और बेचता कम है। इसलिए भारत का व्यापार संतुलन प्रतिकूल (घाटे में) रहता है।

प्रश्न 2. भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की बदलती प्रकृति पर एक टिप्पणी लिखिए।

उत्तर: भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की प्रकृति (स्वरूप) में समय के साथ बहुत बड़े बदलाव आए हैं, जिन्हें हम निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझ सकते हैं:

  • प्रतिकूल व्यापार संतुलन: भारत के आयात (बाहर से सामान मँगाना) और निर्यात (बाहर सामान बेचना) के मूल्यों में अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है। भारत में निर्यात की तुलना में आयात बहुत तेजी से बढ़ा है, जिससे हमारा व्यापार संतुलन भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रतिकूल (घाटे में) बना हुआ है।

  • आयात में भारी बढ़ोतरी: साल 2004-05 में भारत का आयात ₹5,01,065 करोड़ था, जो साल 2016-17 में बहुत ज्यादा बढ़कर ₹25,77,422 करोड़ हो गया।

  • निर्यात में धीमी वृद्धि: इसकी तुलना में हमारा निर्यात मूल्य साल 2004-05 में ₹3,75,340 करोड़ था, जो साल 2016-17 में बढ़कर ₹18,52,340 करोड़ ही हो पाया।

  • विश्व व्यापार में हिस्सेदारी: दुनिया के कुल निर्यात व्यापार में भारत की भागीदारी लगातार कम हुई है और यह घटकर मात्र 1 प्रतिशत रह गई है।

  • कुल विदेशी व्यापार के आकार में वृद्धि: भले ही घाटा बढ़ा हो, लेकिन भारत का कुल विदेशी व्यापार (आयात + निर्यात दोनों मिलाकर) बहुत तेजी से फैला है:

  • साल 1950-51 में यह केवल ₹1,214 करोड़ था।

  • साल 2004-05 में बढ़कर ₹8,76,405 करोड़ हुआ।

  • साल 2016-17 में यह विशाल रूप लेकर ₹44,29,762 करोड़ तक पहुँच गया।

प्रश्न 3. भारत के विदेशी व्यापार की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: भारत का विदेशी व्यापार देश की आर्थिक तरक्की में एक बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। इसकी मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • वैश्विक संबंध: भारत के व्यापारिक संबंध दुनिया के लगभग सभी बड़े देशों और महत्वपूर्ण व्यापारिक समूहों (जैसे आसियान देश, कनाडा, रूस, एशिया और अफ्रीका के देशों) के साथ हैं।

  • व्यापार का बड़ा दायरा: भारत एक बहुत बड़े स्तर पर व्यापार करता है:

  • भारत दुनिया के लगभग 190 देशों को करीब 7500 वस्तुएँ निर्यात (बेचता) करता है।

  • भारत दुनिया के लगभग 140 देशों से करीब 6000 वस्तुएँ आयात (खरीदता) करता है।

  • समुद्री मार्गों पर निर्भरता: हमारे देश का लगभग 95% अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समुद्री रास्तों से होता है, क्योंकि यह भारी सामानों के लिए सबसे सस्ता पड़ता है।

  • पड़ोसी देशों के साथ सड़क मार्ग: भारत अपने पड़ोसी देशों जैसे नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के साथ जमीन से जुड़े सड़क मार्गों द्वारा व्यापार करता है।

  • उत्तरी दिशा में सीमित व्यापार: उत्तर दिशा में विशाल हिमालय पर्वत और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण चीन या मध्य एशिया के साथ थल मार्ग (जमीन) से व्यापार काफी सीमित या कम है।

  • मुख्य वस्तुएँ: भारत के प्रमुख निर्यात आइटम कपड़े (वस्त्र), आभूषण, कीमती रत्न, अयस्क, खनिज और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ हैं। वहीं दूसरी तरफ, पेट्रोलियम उत्पाद (कच्चा तेल) भारत का सबसे बड़ा आयात है। इस प्रकार विदेशी व्यापार भारत की राष्ट्रीय आय को बढ़ाने में बड़ा योगदान देता है।



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