12th History Chapter 11 विद्रोही और राज Subjective

 12th History Chapter 11 विद्रोही और राज Subjective

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

प्रश्न 1. 1857 के क्रांति के तात्कालिक कारण क्या था?

उत्तर: 1857 की क्रांति का सबसे मुख्य और तुरंत का कारण नई 'एनफील्ड राइफल' थी। इस राइफल में जो कारतूस (बुलेट) इस्तेमाल होता था, उस पर चर्बी लगी होती थी और उसे इस्तेमाल करने से पहले दांतों से काटकर खोलना पड़ता था। उस समय बंगाल की सेना में यह खबर फैल गई कि इस कारतूस में गाय और सूअर की चर्बी मिलाई गई है। इससे हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों के सैनिक बहुत नाराज हो गए। उन्हें लगा कि ब्रिटिश सरकार उनका धर्म भ्रष्ट करना चाहती है। इसी वजह से सैनिकों ने इस कारतूस का इस्तेमाल करने से साफ मना कर दिया और विद्रोह शुरू हो गया।

प्रश्न 2. क्रांति का 1857 की क्रांति के धार्मिक कारण का चर्चा करें।

उत्तर: 1857 की क्रांति के धार्मिक कारण निम्नलिखित थे:

  • ईसाई धर्म को बढ़ावा: अंग्रेजों का एक बड़ा मकसद भारतीयों को ईसाई बनाना था। इसके लिए लोगों को तरह-तरह के लालच दिए जाते थे और स्कूलों में भी बाइबल पढ़ाई जाने लगी थी।

  • भारतीय धर्मों का अपमान: अंग्रेज अक्सर हिंदू और मुस्लिम धर्म की बुराई या निंदा करते थे।

  • समुद्र पार जाने की मजबूरी: उस समय हिंदू मान्यताओं के अनुसार समुद्र पार जाना धर्म के खिलाफ माना जाता था, लेकिन अंग्रेज भारतीय सिपाहियों को जबरदस्ती समुद्र पार भेजते थे।

  • धार्मिक प्रतीकों पर रोक: भारतीय सिपाहियों को माथे पर तिलक लगाने, दाढ़ी रखने और पगड़ी पहनने जैसी धार्मिक चीजों पर रोक लगा दी गई थी।

प्रश्न 3. 1857 की क्रांति के मुख्य कारण क्या थे

उत्तर: 1857 की क्रांति के मुख्य कारण नीचे दिए गए हैं:

  • सेना में गाय और सूअर की चर्बी वाले नए कारतूसों का इस्तेमाल करना।

  • भारतीय सैनिकों के साथ अंग्रेजों द्वारा भेदभाव और बुरा व्यवहार करना।

  • अंग्रेजों द्वारा भारतीय किसानों, जमींदारों और व्यापारियों का बहुत ज्यादा आर्थिक शोषण करना (ज्यादा टैक्स वसूलना)।

  • भारतीय राजाओं और राज्यों को हड़पने के लिए 'सहायक संधि' और 'हड़प नीति' (Doctrine of Lapse) चलाना।

  • भारतीयों को अपना धर्म बदलकर ईसाई बनने के लिए उकसाना या प्रोत्साहित करना।

प्रश्न 4. 1857 के विद्रोह के लिए डलहौजी की कौन दो प्रमुख नीतियाँ जिम्मेदार थी ?

उत्तर: 1857 के विद्रोह के लिए लॉर्ड डलहौजी की दो सबसे मुख्य नीतियां जिम्मेदार थीं:

गोद-निषेध नीति (हड़प नीति): इस नीति के तहत यदि किसी भारतीय राजा की अपनी कोई संतान (बेटा) नहीं होती थी, तो उसे किसी बच्चे को गोद लेने का अधिकार नहीं था। राजा की मृत्यु के बाद उसका राज्य सीधा ब्रिटिश कंपनी के शासन में मिला लिया जाता था। इस नीति के कारण सतारा, झांसी और नागपुर जैसे कई राज्य अंग्रेजों के कब्जे में चले गए।

कुशासन के आधार पर हड़पना: डलहौजी ने कई राज्यों पर यह आरोप लगाया कि वे अपना शासन ठीक से नहीं चला पा रहे हैं। उदाहरण के लिए, अवध (Oudh) के राज्य पर खराब शासन (कुशासन) का झूठा आरोप लगाकर उसे ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया गया। इससे वहां की जनता और राजा में अंग्रेजों के प्रति भारी गुस्सा भर गया।

प्रश्न 5. बिहार में 1857 के क्रांति में भाग लेने वाले किन्हीं दो का नाम बताइए।

उत्तर: बिहार में 1857 की क्रांति में हिस्सा लेने वाले दो प्रमुख नेताओं के नाम इस प्रकार हैं:

  • (i) वीर कुंवर सिंह (आरा से)

  • (ii) पीर अली (पटना से)

प्रश्न 6. 1857 की क्रांति में प्रमुख भूमिका निभाने वाली दो महिलाओं के नाम लिखिए।

उत्तर: 1857 की क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली दो प्रमुख महिलाएं थीं:

  • (i) झांसी की रानी – लक्ष्मीबाई

  • (ii) अवध के नवाब की बेगम – हजरत महल

प्रश्न 7. बाबू वीर कुंवर सिंह का एक संक्षिप्त परिचय दें।

उत्तर: बाबू वीर कुंवर सिंह का जन्म 1777 ई. में बिहार के आरा जिले के जगदीशपुर में हुआ था। वे वहां के एक बहुत प्रसिद्ध और बड़े जमींदार थे। जब 1857 की क्रांति शुरू हुई, तब वीर कुंवर सिंह की उम्र लगभग 80 वर्ष थी। इतनी ढलती उम्र में भी उन्होंने बड़ी बहादुरी और फुर्ती से बिहार में इस क्रांति का नेतृत्व किया और अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दी। 26 अप्रैल 1858 को अंग्रेजों से लड़ते हुए वे शहीद हो गए।

प्रश्न 8. बाबू कुंवर सिंह कौन थे ?1857 की क्रांति का नेतृत्व पटना में किसने किया ?

उत्तर: बाबू वीर कुंवर सिंह बिहार के जगदीशपुर (आरा) के एक वीर और विख्यात जमींदार थे, जिन्होंने 1857 की क्रांति के समय पूरे बिहार में विद्रोह की कमान संभाली थी।

वहीं, इसी क्रांति के दौरान पटना शहर में विद्रोह का नेतृत्व पीर अली ने किया था।

प्रश्न 9. रानी लक्ष्मी बाई का जीवन वृत्त लिखें।

उत्तर: रानी लक्ष्मीबाई का जन्म काशी (वाराणसी) में हुआ था। उनके बचपन का नाम मणिकर्णिका था, लेकिन प्यार से सब उन्हें 'मनु' और उनके पिता उन्हें 'छबीली' कहकर बुलाते थे। उनका विवाह झांसी के राजा के साथ हुआ था। 1857 की क्रांति में उन्होंने झांसी से विद्रोह का नेतृत्व किया और अंग्रेजों के खिलाफ बहुत बहादुरी से युद्ध लड़ा। जून 1858 में ग्वालियर के पास अंग्रेजों की सेना से लोहा लेते हुए वे वीरगति को प्राप्त हुईं।

प्रश्न 10. तात्या टोपे कौन थे? उनकी मृत्यु कैसे हुई ?

उत्तर: तात्या टोपे भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के एक महान और कुशल सेनापति थे। उनका असली नाम 'रामचंद्र पांडुरंग' था और उनका जन्म 1814 में महाराष्ट्र के नासिक जिले में हुआ था। वे नाना साहिब के बहुत खास दोस्त और मददगार थे। उन्होंने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर अंग्रेजों के दांत खट्टे किए थे।

मृत्यु: साल 1859 में ब्रिटिश सेना ने उन्हें धोखे से गिरफ्तार कर लिया और 18 अप्रैल 1859 को मध्य प्रदेश के शिवपुरी में उन्हें फांसी दे दी गई।

प्रश्न 11. 1857 की क्रांति के असफलता के चार कारण लिखिए।

उत्तर: 1857 की क्रांति के असफल होने के चार प्रमुख कारण नीचे दिए गए हैं:

  • समय से पहले शुरू होना: इस क्रांति की शुरुआत के लिए 31 मई 1857 की तारीख तय की गई थी, लेकिन यह तय समय से पहले ही 10 मई को शुरू हो गई, जिससे योजना बिखर गई।

  • अच्छे नेतृत्व की कमी: पूरे देश को एक साथ लेकर चलने वाले किसी एक योग्य और केंद्रीय नेता की कमी थी। अलग-अलग जगहों पर लोग अलग-अलग लड़ रहे थे।

  • देशी राजाओं का अंग्रेजों को साथ: भारत के कई राजाओं और नवाबों ने क्रांतिकारियों का साथ देने के बजाय अंग्रेजों की मदद की।

  • सीमित संसाधन: भारतीय सैनिकों के पास अंग्रेजों के मुकाबले अच्छे हथियार, धन और संदेश भेजने के आधुनिक साधनों की बहुत कमी थी।

प्रश्न 12. 1857 की क्रांति के क्या परिणाम हुए? अथवा, 1857 की क्रांति के प्रभाव पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: 1857 की क्रांति के मुख्य परिणाम (असर) इस प्रकार थे:

  • भारत से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का राज हमेशा के लिए खत्म हो गया और भारत का शासन सीधे इंग्लैंड की सरकार (ब्रिटिश क्राउन) के हाथों में चला गया।

  • भविष्य में ऐसे विद्रोह को रोकने के लिए भारतीय सेना के संगठन में कई बड़े सुधार किए गए।

  • अंग्रेजों ने भारत में फूट डालने और राज करने की नीति (Divide and Rule) को और मजबूती से अपनाना शुरू कर दिया।

  • अंग्रेजों ने भारतीयों के सामाजिक और धार्मिक मामलों में दखल देना बंद कर दिया।

प्रश्न 13. सहायक संधि से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: सहायक संधि (Subsidiary Alliance) एक तरह का समझौता या नियम था, जिसे 1798 ई. में गवर्नर जनरल लॉर्ड वेलेजली ने शुरू किया था। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय राज्यों को धोखे या दबाव से ब्रिटिश शासन के अधीन करना था।

सहायक संधि की मुख्य शर्तें:

  • इस संधि को स्वीकार करने वाले राजा या नवाब को अपनी खुद की सेना खत्म करनी पड़ती थी।

  • उन्हें अपने राज्य की रक्षा के लिए अपने खर्चे पर अंग्रेजी सेना को अपने राज्य में रखना अनिवार्य था।

  • राजा या नवाब को अपने दरबार में एक ब्रिटिश अफसर (ब्रिटिश रेजीडेंट) रखना पड़ता था और उसकी सलाह से ही काम करना होता था।

  • इसके बदले में अंग्रेज उस राजा को बाहरी दुश्मनों और अंदरूनी विद्रोहों से बचाने की जिम्मेदारी लेते थे।

  • राजा के इलाके में ब्रिटिश सैनिकों की एक टुकड़ी हमेशा तैनात रहती थी।

  • इस ब्रिटिश सेना के रहने और खाने-पीने का पूरा खर्च उसी राजा को उठाना पड़ता था।

  • संधि करने वाला राजा अंग्रेजों की इजाजत के बिना न तो किसी दूसरे राजा से कोई समझौता (संधि) कर सकता था और न ही किसी युद्ध में हिस्सा ले सकता था।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

प्रश्न 1. 1857 की क्रांति के स्वरूप की विवेचना करें।

उत्तर: 1857 की क्रांति का स्वरूप (नेचर) कैसा था, इस बात पर अलग-अलग इतिहासकारों और विद्वानों के अलग-अलग विचार हैं। इसके मुख्य रूप निम्नलिखित हैं:

  • (1) सैनिक विद्रोह: कई ब्रिटिश इतिहासकारों (जैसे जॉन लॉरेंस और सीले) का मानना है कि यह केवल सैनिकों का एक छोटा सा विद्रोह था, जो स्वार्थ और चर्बी वाले कारतूस के गुस्से के कारण हुआ था। लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है, क्योंकि इसमें केवल सैनिक नहीं बल्कि आम जनता, किसान और राजा भी शामिल थे।

  • (2) मुस्लिम सत्ता की पुनः स्थापना का षड्यंत्र: सर जेम्स आउटरम और डब्ल्यू. टेलर जैसे विचारकों का मानना था कि यह हिंदुओं और मुसलमानों का मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ एक षड्यंत्र था, ताकि भारत में फिर से मुगल या मुस्लिम शासन लाया जा सके। लेकिन विद्रोहियों में हिंदुओं की संख्या बहुत ज्यादा थी, इसलिए इसे केवल मुस्लिम षड्यंत्र नहीं कहा जा सकता।

  • (3) सभ्यता एवं बर्बरता के मध्य संघर्ष: टी. आर. होम्स नाम के अंग्रेज विद्वान ने इसे 'सभ्यता और बर्बरता का युद्ध' कहा। उनका मानना था कि अंग्रेज सभ्य थे और भारतीय असभ्य (बर्बर) थे। लेकिन यह बात बिल्कुल गलत और बेबुनियाद है, क्योंकि अंग्रेजों ने भी इस क्रांति के दौरान भारतीयों पर बहुत क्रूरता और अत्याचार किए थे।

  • (4) धार्मिक संघर्ष: एल. ई. आर. रीज के अनुसार, यह विद्रोह ईसाई धर्म के खिलाफ एक धार्मिक युद्ध था। भारत के हिंदू और मुसलमान इस बात से नाराज थे कि अंग्रेज उनका धर्म बदलकर उन्हें जबरदस्ती ईसाई बनाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने अपने धर्म को बचाने के लिए यह लड़ाई लड़ी।

  • (5) प्रथम स्वतंत्रता संग्राम: इंग्लैंड के नेता बेंजामिन डिजरैली ने इसे एक 'राष्ट्रीय विद्रोह' कहा। वहीं भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी वी.डी. सावरकर ने इसे भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (पहला आजादी का युद्ध) कहा। 100 साल की गुलामी के बाद भारतीयों ने एकजुट होकर अंग्रेजों को भगाने के लिए यह बड़ा संघर्ष किया था, इसलिए इसे भारत की आजादी की पहली बड़ी लड़ाई कहना बिल्कुल सही है।

प्रश्न 2. 1857 के विद्रोह के कारणों की विवेचना करें।

उत्तर: 1857 के विद्रोह के पीछे कोई एक कारण नहीं था, बल्कि इसके पीछे सालों से जमा हो रहा गुस्सा था। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित थे:

  • राजनीतिक कारण: अंग्रेजों ने 'हड़प नीति' (Doctrine of Lapse) और 'सहायक संधि' के जरिए भारतीय राजाओं के राज्य जबरदस्ती छीन लिए थे। उन्होंने अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के परिवार को लाल किला खाली करने का हुक्म दिया और नाना साहिब की पेंशन बंद कर दी। इससे भारत के राजा और नवाब अंग्रेजों के दुश्मन बन गए।

  • धार्मिक कारण: अंग्रेज भारतीयों को ईसाई बनाने के लिए बढ़ावा दे रहे थे। ईसाई मिशनरियों द्वारा हिंदू और मुस्लिम धर्म का मजाक उड़ाया जाता था। जब अंग्रेजों ने सती प्रथा को बंद किया और बाल विवाह को रोकने के कानून बनाए, तो रूढ़िवादी भारतीयों को लगा कि अंग्रेज उनके धर्म और पुरानी संस्कृति को नष्ट कर रहे हैं।

  • सैनिक कारण: ब्रिटिश सेना में भारतीय सैनिकों के साथ बहुत भेदभाव होता था। उन्हें अंग्रेजों के मुकाबले बहुत कम सैलरी मिलती थी और उनका अपमान किया जाता था। साथ ही, उन्हें जबरदस्ती समुद्र पार भेजा जाता था, जिसे भारतीय सैनिक अपने धर्म के खिलाफ मानते थे।

  • आर्थिक कारण: अंग्रेजों ने भारतीय किसानों पर बहुत भारी टैक्स (लगान) लगा दिया था। अंग्रेजों की व्यापार नीतियों के कारण भारत के खुद के छोटे-मोटे धंधे, व्यापार और कुटीर उद्योग पूरी तरह बर्बाद हो गए, जिससे देश में गरीबी और कंगाली फैल गई।

  • तात्कालिक कारण (तुरंत का कारण): सबसे मुख्य कारण था सेना में 'एनफील्ड राइफल' और चर्बी वाले कारतूसों का आना। इन कारतूसों पर गाय और सूअर की चर्बी लगी होती थी, जिसे मुंह से काटना पड़ता था। इससे हिंदू और मुस्लिम सैनिकों का गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने बगावत कर दी।

1857 की क्रांति के परिणाम/महत्व का एक और बिंदु:

  • (5) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना: 1857 की क्रांति के बाद भारतीयों के अंदर देशप्रेम और राजनीति की समझ बहुत बढ़ गई। उन्होंने समझ लिया कि एकजुट होकर ही अंग्रेजों का सामना किया जा सकता है। इसी राष्ट्रवाद की भावना के कारण आगे चलकर साल 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress) की स्थापना हुई, जिसने भारत की आजादी की लड़ाई में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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