12th History Chapter 9 शासक और इतिवृत – मुग़ल दरबार subjective

 12th History Chapter 9 शासक और इतिवृत – मुग़ल दरबार subjective

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1. इतिवृत्त क्या है?

  • उत्तर: मुग़ल काल में दरबार के इतिहासकारों द्वारा लिखे गए ऐतिहासिक ग्रंथों या किताबों को 'इतिवृत्त' (Chronicles) कहा जाता है। इन ग्रंथों में साम्राज्य की महत्वपूर्ण घटनाओं को समय के क्रम (तारीख और साल के अनुसार) के मुताबिक विस्तार से लिखा जाता था।

प्रश्न 2. मुग़ल कौन थे?

  • उत्तर: 'मुग़ल' शब्द की उत्पत्ति 'मंगोल' शब्द से हुई है। मूल रूप से मुग़ल चगताई तुर्क थे। वे दो महान शासकों के वंशज थे—अपनी माता की ओर से वे मंगोल शासक चंगेज खान के वंशज थे और अपने पिता की ओर से तुर्की के शासक तैमूर लंग के वंशज थे।

प्रश्न 3. जजिया क्या था?

  • उत्तर: जजिया एक प्रकार का धार्मिक टैक्स (कर) था, जो मुग़ल साम्राज्य में गैर-मुसलमानों (मुख्य रूप से हिंदुओं) से लिया जाता था। मुग़ल सम्राट अकबर ने अपनी धार्मिक उदारता दिखाते हुए 1564 ईस्वी में इस जजिया कर को पूरी तरह से समाप्त (बंद) कर दिया था।

प्रश्न 4. अकबर ने जजिया कर क्यों समाप्त कर दिया?

  • उत्तर: जजिया एक धार्मिक टैक्स था जो केवल गैर-मुसलमानों से लिया जाता था। अकबर सभी धर्मों के लोगों को एक समान मानता था और उन्हें बराबरी का दर्जा देना चाहता था। अकबर को लगा कि यह कर भेदभावपूर्ण है और इससे प्रजा में असंतोष पैदा होता है। इसलिए, अपनी धर्मनिरपेक्ष और उदार नीति के कारण अकबर ने 1564 ईस्वी में जजिया कर को समाप्त कर दिया।

प्रश्न 5. अकबर ने यात्रा कर क्यों समाप्त कर दिया? दो कारण लिखें।

  • उत्तर: अकबर ने 1563 ईस्वी में हिंदुओं के पवित्र तीर्थ स्थलों पर लगने वाले 'तीर्थ यात्रा कर' को बंद कर दिया था। इसके दो प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:

  • (i) अकबर सभी धर्मों का सम्मान करता था। उसका मानना था कि ईश्वर की पूजा करने के लिए अपनी प्रजा पर टैक्स लगाना पूरी तरह से गलत है।

  • (ii) अकबर बहुसंख्यक हिंदू जनता और राजाओं का समर्थन हासिल करना चाहता था ताकि वह अपने साम्राज्य को मजबूत और स्थिर बना सके।

प्रश्न 6. मुग़ल काल में निर्मित चार स्थापत्य कलाकृतियों के नाम लिखें।

  • उत्तर: मुग़ल काल में बनी चार प्रमुख इमारतें (कलाकृतियाँ) और उन्हें बनाने वाले शासकों के नाम इस प्रकार हैं:

  • बुलंद दरवाज़ा — अकबर

  • आगरा का किला — अकबर

  • ताजमहल — शाहजहाँ

  • लाल किला — शाहजहाँ

प्रश्न 7. मुग़ल काल में अभिवादन के कौन-कौन से तरीके थे?

  • उत्तर: मुग़ल दरबार में राजा को सम्मान देने या प्रणाम करने के प्रमुख तरीके निम्नलिखित थे:

  • सजदा: इसमें घुटनों के बल बैठकर अपने सिर को जमीन से छुआकर राजा को प्रणाम किया जाता था।

  • जमींबोसी: इसमें घुटनों के बल बैठकर जमीन को चूमा जाता था।

  • पायबोस: इस तरीके में सीधे राजा के पैरों को चूमा जाता था।

  • कोर्निश: इसमें दाएं हाथ की हथेली को माथे या सिर पर रखकर राजा के सामने सिर झुकाया जाता था।

प्रश्न 8. मुग़लकालीन चित्रकला की क्या विशेषता थी?

  • उत्तर: मुग़ल काल में चित्रकला (Painting) को बहुत बढ़ावा दिया गया। मुग़ल सम्राट बाबर, हुमायूं, अकबर और जहाँगीर को चित्रकला में बहुत दिलचस्पी थी। इस काल की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि जहाँगीर के शासनकाल में मुग़ल चित्रकला अपने सबसे ऊंचे स्तर (चरम उत्कर्ष) पर पहुँच गई थी।

प्रश्न 9. अकबर के सुलह-ए-कुल की नीति क्या थी?

  • उत्तर: 'सुलह-ए-कुल' का सीधा अर्थ होता है—सभी के लिए शांति और भाईचारा। अकबर की इस नीति के अनुसार साम्राज्य में सभी धर्मों के लोगों को पूरी आजादी थी। कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे धर्म का विरोध या अपमान नहीं कर सकता था। इसका मुख्य उद्देश्य समाज में एकता बनाए रखना था।

प्रश्न 10. अकबर को राष्ट्रीय शासक क्यों कहा जाता था? कोई दो कारण लिखें।

  • उत्तर: अकबर को 'राष्ट्रीय शासक' (National Monarch) माना जाता है, जिसके दो मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • 1. अकबर ने पूरे भारत को जीतकर एक बहुत बड़े हिस्से पर एक मजबूत और संगठित शासन की स्थापना की थी।

  • 2. वह सभी धर्मों को एक समान समझता था (सर्वधर्म समभाव) और बिना किसी भेदभाव के अपनी पूरी प्रजा का सम्मान करता था।

प्रश्न 11. मनसबदारी प्रथा के मुख्य विशेषताओं का वर्णन करे?

  • उत्तर: 'मनसब' फारसी भाषा का शब्द है जिसका मतलब होता है 'पद' या 'रैंक'। राजा जिस व्यक्ति को यह पद देता था, उसे 'मनसबदार' कहा जाता था। इसकी मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार थीं:

  • मनसबदार को दो तरह के पद मिलते थे—'जात' और 'सवार'।

  • 'जात' से मनसबदार के पद और उसकी सैलरी (वेतन) का पता चलता था।

  • 'सवार' से यह पता चलता था कि उस मनसबदार को अपने पास कितने घुड़सवार सैनिक रखने हैं।

प्रश्न 12. अकबर के नवरत्नों के नाम लिखिए।

  • उत्तर: अकबर के दरबार में नौ सबसे बुद्धिमान और कुशल लोग थे जिन्हें 'नवरत्न' कहा जाता था। इमेज के अनुसार चार प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:

  • (1) अब्दुल रहीम खान-ए-खाना

  • (2) हकीम हुमाम

  • (3) मुल्ला दो प्याजा

  • (4) अबुल फजल

प्रश्न 13. दीन-ए-इलाही से आप क्या समझते हैं?

  • उत्तर: 'दीन-ए-इलाही' एक नया धार्मिक विचार या मत था जिसे अकबर ने 1582 ईस्वी में शुरू किया था। यह कोई अलग धर्म नहीं था, बल्कि अकबर ने दुनिया के सभी प्रमुख धर्मों की अच्छी और सच्ची बातों को मिलाकर इसे तैयार किया था ताकि सभी लोग आपस में मिल-जुलकर रह सकें।

प्रश्न 14. अकबर के धार्मिक नीति की विवेचना कीजिए।

  • उत्तर: अकबर ने धार्मिक सहनशीलता (धार्मिक सहिष्णुता) की नीति अपनाई, जहाँ सभी धर्मों का सम्मान किया जाता था। उनकी धार्मिक नीति के प्रमुख कदम ये थे:

  • 1563 में तीर्थ यात्रा टैक्स और 1564 में जजिया टैक्स को हमेशा के लिए बंद कर दिया।

  • 1575 में धार्मिक विषयों पर चर्चा करने के लिए 'इबादतखाना' (प्रार्थना भवन) बनवाया।

  • 1579 में 'मजहर' की घोषणा करके धार्मिक मामलों में खुद को सर्वोच्च बनाया।

  • 1581-82 में सभी धर्मों की अच्छी बातों को मिलाकर 'दीन-ए-इलाही' की शुरुआत की।

प्रश्न 15. अकबर ने सुलह-ए-कुल के विचार को किस प्रकार अपनी राज्य नीति का आधार बनाया? दो उदाहरण दें।

  • उत्तर: अकबर ने देश को एकता के सूत्र में बांधने के लिए 'सुलह-ए-कुल' (सबके साथ शांति) को अपने शासन का आधार बनाया। इसके दो बड़े उदाहरण निम्नलिखित हैं:

  • पहला उदाहरण: उसने हिंदुओं और अन्य गैर-मुसलमानों पर लगने वाले भेदभावपूर्ण टैक्स जैसे—जजिया कर और तीर्थ यात्रा कर को पूरी तरह खत्म कर दिया।

  • दूसरा उदाहरण: उसने 1575 में 'इबादतखाना' बनवाया, जहाँ सभी धर्मों के विद्वान एक साथ बैठकर शांति से बातचीत कर सकते थे।

प्रश्न 16. सुलेखन की 'नस्तलिक' शैली क्या थी?

  • उत्तर: 'नस्तलिक' हाथ से सुंदर लिखने (सुलेखन/Calligraphy) की एक कला थी, जो अकबर को बेहद पसंद थी। यह एक बहुत ही लचीली और प्रवाहपूर्ण (तरल) शैली थी जिसे लंबे, सीधे और आकर्षक तरीके से लिखा जाता था। इसे लिखने के लिए 5 से 10 मिलीमीटर चौड़ी नोक वाली सरकंडे की कलम और स्याही का इस्तेमाल होता था। स्याही को आसानी से सोखने के लिए कलम की नोक के बीच में एक छोटा सा चीरा लगा दिया जाता था।

प्रश्न 17. झरोखा दर्शन क्या था?

  • उत्तर: मुग़ल सम्राट अकबर ने 'झरोखा दर्शन' की शुरुआत की थी। इसके तहत बादशाह अपने दिन की शुरुआत धार्मिक पूजा-पाठ करने के बाद करता था। इसके तुरंत बाद, वह महल के एक छोटे से छज्जे (झरोखे) पर आकर खड़ा हो जाता था, जहाँ नीचे खड़ी आम जनता अपने राजा की एक झलक देख सकती थी और अपनी समस्याएँ सीधे राजा को बता सकती थी।

दीर्घ उत्तरीय

प्रश्न . मुग़लकालीन केंद्रीय प्रशासन की मुख्य विशेषताओं का वर्णन करें।

  • उत्तर: मुग़ल काल में केंद्र स्तर पर शासन चलाने के लिए एक बहुत ही मजबूत और व्यवस्थित प्रणाली बनाई गई थी। इसकी मुख्य विशेषताएँ और प्रमुख अधिकारी इस प्रकार थे:

  • सम्राट (बादशाह): वह पूरे साम्राज्य का सर्वोच्च अधिकारी (मेन हेड) होता था। राज्य का प्रमुख होने के साथ-साथ वह सेना का प्रधान सेनापति, सबसे बड़ा न्यायाधीश (जज) और इस्लाम धर्म का रक्षक भी माना जाता था।

  • वकील या वजीर: यह अधिकारी केंद्र सरकार के सभी विभागों का अध्यक्ष होता था। मुग़ल सम्राट अकबर ने अपने संरक्षक बैरम खाँ के बाद इस पद के महत्व को पूरी तरह समाप्त कर दिया था।

  • दीवान (वित्तमंत्री): पैसों और आर्थिक मामलों में यह सीधे बादशाह का प्रतिनिधि होता था। अकबर के शासनकाल में इस पद पर मुजफ्फर खाँ और राजा टोडरमल जैसे योग्य व्यक्तियों को नियुक्त किया गया था।

  • मीर बख्शी: यह मुख्य रूप से सेना विभाग का कामकाज संभालता था। सेना का संगठन करना, मनसबदारों की सूची रखना और घोड़ों को दागने की व्यवस्था देखना इसी की जिम्मेदारी थी।

  • प्रधान काजी: यह न्याय विभाग का सबसे बड़ा अधिकारी होता था। इसका काम अलग-अलग प्रांतों (राज्यों), जिलों और शहरों में छोटे काजियों की नियुक्ति करना और फौजदारी (लड़ाई-झगड़े और अपराध) के मुकदमों का फैसला करना था।

प्रश्न . अकबर की मनसबदारी व्यवस्था की विवेचना करें।

  • उत्तर: 'मनसब' मूल रूप से फारसी भाषा का एक शब्द है जिसका अर्थ होता है 'पद', 'ओहदा' या 'रैंक'। मुग़ल सम्राट अकबर ने अपने प्रशासन और सेना को मजबूत करने के लिए इस अनोखी मनसबदारी प्रणाली की शुरुआत की थी। इसकी मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • मनसबदार: जिस व्यक्ति को सम्राट द्वारा यह सरकारी पद या रैंक दिया जाता था, उसे 'मनसबदार' कहा जाता था।

  • नियुक्ति और वेतन: सभी मनसबदारों की नियुक्ति, उनका प्रमोशन (तरक्की) या उन्हें पद से हटाने का पूरा अधिकार सीधे सम्राट के पास होता था। इन अधिकारियों को उनके पद के बदले में नकद वेतन (सैलरी) या जागीर दी जाती थी।

  • जात और सवार पद: हर मनसबदार को दो तरह के पद दिए जाते थे—पहला 'जात' और दूसरा 'सवार'। 'जात' पद से मनसबदार के व्यक्तिगत दर्जे और उसके वेतन का पता चलता था, जबकि 'सवार' पद से यह तय होता था कि उस मनसबदार को अपने पास कितने घुड़सवार सैनिक और घोड़े रखने हैं।



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