12th Hindi Poem Chapter 1 कड़बक Subjective
अध्याय 1. कड़बक
-: कवि का परिचय :-
कवि – मालिक मुहम्मद जायसी
जन्म - 15 वीं शती उत्तरार्ध, अनुमानतः1492
निधन - 1548 अनुमानतः ।
निवास स्थान- जायस, कब्र अमेठी, उत्तर प्रदेश
पिता- मलिक शेख ममरेज (मलिक राजे अशरफ)
गुरु - सूफी संत, शेख मोहिदी और सैयद अशरफ जहाँगीर ।
वृति (कार्य/व्यवसाय) - आरंभ में किसानी, शेष जीवन फकीरी में
बचपन में ही अनाथ, साधुओं-फकीरो के साथ बचपन बीता ।
व्यक्तित्व - चेचक के कारण रूपहीन (काला रंग), बाई आँख और कान से वंचित । मृदुभाषी, मनस्वी और स्वभाव से संत थे ।
कृतियाँ/रचना - पदमावत, अखरावट, चित्ररेखा, कहरनामा आखिरी कलाम । चंपावत, होलीनामा, इतरावत |
सप्रसंग व्याख्यात्मक प्रश्न (4 अंक)
1. "धनि सो पुरूख जस कीरति जासू। 2019
फूल मरै पै मरे न बासू ।।"
उत्तर: यह पंक्ति हमारी हिंदी की किताब 'दिगंत भाग-2' की 'कड़बक' कविता से ली गई है, जिसे मलिक मुहम्मद जायसी ने लिखा है। कवि का कहना है कि जिस तरह एक फूल के सूख कर झड़ जाने के बाद भी उसकी महक (सुगंध) हमेशा बनी रहती है, ठीक उसी तरह एक महान और अच्छे कर्म करने वाला इंसान दुनिया से चले जाने के बाद भी अपने यश और अच्छे कामों के लिए हमेशा याद किया जाता है। उसकी इज्जत और नाम कभी नहीं मरता।
2. ‘एक नैन जस दरपन तौ तेहि निरमल भाउ।
सब रूपवंत गहि मुख जोवहिं कई चाउ ।।" 2012
उत्तर: यह पंक्ति 'कड़बक' कविता से ली गई है। कवि मलिक मुहम्मद जायसी कहते हैं कि उनके पास केवल एक ही आँख है, फिर भी उनका मन शीशे (दर्पण) की तरह एकदम साफ़, सच्चा और पवित्र है। उनके इसी साफ़ मन और महान गुणों के कारण, बड़े-बड़े सुंदर और रूपवान लोग भी उनके पैरों में गिरकर उनका सम्मान करते हैं और उनकी बातें बहुत ध्यान और इज्जत से सुनते हैं।
3. जौ लहि अंबहि डाभ न होई। तौ लहि सुगंध बसाई न सोई।
कीन्ह समुन्द्र पानी जौ खारा। तौ अति भएऊ असूझ अपारा।
उत्तर: इन पंक्तियों में कवि कहते हैं कि जब तक आम के पेड़ में नुकीली मंजरियां (डाभ) नहीं निकलतीं, तब तक उसमें मीठी महक नहीं आती। इसी तरह, भगवान ने समुद्र का पानी खारा (नमकीन) बनाया, तभी वह इतना विशाल और गहरा बन पाया जिसे पार करना असंभव है। कहने का अर्थ यह है कि किसी न किसी कमी या संघर्ष के बाद ही इंसान के अंदर बड़प्पन और महानता आती है।
लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)
1. जायसी की दो रचनाओं के नाम लिखें | 2019
उत्तर: मलिक मुहम्मद जायसी की दो प्रमुख रचनाएँ हैं:
(i) पद्मावत
(ii) अखरावट
2. कड़बक के कवि की सोच क्या है? 2015
उत्तर: कवि जायसी की सोच यह है कि इंसान का शरीर नाशवान है (एक दिन खत्म हो जाएगा), लेकिन उसके अच्छे कर्म हमेशा जिंदा रहते हैं। जैसे फूल के सूखने के बाद भी उसकी खुशबू रह जाती है, वैसे ही कवि के मरने के बाद भी उनकी लिखी गई कविताएँ इस दुनिया में हमेशा अमर रहेंगी।
3. मल्लिक मुहम्मद जायसी की प्रेम संबंधी अवधारणा क्या हैं? 2018
उत्तर: मलिक मुहम्मद जायसी को 'प्रेम की पीर' (प्रेम के दर्द) का कवि कहा जाता है। उनके अनुसार सच्चा प्रेम दो आत्माओं और दो दिलों का गहरा मिलन है। उनकी प्रेम कहानियों में भावनाओं की गहराई है और उनकी कविताएँ शहद की तरह मीठी और मन को सुकून देने वाली हैं।
4. कवि ने अपनी एक आँख की तुलना दर्पण से क्यों की है?
उत्तर: कवि ने अपनी एक आँख की तुलना दर्पण (शीशे) से इसलिए की है क्योंकि दर्पण कभी झूठ नहीं बोलता; वह हमेशा सच्चाई और असली रूप दिखाता है। इसी तरह, कवि का मन और उनका स्वभाव भी दर्पण की तरह एकदम साफ़, सच्चा और छल-कपट से दूर है।
5. 'रकत कै लेई' का क्या अर्थ है?
उत्तर: 'रकत कै लेई' का मतलब है खून की गोंद (लेई)। कवि जायसी कहते हैं कि उन्होंने अपनी इस कविता को अपने खून-पसीने की गोंद से जोड़कर (बहुत मेहनत और दर्द से) बनाया है। इसमें उनकी आँखों के आँसुओं की गहराई और सच्चा प्रेम रस मिला हुआ है।
6. 'मुहम्मद यहि कबि जोरि सुनावा।' यहाँ कवि ने 'जोरि' शब्द का प्रयोग किस अर्थ में किया है?
उत्तर: यहाँ कवि ने 'जोरि' शब्द का प्रयोग "जोड़कर बताने" या "रचना करने" के अर्थ में किया है। इसका मतलब है कि कवि ने शब्दों, भावों और कहानियों को बहुत मेहनत से जोड़-जोड़कर इस कविता को बनाया है। (अवधी भाषा में 'जोरि' का मतलब जोड़ना होता है)।
7. कवि ने किस रूप में स्वयं को याद रखे जाने की इच्छा व्यक्त की है?
उत्तर: कवि की इच्छा है कि दुनिया उन्हें उनके द्वारा लिखे गए महाकाव्य (पद्मावत) के कारण हमेशा याद रखे। वे चाहते हैं कि उनके जाने के बाद भी उनकी यह रचना अमर रहे और लोग उनके सच्चे प्रेम-भाव और कविता को याद करें।
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