12th Book 2 chapter 5 Geography भू संसाधन तथा कृषि subjective
प्रश्न 1. कृषि योग्य व्यर्थ भूमि से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: खेती करने लायक वह जमीन (उपजाऊ भूमि) जिस पर पिछले 5 साल या उससे अधिक समय से किसी भी कारण से खेती नहीं की गई हो और वह खाली पड़ी हो, उसे कृषि योग्य व्यर्थ भूमि कहते हैं। इसे सुधार कर दोबारा खेती के काम में लाया जा सकता है।
प्रश्न 2. निवल बोया गया क्षेत्र तथा सकल बोया गया क्षेत्र में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इन दोनों में मुख्य अंतर इस प्रकार है:
निवल बोया गया क्षेत्र (Net Sown Area): यह वह कुल वास्तविक जमीन है, जिस पर साल में कम से कम एक बार फसल बोई और काटी जाती है। इसमें एक जमीन के टुकड़े को सिर्फ एक ही बार गिना जाता है।
सकल बोया गया क्षेत्र (Gross Cropped Area): इसमें निवल बोए गए क्षेत्र के साथ-साथ उस जमीन को भी जोड़ दिया जाता है जिस पर साल में एक से अधिक बार (जैसे दो या तीन बार) फसल उगाई गई हो। यानी अगर एक ही खेत में साल में दो बार फसल बोई गई, तो उस खेत का क्षेत्रफल दो बार जोड़ा जाएगा।
प्रश्न 3. कृषि ऋण प्रदान करने वाली संस्थाओं के नाम लिखिए।
उत्तर: किसानों को खेती के लिए लोन (ऋण) देने वाली प्रमुख संस्थाएँ निम्नलिखित हैं:
भूमि विकास बैंक
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (Gramin Bank)
सहकारी समिति (Cooperative Society)
राष्ट्रीयकृत बैंक (जैसे SBI, PNB आदि)
प्रश्न 4. गन्ना की खेती के लिए आदर्श परिस्थितियाँ क्या होनी चाहिए?
उत्तर: गन्ने की अच्छी पैदावार के लिए निम्नलिखित अनुकूल दशाएँ होनी चाहिए:
तापमान: 21°C से 27°C के बीच गर्म तापमान होना चाहिए।
वर्षा: 75 सेंटीमीटर से 120 सेंटीमीटर तक अच्छी बारिश होनी चाहिए।
मिट्टी: पानी सोखने वाली उपजाऊ दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है।
प्रश्न 5. भू-निम्नीकरण के दो कारण का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: जमीन की उपजाऊ क्षमता कम होने (भू-निम्नीकरण) के दो मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
अति पशुचारण: खेतों या चरागाहों में पशुओं द्वारा बहुत ज्यादा चरने से जमीन की घास खत्म हो जाती है, जिससे मिट्टी का कटाव बढ़ता है और जमीन बंजर होने लगती है।
अधिक सिंचाई: खेतों में जरूरत से ज्यादा पानी भरने या सिंचाई करने से मिट्टी में नमक की मात्रा (लवणता) बढ़ जाती है, जिससे जमीन की उपजाऊ शक्ति घट जाती है।
प्रश्न 6. भारत के किन्हीं चार खरीफ फसलों के नाम लिखिए।
उत्तर: मानसून के समय (जून से सितंबर के बीच) उगाई जाने वाली चार प्रमुख खरीफ फसलें निम्नलिखित हैं:
चावल (धान)
मक्का
कपास
बाजरा(नोट: आप ज्वार, अरहर या मूंगफली भी लिख सकते हैं।)
प्रश्न 7. भारतीय कृषि की प्रमुख समस्याएँ कौन-कौन सी हैं?
उत्तर: भारतीय खेती की प्रमुख समस्याएँ नीचे दिए गए प्रश्न 8 के उत्तर के समान ही हैं (जैसे मानसून पर निर्भरता, छोटे खेत, और कम पैदावार)।
प्रश्न 8. देश के उन सभी कृषि समस्याओं के नाम लिखे जो की सर्वव्यापी हैं?
उत्तर: हमारे देश में खेती की मुख्य और हर जगह पाई जाने वाली समस्याएँ निम्नलिखित हैं:
मानसून पर निर्भरता: भारत में खेती आज भी बारिश (मानसून) के भरोसे चलती है। बारिश न होने पर सूखा पड़ जाता है।
निम्न उत्पादकता: आधुनिक तकनीकों की कमी के कारण अन्य देशों की तुलना में यहाँ प्रति हेक्टेयर पैदावार (उत्पादन) कम होती है।
ऋणग्रस्तता (कर्ज): गरीब किसानों के पास पैसों की कमी होती है, जिससे वे कर्ज के जाल में फंस जाते हैं।
छोटे और बिखरे खेत: विरासत में जमीन बटने के कारण किसानों के पास बहुत छोटे-छोटे खेत बचे हैं, जिन पर आधुनिक तरीके से खेती करना मुश्किल होता है।
भूमि सुधारों की कमी: देश के कई हिस्सों में आज भी भूमि सुधार कानून ठीक से लागू नहीं हो पाए हैं।
प्रश्न 9. भारत के खाद्यान्न फसलों पर एक टिप्पणी लिखें।
उत्तर: भारत में उगाई जाने वाली खाने वाली फसलों (खाद्यान्नों) की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
भारत के कुल बोए गए क्षेत्र के दो-तिहाई (लगभग 66%) भाग पर खाद्यान्न फसलें (जैसे अनाज और दालें) उगाई जाती हैं।
पूरी दुनिया का लगभग 11% अनाज अकेले भारत पैदा करता है। दुनिया में अनाज उत्पादन में चीन और अमेरिका के बाद भारत तीसरे स्थान पर है।
यहाँ मुख्य रूप से चावल और गेहूं जैसी उत्तम फसलें तथा ज्वार, बाजरा और मक्का जैसे मोटे अनाज उगाए जाते हैं।
प्रश्न 10. वर्षा आधारित कृषि से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: ऐसी खेती जो पूरी तरह से वर्षा के पानी और उससे मिलने वाली मिट्टी की नमी पर निर्भर करती है, उसे वर्षा आधारित कृषि या जल कृषि कहते हैं। इन क्षेत्रों में सिंचाई के कृत्रिम साधन (जैसे नहर या ट्यूबवेल) नहीं होते। यहाँ मुख्य रूप से चावल, जूट, गन्ना आदि फसलें उगाई जाती हैं।
प्रश्न 11. शुष्क कृषि किसे कहते हैं?
उत्तर: जिन इलाकों में देश में बहुत कम बारिश (75 सेंटीमीटर से भी कम) होती है, वहाँ की जाने वाली खेती को शुष्क कृषि (सूखी खेती) कहते हैं। इन क्षेत्रों में ऐसी फसलें उगाई जाती हैं जो कम पानी और सूखे को सह सकें, जैसे— रागी, बाजरा, मूंग, चना और ग्वार।
प्रश्न 12. शुष्क कृषि तथा आर्द्र कृषि में क्या अंतर है?
उत्तर: इन दोनों में मुख्य अंतर बारिश की मात्रा का होता है:
शुष्क कृषि (Dry Farming): यह उन सूखे इलाकों में होती है जहाँ सालाना बारिश 75 सेंटीमीटर से कम होती है। यहाँ मिट्टी की नमी को बचाकर कम पानी वाली फसलें (जैसे- बाजरा, मक्का, मूंग) उगाई जाती हैं।
आर्द्र कृषि (Wet Farming): यह उन इलाकों में होती है जहाँ सालाना बारिश 75 सेंटीमीटर से अधिक होती है। इन क्षेत्रों में पौधों को जरूरत से ज्यादा पानी मिलता है, इसलिए यहाँ अधिक पानी चाहने वाली फसलें (जैसे- चावल, जूट, गन्ना) उगाई जाती हैं।
प्रश्न 13. बंजर भूमि तथा कृषि योग्य व्यर्थ भूमि में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर: इन दोनों प्रकार की जमीनों में मुख्य अंतर निम्नलिखित है:
बंजर भूमि: यह वह जमीन होती है जो पूरी तरह से अनुपजाऊ होती है (जैसे पहाड़ी, मरुस्थलीय या खड्ड वाली जमीन)। इस पर किसी भी तकनीक से खेती करना बिल्कुल असंभव होता है।
कृषि योग्य व्यर्थ भूमि: यह जमीन वास्तव में उपजाऊ होती है और इस पर खेती की जा सकती है, लेकिन किसी कारण से (जैसे पानी की कमी या पैसों का अभाव) यह पिछले 5 वर्षों से अधिक समय से खाली (परती) पड़ी हुई है।
प्रश्न 14. भारत में गेहूं के उत्पादन पर एक टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
भारत में चावल के बाद गेहूं दूसरा सबसे प्रमुख खाद्यान्न (अनाज) है।
यह मुख्य रूप से सर्दियों के मौसम में उगाई जाने वाली रबी की फसल है।
पूरी दुनिया के कुल गेहूं उत्पादन का लगभग $12.8\%$ हिस्सा अकेले भारत पैदा करता है।
भारत में उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान इसके मुख्य उत्पादक राज्य हैं। पंजाब और हरियाणा में आधुनिक तकनीकों के कारण इसकी उत्पादकता सबसे अधिक ($4000 \text{ किग्रा/हेक्टेयर}$) है।
प्रश्न 15. भारत में चावल के उत्पादन पर एक टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है।
आंकड़ों के अनुसार, पूरी दुनिया के कुल चावल उत्पादन में भारत का योगदान लगभग 22.07% है।
हमारे देश में जितनी भी जमीन पर खेती होती है, उसके एक-चौथाई (25%) भाग पर अकेले चावल ही बोया जाता है।
भारत में चावल का सबसे ज्यादा उत्पादन पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और पंजाब में होता है। प्रति हेक्टेयर उपज के मामले में पंजाब, हरियाणा और तमिलनाडु सबसे आगे हैं।
भाग 2: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
प्रश्न 1. भारत में गेहूं के उत्पादन एवं वितरण का विवरण दें।
उत्तर: भारत में गेहूं के उत्पादन और फैलाव (वितरण) की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
महत्व: चावल के बाद गेहूं भारत का दूसरा सबसे जरूरी अनाज है, जो देश की कुल कृषि भूमि के लगभग $14\%$ भाग पर उगाया जाता है।
भौगोलिक दशाएँ (मौसम): गेहूं एक ठंडी जलवायु वाली रबी फसल है। इसकी बुआई के समय 10 °c - 15°c और फसल पकने के समय 20 °c - 30°c
का तापमान सबसे अच्छा माना जाता है। इसके लिए 50-75 सेंटीमीटर वर्षा काफी होती है, और जहाँ कम बारिश होती है वहाँ सिंचाई की जरूरत पड़ती है। दोमट और काली मिट्टी इसके लिए सबसे उत्तम है।
उत्पादन और वितरण: इसकी बुआई अक्टूबर-नवंबर में और कटाई मार्च-अप्रैल में की जाती है। भारत के उत्तर-पश्चिमी भाग में इसका उत्पादन सबसे ज्यादा होता है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश इसके सबसे बड़े उत्पादक राज्य हैं।
प्रश्न 2. स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में हुए कृषि विकास की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: आजादी मिलने के बाद से अब तक भारत में खेती के विकास को निम्नलिखित चरणों में समझा जा सकता है:
शुरुआती प्रयास (आजादी के तुरंत बाद): आजादी से पहले हमारी खेती सिर्फ पेट भरने (जीविकोपार्जन) के लिए होती थी। आजादी के बाद सरकार ने अनाज का उत्पादन बढ़ाने के लिए व्यापारिक फसलों की जगह खाद्यान्नों को बढ़ावा दिया, बंजर जमीन को खेती के लायक बनाया और खेतों की सघनता बढ़ाई।
संकट का दौर (1950-1960 का दशक): शुरुआती बढ़त के बाद 1950 के दशक के अंत में उत्पादन रुक गया। सरकार ने 'गहन कृषि जिला कार्यक्रम' (IADP) जैसे प्रयास किए, लेकिन 1960 के दशक में देश में दो बड़े अकाल पड़े, जिससे अनाज की भारी कमी हो गई और हमें बाहर से अनाज मंगाना पड़ा।
हरित क्रांति (1967-68): इस संकट से निकलने के लिए देश में हरित क्रांति की शुरुआत हुई। अच्छे बीजों (HYV), रासायनिक खादों और सिंचाई के साधनों की मदद से देश अनाज के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन गया।
कृषि जलवायु योजना (1988): योजना आयोग ने खेती के साथ-साथ पशुपालन और मत्स्य पालन (जलकृषि) को भी बढ़ावा देने के लिए क्षेत्रीय नीतियां बनाईं।
उदारीकरण (1990 के बाद): 1990 के बाद आर्थिक सुधारों (उदारीकरण) का खेती पर भी असर पड़ा, जिससे कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का प्रयोग बढ़ा और फसलों की उत्पादकता में भारी सुधार हुआ।
प्रश्न 3. हरित क्रांति क्या है? हरित क्रांति की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: 1960 के दशक (विशेषकर 1967-68) में भारतीय कृषि में उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा अपनाई गई एक नई वैज्ञानिक रणनीति को हरित क्रांति कहा जाता है।
इसकी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
उद्देश्य: देश को खाद्यान्न (विशेषकर गेहूं और चावल) के मामले में आत्मनिर्भर बनाना और अकाल जैसी समस्याओं से मुक्ति दिलाना।
मुख्य तरीके: इसके तहत अधिक उपज देने वाले उन्नत किस्म के बीजों (जैसे मैक्सिको से गेहूं और फिलीपींस से चावल के बीज) का उपयोग किया गया। साथ ही बड़े पैमाने पर रासायनिक खादों (Fertilizers), कीटनाशकों, आधुनिक कृषि यंत्रों (जैसे ट्रैक्टर) और सिंचाई के नए साधनों का इस्तेमाल शुरू हुआ।
प्रभाव: इस क्रांति के कारण देश में अनाज का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ गया। यह मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में सबसे ज्यादा सफल रही।
प्रश्न 1. भारत में विभिन्न प्रकार के ग्रामीण अधिवासों के लिए उत्तरदायी किन्हीं दो प्राकृतिक कारकों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: ग्रामीण क्षेत्र में गाँव या बस्तियाँ कहाँ बसेंगी, यह प्रकृति पर निर्भर करता है। इसके दो मुख्य भौतिक (प्राकृतिक) कारक निम्नलिखित हैं:
जल की उपलब्धता: पानी जीवन के लिए सबसे जरूरी है। इसलिए ज्यादातर गाँव नदियों, झीलों या कुओं के पास बसते हैं ताकि पीने और खेती के लिए पानी आसानी से मिल सके।
जमीन की बनावट (उच्चावच): मैदानी इलाकों में जमीन समतल और उपजाऊ होती है, जहाँ खेती करना और मकान बनाना आसान होता है। इसलिए मैदानी भागों में घनी बस्तियाँ होती हैं, जबकि पहाड़ी इलाकों में घर दूर-दूर बिखरे होते हैं।
प्रश्न 2. भारत के चार मध्यकालीन शहरों के नाम लिखिए।
उत्तर: राजा-महाराजाओं और मुगलों के समय विकसित हुए भारत के चार प्रमुख मध्यकालीन शहर निम्नलिखित हैं:
दिल्ली
आगरा
जयपुर
लखनऊ
प्रश्न 3. नगर, महानगर और मेगानगर को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: जनसंख्या (आबादी) के आधार पर इन्हें इस प्रकार बाँटा गया है:
नगर (Town): जिस नगरीय क्षेत्र की जनसंख्या 1 लाख से 10 लाख के बीच होती है, उसे नगर कहते हैं।
महानगर (Metropolitan City): जिस शहर की जनसंख्या 10 लाख से अधिक (10 लाख से 50 लाख के बीच) होती है, उसे महानगर कहते हैं।
मेगानगर (Mega City): 50 लाख से अधिक आबादी वाले बहुत बड़े विशाल शहरों को मेगानगर कहा जाता है (जैसे- मुंबई, दिल्ली)।
प्रश्न 4. ग्रामीण अधिवास की चार विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: ग्रामीण बस्तियों (गाँवों) की चार मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
मुख्य काम: गाँव के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि (खेती) और पशुपालन होता है।
कम आबादी: शहरों की तुलना में गाँवों में जनसंख्या और भीड़-भाड़ बहुत कम होती है।
आपसी संबंध: गाँवों में लोगों के बीच आपस में गहरा जुड़ाव, जान-पहचान और भाईचारा होता है।
सुविधाओं की कमी: गाँवों में बड़े अस्पतालों, अच्छे कॉलेजों और बड़े उद्योगों (रोजगार) की कमी होती है।
प्रश्न 5. ग्रामीण एवं नगरीय बस्तियों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इनमें मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:
व्यवसाय: ग्रामीण बस्तियों के लोग खेती और पशुपालन (प्राथमिक कार्यों) से जुड़े होते हैं, जबकि नगरीय बस्तियों (शहरों) के लोग नौकरी, व्यापार और फैक्ट्रियों (द्वितीयक और तृतीयक कार्यों) में लगे होते हैं।
जीवन शैली: गाँवों में जीवन सीधा-सादा होता है और सामाजिक संबंध मजबूत होते हैं। शहरों में जीवन बहुत व्यस्त और जटिल होता है और आपसी संबंध केवल काम तक सीमित (औपचारिक) होते हैं।
प्रश्न 6. गैरिसन नगर क्या होते हैं? उनका क्या प्रकार्य होता है?
उत्तर: * गैरिसन नगर क्या हैं: इन्हें छावनी नगर (Cantonment Towns) भी कहा जाता है। ये वे शहर होते हैं जिन्हें मुख्य रूप से सेना (मिलिट्री) के रहने, उनके अभ्यास और सुरक्षा के उद्देश्य से बसाया जाता है।
कार्य: इनका मुख्य कार्य देश की सीमाओं और आंतरिक क्षेत्रों की सुरक्षा करना तथा सैन्य ट्रेनिंग देना होता है।
उदाहरण: अंबाला, जालंधर, महू, उधमपुर आदि।
प्रश्न 7. क्या एक प्रकार्य वाले नगर की कल्पना की जा सकती है? या नगर बहुप्रकार्यात्मक क्यों हो जाते हैं?
उत्तर: शुरुआत में कोई शहर किसी एक खास काम के लिए बसता है (जैसे जमशेदपुर फैक्ट्रियों के लिए या वाराणसी धर्म के लिए)। लेकिन जैसे-जैसे शहर बड़ा होता है, वहाँ स्कूल, अस्पताल, बाजार, दफ्तर और गाड़ियों की आवाजाही जैसी कई अन्य सुविधाएँ भी शुरू हो जाती हैं। इसलिए कोई भी शहर सिर्फ एक काम का नहीं रह जाता, बल्कि वह बहुप्रकार्यात्मक (बहुत सारे काम एक साथ करने वाला) बन जाता है।
प्रश्न 8. विभिन्न भौतिक पर्यावरणों में बस्तियों के प्रारूपों के लिए उत्तरदायी कारक कौन-से हैं?
उत्तर: अलग-अलग प्राकृतिक जगहों पर बस्तियाँ कैसी बनेंगी, इसके लिए तीन मुख्य कारक जिम्मेदार हैं:
भौतिक कारक: जमीन की बनावट, जलवायु (मौसम) और पानी की सुविधा।
सांस्कृतिक कारक: समाज की बनावट, जाति और धर्म (जिसके कारण लोग समूह में रहते हैं)।
सुरक्षा कारक: चोर-डकैतों या दुश्मनों से बचाव की सुविधा।
प्रश्न 9. मरुस्थलीय प्रदेशों में गाँवों के अवस्थिति के कौन-से मुख्य कारक होते हैं?
उत्तर: रेगिस्तानी (मरुस्थलीय) इलाकों में गाँवों के बसने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
पानी की कमी: रेगिस्तान में पानी सबसे कीमती होता है।
बस्तियों का प्रकार: जहाँ पानी बिल्कुल नहीं होता, वहाँ लोग दूर-दूर बिखरे हुए घर (एकांकी बस्ती) बनाकर रहते हैं। लेकिन रेगिस्तान में जहाँ भी पानी का कोई स्रोत (जैसे जलस्रोत या नखलिस्तान) मिलता है, वहाँ लोग पानी के लालच में पास-पास आकर गुच्छित (घनी) बस्ती बना लेते हैं।
प्रश्न 10. स्मार्ट सिटी मिशन का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: स्मार्ट सिटी मिशन का मुख्य उद्देश्य शहरों को आधुनिक बनाना है। इसके तहत शहरों में 24 घंटे बिजली-पानी, साफ-सफाई, अच्छी सड़कें, सुरक्षित माहौल और इंटरनेट जैसी तकनीकी सुविधाएं देना है ताकि वहाँ के लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो सके।
भाग 2: कार्यों के आधार पर नगरों का वर्गीकरण (दीर्घ उत्तरीय)
प्रश्न 1. कार्यों के आधार पर नगरों को वर्गीकृत कीजिए।
उत्तर: शहरों में होने वाले मुख्य काम के आधार पर इन्हें निम्नलिखित भागों में बाँटा गया है:
प्रशासनिक नगर: जहाँ देश या राज्य की राजधानी होती है और सरकारी दफ्तर होते हैं (जैसे- दिल्ली, पटना, लखनऊ)।
औद्योगिक नगर: जहाँ बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां और उद्योग होते हैं (जैसे- जमशेदपुर, भिलाई, कानपुर)।
परिवहन नगर: जो सामान को लाने-ले जाने या बंदरगाहों के रूप में प्रसिद्ध होते हैं (जैसे- मुंबई, मुगलसराय)।
वाणिज्यिक नगर: जो व्यापार और बिजनेस के बड़े केंद्र होते हैं (जैसे- कोलकाता, बेंगलुरु)।
खनन नगर: जहाँ जमीन से खनिज निकाले जाते हैं (जैसे- झरिया, कोडरमा, रानीगंज)।
धार्मिक/सांस्कृतिक नगर: जो अपनी धार्मिक पहचान के लिए जाने जाते हैं (जैसे- वाराणसी, हरिद्वार, अयोध्या, मथुरा)।
पर्यटन नगर: जहाँ लोग घूमने-फिरने आते हैं (जैसे- शिमला, नैनीताल, मसूरी)।
प्रश्न 4. भारत में चाय उत्पादन एवं वितरण का वर्णन कीजिए।
उत्तर: भारत में चाय के उत्पादन और फैलाव (वितरण) की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
चाय का परिचय: चाय एक बहुत ही लोकप्रिय पेय (पीने वाला) पदार्थ है। यह एक सदाबहार झाड़ी की सूखी पत्तियों से तैयार की जाती है। यह एक रोपण कृषि (बागानी खेती) और व्यापारिक फसल है।
भौगोलिक दशाएँ (मौसम): चाय का पौधा मूल रूप से चीन का है। इसके लिए उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु (गर्म और नम मौसम) की जरूरत होती है। ढलानी जमीन इसके लिए सबसे अच्छी होती है ताकि इसकी जड़ों में पानी न रुके।
उत्पादन और वितरण: भारत में चाय की खेती सबसे पहले 1840 में असम की ब्रह्मपुत्र घाटी में शुरू हुई थी।
असम: यह भारत का सबसे बड़ा चाय उत्पादक राज्य है। यहाँ ब्रह्मपुत्र और सुरमा घाटी की पहाड़ियों पर चाय उगाई जाती है।
पश्चिम बंगाल: यह दूसरे स्थान पर है। यहाँ के दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और कूचबिहार जिले चाय के लिए बहुत प्रसिद्ध हैं।
दक्षिण भारत: तमिलनाडु की नीलगिरि पहाड़ियों और केरल में भी चाय की खेती की जाती है।
वैश्विक स्थान: भारत दुनिया का एक बहुत बड़ा चाय उत्पादक देश है और यह विश्व की लगभग 21.22%चाय अकेले पैदा करता है। चाय बेचने (निर्यात करने) के मामले में चीन के बाद भारत का दुनिया में दूसरा स्थान है।
प्रश्न 5. कृषि कार्य को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए या भारतीय कृषि की समस्याओं की विवेचना कीजिए।
उत्तर: भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ की लगभग 58% आबादी आज भी खेती पर निर्भर है। लेकिन भारतीय खेती को कई समस्याओं और कारकों का सामना करना पड़ता है, जो निम्नलिखित हैं:
जनसंख्या का भारी दबाव: भारत में आबादी बहुत तेजी से बढ़ रही है, जिससे जमीन पर बोझ बढ़ गया है और प्रति व्यक्ति पैदावार कम हो जाती है।
छोटे और बिखरे खेत: जमीन के लगातार बँटवारे के कारण किसानों के पास बहुत छोटे खेत (औसतन 1 हेक्टेयर से भी कम) बचे हैं। इतने छोटे खेतों पर आधुनिक मशीनों (जैसे ट्रैक्टर) से खेती करना घाटे का सौदा हो जाता है।
मिट्टी की उपजाऊ शक्ति में कमी: एक ही खेत में बार-बार एक ही फसल उगाने और फसल चक्र (Crop Rotation) न अपनाने से मिट्टी की ताकत कम हो रही है। ज्यादा सिंचाई से जमीन बंजर (नमकीन) हो रही है।
मौसम (जलवायु) पर निर्भरता: हमारी खेती आज भी पूरी तरह मानसून की बारिश पर निर्भर है। समय पर बारिश न होने से सूखा पड़ जाता है और फसलें बर्बाद हो जाती हैं।
सिंचाई के साधनों की कमी: आज भी देश के सभी खेतों तक नहर, ट्यूबवेल या कुओं का पानी नहीं पहुँच पाया है। सिंचाई की आधुनिक तकनीकों की बहुत कमी है।
मृदा अपरदन (मिट्टी का कटाव): जंगलों की कटाई और पशुओं द्वारा ज्यादा चराई के कारण तेज बारिश में खेतों की उपजाऊ ऊपरी मिट्टी बह जाती है।
प्रश्न 6. भारत में धान / चावल के उत्पादन एवं वितरण का वर्णन कीजिए।
उत्तर: भारत में धान (चावल) की खेती का पूरा विवरण निम्नलिखित है:
महत्व: चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है। भारत के तीन-चौथाई (लगभग 75%) लोगों का मुख्य भोजन चावल ही है। देश की कुल खेती वाली जमीन के एक-चौथाई (25%) हिस्से पर धान बोया जाता है।
भौगोलिक दशाएँ (अनुकूल मौसम):
जलवायु: धान के लिए उष्ण और आर्द्र जलवायु (गर्म और चिपचिपा मौसम) चाहिए। बोते समय 20° c और पकते समय 27°c का तापमान अच्छा रहता है।
वर्षा: धान के खेतों में पानी भरा रहना जरूरी है, इसलिए इसके लिए 75 - 200 cm तक भारी बारिश की आवश्यकता होती है। कम बारिश वाले इलाकों में सिंचाई करनी पड़ती है।
मिट्टी: पानी रोक कर रखने वाली चिकनी या दोमट मिट्टी इसके लिए सबसे बेस्ट होती है। पहाड़ी इलाकों में सीढ़ीनुमा खेत बनाकर भी धान उगाया जाता है।
मानव श्रम: धान की रोपाई, कटाई और गहाई में मशीनों से ज्यादा इंसानी हाथों की (मजदूरों की) बहुत जरूरत होती है।
उत्पादन और वितरण: भारत के पूर्वी और मैदानी भागों में इसकी खेती सबसे ज्यादा होती है। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, पंजाब, आंध्र प्रदेश और असम इसके मुख्य उत्पादक राज्य हैं। गंगा का मध्यवर्ती मैदान और तटीय इलाके इसके प्रमुख केंद्र हैं।
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