12th Geography Book 2 chapter 4 मानव बस्तियां Subjective
प्रश्न 1. भारत में विभिन्न प्रकार के ग्रामीण अधिवासों (बस्तियों) के लिए उत्तरदायी किन्हीं दो प्राकृतिक कारकों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: ग्रामीण क्षेत्रों में बस्तियाँ कहाँ और कैसी बनेंगी, यह मुख्य रूप से वहाँ की प्रकृति पर निर्भर करता है। इसके दो प्रमुख प्राकृतिक (भौतिक) कारक निम्नलिखित हैं:
जल की उपलब्धता (पानी की सुविधा): ग्रामीण बस्तियाँ आमतौर पर पानी के स्रोतों जैसे- नदियों, झीलों या झरनों के पास बसती हैं। पीने, खाना बनाने, खेती करने और पशुओं के लिए पानी सबसे जरूरी है, इसलिए लोग पानी के स्रोतों के पास रहना पसंद करते हैं।
भूमि की बनावट (उच्चावच): मैदानी इलाकों में जमीन समतल और उपजाऊ होती है, जहाँ खेती करना, मकान बनाना और सड़कें बनाना आसान होता है। इसलिए मैदानी भागों में सघन (घनी) बस्तियाँ पाई जाती हैं। इसके विपरीत, पहाड़ी या पथरीले इलाकों में घर दूर-दूर बिखरे हुए होते हैं।
प्रश्न 2. भारत के चार मध्यकालीन शहरों के नाम लिखिए।
उत्तर: भारत के प्रमुख मध्यकालीन शहर (जो राजा-महाराजाओं और मुगलों के समय विकसित हुए) निम्नलिखित हैं:
दिल्ली
आगरा
जयपुर
लखनऊ (नोट: आप हैदराबाद या नागपुर भी लिख सकते हैं।)
प्रश्न 3. नगर, महानगर और मेगानगर को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: जनसंख्या (आबादी) के आधार पर इन्हें इस प्रकार परिभाषित किया जाता है:
नगर (Town): सामान्यतः 1 लाख से लेकर 10 लाख तक की नगरीय जनसंख्या वाले क्षेत्र को 'नगर' कहा जाता है।
महानगर (Metropolitan City): जिस शहर की जनसंख्या 10 लाख से अधिक (10 लाख से 50 लाख के बीच) हो जाती है, उसे 'महानगर' कहते हैं।
मेगानगर (Mega City): 50 लाख से अधिक आबादी वाले विशाल नगरों को 'मेगानगर' कहा जाता है (जैसे- मुंबई, दिल्ली, कोलकाता)।
प्रश्न 4. ग्रामीण अधिवास की चार विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: ग्रामीण बस्तियों (गाँवों) की चार प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
मुख्य काम-काज: गाँव के लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती-बारी (कृषि) और पशुपालन होता है।
कम आबादी: शहरों की तुलना में गाँवों में जनसंख्या और जनसंख्या का घनत्व (कम जगह में रहने वाले लोग) बहुत कम होता है।
मजबूत सामाजिक संबंध: गाँवों में लोगों के आपसी रिश्ते बहुत गहरे, घनिष्ठ और भाईचारे वाले होते हैं।
बड़ी सुविधाओं की कमी: गाँवों में उच्च स्तर की सुविधाओं जैसे- बड़े अस्पताल, कॉलेज और अच्छे रोजगार के अवसरों की कमी होती है।
प्रश्न 5. ग्रामीण एवं नगरीय बस्तियों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: ग्रामीण और नगरीय (शहरी) बस्तियों में मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:
आधार | ग्रामीण बस्तियाँ (गाँव) | नगरीय बस्तियाँ (शहर) |
आर्थिक क्रियाएँ | यहाँ के लोग अपनी आजीविका के लिए प्राथमिक कार्यों जैसे खेती और पशुपालन पर निर्भर रहते हैं। | यहाँ के लोग उद्योगों (फैक्ट्रियों), व्यापार और विभिन्न प्रकार की सेवाओं (नौकरी) पर निर्भर रहते हैं। |
समानता/गतिशीलता | गाँव के लोग कम गतिशील होते हैं, इसलिए उनके बीच आपसी संबंध बहुत गहरे और घनिष्ठ होते हैं। | शहरों में जीवन बहुत तेज और जटिल होता है। यहाँ आपसी संबंध केवल औपचारिक (दिखावे या काम तक) होते हैं। |
कार्य/भूमिका | ये कच्चे माल और भोजन का उत्पादन करते हैं। | ये शहरों के विकास के केंद्र (नोड्स) होते हैं, जो गाँवों को भी सुविधाएँ और रोजगार देते हैं। |
प्रश्न 6. गैरिसन नगर क्या होते हैं? उनका क्या प्रकार्य होता है?
उत्तर:
गैरिसन नगर क्या हैं: गैरिसन नगर को छावनी नगर (Cantonment Town) भी कहा जाता है। ये ऐसे शहर होते हैं जहाँ सेना (मिलिट्री) रहती है और उनके ट्रेनिंग कैंप होते हैं।
इनका कार्य: इनका मुख्य कार्य देश की सुरक्षा करना होता है।
उदाहरण: अंबाला, जालंधर, बबीना, महू और उधमपुर इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
प्रश्न 7. क्या एक प्रकार्य वाले नगर की कल्पना की जा सकती है? या नगर बहुप्रकार्यात्मक क्यों हो जाते हैं?
उत्तर:
शुरुआत में कोई भी शहर किसी एक खास काम (प्रकार्य) के लिए विकसित होता है। जैसे- दिल्ली शासन चलाने के लिए (प्रशासनिक शहर) और जमशेदपुर फैक्ट्रियों के लिए (औद्योगिक शहर) बना था।
लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है और शहर बड़े होते जाते हैं, वहाँ शिक्षा, व्यापार, मनोरंजन, और परिवहन जैसी कई नई गतिविधियाँ शुरू हो जाती हैं। इसलिए, आज के समय में कोई भी शहर सिर्फ एक काम का नहीं रह जाता, बल्कि वह बहुप्रकार्यात्मक (बहुत सारे काम करने वाला) बन जाता है। वर्तमान में लगभग सभी शहर बहुप्रकार्यात्मक हैं।
प्रश्न 8. विभिन्न भौतिक पर्यावरणों में बस्तियों के प्रारूपों के लिए उत्तरदायी कारक कौन-से हैं?
उत्तर: अलग-अलग प्राकृतिक वातावरण में बस्तियाँ कैसी बनेंगी, इसके लिए निम्नलिखित कारक जिम्मेदार होते हैं:
भौतिक (प्राकृतिक) कारक: जमीन की ऊँचाई, वहाँ की जलवायु (मौसम), पानी की उपलब्धता और भूमि की बनावट।
सांस्कृतिक और मानव जातीय कारक: समाज की बनावट, जाति और धर्म (जिसके आधार पर लोग अक्सर पास-पास घर बनाते हैं)।
सुरक्षा संबंधी कारक: चोरी, डकैती या बाहरी आक्रमणों से बचने की सुविधा।
प्रश्न 9. मरुस्थलीय प्रदेशों में गाँवों के अवस्थिति के कौन-से मुख्य कारक होते हैं?
उत्तर: मरुस्थलीय (रेगिस्तानी) इलाकों में गाँवों के बसने के मुख्य नियम निम्नलिखित हैं:
पानी की समस्या: रेगिस्तान में सबसे बड़ी समस्या पानी की कमी होती है।
बिखरी बस्तियाँ: जिन इलाकों में पानी बिल्कुल नहीं होता, वहाँ लोग मजबूरी में दूर-दूर (एकांकी या बिखरी हुई) बस्तियाँ बनाकर रहते हैं।
गुच्छित (घनी) बस्तियाँ: रेगिस्तान में जहाँ भी पानी का कोई स्रोत (जैसे- कोई चश्मा या नखलिस्तान) मिल जाता है, वहाँ पानी की वजह से बहुत सारे लोग एक ही जगह इकट्ठा हो जाते हैं, जिससे वहाँ घनी बस्तियाँ बन जाती हैं।
प्रश्न 10. स्मार्ट सिटी मिशन का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: स्मार्ट सिटी मिशन का मुख्य उद्देश्य शहरों को आधुनिक सुख-सुविधाओं से जोड़ना है। इसके तहत शहरों के बुनियादी ढांचे (सड़क, बिजली, पानी) को मजबूत किया जाता है और तकनीकी समाधान (Smart Solutions) अपनाए जाते हैं ताकि वहाँ के नागरिकों को एक साफ, स्वच्छ, सुरक्षित और बेहतर जीवन स्तर मिल सके।
1. कार्यों के आधार पर नगरों का वर्गीकरण (Classification of Towns)
(नोट: यह पिछले पृष्ठ के दीर्घ उत्तरीय प्रश्न का बचा हुआ मुख्य भाग है।)
औद्योगिक नगर (Industrial Towns): जिन शहरों का विकास मुख्य रूप से फैक्ट्रियों और उद्योगों के कारण होता है, उन्हें औद्योगिक नगर कहते हैं।
उदाहरण: जमशेदपुर, भिलाई, राउरकेला, दुर्गापुर, मुंबई, कानपुर, अहमदाबाद।
परिवहन नगर (Transport Towns): जो शहर मुख्य रूप से सामान के आयात-निर्यात (लाने-ले जाने) की गतिविधियों और बंदरगाहों (Ports) के रूप में विकसित होते हैं।
उदाहरण: मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, कोची, मुगलसराय, कटनी।
वाणिज्यिक नगर (Commercial Towns): व्यापार और बिजनेस (वाणिज्य) के बड़े केंद्र वाले शहरों को वाणिज्यिक नगर कहा जाता है।
उदाहरण: कोलकाता, मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु।
खनन नगर (Mining Towns): जिन शहरों का विकास जमीन से खनिज (जैसे कोयला, लोहा) निकालने या खनन कार्य के कारण होता है।
उदाहरण: रानीगंज, झरिया, हजारीबाग, कोडरमा।
गैरिसन / छावनी नगर (Garrison Towns): जहाँ सेना के रहने, उनके रहने के क्वार्टर और ट्रेनिंग की व्यवस्था होती है, उन्हें सैनिक नगर या छावनी नगर कहते हैं।
उदाहरण: अंबाला, पठानकोट, उधमपुर।
धार्मिक और सांस्कृतिक नगर (Religious & Cultural Towns): जो शहर अपनी संस्कृति, धर्म, पूजा-पाठ और आध्यात्मिकता के लिए पूरी दुनिया में मशहूर होते हैं।
उदाहरण: वाराणसी, मथुरा, पुरी, मदुरै, कुरुक्षेत्र, हरिद्वार, उज्जैन, अयोध्या।
पर्यटन नगर (Tourist Towns): जो शहर अपने अच्छे मौसम (जलवायु) और प्राकृतिक सुंदरता के कारण घूमने-फिरने के लिए प्रसिद्ध होते हैं।
उदाहरण: नैनीताल, मसूरी, शिमला, माउंट आबू।
प्रश्न 2. नगर बहुप्रकार्यात्मक होते हैं? क्यों?
उत्तर:
कोई भी शहर शुरुआत में किसी एक खास काम (जैसे व्यापार या उद्योग) के कारण बसता है। लेकिन समय के साथ शहर को चालू रखने और वहाँ के लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए कई अन्य काम भी शुरू करने पड़ते हैं।
उदाहरण के लिए: एक परिवहन नगर में गाड़ियों और माल की आवाजाही सबसे मुख्य काम हो सकता है, लेकिन वहाँ रहने वाले लोगों के लिए धीरे-धीरे स्कूल (शैक्षणिक), अस्पताल (चिकित्सा), बाजार (वाणिज्यिक) और सरकारी दफ्तर (प्रशासनिक) भी खुल जाते हैं।
शहर जैसे-जैसे बड़ा होता है, वहाँ इतने सारे काम होने लगते हैं कि हम उसे किसी एक काम वाले वर्ग में नहीं रख सकते। इसीलिए वर्तमान में लगभग सभी नगर बहुप्रकार्यात्मक (बहुत सारे काम एक साथ करने वाले) होते हैं।
प्रश्न 3. भारत में पाई जाने वाली ग्रामीण बस्तियों के प्रकारों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: भारत में ग्रामीण बस्तियों (गाँवों) को मुख्य रूप से चार प्रकारों में बाँटा गया है:
गुच्छित बस्ती (Clustered Settlement): इसमें लोगों के घर बहुत पास-पास और सटे हुए बने होते हैं और पूरा गाँव एक समूह में रहता है। ये बस्तियाँ खेतों और चरागाहों से थोड़ी अलग होती हैं। लोग सुरक्षा और पानी की सुविधा के कारण ऐसे पास-पास रहते हैं। यह उत्तर भारत के मैदानों में ज्यादा देखने को मिलती है।
अर्ध-गुच्छित या विखंडित बस्ती (Semi-Clustered Settlement): इसमें घर एक-दूसरे से थोड़ी दूरी पर होते हैं, लेकिन पूरी तरह से अलग-अलग बिखरे हुए भी नहीं होते। अक्सर मुख्य गाँव से अलग होकर कुछ घर थोड़ी दूर पर बस जाते हैं। ऐसी बस्तियाँ गुजरात और राजस्थान में अधिक पाई जाती हैं।
पल्ली बस्ती (P Hamleted Settlement): ये बहुत छोटी-छोटी ग्रामीण बस्तियाँ होती हैं, जहाँ कुछ गिने-चुने परिवार ही मिलकर रहते हैं। इन्हें स्थानीय भाषा में पन्ना, पाड़ा, नगला या ढाणी भी कहा जाता है। ये बस्तियाँ ज्यादातर गंगा के मैदानी इलाकों और हिमालय की घाटियों में देखने को मिलती हैं।
परिक्षिप्त बस्ती (Dispersed Settlement): इन्हें बिखरी हुई बस्तियाँ भी कहते हैं। इनमें घर जंगलों, पहाड़ियों की ढलानों या बड़े-बड़े खेतों के बीच दूर-दूर (अकेले रूप में) बने होते हैं। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और केरल जैसे राज्यों में इस प्रकार की बस्तियाँ पाई जाती हैं।
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