Geography 12th Chapter 9 book 1 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार subjective

 Geography 12th Chapter 9 book 1 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार subjective

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

1. बहुपक्षीय व्यापार क्या है? [2016A]

  • उत्तर: बहुपक्षीय व्यापार वह व्यापार प्रणाली है जिसमें तीन या तीन से अधिक देश आपस में वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान करते हैं। यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों पर आधारित होता है, जिसका उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करना है।

2. व्यापार संतुलन से क्या तात्पर्य है? [2020A]

  • उत्तर: किसी देश के कुल निर्यात (बेचे गए सामान) और कुल आयात (खरीदे गए सामान) के बीच के अंतर को व्यापार संतुलन कहते हैं। यदि निर्यात, आयात से अधिक हो तो यह 'व्यापार अधिशेष' कहलाता है, और यदि आयात अधिक हो तो इसे 'व्यापार घाटा' कहा जाता है।

3. मुक्त व्यापार क्या है? [2018A, 2021A]

  • उत्तर: मुक्त व्यापार एक ऐसी आर्थिक नीति है जिसमें दो या दो से अधिक देशों के बीच होने वाले व्यापार पर कोई सरकारी प्रतिबंध जैसे सीमा शुल्क (Tariff), कोटा या अन्य बाधाएं नहीं होती हैं। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुलभ और सस्ता बनाना है।

4. विश्व के दो प्रादेशिक व्यापार समूह के नाम लिखिए। (2024A)

  • उत्तर: विश्व के दो प्रमुख प्रादेशिक व्यापार समूह निम्नलिखित हैं:

  • आसियान (ASEAN): दक्षिण-पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन।

  • यूरोपीय संघ (European Union): यूरोप के देशों का एक आर्थिक और राजनीतिक समूह।

5. विश्व व्यापार संगठन क्या है इसके प्रमुख कार्यों को लिखिए। (2012A)

  • उत्तर: विश्व व्यापार संगठन (WTO) एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जो वैश्विक व्यापार के नियमों को नियंत्रित करती है।

  • प्रमुख कार्य: सदस्य देशों के बीच व्यापारिक समझौतों को लागू करना, व्यापारिक विवादों को सुलझाना और मुक्त व्यापार को बढ़ावा देना। इसकी स्थापना 1995 में हुई थी और इसका मुख्यालय जेनेवा में है।

6. ऋणात्मक व्यापार संतुलन क्या है? (2020A, 2023A)

  • उत्तर: जब किसी देश द्वारा विदेशों से मंगाई गई वस्तुओं (आयात) का मूल्य, वहां भेजी गई वस्तुओं (निर्यात) के मूल्य से अधिक होता है, तो उसे ऋणात्मक व्यापार संतुलन या 'व्यापार घाटा' कहते हैं।

7. द्विपक्षीय व्यापार क्या है? (2016A)

  • उत्तर: जब दो देश आपसी समझौते के तहत एक-दूसरे के साथ वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार करते हैं, तो इसे द्विपक्षीय व्यापार कहते हैं। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करना होता है।

8. रेशम मार्ग क्या था और इसका ऐतिहासिक महत्व क्या है?

  • उत्तर: रेशम मार्ग (Silk Route) प्राचीन काल का लगभग 6000 किमी लंबा एक प्रसिद्ध व्यापारिक मार्ग था, जो चीन को मध्य एशिया होते हुए यूरोप से जोड़ता था।

  • महत्व: इस मार्ग से रेशम, मसाले और कीमती धातुओं का व्यापार होता था। इसने न केवल व्यापार को बल्कि एशिया और यूरोप के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक विचारों के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा दिया।

9. विनिमय प्रणाली (Barter System) क्या थी और इसकी प्रमुख विशेषता क्या थी?

  • उत्तर: विनिमय प्रणाली वह प्राचीन पद्धति है जिसमें वस्तुओं के बदले वस्तुओं का सीधा लेन-देन किया जाता था।

  • विशेषता: इसमें मुद्रा (पैसों) का उपयोग नहीं होता था। यह सरल थी, लेकिन इसमें वस्तुओं के सटीक मूल्य निर्धारण और "जरूरतों के दोहरे संयोग" की समस्या रहती थी।

10. दास व्यापार क्या था और इसका समाज पर क्या प्रभाव पड़ा?

  • उत्तर: 15वीं शताब्दी में शुरू हुए दास व्यापार के तहत अफ्रीकी लोगों को जबरन पकड़कर अमेरिका और यूरोप में गुलामों के रूप में बेचा जाता था।

  • प्रभाव: इसने समाज पर गहरा अमानवीय प्रभाव डाला; लाखों परिवार उजड़ गए और मानवाधिकारों का बड़े स्तर पर हनन हुआ।

11. विश्व व्यापार संगठन (WTO) क्या है और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?

  • उत्तर: WTO एक वैश्विक निकाय है जिसकी स्थापना 1 जनवरी 1995 को GATT के स्थान पर की गई थी।

  • उद्देश्य: अंतरराष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना, व्यापारिक बाधाओं को दूर करना और एक पारदर्शी वैश्विक व्यापार प्रणाली सुनिश्चित करना।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

1. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में उत्तरी अटलांटिक समुद्री मार्ग के महत्त्व का वर्णन करें। [2013A, 2020A]

  • उत्तर: उत्तरी अटलांटिक समुद्री मार्ग को "वाणिज्य का महान राजमार्ग" (Great Commerce Highway) कहा जाता है। इसका महत्व निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:

  • विकसित क्षेत्रों का जुड़ाव: यह मार्ग दुनिया के दो सबसे विकसित औद्योगिक क्षेत्रों—उत्तरी अमेरिका (USA और कनाडा) और पश्चिमी यूरोप को जोड़ता है।

  • सर्वाधिक व्यस्त मार्ग: विश्व का लगभग एक-चौथाई विदेशी व्यापार इसी मार्ग से होता है, जिससे यह दुनिया का सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग बन जाता है।

  • आधुनिक पत्तन: इस मार्ग के दोनों छोरों पर न्यूयॉर्क, लंदन, और रोटरडम जैसे विश्व स्तरीय और आधुनिक बंदरगाह स्थित हैं।

  • संसाधनों का प्रवाह: इस मार्ग के जरिए भारी मशीनरी, तकनीक, खाद्यान्न और कच्चे माल का बड़े पैमाने पर आदान-प्रदान होता है।


उत्तरी अटलांटिक समुद्री मार्ग का महत्त्व (क्रमशः)

उत्तरी अटलांटिक समुद्री मार्ग के महत्त्व को निम्नलिखित बिंदुओं से और बेहतर समझा जा सकता है:

  • i. आर्थिक गतिविधियों का केंद्र: उत्तरी अटलांटिक महासागर के दोनों ओर विकसित देश जैसे अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी स्थित हैं। इन देशों के बीच बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार होता है।

  • ii. बड़े बंदरगाहों का जुड़ाव: इस समुद्री मार्ग पर न्यूयॉर्क, लिवरपूल, हैम्बर्ग और रोटरडम जैसे दुनिया के प्रमुख बंदरगाह स्थित हैं, जो वैश्विक व्यापार के मुख्य केंद्र हैं।

  • iii. संसाधनों और वस्तुओं का आदान-प्रदान: इस मार्ग का उपयोग मुख्य रूप से औद्योगिक सामान, पेट्रोलियम, मशीनरी और कृषि उत्पादों के परिवहन के लिए किया जाता है।

  • iv. पर्यटन और सेवाएं: व्यापार के साथ-साथ यह मार्ग पर्यटन और यात्री परिवहन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

  • v. रणनीतिक महत्त्व: यह मार्ग भौगोलिक रूप से प्रमुख है, जो यूरोप और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूती प्रदान करता है। यह विश्व व्यापार और अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी के समान है और विश्व व्यापार को स्थिरता प्रदान करता है।


प्रादेशिक व्यापारिक समूह (Regional Trade Groups)

2. निम्नलिखित प्रादेशिक व्यापारिक समूहों का संक्षेप में विवरण दीजिए:

  • i. नाफ्टा (NAFTA): इसका पूरा नाम "उत्तर अमेरिकी मुक्त व्यापार समझौता" है। यह 1994 में कनाडा, अमेरिका और मैक्सिको के बीच हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य इन तीन देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना, व्यापार बाधाओं को हटाना और सीमा शुल्क को कम करना था।

  • ii. आसियान (ASEAN): यह दक्षिण-पूर्वी एशिया के 10 देशों का एक समूह है, जिसकी स्थापना 1967 में हुई थी। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना तथा क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

  • iii. ओपेक (OPEC): ओपेक का पूरा नाम "पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन" है। इसकी स्थापना 1960 में हुई थी और वर्तमान में इसमें 13 प्रमुख तेल निर्यातक देश सदस्य हैं। इसका मुख्य कार्य वैश्विक तेल आपूर्ति को नियंत्रित करना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को स्थिर रखना है।

  • iv. यूरोपीय स्वतंत्र व्यापार संघ (EFTA): EFTA की स्थापना 1960 में हुई थी, जो यूरोपीय देशों का एक मुक्त व्यापार संघ है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना है। इसके वर्तमान सदस्य देशों में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, फिनलैंड, स्वीडन, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे शामिल हैं।

  • v. दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (SAFTA): साफ़्टा की शुरुआत 2006 में हुई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य दक्षिण एशियाई देशों के बीच मुक्त व्यापार को बढ़ावा देना है। इसमें भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, अफगानिस्तान और मालदीव सदस्य देश हैं। इसका लक्ष्य क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ाकर आर्थिक समृद्धि लाना है



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