गाँधीजी के प्रारंभिक आंदोलन कहाँ-कहाँ हुए थे और क्यों?

प्रश्न: गाँधीजी के प्रारंभिक आंदोलन कहाँ-कहाँ हुए थे और क्यों?

उत्तर:

महात्मा गाँधी वर्ष 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे। भारत आने के बाद उन्होंने तुरंत राष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा आंदोलन शुरू नहीं किया, बल्कि गोपाल कृष्ण गोखले की सलाह पर पहले पूरे देश का दौरा किया। इसके बाद उन्होंने शुरुआती वर्षों में तीन स्थानीय स्तर के सफल आंदोलन किए, जिन्हें गाँधीजी के 'प्रारंभिक आंदोलन' या 'तीन प्रयोग' कहा जाता है।

परीक्षा के दृष्टिकोण से ये तीनों आंदोलन कहाँ हुए और क्यों हुए, इसका पूरा विवरण नीचे दिया गया है:

1. चम्पारण सत्याग्रह (1917) — बिहार

  • कहाँ हुआ: बिहार के चम्पारण जिले में।

  • क्यों हुआ (कारण): यह भारत में गाँधीजी का पहला सत्याग्रह था। यहाँ के अंग्रेज बागान मालिकों ने किसानों के साथ 'तिनकठिया प्रणाली' लागू कर रखी थी, जिसके तहत किसानों को अपनी जमीन के $3/20$ भाग पर जबरन नील (Indigo) की खेती करनी पड़ती थी। नील की खेती से जमीन बंजर हो रही थी और मुनाफ़ा न होने पर भी अंग्रेजों द्वारा भारी टैक्स वसूला जा रहा था। स्थानीय किसान राजकुमार शुक्ल के बुलावे पर गाँधीजी चम्पारण पहुँचे और इस दमनकारी व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन कर इसे खत्म करवाया।

2. अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन (1918) — गुजरात

  • कहाँ हुआ: गुजरात के अहमदाबाद शहर में।

  • क्यों हुआ (कारण): यह आंदोलन अहमदाबाद के सूती कपड़ा मिल मालिकों और वहाँ के मजदूरों के बीच 'प्लेग बोनस' को लेकर था। शहर में प्लेग की महामारी खत्म होने के बाद मिल मालिक बोनस को पूरी तरह बंद करना चाहते थे, जबकि मजदूर बढ़ती महंगाई के कारण इसे जारी रखने या वेतन में 35% बढ़ोतरी की मांग कर रहे थे। गाँधीजी ने मजदूरों का साथ दिया और भारत में पहली बार भूख हड़ताल (Fast unto death) का प्रयोग यहीं किया। अंततः मिल मालिक मजदूरों की तनख्वाह 35% बढ़ाने पर राजी हो गए।

3. खेड़ा सत्याग्रह (1918) — गुजरात

  • कहाँ हुआ: गुजरात के आनंद जिले के खेड़ा नामक स्थान पर।

  • क्यों हुआ (कारण): वर्ष 1918 में सूखे (अकाल) के कारण खेड़ा के किसानों की पूरी फसल नष्ट हो गई थी। ब्रिटिश सरकार के राजस्व कोड (Revenue Code) के अनुसार, यदि फसल सामान्य से 25% कम हो तो लगान (Tax) पूरी तरह माफ़ होना चाहिए था। इसके बावजूद अंग्रेज अधिकारी किसानों पर जबरन लगान वसूली का दबाव बना रहे थे और न देने पर उनकी जमीनें और मवेशी कुर्क कर रहे थे। गाँधीजी ने सरदार वल्लभभाई पटेल के साथ मिलकर इस आंदोलन का नेतृत्व किया और किसानों को लगान न देने के लिए संगठित किया। अंत में सरकार को झुकना पड़ा और लगान माफ़ कर दिया गया।

निष्कर्ष (महत्व): इन तीनों प्रारंभिक आंदोलनों ने गाँधीजी को भारत की गरीब जनता, किसानों और मजदूरों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया। इन सफलताओं ने साबित कर दिया कि 'सत्याग्रह' और 'अहिंसा' जैसे हथियारों से ब्रिटिश सरकार को झुकाया जा सकता है, जिसने आगे चलकर 'असहयोग आंदोलन' जैसे बड़े राष्ट्रीय आंदोलनों की नींव रखी।

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