प्रश्न: गाँधीजी ने चम्पारण आंदोलन क्यों किया?
उत्तर:
महात्मा गाँधी ने वर्ष 1917 में बिहार के चम्पारण जिले से भारत में अपना पहला सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था। परीक्षा के दृष्टिकोण से इस आंदोलन को करने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
तिनकठिया प्रणाली का विरोध: चम्पारण में गोरे अंग्रेज बागान मालिकों ने किसानों के साथ एक जबरन समझौता कर रखा था, जिसके तहत किसानों को अपनी जमीन के 20 कट्टों में से 3 कट्टों पर (यानी $3/20$ भाग पर) नील (Indigo) की खेती करना अनिवार्य था। इसे 'तिनकठिया प्रणाली' कहा जाता था।
किसानों का आर्थिक शोषण: जर्मनी में कृत्रिम रंग (सिंथेटिक डाई) के आविष्कार के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में नील की मांग घट गई थी। इसके बावजूद अंग्रेज अधिकारी किसानों को नील की खेती छोड़ने के बदले भारी टैक्स और अवैध वसूली के लिए मजबूर कर रहे थे।
जमीन का बंजर होना: नील की खेती करने से खेत की उपजाऊ शक्ति नष्ट हो जाती थी और वह जमीन बंजर हो जाती थी, जिससे किसान अपनी जरूरत के लिए मुख्य खाद्य फसलें (जैसे धान) नहीं उगा पा रहे थे।
राजकुमार शुक्ल का निमंत्रण: चम्पारण के एक स्थानीय किसान राजकुमार शुक्ल ने लखनऊ कांग्रेस अधिवेशन (1916) में गाँधीजी से मुलाकात की और उन्हें चम्पारण के किसानों के दुख-दर्द से अवगत कराते हुए वहाँ आने का निमंत्रण दिया।
परिणाम: गाँधीजी के चम्पारण पहुँचने और सत्याग्रह की धमकी के बाद ब्रिटिश सरकार झुकी। सरकार ने एक जांच समिति बनाई और तिनकठिया प्रणाली को हमेशा के लिए खत्म कर दिया, साथ ही किसानों से वसूले गए अवैध धन का 25% हिस्सा वापस लौटाया गया।
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