12th Political science Book 2 chapter 3 नियोजित विकास की राजनीति subjective

 


12th Political science Book 2 नियोजित विकास की राजनीति chapter 3 subjective

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

1. विकास के दो मॉडल कौन हैं? भारत के द्वारा विकास का कौन सा मॉडल अपनाया गया?

उत्तर:- स्वतंत्रता के समय दुनिया में विकास के दो मुख्य मॉडल मौजूद थे:

  • (i) पूँजीवादी मॉडल (Capitalist Model): इसमें व्यापार और उद्योग निजी हाथों में होते हैं (जैसे- अमेरिका)।

  • (ii) साम्यवाद/समाजवादी मॉडल (Socialist Model): इसमें पूरी अर्थव्यवस्था और संसाधनों पर सरकार का नियंत्रण होता है (जैसे- सोवियत संघ)।

भारत का मॉडल: भारत ने इन दोनों के बीच का रास्ता चुनते हुए 'मिश्रित अर्थव्यवस्था' (Mixed Economy) के मॉडल को अपनाया, जहाँ सार्वजनिक (सरकारी) और निजी (प्राइवेट) दोनों क्षेत्रों को मिलकर काम करने का मौका दिया गया।

2. नियोजन द्वारा विकास संबंधी नेहरू के विचारों का उद्देश्य क्या था?

उत्तर:- नियोजन (Planning) के माध्यम से देश का विकास करने के पीछे जवाहरलाल नेहरू के विचारों के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित थे:

  • विदेशी पूँजी और विदेशी टेक्नोलॉजी के भारत में सीधे प्रवेश पर रोक लगाना ताकि देश फिर गुलाम न बने।

  • निजी क्षेत्र (Private Sector) को नियंत्रित करके सार्वजनिक क्षेत्र (Public Sector/सरकारी उद्योगों) को बढ़ावा देना।

  • देश के हित में निजी संपत्ति का राष्ट्रीयकरण (Nationalization) करना।

  • देश में एक मजबूत मिश्रित अर्थव्यवस्था का ढांचा तैयार करना।

3. आदेशित अर्थव्यवस्था तथा मिश्रित अर्थव्यवस्था में अंतर बताइए।

उत्तर:- इन दोनों अर्थव्यवस्थाओं में निम्नलिखित मुख्य अंतर है:

  • आदेशित अर्थव्यवस्था (Command Economy): यह वह व्यवस्था है जिसमें निजी संपत्ति रखने का अधिकार नहीं होता या उसका बलपूर्वक राष्ट्रीयकरण कर दिया जाता है। पूरी अर्थव्यवस्था, कृषि और उद्योगों पर सिर्फ और सिर्फ राज्य (सरकार) का पूरा अधिकार और नियंत्रण होता है।

  • मिश्रित अर्थव्यवस्था (Mixed Economy): यह वह व्यवस्था है जिसमें उत्पादन के साधनों पर सरकार (सार्वजनिक क्षेत्र) और पूँजीपति (निजी क्षेत्र) दोनों का सह-अस्तित्व और नियंत्रण होता है। भारत इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

4. नियोजित विकास की क्यों आवश्यकता है?

उत्तर:- देश में नियोजित विकास (Planned Development) की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से है:

  • देश से गरीबी (निर्धनता) और बेरोजगारी को तेजी से दूर करने के लिए।

  • देश के आधारभूत ढांचे (जैसे- सड़क, बिजली, पानी, बांध) का मजबूत विकास करने के लिए।

  • कृषि और उद्योग दोनों क्षेत्रों का एक साथ संतुलित (समन्वित) विकास करने के लिए।

  • देश में निवेश और पूँजी निर्माण को बढ़ावा देने के लिए।

  • देश के सीमित संसाधनों का सही और न्यायपूर्ण बँटवारा सुनिश्चित करने के लिए।

5. योजना आयोग का क्या कार्य है?

उत्तर:- योजना आयोग (Planning Commission) की स्थापना 15 मार्च 1950 को की गई थी। इसका मुख्य कार्य देश के संसाधनों का सही अनुमान लगाकर उनके विकास के लिए पंचवर्षीय योजनाएं (Five-Year Plans) तैयार करना था, ताकि देश का व्यवस्थित विकास हो सके।

6. योजना अवकाश का अर्थ बताइए।

उत्तर:- सन 1966 में तीसरी पंचवर्षीय योजना के समाप्त होने के बाद, देश के खराब आर्थिक हालातों (युद्ध और अकाल) के कारण चौथी पंचवर्षीय योजना तुरंत शुरू नहीं की जा सकी। इसके बदले 1966 से 1969 तक तीन साल के लिए एक-एक वर्ष की वार्षिक योजनाएं लागू की गईं। पंचवर्षीय योजनाओं के इस तीन साल के अंतराल (गैप) को ही भारतीय इतिहास में 'योजना अवकाश' (Plan Holiday) कहा जाता है।

7. योजना आयोग का परिवर्तित नाम क्या है?

उत्तर:- योजना आयोग का नया परिवर्तित नाम नीति आयोग (NITI Aayog - National Institution for Transforming India) है। केंद्र सरकार द्वारा 1 जनवरी 2015 को इसका नाम और स्वरूप बदल दिया गया था।

8. प्रथम पंचवर्षीय योजना के क्या उद्देश्य थे?

उत्तर:- प्रथम पंचवर्षीय योजना ($1951-1956$) का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र का विकास करना था, क्योंकि आजादी के समय देश में अन्न संकट था। इस योजना के तहत मुख्य रूप से बांधों के निर्माण और सिंचाई के क्षेत्रों में भारी निवेश किया गया (जैसे- भाखड़ा नांगल बांध परियोजना)।

9. द्वितीय पंचवर्षीय योजना के क्या उद्देश्य थे?

उत्तर:- द्वितीय पंचवर्षीय योजना ($1956-1961$) का मुख्य उद्देश्य भारी उद्योगों का विकास और तीव्र औद्योगिकीकरण (Industrialization) करना था। इस योजना के दौरान देश में बड़े-बड़े स्टील प्लांट और भारी उद्योग स्थापित किए गए (जैसे- भिलाई, राउरकेला और दुर्गापुर स्टील प्लांट)।

10. विकास के बारे में गाँधीजी व नेहरू के प्रतिमानों में अन्तर बताइए।

उत्तर:- विकास को लेकर महात्मा गाँधी और जवाहरलाल नेहरू के विचारों (प्रतिमानों) में निम्नलिखित अंतर था:

  • गाँधीजी का विचार: गाँधीजी का मानना था कि विकास केवल भौतिक (पैसों का) नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भी होना चाहिए। वे भारी उद्योगों के खिलाफ थे और कुटीर व छोटे उद्योगों (खादी, चरखा) को बढ़ावा देना चाहते थे ताकि सबको रोजगार मिले। वे कृषि के विकास को सबसे ज्यादा महत्व देते थे।

  • नेहरू जी का विचार: इसके विपरीत, नेहरू जी के विकास मॉडल में आधुनिकता और भारी औद्योगिकीकरण (Heavy Industrialization) पर पूरा जोर था। उनके विचारों में आध्यात्मिक विकास के बजाय बड़े-बड़े कारखानों, बांधों और मिश्रित अर्थव्यवस्था की प्रशंसा को मुख्य स्थान दिया गया था।

11. पीली क्रान्ति से आप क्या समझते हैं? अथवा, पीली क्रान्ति क्या है?

उत्तर:- तिलहन उत्पादन (Oilseeds Production) जैसे- सरसों, सूरजमुखी, तिल आदि के क्षेत्र में व्यापक वृद्धि करने और खाद्य तेलों के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास को 'पीली क्रांति' (Yellow Revolution) कहा जाता है। इसका मुख्य लक्ष्य खाद्य तेलों के उत्पादन में मात्रात्मक और गुणात्मक सुधार लाकर विदेशों से तेल के आयात को कम करना था।

12. श्वेत क्रान्ति पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। अथवा, श्वेत क्रान्ति से क्या तात्पर्य है?

उत्तर:- देश में दूध (दुग्ध) उत्पादन को बढ़ाने के लिए किए गए बड़े और सुव्यवस्थित प्रयास को 'श्वेत क्रांति' (White Revolution) या 'ऑपरेशन फ्लड' कहा जाता है। इसके तहत सहकारी संगठनों (Co-operative Societies) का निर्माण किया गया, पशुओं की अच्छी नस्लों की व्यवस्था की गई और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग किया गया। भारत में डॉ. वर्गीज कुरियन को श्वेत क्रांति का जनक (Father of White Revolution) कहा जाता है।

13. हरित क्रांति के दो सकारात्मक प्रभाव को लिखे।

उत्तर:- हरित क्रांति के मुख्य सकारात्मक (अच्छे) प्रभाव निम्नलिखित हैं (पेज में चार बिंदु दिए गए हैं):

  • (i) खाद्यान्नों (विशेषकर गेहूँ और चावल) के उत्पादन में रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि हुई।

  • (ii) देश खाद्य सुरक्षा (Food Security) के मामले में आत्मनिर्भर बना।

  • (iii) ग्रामीण क्षेत्रों का तेजी से विकास हुआ।

  • (iv) किसानों की आय में वृद्धि हुई और उनके जीवन स्तर में सुधार आया।

14. हरित क्रांति के दो नकारात्मक प्रभाव को लिखे।

उत्तर:- हरित क्रांति के मुख्य नकारात्मक (बुरे) प्रभाव निम्नलिखित हैं:

  • (i) रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति (उर्वरा क्षमता) में गिरावट आई।

  • (ii) यह क्रांति केवल चावल और गेहूँ पर ज्यादा केंद्रित रही, बाकी फसलें (जैसे दलहन-तिलहन) पिछड़ गईं।

  • (iii) रासायनिक दवाओं के ज्यादा उपयोग से मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर बुरा असर पड़ा।

  • (iv) इसका लाभ केवल कुछ ही क्षेत्रों (जैसे पंजाब, हरियाणा) को मिला, जिससे क्षेत्रीय असमानता बढ़ी।

15. बॉम्बे प्लान क्या है?

उत्तर:- सन 1944 में मुंबई (तब बॉम्बे) के 8 बड़े उद्योगपतियों ने मिलकर देश के आर्थिक विकास के लिए एक संयुक्त प्रस्ताव तैयार किया। इस प्रस्ताव में कहा गया था कि सरकार को औद्योगिक और अन्य आर्थिक क्षेत्रों में बड़ा निवेश करना चाहिए और नियोजित अर्थव्यवस्था चलानी चाहिए। इसी योजनाबद्ध प्रस्ताव को 'बॉम्बे प्लान' (Bombay Plan) कहा जाता है।

16. राष्ट्रीय विकास परिषद् की स्थापना कब की गई थी इसके निर्माण का क्या उद्देश्य थे?

उत्तर:- राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC - National Development Council) की स्थापना 6 अगस्त 1952 को की गई थी।

  • उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य योजना आयोग द्वारा बनाई गई पंचवर्षीय योजनाओं की समीक्षा (Review) करना, उन पर विचार-विमर्श करना और उन्हें अंतिम मंजूरी (अनुमोदन) देना था।

  • अध्यक्ष: देश के प्रधानमंत्री इसके पदेन (Ex-officio) अध्यक्ष होते हैं।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

1. हरित क्रांति क्या थी? हरित क्रांति के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव लिखिए।

उत्तर:- हरित क्रांति का अर्थ: सन 1967-68 के दौर में भारतीय कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों, उच्च गुणवत्ता वाले बीजों (HYV Seeds), रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और बेहतर सिंचाई सुविधाओं का उपयोग शुरू किया गया। इसके परिणामस्वरूप देश में खाद्यान्न (विशेषकर गेहूँ) के उत्पादन में अप्रत्याशित और चमत्कारी वृद्धि हुई, जिसे 'हरित क्रांति' (Green Revolution) कहा जाता है। भारत में डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन को हरित क्रांति का जनक माना जाता है। इसका सबसे अधिक प्रभाव पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर पड़ा।

हरित क्रांति के सकारात्मक प्रभाव:

  • खेती की पैदावार और फसलों के कुल उत्पादन में भारी वृद्धि हुई।

  • भारत अनाज के मामले में विदेशों पर निर्भरता खत्म कर आत्मनिर्भर बना।

  • किसानों (विशेषकर बड़े किसानों) की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार हुआ।

  • कृषि का आधुनिकीकरण हुआ और नए कृषि यंत्रों का चलन बढ़ा।

हरित क्रांति के नकारात्मक प्रभाव:

  • क्षेत्रीय और सामाजिक असमानता: इसका लाभ केवल पंजाब, हरियाणा जैसे कुछ राज्यों को मिला, जिससे बाकी राज्य पिछड़ गए। साथ ही बड़े किसानों को फायदा हुआ और छोटे किसान कर्ज में डूब गए।

  • रोजगार में कमी: कृषि क्षेत्र में मशीनीकरण (ट्रैक्टर, थ्रेशर आदि) बढ़ने से गांवों में मजदूरों के लिए रोजगार के अवसर कम हो गए।

  • पर्यावरण को नुकसान: अत्यधिक रसायनों के उपयोग और अत्यधिक पानी खींचने से भूमिगत जल स्तर गिर गया और मिट्टी प्रदूषित हो गई।


2. नियोजन का अर्थ बताइए तथा उसके महत्व का विवेचना कीजिए।

उत्तर:- नियोजन का अर्थ: राष्ट्र की प्राथमिकताओं और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, देश के उपलब्ध सीमित संसाधनों का विभिन्न विकासात्मक कार्यों में सोच-समझकर और सही तरीके से उपयोग करना ही 'आर्थिक नियोजन' (Economic Planning) कहलाता है। सीधे शब्दों में, विकास के लिए पहले से बनाई गई एडवांस प्लानिंग ही नियोजन है।

नियोजन का उद्देश्य और महत्व:

  • गरीबी और बेरोजगारी का अंत: नियोजन का मुख्य महत्व देश से निर्धनता को समाप्त करना और नागरिकों के लिए नए रोजगार पैदा करना है।

  • आधारभूत ढांचे का विकास: इसके माध्यम से देश में बड़े उद्योग, सड़कें, बिजली परियोजनाएं और बांध जैसे जरूरी बुनियादी ढांचे का निर्माण योजनाबद्ध तरीके से किया जाता है।

  • संतुलित विकास: नियोजन से कृषि और उद्योग दोनों क्षेत्रों का एक साथ और समान रूप से (समन्वित) विकास संभव हो पाता है।

  • निवेश और पूँजी को बढ़ावा: देश की पूँजी का सही जगह इस्तेमाल करके नए निवेश के रास्ते खोले जाते हैं जिससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।

  • संसाधनों का सही बँटवारा: इसके द्वारा देश के धन और संसाधनों का तार्किक व न्यायपूर्ण वितरण सुनिश्चित किया जाता है ताकि अमीर-गरीब की खाई को कम किया जा सके।


3. मिश्रित अर्थव्यवस्था क्या है? भारत के संदर्भ में वर्णन कीजिए।

उत्तर:- मिश्रित अर्थव्यवस्था का अर्थ: वैसी आर्थिक व्यवस्था जिसमें उत्पादन के साधनों और उद्योगों पर सरकार (सार्वजनिक क्षेत्र) और निजी पूँजीपति (प्राइवेट सेक्टर) दोनों का सह-अस्तित्व और नियंत्रण होता है, उसे 'मिश्रित अर्थव्यवस्था' (Mixed Economy) कहा जाता है। इसमें लोक-कल्याण और मुनाफा कमाना दोनों साथ-साथ चलते हैं।

भारत के संदर्भ में वर्णन:

  • बीच का रास्ता: आजादी के बाद भारत के सामने विकास के दो मॉडल थे—पहला सोवियत संघ का 'साम्यवाद' (जहाँ सब सरकारी था) और दूसरा अमेरिका का 'पूँजीवाद' (जहाँ सब प्राइवेट था)। भारत ने किसी एक को न चुनकर दोनों की अच्छाइयों को मिलाकर 'मिश्रित अर्थव्यवस्था' को अपनाया।

  • दोनों का मिलकर काम करना: भारत में रेलवे, परमाणु ऊर्जा, रक्षा जैसे कुछ महत्वपूर्ण और रणनीतिक क्षेत्र सरकार ने अपने पास (अधीन) सुरक्षित रखे ताकि जनता का शोषण न हो।

  • निजी क्षेत्र को आजादी: दूसरी तरफ कपड़ा, व्यापार, कृषि और छोटे-बड़े उद्योगों को निजी हाथों (प्राइवेट कंपनियों) के लिए खोल दिया गया ताकि देश में प्रतियोगिता और तेजी से विकास हो सके।

इस प्रकार भारत के संदर्भ में मिश्रित अर्थव्यवस्था ने देश को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और एक लोकतांत्रिक ढांचे में समाजवाद का लक्ष्य पाने में मदद की।


4. योजना आयोग / नीति आयोग पर टिप्पणी लिखें।

उत्तर:- योजना आयोग और नीति आयोग भारत के आर्थिक विकास के लिए बनाई गई बेहद महत्वपूर्ण संस्थाएं हैं। इनके बारे में मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

  • योजना आयोग की स्थापना और स्वरूप: योजना आयोग का गठन 15 मार्च 1950 को किया गया था। यह एक संविधानेत्तर (Non-Constitutional) और केवल एक सलाहकार निकाय (Advisory Body) था, जिसका मुख्य काम देश के विकास के लिए पंचवर्षीय योजनाएं बनाना था। देश के प्रधानमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष होते थे (प्रथम अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू और प्रथम उपाध्यक्ष गुलजारी लाल नंदा थे)। इस आयोग ने देश में कुल 12 पंचवर्षीय योजनाएं बनाईं।

  • नीति आयोग में बदलाव: केंद्र सरकार ने 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग का नाम और ढांचा बदलकर इसके स्थान पर 'नीति आयोग' (NITI Aayog - National Institution for Transforming India) की स्थापना की।

  • नीति आयोग का कार्य: नीति आयोग सरकार के लिए एक 'थिंक टैंक' (Think Tank) के रूप में काम करता है। यह केंद्र और राज्य सरकारों को रणनीतिक, तकनीकी, दिशात्मक और राजनैतिक गतिशीलता प्रदान करता है। वर्तमान में इसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।


5. प्रथम पंचवर्षीय योजना और द्वितीय पंचवर्षीय योजना में क्या भिन्नता थी? व्याख्या कीजिए।

उत्तर:- प्रथम पंचवर्षीय योजना और द्वितीय पंचवर्षीय योजना में मुख्य अंतर और भिन्नताएं निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर थीं:

अंतर का आधार

प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951−1956)

द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956−1961)

मुख्य लक्ष्य/प्राथमिकता

इसका मुख्य उद्देश्य भारत को गरीबी से निकालना और कृषि क्षेत्र का विकास करना था।

इसका मुख्य उद्देश्य देश में तीव्र औद्योगिकीकरण और भारी उद्योगों का विकास करना था।

योजना के रणनीतिकार

इसकी तैयारी युवा अर्थशास्त्री के. एन. राज (K. N. Raj) के नेतृत्व में की गई थी, जिन्होंने विकास की रफ्तार धीमी रखने की सलाह दी थी।

इसका मॉडल प्रसिद्ध सांख्यिकीविद पी. सी. महालनोबिस (P. C. Mahalanobis) ने तैयार किया था, जो तेज बदलाव चाहते थे।

प्रमुख कार्य और निवेश

इसके तहत कृषि को बढ़ावा देने के लिए भाखड़ा नांगल बांध जैसी बड़ी सिंचाई परियोजनाओं की शुरुआत हुई और देश में 5 IIT कॉलेज खोले गए। कुल बजट का 15.1% कृषि पर खर्च का लक्ष्य था।

इसके तहत देश में बड़े-बड़े स्टील प्लांट (जैसे भिलाई, दुर्गापुर, राउरकेला) और भारी मशीनरी उद्योग लगाए गए। इसमें उद्योगों पर 18.5% खर्च का लक्ष्य था।

मूल दृष्टिकोण

इसका दृष्टिकोण ग्रामीण और कृषि आधारित था ताकि खाद्यान्न संकट दूर हो।

इसका दृष्टिकोण शहरी और औद्योगिक था ताकि देश तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बने।


6. योजना आयोग द्वारा नवभारत के निर्माण हेतु कौन-कौन से प्रारंभिक कदम उठाए गए?

उत्तर:- स्वतंत्रता के बाद एक नए और मजबूत भारत (नवभारत) के निर्माण के लिए भारतीय योजना आयोग द्वारा निम्नलिखित शुरुआती और महत्वपूर्ण कदम उठाए गए:

  1. सोवियत संघ के मॉडल को अपनाना: योजना आयोग ने विकास के लिए सोवियत संघ (USSR) के 'पंचवर्षीय योजना' के मॉडल को स्वीकार किया। इसके तहत यह तय किया गया कि सरकार अगले 5 वर्षों के लिए अपनी आय और व्यय (खर्च) की एक पूरी योजना बनाएगी, जिससे संसाधनों का सही इस्तेमाल हो सके।

  2. बजट का दो भागों में विभाजन: योजना आयोग की सलाह पर केंद्र और राज्य सरकारों के बजट को दो हिस्सों में बांटा गया—

  3. योजना व्यय (Plan Expenditure): वह पैसा जो पंचवर्षीय योजना में तय किए गए बड़े विकास कार्यों (जैसे बांध, उद्योग, स्कूल) पर खर्च होता था।

  4. गैर-योजना व्यय (Non-Plan Expenditure): वह पैसा जो सरकार के रोजमर्रा के कामों, सरकारी कर्मचारियों की सैलरी और रखरखाव पर खर्च होता था।

  5. योजना प्रारूप (Draft Document) जारी करना: सन 1951 में योजना आयोग ने प्रथम पंचवर्षीय योजना का आधिकारिक प्रारूप और दस्तावेज देश के सामने जारी किया। इसके जरिए देश के सामने एक साफ लक्ष्य रखा गया कि हमें अगले पांच सालों में कृषि, सिंचाई और बुनियादी ढांचे को किस स्तर तक मजबूत करना है। इसने देश के आर्थिक विकास की एक ठोस बुनियाद रखी।





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