12th Political science Book 2 chapter 2 एक दल का प्रभुत्व दौर subjective

 12th Political science Book 2 chapter 2 एक दल का प्रभुत्व दौर subjective


लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

1. एक दलीय प्रभुत्व का क्या अर्थ है? या एकल आधिपत्य दल व्यवस्था क्या है?

उत्तर:- जब किसी देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में कई राजनीतिक दल चुनाव लड़ते हैं, लेकिन लंबे समय तक सत्ता (सरकार) पर किसी एक ही मजबूत दल का कब्जा रहता है, तो उसे 'एक दलीय प्रभुत्व' या 'एकल आधिपत्य दल व्यवस्था' कहा जाता है।

2. एक दलीय व्यवस्था क्या है?

उत्तर:- जिस देश के संविधान या शासन व्यवस्था में सिर्फ एक ही राजनीतिक दल को काम करने की अनुमति होती है और सरकार चलाने की पूरी शक्ति उसी एक दल के पास होती है, उसे 'एक दलीय व्यवस्था' कहते हैं (जैसे- चीन)। वहाँ विपक्ष का कोई अस्तित्व नहीं होता।

3. प्रथम 3 आम चुनाव में कांग्रेस के प्रभुत्व से आप क्या समझते हैं? अथवा, राजनीति में कांग्रेस प्रभुत्व से आप क्या समझते हैं?

उत्तर:- देश की आजादी के बाद हुए पहले तीन आम चुनावों (1952, 1957 और 1962) में कांग्रेस पार्टी को केंद्र और देश के अधिकांश राज्यों में एकतरफा और भारी बहुमत से जीत मिली। इस दौर में विपक्षी दल बहुत कमजोर थे। इसलिए 1952 से 1967 तक के इस काल को भारतीय राजनीति में 'कांग्रेस के प्रभुत्व का काल' कहा जाता है।

4. भारत के सभी राष्ट्रीय दलों के नाम लिखिए।

उत्तर:- भारत में वर्तमान में मुख्य राष्ट्रीय राजनीतिक दल निम्नलिखित हैं:

  1. भारतीय जनता पार्टी (BJP)

  2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)

  3. आम आदमी पार्टी (AAP)

  4. बहुजन समाज पार्टी (BSP)

  5. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI-M]

  6. नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP)

5. गठबंधन की सरकार किसे कहते हैं?

उत्तर:- जब किसी चुनाव में किसी भी एक सिंगल राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत (सरकार बनाने के लिए जरूरी सीटें) नहीं मिलता है, तब दो या दो से अधिक दल आपस में मिलकर और एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम बनाकर सरकार का गठन करते हैं। ऐसी सरकार को 'गठबंधन की सरकार' (Coalition Government) कहा जाता है।

6. दल बदल किसे कहते हैं?

उत्तर:- जब कोई नेता (विधायक या सांसद) किसी एक राजनीतिक दल के टिकट पर चुनाव लड़कर जीतता है, लेकिन स्वार्थ या किसी अन्य कारण से उस दल को छोड़कर किसी दूसरे दल में शामिल हो जाता है, तो इस प्रक्रिया को 'दल-बदल' कहा जाता है।

7. चुनाव आयोग के चार कार्यों का उल्लेख करें।

उत्तर:- भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission) के चार प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:

  • (i) चुनाव क्षेत्रों का निर्धारण और परिसीमन (Border Fixing) करना।

  • (ii) देश के मतदाताओं की सही और नई वोटर लिस्ट (मतदाता सूची) तैयार करना।

  • (iii) विभिन्न राजनीतिक दलों को चुनाव लड़ने के लिए मान्यता देना और उन्हें सुरक्षित चुनाव चिन्ह आवंटित करना।

  • (iv) देश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव संपन्न कराना तथा राजनीतिक दलों के लिए आचार संहिता लागू करना।

8. साधारण बहुमत और विशेष बहुमत में क्या अंतर है?

उत्तर:- साधारण बहुमत और विशेष बहुमत में निम्नलिखित मुख्य अंतर है:

  • साधारण बहुमत: इसका अर्थ है सदन (संसद) में उस दिन उपस्थित और मतदान करने वाले कुल सदस्यों के आधे से अधिक ($>50\%$) का समर्थन।

  • विशेष बहुमत: इसका अर्थ है सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई ($2/3$ या लगभग $66\%$) समर्थन। इसका उपयोग बड़े या संवैधानिक बदलावों के लिए होता है।

9. वामपंथी दल से क्या समझते हैं?

उत्तर:- वामपंथी दल (Leftist Parties) उन राजनीतिक दलों को कहा जाता है जो समाज के गरीब, पिछड़े, शोषित, मजदूर और दलित वर्गों के अधिकारों और कल्याण की बात करते हैं। ये दल मौजूदा पूँजीवादी व्यवस्था को बदलकर सामाजिक समानता लाना चाहते हैं। भारत में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) इसके मुख्य उदाहरण हैं।

10. भारतीय जनसंघ की स्थापना कब हुई थी और इसके संस्थापक अध्यक्ष कौन थे?

उत्तर:- भारतीय जनसंघ (BJS) की स्थापना 21 अक्टूबर 1951 को हुई थी। इसके संस्थापक अध्यक्ष डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी थे।

11. भारत में चुनाव कराने का उत्तरदायित्व किस पर है?

उत्तर:- भारत में पूरे देश, राज्यों की विधानसभाओं और राष्ट्रपति/उपराष्ट्रपति का चुनाव पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी से कराने का उत्तरदायित्व भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) पर है।

12. भारत में चुनाव आयोग का गठन कब हुआ? इसके प्रथम मुख्य चुनाव आयुक्त कौन थे?

उत्तर:- भारत में निर्वाचन आयोग का गठन 25 जनवरी 1950 को हुआ था (इसीलिए हर साल 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है)। इसके सबसे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) सुकुमार सेन थे।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

1. भारत के एकल आधिपत्यशाली दल व्यवस्था को परिभाषित कीजिए।

उत्तर:- भारत में स्वतंत्रता के बाद एक अनोखी बहुदलीय व्यवस्था (Multiparty System) अपनाई गई, जहाँ कई दलों को चुनाव लड़ने की आजादी थी। इसके बावजूद शुरुआती दौर में 'एकल आधिपत्यशाली दल व्यवस्था' (One-Party Dominant System) देखने को मिली।

इसे निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:

  • कांग्रेस का एकतरफा दबदबा: आजादी के बाद प्रथम तीन आम चुनावों (1952 से 1967) में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने केंद्र और लगभग सभी राज्यों की सत्ता पर एकतरफा जीत हासिल की।

  • विपक्ष की कमजोरी: उस समय देश में अन्य दल भी मौजूद थे और चुनाव भी निष्पक्ष होते थे, लेकिन विपक्ष इतना बिखरा हुआ और कमजोर था कि वह कांग्रेस को टक्कर नहीं दे पा रहा था।

  • प्रमुख कारण: नेहरू जी का चमत्कारी नेतृत्व, आजादी के आंदोलन की विरासत और देशव्यापी संगठन होने के कारण जनता का पूरा भरोसा कांग्रेस पर था।

संक्षेप में, भारत की एकल आधिपत्यशाली व्यवस्था का मतलब यह नहीं था कि यहाँ अन्य दलों पर पाबंदी थी, बल्कि यह कांग्रेस की लोकप्रियता और मजबूत स्थिति के कारण बनी एक व्यावहारिक राजनीतिक सच्चाई थी।

2. राजनीतिक दल बदल क्या है? इस पर रोक के लिए क्या उपाय किए गए?

उत्तर:- * दल-बदल का अर्थ: जब कोई विधायक या सांसद किसी एक राजनीतिक दल के चुनाव चिन्ह (टिकट) पर चुनाव जीतकर आता है, और बाद में अपने निजी स्वार्थ या किसी अन्य कारण से उस दल को छोड़कर किसी दूसरे दल में शामिल हो जाता है, तो इसे 'दल-बदल' कहते हैं।

  • रोकने के उपाय: भारतीय राजनीति में इस समस्या को रोकने के लिए संसद द्वारा संविधान में 52वाँ संशोधन करके 'दल-बदल विरोधी कानून' (Anti-Defection Law) पास किया गया। इस कानून के तहत यदि कोई सदस्य अपनी पार्टी के निर्देशों या अध्यक्ष के आदेशों का उल्लंघन करता है, तो उसकी संसद या विधानसभा की सदस्यता समाप्त की जा सकती है। इस कानून के कारण अब कोई भी नेता अपनी मर्जी से आसानी से दल-बदल नहीं कर पाता, जिससे सरकारों में स्थिरता आई है।

3. लोकतंत्र में राजनीतिक दल क्यों आवश्यक हैं?

उत्तर:- राजनीतिक दल लोकतंत्र का पहिया हैं, जिसके बिना लोकतांत्रिक व्यवस्था काम नहीं कर सकती। इनकी आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से है:

  • जनता की आवाज: राजनीतिक दल जनता की समस्याओं, इच्छाओं और भावनाओं को इकट्ठा करके सरकार के सामने मजबूती से रखते हैं।

  • चुनावों का संचालन: लोकतंत्र में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराने के लिए राजनीतिक दलों का होना जरूरी है, क्योंकि ये जनता को उम्मीदवारों के रूप में विकल्प देते हैं।

  • नीति निर्माण में सहायक: ये देश की मुख्य समस्याओं के आधार पर नीतियां और योजनाएं तैयार करते हैं, जिन्हें सरकार में आने पर लागू किया जाता है।

  • सरकार पर नियंत्रण: सत्ता में रहने वाला दल सरकार चलाता है, जबकि विपक्षी दल सरकार की गलत नीतियों का विरोध करके उसे जनता के प्रति जवाबदेह और नियंत्रित रखते हैं।

4. केरल में कम्युनिस्टों की प्रथम चुनावी जीत और अनुच्छेद 356 का कांग्रेस द्वारा दुरुपयोग विषय पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर:- यह भारतीय राजनीति की एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घटना है, जिसे दो भागों में समझा जा सकता है:

  • (i) केरल में कम्युनिस्टों की ऐतिहासिक जीत: मार्च 1957 में हुए केरल विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) सबसे बड़े दल के रूप में उभरी और पाँच स्वतंत्र उम्मीदवारों के समर्थन से पूर्ण बहुमत हासिल किया। राज्यपाल के आमंत्रण पर ई.एम.एस. नम्बूदरीपाद के नेतृत्व में वहाँ सरकार बनी। यह दुनिया में पहला ऐसा मौका था जब कोई कम्युनिस्ट सरकार लोकतांत्रिक चुनावों के जरिए सत्ता में आई थी।

  • (ii) अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग: कम्युनिस्ट पार्टी ने सत्ता में आते ही कई क्रांतिकारी भूमि सुधार और प्रगतिशील नीतियां लागू करना शुरू किया, जिससे घबराकर विरोधी दलों और कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ 'मुक्ति संघर्ष' आंदोलन छेड़ दिया। अंततः, 1959 में केंद्र की कांग्रेस सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) का सहारा लेकर केरल की चुनी हुई कम्युनिस्ट सरकार को बर्खास्त कर दिया। केंद्र सरकार का यह फैसला भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में अनुच्छेद 356 के पहले सबसे विवादास्पद दुरुपयोग के रूप में जाना जाता है।

5. दूसरे और तीसरे आम चुनाव में कांग्रेस को मिली सफलता पर एक लेख लिखिए।

उत्तर:- देश में दूसरा आम चुनाव 1957 में और तीसरा आम चुनाव 1962 में हुआ था। इन दोनों चुनावों में भी प्रथम चुनाव की तरह कांग्रेस का एकतरफा दबदबा रहा, जिसे निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:

संसद में भारी बहुमत: इन दोनों आम चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा की लगभग तीन-चौथाई सीटों पर जीत हासिल की। कांग्रेस की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि विपक्ष की कोई भी पार्टी कांग्रेस द्वारा जीती गई सीटों का दसवां भाग (10%) भी हासिल नहीं कर सकी।

राज्यों में स्थिति: अधिकांश राज्यों की विधानसभाओं में भी कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिला। हालांकि, 1957 में केरल जैसे राज्य में कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार बनने से कांग्रेस के एकाधिकार को थोड़ी चुनौती जरूर मिली, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस का कोई मुकाबला नहीं था।

चुनाव प्रणाली का फायदा (FPTP): भारत में 'सर्वाधिक वोट पाने वाले की जीत' (First-Past-The-Post) वाली चुनावी प्रणाली अपनाई गई है। इसका फायदा कांग्रेस को मिला; भले ही उसे कुल वोटों का 45% के आसपास ही हिस्सा मिलता था, लेकिन विपक्षी वोटों के बिखराव के कारण वह सीटों के मामले में 74% से ज्यादा का भारी बहुमत हासिल करने में सफल रही। नेहरू जी का लोकप्रिय नेतृत्व इस सफलता का सबसे बड़ा आधार था।





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