12th Sociology book 2 chapter 5 . सामाजिक आन्दोलन subjective

 Sociology book 2 chapter 5 . सामाजिक आन्दोलन subjective 


Sociology Chapter 5 सामाजिक आन्दोलन subjective

प्रश्न 1. भक्ति आन्दोलन क्या है?

  • उत्तर— भक्ति आन्दोलन भारत में हुआ एक ऐसा धार्मिक और सामाजिक सुधार आन्दोलन था, जिसने समाज की बुराइयों को दूर करने का प्रयास किया। इसका मुख्य उद्देश्य समाज से जाति-भेद, छुआछूत और अंधविश्वास को खत्म करना था। इस आन्दोलन के संतों ने सिखाया कि ईश्वर की भक्ति के लिए किसी जाति, धन या ऊंचे ज्ञान की जरूरत नहीं है, बल्कि एक सच्चा और साफ मन ही काफी है। उन्होंने बताया कि हर इंसान बराबर है और भगवान को पाने का रास्ता प्रेम, भक्ति और इंसानियत से होकर जाता है।

प्रश्न 2. साइबर अपराध क्या है?

  • उत्तर— साइबर अपराध (Cyber Crime) उस गैर-कानूनी काम या जुर्म को कहते हैं जो कंप्यूटर, मोबाइल, इंटरनेट या किसी भी डिजिटल साधन के जरिए किया जाता है। इसके तहत लोगों के साथ ऑनलाइन धोखा करना, उनकी निजी जानकारी (जैसे पासवर्ड या फोटो) चुराना, बैंक से पैसों की ठगी करना या किसी के कंप्यूटर सिस्टम को नुकसान पहुंचाना शामिल है।

प्रश्न 3. मद्यपान के तीन कारणों पर प्रकाश डालें।

  • उत्तर— मद्यपान (शराब पीने की आदत) के तीन प्रमुख कारण नीचे दिए गए हैं:

  • मानसिक तनाव और चिंता: बहुत से लोग अपने जीवन के दुखों, असफलताओं, मानसिक परेशानी या तनाव से बचने के लिए शराब का सहारा लेते हैं। उन्हें गलतफहमी होती है कि शराब पीने से उनका तनाव कम हो जाएगा।

  • सामाजिक प्रभाव और बुरी संगति: कई बार लोग दोस्तों के दबाव में आकर या समाज में दिखावा करने के चक्कर में शराब पीना शुरू कर देते हैं। बुरी संगत इसका एक बड़ा कारण होती है।

  • आदत और आत्म-नियंत्रण की कमी: शुरुआत में मजे के लिए पीने से धीरे-धीरे इसकी आदत (लत) पड़ जाती है। इसके बाद व्यक्ति का खुद की भावनाओं और व्यवहार पर काबू नहीं रहता और वह चाहकर भी शराब नहीं छोड़ पाता।

प्रश्न 4. बिहार में मद्यनिषेध के दो प्रभावों पर प्रकाश डालें।

  • उत्तर— बिहार में मद्यनिषेध (शराबबंदी) लागू होने के दो मुख्य अच्छे प्रभाव (असर) इस प्रकार हैं:

  • स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन में सुधार: शराबबंदी के बाद लोगों की सेहत में सुधार हुआ है। घरों में शराब के कारण होने वाले घरेलू झगड़े और मारपीट कम हुए हैं, जिससे परिवारों में शांति और खुशहाली आई है।

  • काम और आमदनी में बढ़ोतरी: जो लोग पहले अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा शराब में बर्बाद कर देते थे, वे अब वही पैसा अपने परिवार, बच्चों की पढ़ाई और अच्छे खाने पर खर्च कर रहे हैं। साथ ही, अब वे काम पर ज्यादा ध्यान दे पा रहे हैं, जिससे उनकी आमदनी भी बढ़ी है।

प्रश्न 5. भारत में पर्यावरण सम्बन्धी कुछ प्रमुख आन्दोलनों की चर्चा कीजिए।

  • उत्तर— भारत में पर्यावरण को बचाने के लिए कई आन्दोलन हुए हैं, जो मुख्य रूप से जंगलों, नदियों और जंगली जीवों की रक्षा से जुड़े थे। इनमें से प्रमुख आन्दोलन निम्नलिखित है:

  • चिपको आन्दोलन: यह पर्यावरण की रक्षा के लिए चलाया गया एक बहुत प्रसिद्ध आन्दोलन था। इसमें जब ठेकेदार पेड़ों को काटने आते थे, तो वहां के स्थानीय लोग (विशेषकर महिलाएं) पेड़ों से चिपक जाते थे ताकि उन्हें कटने से बचाया जा सके। इसी वजह से इसका नाम 'चिपको आन्दोलन' पड़ा।

  • प्रशान्त घाटी आन्दोलन: यह आन्दोलन केरल राज्य में वहां के जंगलों और जंगली जीवों (वन्यजीवों) को बचाने के लिए चलाया गया था।

  • केन्द्रीय गंगा प्राधिकरण: गंगा नदी को प्रदूषण से बचाने और उसे साफ रखने के लिए साल 1985 में इस संस्था का गठन किया गया था।

प्रश्न 6. भारत में जनजातीय आन्दोलन के विभिन्न प्रकारों की विवेचना कीजिए।

  • उत्तर— भारत में आदिवासियों या जनजातियों द्वारा किए गए आन्दोलनों को उनके मक़सद के आधार पर पाँच भागों में बाँटा जा सकता है:

  • विरोधपूर्ण आन्दोलन: यह आन्दोलन आदिवासियों के साथ होने वाले अन्याय और शोषण के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए हुआ था। (जैसे: सन्याल विद्रोह और मुण्डा आन्दोलन)

  • सुधारवादी आन्दोलन: समाज में फैली कुरीतियों, बुराइयों और अंधविश्वासों को खत्म करने के लिए यह आन्दोलन चलाया गया। (जैसे: ताना भगत आन्दोलन और भील भगत आन्दोलन)

  • राजनीतिक आन्दोलन: अपने राजनीतिक अधिकारों को पाने और अपने लिए एक अलग राज्य की माँग करने के लिए यह आन्दोलन हुआ। (जैसे: झारखण्ड आन्दोलन और बोडो आन्दोलन)

  • पृथकतावादी आन्दोलन: अपनी एक बिल्कुल अलग पहचान बनाए रखने या पूरी तरह आज़ादी की माँग करने से जुड़े आन्दोलन। (जैसे: नागा आन्दोलन)

  • एकतावादी आन्दोलन: अपनी आदिवासी संस्कृति को बचाने और समाज में एकता (भाईचारे) को मजबूत करने के लिए किया गया प्रयास। (जैसे: खासी जनजाति का सांस्कृतिक आन्दोलन)

प्रश्न 7. पर्यावरण का अभिप्राय क्या है? अथवा (Or) पर्यावरण विनाश पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

  • उत्तर— हमारे आस-पास पाए जाने वाले सभी प्राकृतिक तत्व (जैसे: पानी, हवा, ज़मीन, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी) और इंसानी जीवन से जुड़ी गतिविधियाँ मिलकर पर्यावरण कहलाती हैं।जब इंसानों की गलतियों या फैक्ट्रियों के कारण हवा-पानी गंदा होता है, जंगल काटे जाते हैं, जंगली जानवर खत्म होने लगते हैं और कुदरत का संतुलन बिगड़ जाता है, तो उसे ही पर्यावरण विनाश या पर्यावरण प्रदूषण कहते हैं।

प्रश्न 8. समाज में स्त्रियों की स्थिति में सुधार लाने हेतु राजा राममोहन राय व रानाडे द्वारा किये गये कार्यों को बताइए।

  • उत्तर— समाज में महिलाओं की हालत सुधारने में इन दोनों समाज सुधारकों का बहुत बड़ा योगदान रहा है:

  • राजा राममोहन राय: इन्होंने समाज में फैली सती प्रथा (पति की मौत पर पत्नी को जिंदा जला देना) का कड़ा विरोध किया और साल 1829 में कानून बनवाकर इस पर रोक लगवाई। इन्होंने 'ब्रह्म समाज' की स्थापना की और महिलाओं की पढ़ाई-लिखाई, सम्मान और उनके अधिकारों का पूरा समर्थन किया।

  • महादेव गोविन्द रानाडे: इन्होंने लड़कियों की शिक्षा, विधवा महिलाओं की दोबारा शादी (विधवा पुनर्विवाह) और समाज में महिलाओं को बराबरी का हक़ दिलाने के लिए काम किया। उन्होंने अपनी किताबों और भाषणों के ज़रिए समाज की बुराइयों को दूर करने की कोशिश की।

प्रश्न 9. सामाजिक आन्दोलन क्या है? भारत में जनजातीय आन्दोलन के प्रमुख कारण बताइए।

  • उत्तर— समाज में किसी बड़े बदलाव को लाने के लिए या किसी गलत बदलाव को रोकने के लिए जब लोग एक साथ मिलकर लगातार कोशिश या संघर्ष करते हैं, तो उसे सामाजिक आन्दोलन कहते हैं।भारत में जनजातीय (आदिवासी) आन्दोलनों के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • विकास की उपेक्षा: आदिवासी इलाक़ों का पिछड़ा रह जाना और वहां विकास के काम न होना।

  • जागरूकता का बढ़ना: आदिवासियों का पढ़ा-लिखा होना और अपने अधिकारों को समझने लगना।

  • गलत वन नीतियाँ: सरकार की ऐसी नीतियां जिससे आदिवासियों से उनके जंगलों का अधिकार छिन गया।

  • बाहरी शोषण: साहूकारों, जमींदारों और बाहरी लोगों द्वारा आदिवासियों को धोखा देना या सताना।

  • सांस्कृतिक पहचान: अपनी पुरानी परंपराओं और संस्कृति को बचाए रखने की इच्छा।

  • राजनीतिक कारण: राजनीति और सरकारी फैसलों में आदिवासियों का कम प्रभाव होना।

प्रश्न 10. बचपन बचाओ आन्दोलन पर प्रकाश डालिए।

  • उत्तर— 'बचपन बचाओ आन्दोलन' बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने और देश से बाल मजदूरी (छोटे बच्चों से काम करवाना) को खत्म करने के लिए चलाया गया एक बहुत बड़ा आन्दोलन है। इसकी शुरुआत साल 1980 में कैलाश सत्यार्थी ने की थी।इस आन्दोलन का मुख्य मक़सद बच्चों को शोषण, जबरन मजदूरी और बुरे बर्ताव से बचाकर उन्हें स्कूल भेजना और एक सुरक्षित जीवन देना है। इस आन्दोलन की मदद से अब तक हज़ारों बच्चों को बाल मजदूरी के चंगुल से छुड़ाया जा चुका है।

प्रश्न 11. बाल विकास से आप क्या समझते हैं?

  • उत्तर— किसी भी बच्चे के बड़े होने, उसके कुछ नया सीखने और उसके व्यवहार (सोचने-समझने के तरीके) में आने वाले सभी बदलावों के वैज्ञानिक अध्ययन को बाल विकास (Child Development) कहा जाता है।

प्रश्न 12. आर्य समाज की स्थापना किसके द्वारा और क्यों की गई ?

उत्तर— आर्य समाज की स्थापना दयानन्द सरस्वती ने की।

इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य भारतीय समाज में फैली कुरीतियों, अंधविश्वास और सामाजिक बुराइयों को दूर करना तथा वेदों की सच्ची शिक्षाओं को फैलाना था।

नोट: इमेज के सबसे ऊपर "बाल विकास" (Child Development) की परिभाषा का अंतिम हिस्सा भी दिख रहा है:

 

"...बच्चे के बढ़ने, सीखने और व्यवहार में आने वाले सभी बदलावों का वैज्ञानिक अध्ययन ही बाल विकास कहलाता है।"


अध्याय – 5. सामाजिक आन्दोलन

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तरी

प्रश्न 1. जनजाति की परिभाषा दीजिए। जनजातीय आन्दोलन के कारणों की विवेचना करें।

उत्तर:

जनजाति की परिभाषा (Definition of Tribe):

जनजाति ऐसे लोगों का एक समूह (group) होता है जो एक निश्चित क्षेत्र में एक साथ रहते हैं। इनकी अपनी एक अलग संस्कृति, भाषा, रीति-रिवाज और जीने का तरीका होता है। इनका जीवन पूरी तरह से प्रकृति (nature) और जंगलों पर निर्भर करता है।

जनजातीय आन्दोलन क्या है?

जब कोई जनजातीय समाज अपने अधिकारों को बचाने, अपने शोषण (exploitation) के खिलाफ आवाज उठाने और अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए एकजुट होकर संघर्ष करता है, तो उसे जनजातीय आन्दोलन कहते हैं।

जनजातीय आन्दोलन के मुख्य कारण:

  • . जागरूकता का बढ़ना: पहले जनजातियाँ शांत और आत्मनिर्भर जीवन जीती थीं। लेकिन जब उन्हें यह अहसास हुआ कि उनके साथ अन्याय हो रहा है और उनके अधिकार छीने जा रहे हैं, तो उनमें राजनीतिक चेतना और जागरूकता आई। इसी वजह से उन्होंने आन्दोलन शुरू किए।

  • बाहरी लोगों द्वारा शोषण: बाहरी व्यापारियों ने आदिवासियों को भारी ब्याज पर कर्ज देकर उनकी जमीनें हड़प लीं। सरकारी कर्मचारियों ने उनकी सरलता का फायदा उठाया और ठेकेदारों तथा साहूकारों ने उनका आर्थिक शोषण किया। इस शोषण से तंग आकर जनजातियों ने आन्दोलन का रास्ता चुना।

. दोषपूर्ण वन-नीति: जनजातियों का पूरा जीवन जंगलों पर टिका होता है—जैसे लकड़ी, फल-फूल, जड़ी-बूटियाँ इकट्ठा करना, पशु चराना और शिकार करना। ब्रिटिश काल (अंग्रेजों के समय) में जब आदिवासियों के जंगलों में जाने पर रोक लगा दी गई, तो उनकी रोज़ी-रोटी छिन गई। इसके विरोध में कई जनजातीय आन्दोलन हुए।

  • . राजनीतिक दलों की भूमिका: आज़ादी के बाद राजनीतिक दलों ने जनजातियों को अलग राज्य, विशेष सुविधाएं और अधिकार देने के बड़े-बड़े सपने दिखाए। लेकिन जब ये वादे पूरे नहीं हुए, तो उनका असंतोष (नाराजगी) बढ़ गया। इसी कारण झारखंड, गोंडवाना और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जनजातीय आन्दोलन हुए।

  • . विदेशी शक्तियों का प्रभाव: भारत के उत्तर-पूर्वी (North-East) क्षेत्रों में कुछ विदेशी ताकतों ने जनजातियों के मन में अलगाव (अलग होने) की भावना भड़काई। नागा और मिजो आन्दोलन इसी के उदाहरण हैं, जिससे जनजातीय आन्दोलन और तेज़ हो गए।

प्रश्न 2. जनजातीय आन्दोलन की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

जनजातीय आन्दोलन वे आन्दोलन होते हैं जो जनजातीय समुदाय के लोग अपने अधिकारों की रक्षा करने, शोषण के खिलाफ लड़ने और अपने जीवन में सुधार लाने के लिए करते हैं।

इन आन्दोलनों की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • संगठित नेतृत्व और विचारधारा: हर जनजातीय आन्दोलन का कोई न कोई नेता होता है और समाज में बदलाव लाने के लिए सब मिलकर प्रयास करते हैं। यह आन्दोलन एक खास सोच या विचारधारा पर आधारित होता है। जब जनजातियों में नया और पढ़ा-लिखा नेतृत्व आया, तभी ये आन्दोलन और मजबूत होकर शुरू हुए।

  • शोषण के विरुद्ध आन्दोलन: जहाँ दूसरे समाजों के आन्दोलन सुधार करने या नई मांगें पूरी करवाने के लिए होते हैं, वहीं जनजातीय आन्दोलन मुख्य रूप से अपने आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक शोषण से आज़ादी पाने के लिए होते हैं।

  • आन्दोलन का उग्र रूप: जनजातियाँ आमतौर पर बहुत शांतिप्रिय होती हैं और अपने में मग्न रहती हैं। लेकिन जब उनका आन्दोलन शुरू होता है, तो वह बहुत उग्र (तेज और आक्रामक) रूप ले लेता है क्योंकि यह उनके अस्तित्व की लड़ाई होती है।

  • . राजनीतिक दलों का प्रभाव: आज़ादी के बाद के ज़्यादातर जनजातीय आन्दोलन राजनीतिक पार्टियों से प्रभावित रहे हैं, खास तौर पर वामपंथी (Leftist) या साम्यवाद (Communism) की सोच से।

  • . सुधारवादी और एकतावादी स्वरूप: जनजातीय आन्दोलन सिर्फ विरोध करने तक सीमित नहीं होते। इनका मकसद बाहरी शोषण को रोकना, अपने समाज और आर्थिक व्यवस्था में सुधार करना तथा आदिवासियों के बीच एकता को मजबूत करना भी होता है।

  • . सांस्कृतिक पहचान की रक्षा: जनजातीय आन्दोलनों का एक बड़ा उद्देश्य अपनी अलग सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखना और बाहरी संस्कृति के जबरन थोपे जा रहे प्रभाव का विरोध करना है।

  • . जंगल और भूमि से जुड़ा संघर्ष: ज्यादातर जनजातीय आन्दोलन जंगलों से मिलने वाली सुविधाओं के छिन जाने, ज़मीन हड़पे जाने और बड़े ज़मींदारों व ठेकेदारों द्वारा किए जाने वाले शोषण के खिलाफ होते हैं।

प्रश्न 3. भारतीय इतिहास के आधुनिक दौर के कुछ प्रसिद्ध आदिवासी जनजातीय आन्दोलनों पर प्रकाश डालिए।

उत्तर:

आधुनिक भारतीय इतिहास में जनजातीय आन्दोलन मुख्य रूप से शोषण, ज़मीन छीने जाने, बिना मजदूरी के काम कराने (बेगार प्रथा) और उनकी संस्कृति में बाहरी दखल के खिलाफ हुए। इन आन्दोलनों का मुख्य मकसद आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा करना और उनके आत्मसम्मान को बनाए रखना था।

प्रमुख जनजातीय आन्दोलन निम्नलिखित हैं:

  • 1. भील आन्दोलन (1817–1846): यह आन्दोलन राजस्थान की भील जनजाति द्वारा चलाया गया था। राजपूत सामंतों और अंग्रेजों ने भीलों की ज़मीन छीन ली थी, जिसके विरोध में भीलों ने सरकारी कर्मचारियों और सैनिकों के खिलाफ संघर्ष किया। इसे 'खानदेश' या 'राजन्याबदोश विद्रोह' भी कहा जाता है।

  • 2. संथाल विद्रोह (1855–56): यह आन्दोलन संथाल जनजाति द्वारा ज़मींदारों, साहूकारों और अंग्रेजों के शोषण के खिलाफ किया गया था। सिद्धू और कान्हू के नेतृत्व में संथालों ने हथियारों के साथ विद्रोह किया और एक अलग शासन की माँग की।

  • 3. बिरसा मुण्डा आन्दोलन (1890–1900): यह आन्दोलन छोटा नागपुर क्षेत्र (झारखंड) में बिरसा मुण्डा के नेतृत्व में हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य बेगार प्रथा (बिना पैसे काम करवाना), ज़मींदारों के शोषण और अंग्रेजी शासन का विरोध करना था। बिरसा मुण्डा ने जनजातीय एकता और अधिकारों पर बहुत ज़ोर दिया।

  • 4. भील भगत आन्दोलन (1903–1920): यह एक सुधारवादी आन्दोलन था। इसका मुख्य उद्देश्य भील समाज के लोगों में शिक्षा, साफ़-सफ़ाई और सामाजिक सुधार लाना था, साथ ही समाज में फैली कुप्रथाओं (बुरी आदतों) को खत्म करना था।

  • 5. बोडो आन्दोलन (1950 के बाद): यह आन्दोलन असम की बोडो जनजाति द्वारा चलाया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य बोडो भाषा को सम्मान दिलाना और एक अलग राज्य (उदयाचल) की माँग करना था।

प्रश्न 4. दलित आन्दोलन पर प्रकाश डालिए।

उत्तर:

दलित आन्दोलन वह सामाजिक आन्दोलन है जिसका उद्देश्य समाज में फैली अस्पृश्यता (छुआछूत), जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता को खत्म करना है, ताकि दलितों को भी समाज में समान अधिकार और सम्मान मिल सके।

इस आन्दोलन का इतिहास और विकास:

  • प्राचीन काल: इस आन्दोलन की शुरुआत प्राचीन समय में महात्मा बुद्ध द्वारा जाति-भेदभाव के विरोध से मानी जाती है।

  • मध्यकाल (भक्ति आन्दोलन): कबीर और गुरु नानक जैसे भक्ति काल के संतों ने कर्म और भक्ति के आधार पर सब इंसानों को बराबर बताते हुए समानता का संदेश दिया।

  • 19वीं सदी: स्वामी दयानन्द सरस्वती और ज्योतिबा फुले ने छुआछूत और ब्राह्मणवादी वर्चस्व (भेदभाव वाली व्यवस्था) का खुलकर विरोध किया।

  • 20वीं सदी: महात्मा गांधी ने छुआछूत मिटाने (अस्पृश्यता उन्मूलन) के काम को देश के राष्ट्रीय आन्दोलन (आज़ादी की लड़ाई) से जोड़ा।

  • डॉ. भीमराव अम्बेडकर की भूमिका: डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने दलितों के सामाजिक और राजनीतिक अधिकारों के लिए सबसे बड़ा संघर्ष किया। उन्होंने बाद में बौद्ध धर्म अपनाकर 'नव-बौद्ध आन्दोलन' को आगे बढ़ाया ताकि दलितों को सम्मानजनक जीवन मिल सके।

प्रश्न 5. महिला आन्दोलन पर एक समाजशास्त्रीय निबन्ध लिखिए।

उत्तर:

भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति प्राचीन काल में बहुत सम्मानजनक और अच्छी थी, लेकिन धीरे-धीरे समय के साथ इसमें गिरावट आती गई। मध्यकाल (Middle Ages) तक आते-आते समाज में बाल-विवाह, सती प्रथा, पर्दा प्रथा और विधवाओं के साथ बुरा व्यवहार जैसी कई सामाजिक बुराइयाँ फैल गईं। इन्हीं व्यवस्थाओं और असमानता के खिलाफ महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिलाने के लिए महिला आन्दोलन की शुरुआत हुई।

इन कुप्रथाओं के कारण महिलाओं की सामाजिक स्थिति बहुत दयनीय (खराब) हो गई थी। 19वीं सदी में महिलाओं को समानता और अधिकार दिलाने के लिए कई समाज सुधार आन्दोलन शुरू हुए:

  • राजा राममोहन राय: इन्होंने 'ब्रह्म समाज' की स्थापना की और सती प्रथा का कड़ा विरोध किया। इनके प्रयासों के कारण ही 1829 में सती प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।

  • ईश्वरचन्द्र विद्यासागर: इन्होंने विधवाओं की दोबारा शादी (विधवा पुनर्विवाह) और महिला शिक्षा (स्त्री शिक्षा) को बढ़ावा देने के लिए बहुत महत्वपूर्ण प्रयास किए।

  • स्वामी दयानन्द सरस्वती: इन्होंने 'आर्य समाज' के माध्यम से महिलाओं की शिक्षा, समाज में उन्हें बराबरी का दर्जा और उनके सामाजिक अधिकारों को दिलाने पर बहुत ज़ोर दिया।

प्रश्न 6. पर्यावरण आन्दोलन में भारत सरकार के प्रयत्नों को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

आज के समय में पर्यावरण की रक्षा करना पूरे देश के लिए एक बहुत बड़ी ज़रूरत बन गया है। भारत सरकार ने पर्यावरण आन्दोलन को मजबूत बनाने और प्रदूषण (pollution) को रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जो निम्नलिखित हैं:

  • पहला (National Green Tribunal - NGT): केंद्र सरकार ने 18 अक्टूबर 2010 को 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (NGT) की स्थापना की। यह संस्था पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाली कंपनियों या उद्योगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करती है और पर्यावरण प्रदूषण से पीड़ित लोगों को न्याय दिलाती है।

  • दूसरा (पर्यावरण और वन संरक्षण): प्रकृति को बचाने के लिए पेड़ लगाना (वृक्षारोपण), जंगलों की रक्षा करना और लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए सरकार कई योजनाएँ चला रही है। इसके साथ ही 'वन संरक्षण अधिनियम' (Forest Conservation Act) को भी सख्ती से लागू किया गया है।

  • तीसरा (वन्य जीवों की रक्षा): जंगली जानवरों को बचाने के लिए साल 1972 में 'वन्य जीव संरक्षण अधिनियम' (Wildlife Protection Act) पास किया गया। इसके तहत देश में राष्ट्रीय उद्यानों (National Parks) और वन्यजीव अभ्यारण्यों (Sanctuaries) को बनाया गया ताकि जानवर सुरक्षित रह सकें।

  • चौथा (जल प्रदूषण पर रोक): पानी के प्रदूषण को रोकने और साफ-सफाई बनाए रखने के लिए साल 1974 में 'जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम' लागू किया गया। इसके अलावा नदियों को साफ करने के लिए विशेष सफाई कार्यक्रम भी शुरू किए गए।

  • पांचवां (मूल कर्तव्य): पर्यावरण की पूरी तरह रक्षा के लिए साल 1986 में 'पर्यावरण संरक्षण अधिनियम' (Environment Protection Act) पास किया गया। साथ ही, संविधान के 42वें संशोधन द्वारा पर्यावरण की रक्षा करना देश के हर नागरिक का मूल कर्तव्य (Fundamental Duty) बना दिया गया।





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