12th Hindi Poem Chapter 2 पद Subjective
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)
प्रश्न 1. सूरदास के प्रथम पद का भावार्थ अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर:
महाकवि सूरदास कृष्ण भक्ति के सबसे महान कवि माने जाते हैं। उन्होंने इस पद में माता के वात्सल्य (बचपन के प्रति प्रेम) का बहुत ही सुंदर वर्णन किया है।
भावार्थ:
सुबह होने का संदेश: माता यशोदा अपने प्यारे पुत्र बालक कृष्ण को बहुत ही कोमल और मीठे स्वर में जगाते हुए कहती हैं—"हे ब्रजराज के कुँवर (श्री कृष्ण)! अब जाग जाइए, सुबह हो गई है।"
प्रकृति में बदलाव: माता कहती हैं कि कमल के फूल खिल चुके हैं और कुमुद (रात में खिलने वाले फूल) मुरझा गए हैं। भौंरे भी लताओं (बेलों) में छिप गए हैं।
पशु-पक्षियों की आवाजें: सुबह होते ही मुर्गे और दूसरे पक्षी चहकने लगे हैं, उनकी आवाजें सुनाई दे रही हैं। पेड़-पौधे भी मानो सुबह की हवा में झूमकर कुछ बोल रहे हैं। गौशाला में गाएँ रंभा (आवाज दे) रही हैं और अपने बछड़ों को दूध पिलाने के लिए दौड़ रही हैं।
आसमान का नजारा: रात बीत चुकी है, इसलिए चंद्रमा का प्रकाश धीमा हो गया है और सूर्य की किरणें चारों तरफ फैल रही हैं।
भक्तिमय माहौल: गाँव के सभी पुरुष और महिलाएँ सुबह-सुबह भजन-कीर्तन गा रहे हैं।
जगाने का अनुरोध: इसलिए हे कमल को हाथ में धारण करने वाले भगवान कृष्ण! अब आप उठ जाइए, सुबह हो चुकी है।
प्रश्न 2. सूरदास के किसी एक पद का अर्थ लिखें।
विकल्प क: प्रथम पद का अर्थ (माता यशोदा द्वारा कृष्ण को जगाना)
कवि सूरदास कहते हैं कि माता यशोदा सुबह होने पर बालक कृष्ण को जगा रही हैं। वे कहती हैं कि हे कृष्ण! उठो, सुबह हो गई है। बगीचे में कमल खिल गए हैं, पक्षी और मुर्गे चहक रहे हैं, गाएँ बछड़ों के लिए रंभा रही हैं, चाँद की रोशनी फीकी पड़ गई है और सूरज निकल आया है। गाँव के लोग भजन गा रहे हैं, इसलिए अब आप भी जाग जाइए।
विकल्प ख: द्वितीय पद का अर्थ (बालक कृष्ण का भोजन करना)
यह पद हमारी पाठ्यपुस्तक 'दिगंत भाग-2' में कवि सूरदास द्वारा रचित 'पद' से लिया गया है। इस पद में बालक कृष्ण के भोजन करने के सुंदर दृश्य का वर्णन है।
शब्दों में अर्थ:
भोजन का ढंग: बालक कृष्ण अपने पिता नंद बाबा की गोद में बैठकर खाना खा रहे हैं। वे कुछ खाना खुद खाते हैं और कुछ जमीन पर गिरा देते हैं। कृष्ण के इस सीधे-साधे और प्यारे ढंग को नंद बाबा और माता यशोदा बहुत खुश होकर देख रहे हैं।
तरह-तरह के पकवान: कृष्ण के सामने बेसन से बनी बड़ी, बरा और कई तरह के स्वादिष्ट पकवान रखे हैं। वे अपने हाथों से उठा-उठाकर इन्हें खा रहे हैं। उन्हें मिट्टी के बर्तन में रखी हुई दही सबसे ज्यादा पसंद आ रही है और वे उसे बड़े चाव से खा रहे हैं।
पिता-पुत्र का प्रेम: कृष्ण मिश्री, दही और माखन को मिलाकर खुद भी खा रहे हैं और प्यार से कुछ हिस्सा अपने पिता नंद बाबा के मुँह में भी लगा रहे हैं। इस सुंदर और आनंद से भरे दृश्य का शब्दों में वर्णन करना मुश्किल है।
सूरदास की भक्ति: नंद बाबा और माता यशोदा को कृष्ण की इन लीलाओं को देखकर जो सुख मिल रहा है, वह तीनों लोकों में किसी को नहीं मिल सकता। भोजन करने के बाद जब कृष्ण कुल्ला (आचमन) करते हैं, तो कवि सूरदास उनसे प्रार्थना करते हैं कि मुझे आपकी जूठन मिल जाए, क्योंकि उस जूठन को पाना ही मैं अपना सबसे बड़ा सौभाग्य समझता हूँ।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)
प्रश्न 3. सूरदास रचित पठित पाठ के आधार पर सूर के वात्सल्य वर्णन की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
माता-पिता और संतान के बीच के सच्चे प्रेम, स्नेह और ममता को दिखाने वाले रस को वात्सल्य रस कहते हैं। महाकवि सूरदास को वात्सल्य रस का सबसे महान और बेजोड़ कवि माना जाता है। उनके वात्सल्य वर्णन की प्रमुख विशेषताएँ नीचे दी गई हैं:
ममता और स्नेह का सुंदर रूप: सूरदास की कविताओं को पढ़कर पाठक का मन भी खुशी और आनंद से भर जाता है। वे बच्चों की छोटी-मोटी हरकतों का बहुत प्यारा वर्णन करते हैं।
प्रथम पद में माँ का प्यार: पहले पद में माता यशोदा अपने प्यारे पुत्र कृष्ण को सुबह होने पर बड़े ही मीठे और कोमल स्वर में जगाती हैं। इसमें एक माँ की ममता साफ दिखाई देती है।
द्वितीय पद में पिता का स्नेह: दूसरे पद में बालक कृष्ण अपने पिता नंद बाबा की गोद में बैठकर भोजन कर रहे हैं। वे कुछ खाना खुद खाते हैं और कुछ जमीन पर गिराते हैं। इसमें एक पिता का अपने बच्चे के प्रति गहरा प्रेम दिखाई देता है।
निष्कर्ष: सूरदास ने इन दोनों पदों में माता-पिता और बच्चे के बीच के प्रेम का इतना सजीव चित्र खींचा है कि इसकी तुलना किसी और कवि से नहीं की जा सकती।
सप्रसंग व्याख्यात्मक प्रश्न (4 अंक)
प्रश्न 1. "आपुन खात, नंद मुख नावत, जो रस नंद-जसोदा बिलसत, सो नहिं तिहूँ भुवनियाँ।"
उत्तर:
प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक 'दिगंत भाग-2' के सूरदास द्वारा रचित 'पद' कविता से ली गई हैं।
सरल व्याख्या: इन पंक्तियों में कवि कहते हैं कि बालक कृष्ण भोजन करते समय कुछ खाना खुद खा रहे हैं और कुछ प्यार से अपने पिता नंद बाबा के मुँह में भी डाल रहे हैं। इस सुंदर दृश्य को देखकर माता यशोदा और नंद बाबा को जो सुख और आनंद मिल रहा है, वह सुख इस संसार के तीनों लोकों में किसी को भी मिलना असंभव है।
प्रश्न 2. "कछुक खात, कुछ धरनि गिरावत, छवि निरखति नंद-रानियाँ"
उत्तर:
प्रसंग: प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्यपुस्तक 'दिगंत भाग-2' के सूरदास द्वारा रचित 'पद' कविता से ली गई है।
सरल व्याख्या: इस पंक्ति में कवि कहते हैं कि छोटे से बालक कृष्ण राजा नंद की गोद में बैठकर खाना खा रहे हैं। वे छोटे-छोटे हाथों से कुछ भोजन अपने मुँह में डालते हैं और कुछ जमीन पर गिरा देते हैं। बाल कृष्ण के इस प्यारे और भोले-भाले रूप को नंद बाबा की रानी (माता यशोदा) बहुत खुश और हैरान होकर देख रही हैं।
प्रश्न 3. "जो रस नंद-जसोदा बिलसत सो नहीं तिहूँ भुवनियाँ। भोजन करि नंद आचमन लीन्हों, माँगत सूर जूठनियाँ।"
उत्तर:
प्रसंग: प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्यपुस्तक 'दिगंत भाग-2' के सूरदास द्वारा रचित 'पद' कविता से ली गई है।
सरल व्याख्या: कवि कहते हैं कि बालक कृष्ण की इस प्यारी लीला को देखकर माता यशोदा और नंद बाबा जिस सुख का आनंद ले रहे हैं, वह तीनों लोकों में सबसे दुर्लभ है। जब कृष्ण और नंद बाबा भोजन करने के बाद कुल्ला (आचमन) कर लेते हैं, तब भक्त कवि सूरदास जी नंद बाबा से कृष्ण की थोड़ी सी जूठन माँगते हैं। सूरदास जी उस जूठन को पाना ही अपने जीवन का सबसे बड़ा भाग्य मानते हैं।
लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)
प्रश्न 1. ब्रजभाषा के प्रारम्भिक कवि कौन हैं?
उत्तर: ब्रजभाषा के शुरुआती और सबसे प्रमुख कवि सूरदास जी हैं। इन्हें कृष्ण भक्ति धारा का सबसे श्रेष्ठ और महान कवि माना जाता है।
प्रश्न 2. कृष्ण खाते समय क्या-क्या करते हैं?
उत्तर: बालक कृष्ण अपने पिता नंद बाबा की गोद में बैठकर भोजन करते हैं। खाते समय वे कुछ खाना खुद खाते हैं और कुछ जमीन पर गिरा देते हैं। उन्हें मिट्टी के बर्तन में रखी दही खाना बहुत पसंद है। वे मिश्री, दही और माखन को मिलाकर खाते हैं और थोड़ा सा अपने पिता नंद बाबा के मुँह में भी लगा देते हैं।
प्रश्न 3. कवि भगवान कृष्ण को जगाने के लिए क्या-क्या उपमा देते हैं?
उत्तर: कवि सूरदास बालक कृष्ण को जगाने के लिए उन्हें 'ब्रजराज कुँवर' (ब्रज के राजकुमार) और 'अंबुजकर धारी' (हाथ में कमल का फूल धारण करने वाले भगवान) कहकर पुकारते हैं।
प्रश्न 4. गायें किस ओर दौड़ पड़ीं?
उत्तर: सुबह होते ही गाएँ अपने छोटे-छोटे बछड़ों को दूध पिलाने के लिए व्याकुल हो जाती हैं। इसलिए वे गौशाला में जोर-जोर से रंभाने (आवाज करने) लगती हैं और अपने बछड़ों की तरफ तेजी से दौड़ पड़ती हैं।
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