12th Geography Book 2 chapter 2 प्रवास subjective
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type Questions & Answers)
प्रश्नोत्तर 1. प्रवास (Migration) क्या है?
उत्तर:- जब कोई व्यक्ति या समुदाय किसी विशेष कारण (जैसे- रोजगार, शिक्षा, सुरक्षा या प्राकृतिक आपदा) से अपने मूल स्थान को छोड़कर किसी अन्य स्थान पर स्थायी या अस्थायी रूप से जाकर बस जाते हैं, तो इसे प्रवास (Migration) कहा जाता है।
प्रश्नोत्तर 2. आप्रवास एवं उत्प्रवास में अंतर स्पष्ट करें। [2021]
उत्तर:- आप्रवास और उत्प्रवास में मुख्य अंतर निम्नलिखित है:
आप्रवास (Immigration): जब लोग किसी बाहरी या अन्य स्थान से आकर किसी नए स्थान पर बस जाते हैं, तो उस स्थान के संदर्भ में इस प्रक्रिया को आप्रवास कहते हैं। (आने वाले व्यक्ति को आप्रवासी कहा जाता है)।
उत्प्रवास (Emigration): जब लोग अपने मूल स्थान या किसी स्थान को छोड़कर अन्य जगहों पर चले जाते हैं, तो उस स्थान के संदर्भ में इस प्रक्रिया को उत्प्रवास कहते हैं। (जाने वाले व्यक्ति को उत्प्रवासी कहा जाता है)।
प्रश्नोत्तर 3. राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रवास के बीच अंतर स्पष्ट करें। [2022A]
उत्तर:- राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रवास के बीच मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:
राष्ट्रीय प्रवास (National Migration): एक ही देश की भौगोलिक सीमा के भीतर एक जगह से दूसरी जगह होने वाले प्रवास को राष्ट्रीय प्रवास कहते हैं। जैसे - बिहार के लोगों का दिल्ली या मुंबई जाकर बसना।
अंतर्राष्ट्रीय प्रवास (International Migration): जब लोग अपने देश को छोड़कर किसी दूसरे देश में (अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं को पार करके) जाकर बसते हैं, तो उसे अंतर्राष्ट्रीय प्रवास कहते हैं। जैसे - भारत से किसी का नेपाल, अमेरिका या सऊदी अरब जाना।
प्रश्नोत्तर 4. अपकर्ष कारक (Pull Factor) क्या है? [2022A]
उत्तर:- अपकर्ष कारक (Pull Factor): वे अनुकूल कारक होते हैं जो लोगों को विभिन्न स्थानों से अपनी ओर आने के लिए आकर्षित (Attract) करते हैं। ये कारक गंतव्य स्थान (Destination) को अधिक बेहतर और आकर्षक बनाते हैं।
जैसे - रोजगार के बेहतर अवसर, उच्च शिक्षा की सुविधाएं, अच्छी स्वास्थ्य-चिकित्सा सेवाएं, सुखद जलवायु, शांतिपूर्ण माहौल और जीवन स्तर में सुधार।
प्रश्नोत्तर 5. प्रवास के दो प्रतिकर्ष कारकों का उल्लेख करें। [2023A]
उत्तर:- प्रतिकर्ष कारक (Push Factors) वे प्रतिकूल कारक होते हैं जो लोगों को उनका मूल निवास स्थान छोड़ने के लिए मजबूर या विवश करते हैं। प्रवास के दो प्रमुख प्रतिकर्ष कारक निम्नलिखित हैं:
आर्थिक कारक: स्थानीय स्तर पर काम या रोजगार के अवसरों की कमी, अत्यधिक गरीबी और कम मजदूरी के कारण लोग आजीविका की तलाश में अपने मूल स्थान को छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं।
भौतिक या प्राकृतिक कारक: प्राकृतिक आपदाएं (जैसे- बाढ़, सूखा, भूकंप, चक्रवात), प्रतिकूल जलवायु, बंजर भूमि और जल संसाधनों की कमी के कारण भी लोग सुरक्षित स्थानों पर प्रवास करने के लिए विवश होते हैं।
प्रश्नोत्तर 6. प्रवास के जनसांख्यिकीय परिणाम क्या होते हैं?
उत्तर:- प्रवास के मुख्य जनसांख्यिकीय (Demographic) परिणाम निम्नलिखित हैं:
ग्रामीण क्षेत्रों से बड़े पैमाने पर युवाओं और कुशल (Skilled) जनसंख्या के बाहर चले जाने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों की कार्यशील जनसंख्या में भारी कमी आ जाती है।
महानगरों या शहरों (गंतव्य स्थानों) पर जनसंख्या का दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है और वहाँ कार्यशील (Working-age) आयु वर्ग की संख्या अधिक हो जाती है।
प्रवास के कारण उद्गम (जहां से लोग जाते हैं) और गंतव्य (जहां लोग पहुंचते हैं) दोनों ही क्षेत्रों की जनसंख्या के लिंग अनुपात (Sex Ratio) में असंतुलन पैदा हो जाता है, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों से अक्सर पुरुष वर्ग रोजगार के लिए अधिक प्रवास करता है।
प्रश्नोत्तर 7. स्त्रियों के प्रवास का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर:- भारत में स्त्रियों (महिलाओं) के प्रवास का सबसे मुख्य और सबसे बड़ा कारण विवाह (Marriage) है। वर्ष 2001 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, भारत में लगभग 65% महिला प्रवास केवल विवाह के कारण हुआ है, क्योंकि शादी के बाद महिलाओं को अपना पैतृक घर छोड़कर अपने पति के घर जाना पड़ता है।
प्रश्नोत्तर 8. 2011 की जनगणना में कितने प्रतिशत लोग प्रवासी थे?
उत्तर:- भारत की जनगणना 2011 के अनुसार, देश की कुल जनसंख्या में प्रवासियों (Migrants) का प्रतिशत लगभग 37% था। अगर संख्या के दृष्टिकोण से देखा जाए, तो देश में लगभग 45.6 करोड़ लोग आंतरिक प्रवासी (Internal Migrants) के रूप में दर्ज किए गए थे।
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)
प्रश्नोत्तर 9. भारत में प्रवास के दो मुख्य कारण क्या हैं?
उत्तर:- भारत में प्रवास के दो मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
प्रतिकर्ष कारक (Push Factors): इसके अंतर्गत वे कारण आते हैं जो लोगों को अपना मूल स्थान छोड़ने पर मजबूर करते हैं; जैसे- अत्यधिक गरीबी, प्राकृतिक आपदाएं, कृषि पर जनसंख्या का बढ़ता दबाव और बुनियादी सुविधाओं (बिजली, पानी, सड़क) की कमी आदि।
अपकर्ष कारक (Pull Factor): इसके अंतर्गत वे अनुकूल कारण आते हैं जो लोगों को किसी नए स्थान की ओर आकर्षित करते हैं; जैसे- शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाएं, रोजगार के अच्छे अवसर, उच्च वेतन (ज्यादा आमदनी) और मनोरंजन के साधन आदि।
प्रश्नोत्तर 10. आंतरिक प्रवास के कितने प्रकार होते हैं?
उत्तर:- देश की सीमा के भीतर होने वाले आंतरिक प्रवास की मुख्य रूप से चार धाराएं (प्रकार) होती हैं:
(i) ग्रामीण से ग्रामीण (Rural to Rural)
(ii) ग्रामीण से नगरीय (Rural to Urban)
(iii) नगरीय से नगरीय (Urban to Urban)
(iv) नगरीय से ग्रामीण (Urban to Rural)
प्रश्नोत्तर 11. गिरमिट एक्ट के तहत प्रवास क्या था?
उत्तर:- गिरमिट एक्ट (Indentured Labour Act) एक समयबद्ध अनुबंध (Time-bound Contract) था। इसके तहत औपनिवेशिक काल (अंग्रेजों के शासनकाल) में भारतीय मजदूरों को कृषि कार्य (गन्ने की खेती आदि) के लिए मॉरीशस, कैरेबियन द्वीप, फिजी और दक्षिण अफ्रीका जैसे सुदूर देशों में भेजा गया था। इसी अनुबंधित प्रवास को गिरमिटिया प्रवास कहा जाता है।
प्रश्नोत्तर 12. गिरमिट एक्ट के तहत भारतीयों को किन-किन देशों में काम के लिए भेजा गया था?
उत्तर:- गिरमिट एक्ट के तहत अलग-अलग यूरोपीय शक्तियों द्वारा भारतीयों को निम्नलिखित देशों में भेजा गया था:
अंग्रेजों द्वारा: मॉरीशस, कैरेबियन द्वीप (त्रिनिदाद, टोबैगो और गुयाना), फिजी और दक्षिण अफ्रीका।
फ्रांसीसी और जर्मनों द्वारा: रियूनियन द्वीप, गुआडेलॉप, मार्टीनिक और सूरीनाम।
फ्रांसीसी, डच और पुर्तगालियों द्वारा: गोवा, दमन और दीव से भारतीयों को अंगोला और मोजाम्बिक भेजा गया।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)
प्रश्नोत्तर 1. आंतरिक प्रवास से आप क्या समझते हैं? [2017A]
उत्तर:- आंतरिक प्रवास का अर्थ: जब लोग अपने ही देश की भौगोलिक सीमा के अंदर एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रवास करते हैं, तो इसे आंतरिक प्रवास कहा जाता है। इसमें लोग गांव से शहर, शहर से गांव, या एक राज्य से दूसरे राज्य (जैसे बिहार से पंजाब या महाराष्ट्र) में जाते हैं।
यह प्रवास अक्सर बेहतर नौकरी, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं या बेहतर जीवन स्तर की तलाश में होता है। जैसे- ग्रामीण इलाकों में काम के अवसर कम होने के कारण लोग आजीविका के लिए शहरों की ओर रुख करते हैं।
आंतरिक प्रवास के मुख्य कारण:
आर्थिक कारण: रोजगार (काम) की तलाश या बेहतर आय की चाहत।
सामाजिक कारण: विवाह (शादी), शिक्षा, या पूरे परिवार के साथ कहीं जाकर रहना।
प्राकृतिक कारण: बाढ़, सूखा, भूकंप या अन्य प्राकृतिक आपदाओं से खुद को बचाना।
प्रभाव: आंतरिक प्रवास का सीधा असर समाज और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इससे जहां शहरी क्षेत्रों में भीड़ और जनसंख्या का दबाव बढ़ता है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में कुशल श्रमिकों की कमी हो सकती है।
प्रश्नोत्तर 2. प्रवास के सामाजिक एवं जनसांख्यिकीय परिणाम का वर्णन कीजिए। [2022A]
उत्तर:- जब कोई व्यक्ति या समुदाय किसी विशेष कारण से अपने मूल स्थान को छोड़कर किसी अन्य स्थान पर स्थायी या अस्थायी रूप से जाकर बसता है, तो उसे प्रवास कहते हैं। भारत में लोग गरीबी, कृषि पर निर्भरता, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा की कमी के कारण अक्सर गांवों से शहरों की ओर जाते हैं। प्रवास के मुख्य सामाजिक और जनसांख्यिकीय परिणाम निम्नलिखित हैं:
(1) सामाजिक परिणाम (Social Consequences):
प्रवास से ग्रामीण क्षेत्रों में नई तकनीकों, परिवार नियोजन और शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ती है क्योंकि शहर गए लोग नए विचार वापस लाते हैं।
अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों के आपस में मिलने से एक मिश्रित (कंपोजिट) संस्कृति का निर्माण होता है जो संकीर्ण विचारों को दूर करती है।
नकारात्मक पक्ष: लेकिन कभी-कभी आर्थिक असमानता और शहरों के अकेलेपन के कारण कुछ प्रवासी अवसाद (Depression), अपराध या नशामे भी संलिप्त हो जाते हैं।
(2) जनसांख्यिकीय परिणाम (Demographic Consequences):
गांवों से ज्यादातर युवा और कुशल (Skilled) लोग ही रोजगार के लिए बाहर जाते हैं, जिससे गांवों में केवल वृद्ध, महिलाएं और बच्चे रह जाते हैं। परिणामतः गांवों का लिंगानुपात (Sex Ratio) बढ़ जाता है।
इसके विपरीत, शहरों में पुरुषों और युवाओं की संख्या अचानक बढ़ जाती है, जिससे वहां का लिंगानुपात घट जाता है और जनसंख्या का असंतुलन पैदा होता है।
इसके अलावा, महानगरों में अत्यधिक भीड़ के कारण गंदी बस्तियों (Slums) का निर्माण होता है, तथा ट्रैफिक, प्रदूषण और आवास जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती हैं। हालांकि, सकारात्मक रूप से इससे लोगों की आर्थिक स्थिति और कार्य संस्कृति में बड़ा सुधार होता है।
प्रश्न 3: भारतीय प्रवास के सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों का वर्णन करें।
उत्तर:- भारतीय प्रवास के सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव निम्नलिखित हैं -
1. सामाजिक प्रभाव:
प्रवासी लोग शहरों से नई तकनीक, शिक्षा और आधुनिक विचार ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचाते हैं, जिससे ग्रामीण समाज में जागरूकता आती है।
विभिन्न संस्कृतियों के अंतर्मिश्रण (आपसी मेलजोल) से सामाजिक सौहार्द और भाईचारा बढ़ता है, जिससे एक मिश्रित संस्कृति का विकास होता है।
नकारात्मक पक्ष: शहरों में जाकर अपरिचित माहौल के कारण उत्पन्न हुई गुमनामी और खिन्नता (अकेलेपन) से मानसिक तनाव बढ़ता है, जो कभी-कभी प्रवासियों को अपराध और नशा जैसी बुराइयों की ओर धकेल देता है।
2. पर्यावरणीय प्रभाव:
ग्रामीण-नगरीय प्रवास (गांवों से शहरों की ओर होने वाले पलायन) के कारण महानगरों की जनसंख्या और संसाधनों पर अत्यधिक दबाव बढ़ता है।
शहरों में अनियंत्रित रूप से गंदी बस्तियों (Slums) और अव्यवस्थित कॉलोनियों का निर्माण होता है, जिससे आवास की गंभीर समस्या पैदा होती है।
प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन और उपयोग से भूमिगत जलस्तर तेजी से घटता है, और वायु, जल तथा ध्वनि प्रदूषण में भारी वृद्धि होती है।
प्रश्न 4: भारत में प्रवास के प्रमुख कारणों का उल्लेख करें।
उत्तर:- भारत में प्रवास के मुख्य कारण प्रतिकर्ष कारक (Push Factors) और अपकर्ष कारक (Pull Factors) हैं:
1. प्रतिकर्ष कारक (Push Factors): ये वे प्रतिकूल कारक होते हैं जो लोगों को अपना मूल निवास स्थान छोड़ने के लिए मजबूर करते हैं।
जैसे - अत्यधिक गरीबी और बेरोजगारी, प्राकृतिक आपदाएँ (जैसे- बाढ़, सूखा, भूकंप), स्वास्थ्य और उच्च शिक्षा सेवाओं की भारी कमी, तथा कृषि भूमि पर जनसंख्या का बढ़ता दबाव जिसके कारण आजीविका चलाना कठिन हो जाता है।
2. अपकर्ष कारक (Pull Factors): ये वे अनुकूल कारक होते हैं जो लोगों को बेहतर सुविधाओं के कारण अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
जैसे - नगरीय या शहरी क्षेत्रों में बेहतर रोजगार के अवसर और उच्च वेतन (अधिक आमदनी), गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य और उच्च शिक्षा सुविधाएँ, मनोरंजन के आधुनिक साधन तथा बेहतर और आरामदायक जीवन स्तर में सुधार की संभावना।

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