12th Geography Book 2 chapter 1 जनसंख्या वितरण घनत्व वृद्धि और संघटन Subjective
लघु उत्तरीय प्रश्न:-
प्रश्न 1. भारत में जनसंख्या के असमान वितरण के लिए जिम्मेदार दो कारकों को लिखें। (2013A)
उत्तर: भारत में हर जगह आबादी एक जैसी नहीं है। इसके मुख्य रूप से दो बड़े कारण हैं:
जमीन की बनावट (प्राकृतिक परिस्थितियाँ): उपजाऊ मैदानी और तटीय (समुद्र के किनारे वाले) इलाकों में खेती और रहने की अच्छी सुविधा होने के कारण ज्यादा लोग रहते हैं। इसके विपरीत, पहाड़ी, पठारी और रेगिस्तानी इलाकों में जीवन कठिन होने के कारण कम लोग रहते हैं।
पानी और वर्षा की उपलब्धता: जिन क्षेत्रों में अच्छी बारिश होती है और पानी आसानी से मिलता है, वहाँ जनसंख्या अधिक होती है।
प्रश्न 2. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में दो सघनतम जनसंख्या घनत्व वाले राज्य कौन से हैं? [2018A]
उत्तर: सन 2011 की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में सबसे ज्यादा जनसंख्या घनत्व (यानी कम जगह में सबसे ज्यादा लोग रहने वाले) वाले दो राज्य बिहार और पश्चिम बंगाल हैं।
बिहार का जनघनत्व 1102 व्यक्ति प्रति वर्ग Km और पश्चिम बंगाल का जनघनत्व 1029 व्यक्ति प्रति वर्ग km है।
प्रश्न 3. जनसंख्या परिवर्तन के कम-से-कम दो घटकों की व्याख्या कीजिए। [2018A, 2020A]
उत्तर: किसी जगह की आबादी के बदलने (घटने या बढ़ने) के मुख्य रूप से दो कारण (घटक) नीचे दिए गए हैं:
जन्मदर: हर एक हजार लोगों पर एक साल में जितने बच्चों का जन्म होता है, उसे जन्मदर कहते हैं। जन्मदर बढ़ने से जनसंख्या बढ़ती है।
मृत्युदर: हर एक हजार लोगों पर एक साल में जितने लोगों की मौत होती है, उसे मृत्युदर कहते हैं। मृत्युदर घटने या बढ़ने से जनसंख्या पर सीधा असर पड़ता है।
प्रश्न 4. जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले चार भौगोलिक कारकों के नाम लिखें। [2020A]
उत्तर: लोग किस जगह पर ज्यादा रहेंगे और कहाँ कम, इसे तय करने वाले चार मुख्य प्राकृतिक (भौगोलिक) कारण ये हैं:
जमीन का उपजाऊपन: जहाँ की मिट्टी उपजाऊ होती है, वहाँ खेती अच्छी होने के कारण ज्यादा लोग रहते हैं।
जलवायु: जहाँ का मौसम न ज्यादा गर्म हो और न ज्यादा ठंडा (जैसे मैदानी इलाके), वहाँ लोग ज्यादा बसते हैं।
पानी की सुविधा: पीने और खेती के लिए जहाँ पानी आसानी से मिलता है, वहाँ आबादी घनी होती है।
जमीन की बनावट: पहाड़ों और रेगिस्तानों की तुलना में समतल मैदानों में रहना और काम करना आसान होता है, इसलिए वहाँ आबादी ज्यादा होती है।
प्रश्न 5. जन्म दर एवं मृत्यु दर के बीच अंतर करें। [2015A, 2021A]
उत्तर: जन्मदर और मृत्युदर में मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:
परिभाषा: प्रति हजार लोगों पर एक साल में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या को 'जन्मदर' कहते हैं, जबकि प्रति हजार लोगों पर एक साल में मरने वाले लोगों की संख्या को 'मृत्युदर' कहते हैं।
जनसंख्या पर असर: जन्मदर अधिक होने से आबादी बढ़ती है, जबकि मृत्युदर अधिक होने से आबादी घटती है।
उम्र: जन्मदर में केवल नए जन्मे बच्चों की गिनती होती है, जबकि मृत्युदर में हर उम्र के मरने वाले लोगों को गिना जाता है।
प्रश्न 6. जन्म दर क्या है? [2022A]
उत्तर: किसी खास क्षेत्र में हर एक हजार (1,000) लोगों पर एक साल के अंदर जन्म लेने वाले जीवित बच्चों की कुल संख्या को जन्मदर कहा जाता है।
प्रश्न 7. स्थिर जनसंख्या से आप क्या समझते हैं? [2022A]
उत्तर: स्थिर जनसंख्या का मतलब ऐसी स्थिति से है जहाँ किसी जगह की आबादी न तो बढ़ती है और न ही घटती है (यानी आबादी एक जगह रुक जाती है)। ऐसा तब होता है जब बच्चों के जन्म लेने की रफ़्तार (जन्मदर) और लोगों के मरने की रफ़्तार (मृत्युदर) आपस में बराबर हो जाए और बाहर से कोई आकर वहाँ न बसे।
प्रश्न 8. भारत में जनसंख्या वृद्धि की प्रमुख अवधियों का उल्लेख कीजिए। [2022A]
उत्तर: भारत में जनसंख्या बढ़ने के इतिहास को 4 अलग-अलग समय (अवधियों) में बाँटा गया है:
(i) स्थिर जनसंख्या (1901-1921): इस समय आबादी बहुत धीरे-धीरे बढ़ी और स्थिर रही। साल 1911 से 1921 के बीच तो महामारी और अकाल के कारण जनसंख्या बढ़ने के बजाय 0.31% घट गई थी।
(ii) सामान्य वृद्धि (1921-1951): इस समय देश में स्वास्थ्य और साफ-सफाई में थोड़ा सुधार हुआ, जिससे मरने वालों की संख्या कम हुई और आबादी सामान्य रूप से बढ़ी।
(iii) तेज वृद्धि या जनसंख्या विस्फोट (1951-1981): इस दौर में देश का विकास हुआ और मृत्युदर में भारी कमी आई, जिससे आबादी बहुत तेजी से (लगभग 2.2% सालाना) बढ़ी। इसे 'जनसंख्या विस्फोट' का समय भी कहते हैं।
(iv) वृद्धि दर में कमी (1981-2011): इस समय देश की आबादी तो बढ़ी, लेकिन लोगों में जागरूकता आने के कारण आबादी बढ़ने की रफ़्तार (गति) धीरे-धीरे कम होने लगी।
प्रश्न 9. अशोधित मृत्यु दर की गणना कैसे की जाती है? [2023A]
उत्तर: किसी क्षेत्र में एक साल के दौरान प्रति हजार लोगों पर मरने वाले लोगों की संख्या को अशोधित मृत्युदर कहते हैं। इसे निकालने का आसान सूत्र (Formula) यह है:
प्रश्न 10. भारत के व्यवसायिक संवर्गों/संगठन का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: कामकाज के आधार पर भारत की आबादी को मुख्य रूप से 3 भागों (क्षेत्रों) में बाँटा गया है:
प्राथमिक क्षेत्र (कृषि और पशुपालन): भारत की सबसे ज्यादा आबादी यानी 54.6% लोग खेती-बारी और इससे जुड़े कामों में लगे हैं।
द्वितीयक क्षेत्र (उद्योग और कारखाने): केवल 3.8% लोग फैक्ट्रियों और निर्माण के कामों में लगे हैं।
तृतीयक क्षेत्र (सेवा, व्यापार और नौकरी): लगभग 41.6% लोग व्यापार, दुकानदारी, ट्रांसपोर्ट, सरकारी या प्राइवेट नौकरी जैसी सेवाओं में काम करते हैं।
प्रश्न 11. भारत में जनसंख्या घनत्व के वितरण/स्थानिक वितरण का विवेचना कीजिए।
उत्तर: भारत में हर जगह जनसंख्या का घनत्व (एक वर्ग किलोमीटर में रहने वाले लोगों की संख्या) एक समान नहीं है। पूरे भारत का औसत जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।
घनी आबादी वाला राज्य: बिहार है, जहाँ सबसे ज्यादा यानी 1102 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी में रहते हैं।
सबसे कम आबादी वाला राज्य: अरुणाचल प्रदेश है, जहाँ सबसे कम यानी केवल 17 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी में रहते हैं।
प्रश्न 12. कृषि घनत्व क्या है?
उत्तर: कृषि घनत्व का मतलब है कि खेती करने वाली जमीन पर किसानों का कितना बोझ है। इसे निकालने के लिए देश की कुल खेती करने वाली आबादी (किसान और मजदूर) को कुल खेती योग्य जमीन के हिस्से से भाग (Divide) दिया जाता है। इससे पता चलता है कि एक निश्चित खेती की जमीन पर कितने लोग निर्भर हैं।
प्रश्न 13. जनसंख्या संगठन से आप क्या समझते हैं? (2023A)
उत्तर: जनसंख्या संगठन का मतलब है किसी जगह की आबादी की विशेषताओं को समझना। इसके अंतर्गत हम समाज के लोगों की अलग-अलग चीजों का अध्ययन करते हैं, जैसे:
उनकी उम्र (आयु) और लिंग (महिला-पुरुष का अनुपात)।
वे कहाँ रहते हैं (गाँव या शहर)।
उनकी जाति, जनजाति, भाषा, धर्म और वे कितने पढ़े-लिखे (साक्षरता) हैं।
वे क्या काम-धंधा करते हैं और उनकी वैवाहिक स्थिति क्या है।
प्रश्न 14. मुख्य श्रमिक और सीमांत श्रमिक में अंतर कीजिए।
उत्तर: काम करने के दिनों के आधार पर श्रमिकों (मजदूरों/कामगारों) को दो भागों में बाँटा गया है:
मुख्य श्रमिक: वह व्यक्ति जो साल में कम से कम 183 दिन (यानी लगभग 6 महीने) या उससे ज्यादा दिनों तक कोई आर्थिक काम करता है, उसे मुख्य श्रमिक कहते हैं।
सीमांत श्रमिक: वह व्यक्ति जो साल में 183 दिनों से कम काम करता है, उसे सीमांत श्रमिक कहते हैं। इन्हें पूरे साल काम नहीं मिल पाता।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न:-
प्रश्न 1. भारत में जनसंख्या घनत्व की व्याख्या करें। [2013A]
उत्तर: प्रति वर्ग किलोमीटर (1 $Km^2$) जमीन के टुकड़े पर रहने वाले लोगों की कुल संख्या को जनसंख्या घनत्व कहते हैं। इसे निकालने का सबसे आसान तरीका कुल आबादी को कुल क्षेत्रफल (जमीन) से भाग देना है।
भारत में जनसंख्या घनत्व लगातार बढ़ रहा है। साल 1951 में यह सिर्फ 117 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था, जो 2011 में बढ़कर 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर हो गया।
जनसंख्या घनत्व के आधार पर भारत को 3 मुख्य भागों में बाँटा गया है:
अधिक घनत्व वाले क्षेत्र: जहाँ एक वर्ग किलोमीटर में 500 से ज्यादा लोग रहते हैं। जैसे- बिहार (1102), पश्चिम बंगाल (1029), दिल्ली (11,297) और चंडीगढ़।
सामान्य घनत्व वाले क्षेत्र: जहाँ जनसंख्या घनत्व 250 से 500 के बीच है। जैसे- झारखंड (414), असम (397), गोवा, कर्नाटक और ओडिशा।
बहुत कम घनत्व वाले क्षेत्र: जहाँ 250 से भी कम लोग प्रति वर्ग किलोमीटर में रहते हैं। ये ज्यादातर पहाड़ी, पठारी या जंगली इलाके होते हैं। जैसे- अरुणाचल प्रदेश, अंडमान निकोबार आदि।
प्रश्न 2. भारत की जनसंख्या के व्यावसायिक संगठन का विवरण दें। [2015A]
उत्तर: 'व्यवसाय' का मतलब उस काम से है जिससे लोग अपनी आजीविका (कमाई) चलाते हैं, जैसे- खेती, दुकानदारी, नौकरी या उद्योग। भारत की कामकाजी आबादी को मुख्य रूप से 3 बड़े हिस्सों (sectors) में बाँटा जाता है:
प्राथमिक व्यवसाय (Primary Sector): इसमें सीधे प्रकृति से जुड़े काम आते हैं, जैसे- खेती-बारी, पशुपालन, लकड़ी काटना, मछली पकड़ना और खदानों से खनिज निकालना। भारत के सबसे ज्यादा लोग यानी 54.6% इसी क्षेत्र में काम करते हैं।
द्वितीयक व्यवसाय (Secondary Sector): इसमें फैक्ट्रियों में सामान बनाना, छोटे-बड़े उद्योग (कुटीर उद्योग), बिजली बनाना और निर्माण कार्य शामिल हैं। भारत के केवल 3.8% लोग इस क्षेत्र से जुड़े हैं।
तृतीयक व्यवसाय (Tertiary Sector): इसे 'सेवा क्षेत्र' भी कहते हैं। इसमें कोई नया सामान नहीं बनता, बल्कि सेवाएँ दी जाती हैं; जैसे- गाड़ियाँ चलाना (परिवहन), बातचीत के साधन (संचार), बैंक, दुकानें (व्यापार) और नौकरियां। भारत के 41.6% लोग इस क्षेत्र में काम करते हैं।
प्रश्न 3. भारत में जनसंख्या के असमान वितरण को प्रभावित करने वाले कारक का वर्णन करें। [2018A] अथवा भारत के असमान जनसंख्या वितरण के लिए जिम्मेदार कारकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: भारत में हर जगह लोग एक बराबर संख्या में नहीं रहते; कहीं बहुत ज्यादा भीड़ है तो कहीं बहुत कम लोग हैं। इस असमानता के मुख्य प्राकृतिक (भौगोलिक) कारण नीचे दिए गए हैं:
i. भू-आकृति (जमीन की बनावट): लोग समतल मैदानों में रहना सबसे ज्यादा पसंद करते हैं क्योंकि वहाँ घर बनाना, खेती करना और सड़कें बनाना आसान होता है। इसीलिए उत्तर भारत के मैदानों (जैसे- उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल) में बहुत ज्यादा आबादी है। इसके विपरीत, पहाड़ी और पठारी इलाकों (जैसे- जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड) में जीवन कठिन होने के कारण आबादी कम है।
ii. जल की उपलब्धता: पानी जीवन के लिए सबसे जरूरी है। जिन क्षेत्रों में नदियाँ हैं या पीने और सिंचाई के लिए साफ पानी आसानी से मिल जाता है, वहाँ लोग ज्यादा बसते हैं।
iii. जलवायु (मौसम): बहुत ज्यादा गर्मी (जैसे थार का मरुस्थल) या बहुत ज्यादा ठंड (जैसे लद्दाख) वाले इलाकों में लोग कम रहते हैं। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों का मौसम खेती और रहने के अनुकूल है, इसलिए वहाँ सबसे अधिक जनसंख्या पाई जाती है।
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