12th Geography Book 2 chapter 10 परिवहन तथा संचार Subjective
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. परिवहन क्या है और इसके मुख्य साधन कौन-कौन से हैं?
उत्तर: परिवहन (Transport) वह प्रक्रिया या माध्यम है जिसके द्वारा चीज़ों (सामानों) और लोगों को एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाया जाता है। इसके मुख्य साधन निम्नलिखित हैं:
स्थल परिवहन: सड़क, रेलवे और पाइपलाइन।
जल परिवहन: समुद्री मार्ग और अंतःस्थलीय मार्ग (नदियाँ, झीलें)।
वायु परिवहन: राष्ट्रीय (देश के अंदर) और अंतर्राष्ट्रीय (विदेशों के लिए) हवाई सेवाएँ।
प्रश्न 2. पाइपलाइन परिवहन के लाभ और हानि पर चर्चा करें।
उत्तर:
लाभ: पाइपलाइन से पेट्रोलियम (तेल) और गैस जैसी तरल चीज़ों को बहुत सस्ते और आसान तरीके से एक जगह से दूसरी जगह भेजा जा सकता है। इसे पहाड़, घने जंगल और रेगिस्तान जैसे कठिन रास्तों में भी बिछाया जा सकता है और इसमें ऊर्जा की खपत बहुत कम होती है।
हानि: इसे एक बार बिछाने के बाद इसकी क्षमता को बढ़ाना बहुत मुश्किल होता है। साथ ही, इसकी मरम्मत करना, सुरक्षा बनाए रखना और अगर कहीं पाइप लीक (रिसाव) हो जाए, तो उस जगह का पता लगाना काफी कठिन होता है।
प्रश्न 3. संचार से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर: संचार (Communication) वह माध्यम या प्रक्रिया है जिसके द्वारा इंसान अपने विचारों, भावनाओं, संदेशों और जानकारियों को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक या एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाता है।
प्रश्न 4. भारत के हवाई परिवहन में एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस के योगदान पर चर्चा करें।
उत्तर: भारत में हवाई सेवा दो मुख्य हिस्सों में बंटी है:
एयर इंडिया: यह संस्था मुख्य रूप से विदेशी (अंतर्राष्ट्रीय) उड़ानों का काम संभालती है। मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई इसके सबसे बड़े और मुख्य केंद्र बिंदु हैं।
इंडियन एयरलाइंस: यह संस्था देश के अंदरूनी हिस्सों (घरेलू उड़ानों) और भारत के पड़ोसी देशों के साथ हवाई संपर्क और उड़ानों का प्रबंधन करती है।
प्रश्न 5. भारतीय रेलों के तीन प्रकार के गेज़ों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: भारतीय रेल की पटरियों के बीच की दूरी (चौड़ाई) के आधार पर इन्हें तीन भागों में बांटा गया है:
बड़ी लाइन (Broad Gauge): इसमें पटरियों के बीच की दूरी 1.616 मीटर होती है। देश में ये पटरियाँ सबसे ज़्यादा लंबी दूरी तक फैली हैं।
मीटर लाइन (Meter Gauge): इसमें दोनों पटरियों के बीच की दूरी ठीक 1 मीटर होती है।
छोटी लाइन (Narrow Gauge): इसमें पटरियों के बीच की दूरी सबसे कम (0.762 मीटर या 0.610 मीटर) होती है। ये पटरियाँ ज़्यादातर पहाड़ी इलाकों में इस्तेमाल होती हैं।
प्रश्न 6. उत्तर दक्षिण एंव पूर्व पश्चिम गलियारे के बारे में लिखिए।
उत्तर: ये दोनों भारत सरकार की दो बहुत बड़ी और मुख्य सड़क योजनाएँ हैं:
उत्तर-दक्षिण गलियारा: यह लगभग 4,016 किलोमीटर लंबा है, जो उत्तर में श्रीनगर (जम्मू और कश्मीर) को दक्षिण में कन्याकुमारी (तमिलनाडु) से जोड़ता है।
पूर्व-पश्चिम गलियारा: यह लगभग 3,640 किलोमीटर लंबा है, जो पूर्व में सिलचर (असम) को पश्चिम में पोरबंदर (गुजरात) से जोड़ता है।
प्रश्न 7. भारत में सड़कों के असमान वितरण के लिए उत्तरदायी किन्हीं तीन कारणों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: भारत में हर जगह सड़कें एक जैसी (बराबर) नहीं हैं। कहीं बहुत अच्छी और ज़्यादा सड़कें हैं, तो कहीं बहुत कम। इसके तीन मुख्य कारण ये हैं:
धरातल का स्वरूप (ज़मीन की बनावट): समतल और मैदानी इलाकों में सड़कें बनाना बहुत आसान होता है, इसलिए वहाँ सड़कों का जाल ज़्यादा है। इसके विपरीत, पहाड़ी और ऊंचे-नीचे इलाकों में सड़कें बनाना बहुत कठिन होता है, इसलिए वहाँ सड़कें कम हैं।
जनसंख्या (आबादी का होना): जहाँ ज़्यादा लोग रहते हैं (अधिक जनसंख्या घनत्व), वहाँ ज़रूरत के हिसाब से सड़कें ज़्यादा बनाई जाती हैं। कम आबादी वाले इलाकों में सड़कें भी कम होती हैं।
आर्थिक विकास का स्तर: सड़क बनाने में काफी पैसा खर्च होता है। जो राज्य या क्षेत्र आर्थिक रूप से मजबूत और अमीर हैं, वहाँ सड़कों का विकास बहुत अच्छा और ज़्यादा हुआ है।
प्रश्न 8. स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना का संक्षेप में विवरण दीजिए।
उत्तर: स्वर्णिम चतुर्भुज (Golden Quadrilateral) भारत की सबसे बड़ी सड़क परियोजना है। यह देश के चार सबसे बड़े महानगरों—दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को आपस में तेज़ रफ्तार एक्सप्रेसवे से जोड़ती है। इस पूरे मार्ग की लंबाई लगभग 5,846 किलोमीटर है। यह शानदार सड़क 4 या 6 लेन की बनी है, जिससे शहरों के बीच का सफर बहुत तेज़, आसान और सुरक्षित हो गया है।
प्रश्न 9. कोंकण रेलवे का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर: कोंकण रेलवे भारत के पश्चिमी तट पर बनी एक बेहद महत्वपूर्ण रेल परियोजना है।
कहाँ से कहाँ तक: यह रेल मार्ग महाराष्ट्र के रोहा स्टेशन को कर्नाटक के मंगलौर स्टेशन से जोड़ता है। इसकी कुल लंबाई 760 किलोमीटर है।
विशेषता: इसका निर्माण साल 1998 में पूरा हुआ था। यह इंजीनियरिंग का एक बेजोड़ नमूना है क्योंकि यह अपने रास्ते में 146 बड़ी-छोटी नदियों, कई धाराओं, 2000 पुलों और 91 सुरंगों को पार करती है। इसमें कर्नाटक, गोवा और महाराष्ट्र राज्य शामिल हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. भारत में परिवहन के प्रमुख साधन कौन-कौन से हैं? इनके विकास को प्रभावित करने वाले कारकों की विवेचना करो।
उत्तर: भारत में परिवहन के मुख्य रूप से तीन साधन हैं: स्थल परिवहन (सड़क, रेल, पाइपलाइन), जल परिवहन (नदियाँ, झीलें और समुद्री मार्ग) और वायु परिवहन (देश और विदेश की हवाई उड़ानें)।
परिवहन साधनों के विकास को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक निम्नलिखित हैं:
भौतिक कारक (प्रकृति और ज़मीन): मैदानी और समतल इलाकों (जैसे उत्तर भारत के मैदान) में सड़कें और रेल की पटरियाँ आसानी से बिछाई जा सकती हैं, इसलिए यहाँ परिवहन का अच्छा विकास हुआ है। वहीं, असम और हिमालय जैसे पहाड़ी, घने जंगलों और कठिन रास्तों वाले क्षेत्रों में इनका विकास बहुत सीमित है।
आर्थिक कारक: जिन क्षेत्रों में उद्योग-धंधे ज़्यादा होते हैं, व्यापार बड़ा होता है और जो शहर अमीर होते हैं, वहाँ सामान और लोगों को लाने-ले जाने के लिए सरकार और कंपनियाँ परिवहन का तेज़ी से विकास करती हैं।
राजनीतिक कारक: भारत में ब्रिटिश शासन (अंग्रेजों के समय) के दौरान उनका मुख्य उद्देश्य यहाँ के संसाधनों का शोषण करना था। अपने इसी स्वार्थ के लिए उन्होंने देश के अंदरूनी इलाकों को रेलमार्गों द्वारा बंदरगाहों से जोड़ दिया, जिसके कारण कुछ खास क्षेत्रों में परिवहन का विकास बहुत तेज़ी से हुआ। इसके विपरीत, आर्थिक रूप से कम विकसित क्षेत्रों (जैसे राजस्थान के कुछ हिस्सों) में इसका विकास काफी कम रहा।
निष्कर्ष: इस प्रकार, भारत में सड़कें कृषि, उद्योग, पर्यटन और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को मजबूत बनाकर देश के आर्थिक विकास की रीढ़ की हड्डी (सबसे मुख्य आधार) का काम करती हैं।
नए दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 2. पाइपलाइन परिवहन से लाभ एवं हानि की विवेचना करें।
उत्तर: पाइपलाइन के द्वारा द्रव (लिक्विड) और गैस जैसी चीज़ों जैसे—खनिज तेल, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और पीने वाले साफ पानी (पेयजल) को एक जगह से दूसरी जगह भेजा जाता है।
इसके मुख्य लाभ और हानियाँ निम्नलिखित हैं:
लाभ (Advantages):
लगातार सप्लाई: एक बार ज़मीन या पानी के नीचे पाइपलाइन बिछा देने के बाद, इससे बिना किसी रुकावट या बाधा के चीज़ों की सप्लाई लगातार होती रहती है।
सस्ता और आसान: यह सामानों को लंबी दूरी तक भेजने का बहुत ही सस्ता, सुगम और सुरक्षित साधन है।
हर तरह के रास्तों में संभव: इसे जल, थल (ज़मीन), मरुस्थल (रेगिस्तान), ऊँचे पर्वतों और घने जंगलों में भी आसानी से बिछाया जा सकता है।
हानियाँ (Disadvantages):
सीमित क्षमता: इसे एक बार बिछाने के बाद इसकी क्षमता (कैपेसिटी) को घटाया या बढ़ाया नहीं जा सकता।
मरम्मत में दिक़्क़त: ज़्यादातर पाइपलाइनें भूमिगत (ज़मीन के नीचे) होती हैं, जिसके कारण उनकी देखरेख और मरम्मत (रिपेयर) के काम में बहुत दिक़्क़त आती है।
सुरक्षा की चिंता: सुरक्षा के नज़रिए से इसे बहुत सही नहीं माना जाता क्योंकि इस पर हमेशा आतंकी हमलों या चोरी का ख़तरा बना रहता है।
लीकेज का पता लगाना मुश्किल: अगर पाइपलाइन में कहीं कोई छोटा-मोटा रिसाव (लीकेज) हो जाए, तो उस सटीक जगह का पता लगाना काफी कठिन होता है।
प्रश्न 3. भारत के आर्थिक विकास में सड़कों की भूमिका का वर्णन करो।
उत्तर: भारत के आर्थिक और सामाजिक विकास में सड़कों की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण है। यह न केवल व्यापार और परिवहन की रफ्तार को बढ़ाती हैं, बल्कि देश के सामाजिक जुड़ाव और अलग-अलग क्षेत्रों के विकास में भी बड़ा योगदान देती हैं।
इसकी मुख्य भूमिका और विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
ऐतिहासिक महत्व: भारत में प्राचीन काल (पुराने समय) से ही सड़कों का बहुत महत्व रहा है। शेरशाह सूरी द्वारा बनवाया गया राष्ट्रीय राजमार्ग "ग्रैंड ट्रंक रोड" (GT Road) इसका सबसे बड़ा ऐतिहासिक उदाहरण है। आजादी के बाद देश में सड़कों का विकास और भी तेज़ी से हुआ।
भौगोलिक बनावट का प्रभाव: दक्षिण भारत में पक्की सड़कों का जाल उत्तर के मुकाबले अधिक है, क्योंकि दक्षिणी पठार पर सड़क बनाने के लिए पत्थर बहुत आसानी से मिल जाते हैं।
विश्व का दूसरा सबसे बड़ा नेटवर्क: भारत के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है। साल 2016-17 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में सड़कों की कुल लंबाई 54.8 लाख किलोमीटर थी।
यात्री और माल ढुलाई का मुख्य साधन: देश के कुल परिवहन में से लगभग 85% यात्री और 70% माल (सामान) का आना-जाना सड़कों के माध्यम से ही होता है।
राष्ट्रीय राजमार्गों का योगदान: साल 2020 में भारत के राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) की कुल लंबाई 1,36,440 किलोमीटर थी। ये राजमार्ग देश के मुख्य बड़े शहरों जैसे मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, दिल्ली, बेंगलुरु और श्रीनगर को आपस में जोड़ते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में सहायक: ये सड़कें सिर्फ देश के अंदर ही नहीं जोड़तीं, बल्कि पड़ोसी देशों के साथ अंतर्राष्ट्रीय संपर्क भी बढ़ाती हैं, जिससे पाकिस्तान, तिब्बत-चीन, बांग्लादेश और म्यांमार जैसे देशों के साथ भारत का व्यापार संभव हो पाता है।
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