12th Hindi Chapter 10 जूठन subjective

 12th Hindi Chapter 10 जूठन subjective



लघु उत्तरीय प्रश्न

1. क्या 'जूठन' शीर्षक सार्थक है? [2019]

उत्तर- 'जूठन' ओमप्रकाश वाल्मीकि की आत्मकथा है। लेखक को बचपन में दूसरों की जूठन खाकर पेट भरना पड़ता था। यह पाठ उनके जीवन की सच्चाई और जातिगत उत्पीड़न को दिखाता है। यही कारण है कि 'जूठन' शीर्षक बहुत सार्थक है।

2. घर पहुँचने पर लेखक ओमप्रकाश वाल्मीकि को देख उनकी माँ क्यों रो पड़ती हैं? [2023]

उत्तर- लेखक को अपने चाचा के साथ एक मरे हुए बैल की खाल उतारने के लिए भेजा गया था। किन्तु घर लौटते समय लेखक ओमप्रकाश वाल्मीकि गंदगी और खून से लथपथ थे और बहुत थक गए थे। उसे देखकर माँ दुखी होकर रो पड़ीं।

3. हेडमास्टर कलीराम ने बालक ओमप्रकाश को क्या आदेश दिया था? [2024]

उत्तर- हेडमास्टर कलीराम ने ओमप्रकाश को स्कूल के कमरे और मैदान की सफाई करने का आदेश दिया था, क्योंकि वह अछूत और नीच जाति का लड़का था।

4. किन बातों को सोचकर लेखक के भीतर काँटे से उगने लगते हैं?

उत्तर- लेखक को अपने बचपन की गरीबी याद आती है कि किस तरह उसका परिवार सफाई का काम करता था, गोबर और कूड़ा साफ करता था। उन्हें मेहनत के बदले थोड़ा अनाज मिलता था और जूठा खाना खाना पड़ता था। यही बातें सोचकर लेखक के मन में दर्द और चुभन होने लगती है।

5. "दिन रात, मर खपकर भी हमारे पसीने की कीमत मात्र 'जूठन' फिर भी किसी को शिकायत नहीं। कोई शर्मिंदगी नहीं, कोई पश्चाताप नहीं।" ऐसा क्यों? अपने शब्दों में उत्तर दीजिए।

उत्तर- गरीब लोग दिन-रात मेहनत करते हैं, फिर भी उन्हें सिर्फ जूठन मिलती है। उनके पास कोई और साधन नहीं होता, इसलिए वही उन्हें अमृत जैसा लगता है। उन्हें शर्म या शिकायत नहीं होती, क्योंकि अभाव और मजबूरी में वे सब कुछ सहने के आदी हो चुके हैं।

6. सुरेन्द्र की बातों को सुनकर लेखक विचलित क्यों हो जाता है?

उत्तर- लेखक सुरेन्द्र की बातों को सुनकर इसलिए विचलित हो जाता है क्योंकि सुरेन्द्र के परिवार की जूठन पर ही उसका बचपन बीता था। उसे याद आया कि बचपन में उसके परिवार को वहाँ बहुत अपमान और दुख झेलने पड़े थे। जब सुरेन्द्र ने उसके घर के खाने की तारीफ की, तो लेखक को वही पुरानी अपमानजनक पल याद आ जाती है।

7. लेखक की भाभी क्या कहती हैं? उनके कथन का महत्व बताइए।

उत्तर- लेखक की भाभी कहती थी – “इनसे यह काम मत कराओ, भूखे रह लेंगे, पर इन्हें इस गंदगी में मत घसीटो।” भाभी नहीं चाहती थी वे खाल उतारने जैसे गंदे काम करें। वह पढ़-लिखकर कुछ अच्छा बने। भाभी की इसी सोच और त्याग से लेखक का जीवन बदल गया।

8. लेखक ओमप्रकाश वाल्मीकि समाज में क्या बदलाव लाना चाहते हैं?

उत्तर- लेखक समाज में बराबरी लाना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि ऊँच-नीच और जाति भेद खत्म हो। हर व्यक्ति को सम्मान और समान अवसर मिले। दलित लोग कितने दुख, अपमान और अन्याय झेलते हैं। लेखक चाहते हैं कि अब कोई भी ऐसा जीवन न जीए, जहाँ मेहनत के बाद भी सिर्फ "जूठन" खाने को मिले।

9. 'जूठन' आत्मकथा का सारांश लिखें।

उत्तर- ‘जूठन’ ओम प्रकाश वाल्मीकि की आत्मकथा है, जिसमें लेखक अपने जीवन की सच्चाई और दुख भरे अनुभव बताए हैं। उनका परिवार बहुत गरीब था और छोटी जाति का होने के कारण उन्हें अपमान झेलना पड़ता था। उनकी माँ मेहनत-मजदूरी करती थी और कभी-कभी दूसरों की जूठन खाकर परिवार का पेट भरती थी। समाज उन्हें नीचा समझता था। लेखक ने इस आत्मकथा में दिखाया है कि कैसे दलित लोग मेहनत करते हुए भी सम्मान से वंचित रहते हैं। अब लेखक पढ़-लिखकर आगे बढ़ गये हैं और वे चाहते हैं कि दलित लोग भी शिक्षा पाकर अपने जीवन में सुधार करें और बराबरी का हक पाएँ।

10. पिता जी ने स्कूल में क्या देखा? उन्होंने आगे क्या किया? पूरा विवरण अपने शब्दों में लिखें।

उत्तर- लेखक स्कूल में झाड़ू लगा रहे थे। तभी उसके पिता जी वहाँ से गुजर रहे थे। उन्होंने अपने बेटे को झाड़ू लगाते देखा तो रुक गए और पूछा – “ये क्या कर रहे हो?" लेखक अपने पिता को देखकर रोने लगे। पिता जी स्कूल के मैदान में आए और प्यार से पूछा – “क्यों रो रहे हो? क्या हुआ?” तब लेखक ने रोते-रोते सब बता दिया कि “तीन दिन से झाड़ू लगवा रहे हैं, पढ़ने नहीं देते।”

यह सुनकर उसके पिता जी बहुत गुस्सा हो गए। उन्होंने झाड़ू छीनकर फेंक दी और जोर से बोले – “कौन मास्टर है जो मेरे बेटे से झाड़ू लगवाता है?” उनकी आवाज सुनकर सारे मास्टर बाहर आ गए। हेडमास्टर कलीराम ने गुस्से में लेखक के पिता को धमकाया, लेकिन पिता जी नहीं डरे। उन्होंने हिम्मत और गुस्से से सबका सामना किया। लेखक उस दिन अपने पिता का साहस देखकर कभी नहीं भूल पाया।

सप्रसंग व्याख्यात्मक प्रश्न

1. "कितने क्रूर समाज में रह रहे हैं हम, जहाँ श्रम का कोई मोल नहीं ताकि निर्धनता को बरकरार रखने का षड्यंत्र ही था यह सब।"

उत्तर- प्रस्तुत पंक्ति ओमप्रकाश वाल्मीकि की आत्मकथा 'जूठन' से ली गई हैं। लेखक कहते हैं कि हमारा समाज बहुत क्रूर है, जहाँ मेहनत करने वालों को सम्मान नहीं मिलता। दलित लोग कठिन काम करते हैं, लेकिन उन्हें बहुत कम पैसे और बहुत गालियाँ मिलती हैं। समाज ने गरीबों को गरीब बनाए रखने की व्यवस्था बना रखी है। लेखक चाहते हैं कि इस अन्यायपूर्ण व्यवस्था को बदला जाए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. विद्यालय में लेखक के साथ कैसी घटनाएँ घटती हैं? 'जूठन' शीर्षक आत्मकथा के आधार पर लिखें।

उत्तर- विद्यालय में लेखक को छोटी जाति का होने के कारण प्रतिदिन अपमान सहना पड़ता था। उसे मैदान और बरामदे में झाड़ू लगाना पड़ता था। हेडमास्टर की डाँट सहनी पड़ती थी। उसके साथ रोज बुरा व्यवहार किया जाता था। जिस कारण लेखक की आँखों से आँसू बहने लगते थे। और बाकी बच्चे और मास्टर दूर से उसका तमाशा देखते रहते थे। उसे विद्यालय में बहुत अपमान और दुख सहना पड़ता था। स्कूल के कमरे की खिड़की-दरवाजों से मास्टरों और लड़कों की आँखें छिप-छिप कर तमाशा देख रही थीं। लेखक का रोम-रोम यातना की गहरी खाई में लगातार गिर रहा था।

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