12th Geography Book 2 chapter 9 भारत के संदर्भ में नियोजन एवं सतत् पोषणीय विकास Subjective
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. नियोजन (Planning) से क्या आशय है?
उत्तर: नियोजन (Planning) का सीधा मतलब है किसी भी काम को करने से पहले उसके बारे में सोचना और योजना बनाना। इसके अंतर्गत हम यह तय करते हैं कि भविष्य में हमारा लक्ष्य क्या है, उस लक्ष्य को कैसे पूरा करना है, और उसके लिए किन-किन चीज़ों की ज़रूरत पड़ेगी। आसान शब्दों में कहें तो, "क्या करना है, कैसे करना है और कब करना है" इसे पहले से तय करना ही नियोजन है।
प्रश्न 2. सतत पोषणीय विकास की संकल्पना को परिभाषित करें।
उत्तर: सतत पोषणीय विकास (Sustainable Development) का मतलब एक ऐसे विकास से है जिसमें हम आज की अपनी ज़रूरतों को इस तरह पूरा करें कि आने वाली पीढ़ियों (भविष्य के बच्चों) को अपनी ज़रूरतों को पूरा करने में कोई दिक़्क़त न हो। यानी, पर्यावरण और संसाधनों (जैसे- पानी, कोयला, पेड़-पौधे) का इस्तेमाल इस तरह करना कि वे आने वाले समय के लिए भी बचे रहें और उन्हें नुक़सान न पहुँचे।
प्रश्न 3. भारत के किन्हीं चार सूखा संभावी राज्यों के नाम लिखिए?
उत्तर: भारत के चार प्रमुख सूखा संभावी राज्य (जहाँ अक्सर सूखा पड़ने की संभावना रहती है) निम्नलिखित हैं:
राजस्थान (विशेषकर पश्चिमी भाग)
गुजरात (विशेषकर कच्छ और सौराष्ट्र का इलाका)
मध्य प्रदेश
आंध्र प्रदेश (या महाराष्ट्र का विदर्भ/मराठवाड़ा क्षेत्र)
भारत के प्रमुख सूखा संभावी राज्य राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश हैं।
प्रश्न 4. योजना आयोग क्या है? इसका गठन कब हुआ था?
उत्तर: योजना आयोग भारत सरकार की एक ऐसी मुख्य संस्था थी जिसका काम देश की तरक्की और आर्थिक विकास के लिए योजनाएँ (प्लान) बनाना और उन्हें लागू करना था। यह आयोग देश के लिए 'पंचवर्षीय योजनाएँ' (5 साल का प्लान) तैयार करता था।
गठन: इसका गठन 15 मार्च, 1950 को हुआ था। (अब इसकी जगह 'नीति आयोग' काम करता है)।
प्रश्न 5. इंदिरा गांधी नहर कमान क्षेत्र का वर्णन कीजिए।
उत्तर: इंदिरा गांधी नहर भारत की एक बहुत बड़ी नहर प्रणाली है।
शुरुआत: इसकी शुरुआत 31 मार्च 1958 को हुई थी। पहले इसे 'राजस्थान नहर' कहा जाता था।
कहाँ से कहाँ तक: यह नहर पंजाब के 'हरिके बांध' से निकलती है और राजस्थान के थार मरुस्थल (रेगिस्तान) तक जाती है।
लंबाई और सिंचाई: इस नहर तंत्र की कुल लंबाई 9,060 किलोमीटर है। इससे राजस्थान के लगभग 19.63 लाख हेक्टेयर सूखे इलाके में सिंचाई (पानी) की सुविधा मिलती है।
प्रश्न 6. इंदिरा गांधी नहर कमान क्षेत्र का सिंचाई पर क्या सकारात्मक प्रभाव पड़ा?
उत्तर: इस नहर के आने से सिंचाई और खेती पर निम्नलिखित अच्छे (सकारात्मक) प्रभाव पड़े:
खेतों का दायरा बढ़ा, जिससे सूखी ज़मीन भी खेती के लायक बन गई।
खेतों में फसलें जल्दी और ज़्यादा मात्रा में उगने लगीं।
पहले जहाँ सिर्फ सूखा झेलने वाली फसलें (जैसे चना, बाजरा, ज्वार) उगती थीं, वहीं अब पानी मिलने से गेहूँ, चावल, कपास और मूँगफली जैसी कीमती व्यापारिक फसलें उगाई जाने लगी हैं।
प्रश्न 7. प्रादेशिक नियोजन से क्या आशय है?
उत्तर: प्रादेशिक नियोजन (Regional Planning) का मतलब है किसी खास इलाके या क्षेत्र (Region) की ज़रूरतों को देखकर वहाँ का विकास करना। इसके तहत उस इलाके में मिलने वाले संसाधनों (जैसे पानी, ज़मीन, खनिज) का सही और समझदारी से इस्तेमाल किया जाता है, ताकि उस पूरे क्षेत्र का हर तरफ से बराबर विकास हो सके।
प्रश्न 8. भारत सरकार के पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम का विवरण दीजिए।
उत्तर: यह कार्यक्रम भारत सरकार द्वारा पहाड़ी इलाकों के विकास के लिए शुरू किया गया था। पहाड़ी क्षेत्रों की अपनी अलग चुनौतियाँ होती हैं (जैसे ऊँचे-नीचे रास्ते, ठंडी जलवायु, आवागमन की दिक़्क़त), इसलिए उन्हें ध्यान में रखकर यह योजना बनाई गई।
इस कार्यक्रम को बनाते समय मुख्य बातें ध्यान में रखी गईं:
विकास का लाभ वहाँ के सभी लोगों तक पहुँचे।
पहाड़ी इलाकों के अपने संसाधनों और स्थानीय लोगों के टैलेंट (प्रतिभा) को बढ़ावा दिया जाए।
पिछड़े और गरीब इलाकों के लोगों को व्यापार में शोषण (नुक़सान) से बचाया जाए।
वहाँ के बाज़ारों में सुधार हो ताकि मज़दूरों और किसानों को सही फ़ायदा मिले।
प्रकृति और पर्यावरण का संतुलन बना रहे।
प्रश्न 9. भरमौर क्षेत्र को विकास की आवश्यकता क्यों पड़ी?
उत्तर: भरमौर क्षेत्र (हिमाचल प्रदेश का एक पहाड़ी इलाका) बहुत ही दुर्गम और कठिन जगह पर बसा है। यहाँ का भूगोल मुश्किल है, बारिश बहुत कम होती है और जीने के साधन भी बहुत सीमित (कम) हैं। इन दिक़्क़तों की वजह से यहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य (अस्पताल), खेती और दूसरी ज़रूरी सुविधाओं की बहुत कमी थी। इसी पिछड़ेपन को दूर करने के लिए वहाँ विकास कार्यक्रम शुरू करने की ज़रूरत पड़ी।
प्रश्न 10. भरमौर क्षेत्र की प्रमुख जनजाति कौन-सी है और वे किस प्रकार का जीवन जीते हैं?
उत्तर: भरमौर क्षेत्र में मुख्य रूप से 'गद्दी' (Gaddi) जनजातीय समुदाय के लोग रहते हैं।
जीवन शैली: ये लोग 'मौनमी प्रवास' यानी मौसम के हिसाब से अपना स्थान बदलते रहते हैं। जब गर्मियों का मौसम आता है, तो ये अपने पशुओं को लेकर ऊँचे पहाड़ी मैदानों पर चले जाते हैं और जब कड़ाके की सर्दियाँ आती हैं, तो नीचे के मैदानी या कम ऊँचे इलाकों में आ जाते हैं।
भाषा: इनकी मुख्य भाषा 'गद्दीयाली' है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. सूखा संभावी क्षेत्र कार्यक्रम पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखो। यह कार्यक्रम देश में शुष्क भूमि कृषि विकास में कैसे सहायक है?
उत्तर: सूखा संभावी क्षेत्र कार्यक्रम (Drought Prone Area Programme) की शुरुआत देश की चौथी पंचवर्षीय योजना (1969-74) के दौरान की गई थी।
उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य उन इलाकों में सूखे के बुरे असर को कम करना है जहाँ बार-बार सूखा पड़ता रहता है। साल 1967 में योजना आयोग ने देश के 67 जिलों की पहचान सूखा ग्रस्त क्षेत्रों के रूप में की थी। ये क्षेत्र मुख्य रूप से राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में फैले हैं।
यह शुष्क (सूखी) भूमि कृषि के विकास में इस प्रकार सहायता करता है:
बुरे प्रभावों को कम करना: यह सूखे के कारण खेती और फसलों को होने वाले नुक़सान को रोकता है।
उत्पादकता बढ़ाना: यह सूखी ज़मीन, पानी के सही इस्तेमाल, मवेशियों (पशुधन) और इंसानी संसाधनों की क्षमता को सुधारता है ताकि कम पानी में भी अच्छी खेती हो सके।
रोज़गार देना: सूखे के दिनों में जब खेती बंद हो जाती है, तब यह कार्यक्रम वहाँ के गरीब ग्रामीणों और किसानों को काम (रोज़गार) के नए अवसर देता है।
आर्थिक विकास: इसके ज़रिए गाँवों की आर्थिक स्थिति सुधरती है और लोगों को गाँव छोड़कर शहर भागने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
: इस कार्यक्रम के तहत प्राकृतिक संसाधनों के सही और लंबे समय तक इस्तेमाल को पक्का करने के लिए निम्नलिखित प्रमुख घटकों (कामों) पर ध्यान दिया जाता है:
सिंचाई सुविधाओं का विकास: पानी को बचाने और सही इस्तेमाल के लिए तालाब, कुएँ और चेक डैम (छोटे बांध) बनाए जाते हैं।
कृषि विकास: कम पानी में उगने वाली (सूखा प्रतिरोधी) फसलों की खेती की जाती है, खेती की नई और बेहतर तकनीकों को फैलाया जाता है, और मिट्टी को ख़राब होने से बचाया (मृदा संरक्षण) जाता है।
पशुपालन विकास: पशुओं की सेहत का ध्यान रखने, उनके लिए चारे का उत्पादन बढ़ाने और दूध के उत्पादन को बढ़ावा देने पर काम होता है।
वन संरक्षण: नए पेड़-पौधे लगाना (वनरोपण/वृक्षारोपण) और पर्यावरण की जैव विविधता को बचाना।
ग्रामीण विकास: गाँवों में पक्की सड़कें, स्कूल (शिक्षा), अस्पताल (स्वास्थ्य) और रहने के लिए मकान जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना।
प्रश्न 2. इंदिरा गांधी नहर कमान क्षेत्र में सतत पोषणीय विकास को बढ़ावा देने के लिए उपाय सुझाइए।
उत्तर: इंदिरा गांधी नहर (जिसे पहले राजस्थान नहर कहते थे) भारत की सबसे बड़ी नहर परियोजनाओं में से एक है। इसका मुख्य उद्देश्य थार मरुस्थल (रेगिस्तान) के इलाकों में सिंचाई के लिए पानी पहुँचाना है। इस क्षेत्र में पर्यावरण और संसाधनों को बिना नुक़सान पहुँचाए लंबे समय तक विकास (सतत पोषणीय विकास) बनाए रखने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:
सख्त जल प्रबंधन नीति: पानी के सही और समझदारी से इस्तेमाल के लिए जल प्रबंधन के नियमों का सख्ती से पालन होना चाहिए ताकि पानी बर्बाद न हो।
कम पानी वाली फसलें उगाना: ऐसी फसलें जिनमें बहुत ज़्यादा पानी लगता है, उनकी जगह कम पानी में उगने वाली फसलों को बढ़ावा देना चाहिए, जैसे कि खट्टे फल (बागवानी) आदि।
पानी के बहाव को पक्का करना: नहर से खेतों तक पानी का बँटवारा सभी को बराबर मिलना चाहिए। साथ ही, पानी के रिसाव और बर्बादी को रोकने के लिए खेतों की नालियों (नालों) को पक्का किया जाना चाहिए।
मिट्टी की समस्या में सुधार: अत्यधिक सिंचाई के कारण जहाँ जलभराव (पानी जमा होना) और लवणता (मिट्टी में नमक/रेह की मात्रा बढ़ना) की समस्या हो गई है, उसे ठीक करने के उपाय किए जाने चाहिए।
पेड़ लगाना और चरागाह विकास: रेगिस्तान को फैलने से रोकने के लिए बड़े पैमाने पर पेड़-पौधे लगाना (वनीकरण) चाहिए और पशुओं के चरने के लिए चरागाहों का विकास करना चाहिए।
गरीब किसानों की मदद: छोटे और गरीब किसानों को खेती के नए साधन अपनाने के लिए सरकार की तरफ से आर्थिक सहायता (मदद) मिलनी चाहिए।
अन्य क्षेत्रों का विकास: इस इलाके के लोग सिर्फ खेती पर ही निर्भर न रहें, इसलिए यहाँ छोटे उद्योगों और व्यापार (सेवा क्षेत्रों) को भी बढ़ावा देना चाहिए ताकि यहाँ की अर्थव्यवस्था संतुलित और मजबूत बनी रहे।
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