प्रश्न: नयनार कौन थे?
उत्तर:
मध्यकाल में दक्षिण भारत (विशेषकर तमिलनाडु) में भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाने में नयनार संतों की मुख्य भूमिका थी। परीक्षा के दृष्टिकोण से इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
• शैव भक्त: नयनार उन संतों को कहा जाता है जो भगवान शिव के अनन्य भक्त थे। उन्होंने घूम-घूमकर शिव भक्ति का प्रचार किया और रूढ़िवादिता का विरोध किया।
• संख्या: नयनार संतों की कुल संख्या 63 (तिरसठ) मानी जाती है। इन संतों में अप्पार, सम्बन्दर, सुंदरार और मणिक्कवाचकार सबसे प्रसिद्ध थे।
• समानता पर बल: इन संतों में समाज के सभी वर्गों के लोग शामिल थे, जैसे- कुम्हार, किसान, शिकारी, सैनिक, ब्राह्मण और अछूत समझे जाने वाले वर्ग। इन्होंने जाति प्रथा और ऊंच-नीच का कड़ा विरोध किया।
• पवित्र ग्रंथ: नयनार संतों के भजनों और गीतों को 'तेवरम' और 'तिरुवाचकम' नामक पवित्र ग्रंथों में संकलित किया गया है, जिन्हें 'तमिल वेद' के रूप में भी जाना जाता है।
संक्षेप में, नयनार संतों ने दक्षिण भारत में शिव भक्ति की एक ऐसी लहर चलाई जिसने जातिगत भेदभाव को भुलाकर सबको एक सूत्र में बांधा।
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