प्रश्न: ब्राह्मी और खरोष्ठी लिपि में क्या अन्तर है?
उत्तर:
ब्राह्मी और खरोष्ठी प्राचीन भारत की दो सबसे महत्वपूर्ण लिपियाँ हैं, जिनका उपयोग सम्राट अशोक ने अपने अभिलेखों में किया था। इन दोनों लिपियों में मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:
लेखन की दिशा: ब्राह्मी लिपि को बाएं से दाएं (Left to Right) लिखा जाता था, जैसे आज हम हिंदी (देवनागरी) लिखते हैं। इसके विपरीत, खरोष्ठी लिपि को दाएं से बाएं (Right to Left) लिखा जाता था, जैसे उर्दू लिखी जाती है।
क्षेत्रीय विस्तार: ब्राह्मी लिपि का प्रयोग संपूर्ण भारत (मुख्यतः मध्य, पूर्वी और दक्षिणी भाग) में व्यापक रूप से होता था। जबकि खरोष्ठी लिपि का प्रयोग केवल उत्तर-पश्चिम भारत (वर्तमान पाकिस्तान और अफगानिस्तान के क्षेत्र) तक ही सीमित था।
उत्पत्ति: ब्राह्मी को भारत की एक मूल और स्वतंत्र लिपि माना जाता है, जिससे आधुनिक समय की देवनागरी, बंगाली और तमिल जैसी लिपियों का विकास हुआ। वहीं, खरोष्ठी लिपि पर विदेशी 'आरामाइक' (सीरियाई) लिपि का गहरा प्रभाव माना जाता है।
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