प्रश्न: वर्द्धमान महावीर की किन्हीं दो शिक्षाओं को लिखें।
उत्तर:
जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर वर्द्धमान महावीर ने समाज को सुधारने और मोक्ष प्राप्त करने के लिए अत्यंत व्यावहारिक शिक्षाएं दीं। परीक्षा के दृष्टिकोण से उनकी दो प्रमुख शिक्षाएं निम्नलिखित हैं:
1. पंचमहाव्रत (विशेषकर अहिंसा पर अत्यधिक बल): महावीर स्वामी की सबसे मुख्य शिक्षा 'अहिंसा' है। उनके अनुसार संसार के सभी जीवों (मनुष्यों, पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों और यहाँ तक कि मिट्टी, जल तथा वायु) में भी जीवन है। इसलिए मन, वचन या कर्म किसी भी रूप में किसी जीव को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए। उन्होंने जीवन को पवित्र बनाने के लिए पांच व्रतों का पालन अनिवार्य बताया: अहिंसा (हिंसा न करना), सत्य (झूठ न बोलना), अस्तेय (चोरी न करना), अपरिग्रह (धन इकट्ठा न करना) और ब्रह्मचर्य।
2. त्रिरत्न और कर्म का सिद्धांत: महावीर स्वामी ने सिखाया कि मनुष्य अपने कर्मों के कारण ही जन्म और मरण के चक्र में फंसता है। अच्छे कर्मों से मुक्ति या मोक्ष (निर्वाण) पाने के लिए उन्होंने 'त्रिरत्न' (तीन रास्ते) बताए, जो इस प्रकार हैं:
सम्यक दर्शन (सच्ची श्रद्धा या विश्वास)
सम्यक ज्ञान (सच्चा और सही ज्ञान)
सम्यक चरित्र (अच्छा आचरण और पवित्र जीवन)
संक्षेप में, महावीर स्वामी की ये शिक्षाएं मनुष्य को कठोर आत्म-संयम, पवित्रता और सभी जीवों के प्रति दया भाव रखने का संदेश देती हैं।
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