प्रश्न: मोहनजोदड़ो के विशाल स्नानागार का विवरण दें।
उत्तर:
'विशाल स्नानागार' (The Great Bath) मोहनजोदड़ो का सबसे प्रसिद्ध और आकर्षक पुरातात्विक ढांचा है। यह सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों की उन्नत वास्तुकला और इंजीनियरिंग का एक बेजोड़ नमूना है। परीक्षा के दृष्टिकोण से इसका विवरण निम्नलिखित बिंदुओं के अंतर्गत किया जा सकता है:
संरचना और माप: यह विशाल स्नानागार मोहनजोदड़ो के 'दुर्ग' (किले वाले भाग) के भीतर स्थित था। यह चारों ओर से गलियारों से घिरा हुआ एक आयताकार (Rectangular) जलाशय था। इस जलाशय की लंबाई लगभग 11.88 मीटर, चौड़ाई 7.01 मीटर और गहराई 2.44 मीटर थी।
सीढ़ियाँ और कमरे: जलाशय के अंदर उतरने के लिए उत्तरी और दक्षिणी भागों में ईंटों से बनी दो सीढ़ियाँ थीं। स्नानागार के तीनों ओर कपड़े बदलने के लिए छोटे-छोटे कमरे बने हुए थे, जिनमें से एक कमरे में एक बड़ा कुआं भी था।
जल निकासी और स्वच्छता की व्यवस्था: स्नानागार को भरने के लिए पानी पास के कुएं से लाया जाता था। गंदे पानी को बाहर निकालने के लिए जलाशय के फर्श पर एक कोना ढालूदार बनाया गया था, जो एक बहुत बड़े मुख्य नाले से जुड़ा हुआ था, ताकि उपयोग के बाद पानी बदला जा सके।
वाटरप्रूफिंग (जल-रोधी तकनीक): जलाशय से पानी का रिसाव (Leakage) रोकने के लिए इसके फर्श और दीवारों को तराशी गई ईंटों से पक्का किया गया था और उन पर जिप्सम के गारे (Plaster) तथा चारकोल (बिटुमेन) की मोटी परत चढ़ाई गई थी। प्राचीन दुनिया में वाटरप्रूफिंग का यह पहला उदाहरण है।
धार्मिक और सार्वजनिक महत्व: इतिहासकारों (जैसे सर जॉन मार्शल) का मानना है कि इस विशाल स्नानागार का उपयोग आम दिनों में नहाने के लिए नहीं, बल्कि विशेष धार्मिक अवसरों, त्योहारों या अनुष्ठानों के समय सामूहिक स्नान (पवित्र स्नान) के लिए किया जाता था, जैसा आज भी हमारे यहाँ छठ या कुंभ जैसे पर्वों पर होता है।
संक्षेप में, मोहनजोदड़ो का यह विशाल स्नानागार सिंधु सभ्यता की उच्च नागरिक व्यवस्था, स्वच्छता के प्रति उनकी जागरूकता और उत्कृष्ट वास्तुकला का जीता-जागता प्रमाण है।
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