12th Sociology Book 2 chapter 04 सामाजिक परिवर्तन और अर्थव्यवस्था subjective

 


12th Sociology chapter 04 सामाजिक परिवर्तन और अर्थव्यवस्था subjective

प्रश्न 1. प्रधानमंत्री रोजगार योजना पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: भारत सरकार ने 1993 में प्रधानमंत्री रोजगार योजना (PMRY) की शुरुआत की थी। इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षित बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को अपना खुद का व्यवसाय (स्वरोजगार) शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत व्यापार और सेवा क्षेत्र में छोटे उद्योग लगाने के लिए कम ब्याज पर ऋण दिया जाता है ताकि लोग आत्मनिर्भर बन सकें।

प्रश्न 2. वर्ग चेतना (Class Consciousness) क्या है?

उत्तर: जब समाज का कोई व्यक्ति अपने सामाजिक वर्ग, अपनी आर्थिक स्थिति और समाज में अपनी प्रतिष्ठा के प्रति पूरी तरह जागरूक हो जाता है, तो उसे वर्ग चेतना कहते हैं। इसमें व्यक्ति यह समझने लगता है कि उसका वर्ग अन्य वर्गों की तुलना में कहाँ खड़ा है।

प्रश्न 3. हरित क्रांति से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: भारत में 1966-67 के दौरान कृषि क्षेत्र में नई तकनीक, उन्नत किस्म के बीजों (HYV), रासायनिक खादों और आधुनिक मशीनों के उपयोग से खाद्यान्न उत्पादन में जो रिकॉर्ड वृद्धि हुई, उसे हरित क्रांति कहा जाता है।

प्रश्न 4. भारत में हरित क्रांति की प्रमुख विशेषताओं की चर्चा कीजिए।

उत्तर: हरित क्रांति की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • खेती में रासायनिक उर्वरकों (खादों) का बड़े पैमाने पर प्रयोग।

  • अधिक उपज देने वाले आधुनिक बीजों और नई फसलों को अपनाया गया।

  • सिंचाई के लिए बड़ी और छोटी नहरों व नलकूप योजनाओं का विस्तार किया गया।

  • किसानों को फसलों का सही दाम दिलाने के लिए कृषि मूल्य आयोग की स्थापना की गई।

प्रश्न 5. पंचायतों की आमदनी के प्रमुख साधन क्या हैं?

उत्तर: पंचायतों को आय मुख्य रूप से इन स्रोतों से प्राप्त होती है:

  • गाँव के छोटे-मोटे विवादों के निपटारे या समझौतों से मिलने वाली राशि।

  • सरकारी अनुदान, दान या ऋण के रूप में मिलने वाला पैसा।

  • कूड़ा-कचरा, गोबर, खाद या मृत पशुओं की नीलामी से होने वाली आय।

  • गाँव की जमीनों के लगान और घरों पर लगाए गए स्थानीय कर (टैक्स)।

प्रश्न 6. भारतीय समाज में भूमि सुधार के प्रमुख कदमों की चर्चा कीजिए।

उत्तर: सरकार द्वारा किए गए प्रमुख भूमि सुधार इस प्रकार हैं:

  • जमींदारी प्रथा का अंत: खेती में मौजूद बिचौलियों को हटाकर किसानों का सीधा संपर्क सरकार से कराया गया।

  • काश्तकारी सुधार: पट्टे पर खेती करने वाले किसानों को कानूनी अधिकार दिए गए।

  • चकबंदी: बिखरे हुए छोटे-छोटे खेतों को मिलाकर एक बड़ा और व्यवस्थित खेत बनाया गया।

  • दस्तावेजों का सुदृढ़ीकरण: जमीन के रिकॉर्ड (खसरा-खतियान) को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाया गया।

प्रश्न 7. भूमि सुधार के उद्देश्यों पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: भूमि सुधार के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  • कृषि व्यवस्था में समानता और सामाजिक न्याय लाना।

  • औपनिवेशिक काल (ब्रिटिश शासन) के दौरान हुए किसानों के शोषण को समाप्त करना।

  • खेती की पैदावार बढ़ाना और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार करना।

प्रश्न 8. भूमि सुधार का क्या अर्थ है?

उत्तर: भूमि सुधार का अर्थ है भूमि के स्वामित्व (Ownership) और जोतने के तरीकों में सरकार द्वारा कानूनी बदलाव करना, ताकि खेती अधिक लाभदायक हो सके और भूमिहीन किसानों को न्याय मिल सके।

प्रश्न 9. भूमि की हदबंदी अधिनियम (Land Ceiling Act) से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: इस कानून के तहत सरकार ने यह निर्धारित किया है कि कोई भी परिवार एक निश्चित सीमा से अधिक कृषि भूमि अपने पास नहीं रख सकता। इस तय सीमा से अधिक जो भी भूमि होती है, सरकार उसे अपने नियंत्रण में ले लेती है और भूमिहीन किसानों के बीच बाँट देती है।

प्रश्न 10. नव किसान आंदोलन से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: किसानों द्वारा भूमि सुधार लागू करने, जमींदारी प्रथा को पूरी तरह समाप्त करने और भूमि पर लगने वाले कर (Tax) को कम करने जैसी माँगों के लिए किए गए संघर्ष को नव किसान आंदोलन कहा जाता है।

प्रश्न 11. भारत में प्रमुख ग्रामीण समस्याएँ कौन-कौन सी हैं?

उत्तर: भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में व्याप्त प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं:

  1. पुरानी कुप्रथाएँ, रूढ़ियाँ और परंपराएँ।

  2. जाति व्यवस्था और जाति के आधार पर काम का बँटवारा होना।

  3. समाज में फैला अंधविश्वास।

  4. स्थानीय राजनीति में जाति का अत्यधिक प्रभाव।

  5. आर्थिक पिछड़ापन और गरीबी।


दीर्घ उत्तरीय पश्न उत्तर सहित

अध्याय - 4. सामाजिक परिवर्तन और अर्थव्यवस्था

प्रश्न 1. औद्योगीकरण ने भारत के ग्रामीण जीवन को किस प्रकार प्रभावित किया?

उत्तर: औद्योगीकरण (Factory और उद्योगों के बढ़ने) ने भारत के गाँवों के जीवन को पूरी तरह से बदल दिया है। इसके मुख्य प्रभाव नीचे दिए गए हैं:

  • संयुक्त परिवार का टूटना: पहले गाँवों में सब लोग एक साथ मिलकर (संयुक्त परिवार में) रहते थे। उद्योगों के आने से लोग काम की तलाश में बाहर जाने लगे, जिससे संयुक्त परिवार कमजोर होने लगे और लोग अलग (एकल परिवार में) रहने लगे।

  • पुरानी सोच और अंधविश्वास में कमी: शहरों और फैक्ट्रियों के संपर्क में आने से ग्रामीण लोगों की सोच बदली। अब वे अंधविश्वासों और पुरानी रूढ़िवादी प्रथाओं पर कम भरोसा करते हैं।

  • खेती के तरीकों में बदलाव: अब खेती में नए बीजों, खाद और मशीनों (ट्रैक्टर आदि) का इस्तेमाल होने लगा है। इससे खेती वैज्ञानिक तरीके से होने लगी है और अब किसान पूरी तरह से केवल मौसम या प्रकृति पर निर्भर नहीं हैं।

  • आर्थिक सोच में बदलाव: पहले ग्रामीण लोग गरीबी या किसी भी समस्या को अपना 'भाग्य' मान लेते थे। लेकिन अब वे अपनी समस्याओं के लिए सरकार और उसकी नीतियों को जिम्मेदार मानने लगे हैं।

  • पैसों (मुद्रा) का बढ़ता चलन: गाँवों में अब लेन-देन के लिए पैसों (नकद) का इस्तेमाल बहुत बढ़ गया है। साथ ही, खेती के अलावा कमाई के नए-नए साधन और बिजनेस भी शुरू हो गए हैं।

  • जजमानी व्यवस्था का खत्म होना: गाँवों में पहले जो सदियों पुरानी पारंपरिक 'जजमानी व्यवस्था' (काम के बदले अनाज या सेवा देने की प्रथा) चलती थी, वह नए व्यवसायों के आने से कमजोर पड़ गई है।

  • जाति व्यवस्था का कमजोर होना: नए काम-धंधों, खान-पान और आपस में मेल-जोल बढ़ने से जाति के कड़े नियम अब ढीले पड़ गए हैं और जाति पंचायतों का असर भी कम हो गया है।

  • फैक्ट्रियों के पास वाले गाँवों पर ज्यादा असर: ये सारे बदलाव उन गाँवों में सबसे ज्यादा देखने को मिलते हैं जो किसी औद्योगिक क्षेत्र या फैक्ट्रियों के नजदीक स्थित हैं।

प्रश्न 2. भारत में हरित क्रान्ति की प्रमुख विशेषताओं की चर्चा कीजिए।

उत्तर: भारत में हरित क्रांति (Green Revolution) का मुख्य उद्देश्य खेती की पैदावार और अनाज के उत्पादन में तेजी से बढ़ोतरी करना था। इसकी प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

  • उन्नत किस्म के बीजों (HYV Seeds) का उपयोग: हरित क्रांति के तहत खेतों में ज्यादा पैदावार देने वाले नए और आधुनिक बीजों का इस्तेमाल शुरू किया गया।

  • रासायनिक खादों और कीटनाशकों का प्रयोग: फसलों को बीमारी से बचाने और अच्छी ग्रोथ के लिए केमिकल वाली खादों और दवाइयों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया।

  • सिंचाई के आधुनिक साधन: केवल बारिश पर निर्भर रहने के बजाय नहरों, ट्यूबवेल (नलकूप) और पंपसेट के जरिए खेतों में पानी पहुँचाने की व्यवस्था की गई।

  • अनाज उत्पादन में भारी वृद्धि: इन सब नए तरीकों की वजह से भारत में मुख्य रूप से गेहूँ और चावल के उत्पादन में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी हुई, जिससे देश में अनाज की कमी दूर हो गई।

प्रश्न 3. हरित क्रान्ति पर निबन्ध लिखिए।

उत्तर: हरित क्रांति का भारत के आर्थिक और कृषि विकास में बहुत बड़ा योगदान रहा है। 'हरित' का मतलब कृषि (खेती) से है और 'क्रान्ति' का मतलब बहुत तेजी से होने वाले बदलाव से है। जब कम समय में कृषि उत्पादन में बहुत तेजी से बढ़ोतरी होती है, तो उसे हरित क्रांति कहते हैं। भारत में इसका मुख्य उद्देश्य अनाज का उत्पादन बढ़ाकर देश को आत्मनिर्भर बनाना था। भारत में हरित क्रांति की शुरुआत करने का श्रेय डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन को दिया जाता है।

हरित क्रान्ति के प्रमुख कार्यक्रम और विशेषताएँ:

  • अधिक उपज देने वाले बीजों का प्रयोग: कृषि विश्वविद्यालयों के सहयोग से ऐसे नए बीज (HYV बीजों) तैयार किए गए जिससे फसलों की पैदावार बढ़ी। इसमें मुख्य रूप से गेहूँ और धान (चावल) जैसी फसलों पर ज्यादा ध्यान दिया गया।

  • बहुफसल कार्यक्रम (एक से ज्यादा फसलें उगाना): साल 1967-68 से एक ही खेत में साल भर में दो या तीन फसलें उगाने की व्यवस्था की गई। इससे प्रति एकड़ पैदावार बढ़ी और किसानों की कमाई में भी वृद्धि हुई।

  • सिंचाई सुविधाओं का विस्तार: खेती को केवल बारिश के भरोसे छोड़ने के बजाय नहरों, बाँधों, ट्यूबवेल और कुओं का निर्माण किया गया, ताकि फसलों को समय पर पानी मिल सके।

  • रासायनिक खादों का प्रयोग: पैदावार को और ज्यादा बढ़ाने के लिए पारंपरिक गोबर खाद के साथ-साथ रासायनिक खादों और कीटनाशक दवाइयों का इस्तेमाल बढ़ाया गया। इसके अलावा किसानों को खेती के लिए लोन (ऋण) और ट्रेनिंग की सुविधा भी दी गई।

प्रश्न 4. उदारीकरण की चुनौतियों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: उदारीकरण (Liberalization/बिजनेस के नियमों को आसान बनाना) से भारतीय अर्थव्यवस्था को फायदा तो हुआ, लेकिन इसके सामने कई गंभीर चुनौतियाँ और नुकसान भी सामने आए, जो सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर दिखते हैं:

  • गरीबी की समस्या: उदारीकरण के बाद भी देश की एक बहुत बड़ी आबादी गरीबी रेखा से नीचे जी रही है। सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी (जैसे- डीज़ल, खाद और बीज पर मिलने वाली छूट) में कमी आने से गरीब वर्ग और किसानों पर बुरा असर पड़ा है।

  • बेरोजगारी की चुनौती: उदारीकरण की वजह से फैक्ट्रियों में नई टेक्नोलॉजी और कंप्यूटर का इस्तेमाल बढ़ गया, जिससे केवल ऊंचे कौशल (Skills) वाले लोगों की मांग बढ़ी। हमारी शिक्षा व्यवस्था इस बदलाव के तैयार नहीं थी, जिसके कारण बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार नहीं मिल पाया।

  • पारंपरिक व्यवसायों पर बुरा असर: बाजार में बड़े-बड़े उद्योगों के आ जाने से छोटे कुटीर उद्योग और गाँव के पारंपरिक धंधे कमजोर पड़ गए, क्योंकि छोटे व्यापारी नई परिस्थितियों के साथ तालमेल नहीं बिठा पाए।

  • सामाजिक असमानता में वृद्धि: उदारीकरण का सबसे ज्यादा फायदा केवल पढ़े-लिखे और अमीर वर्ग को मिला, जबकि गरीब और अनपढ़ लोग पीछे छूट गए। इससे अमीरों और गरीबों के बीच की खाई (असमानता) और बढ़ गई।

  • सामाजिक सुरक्षा में कमी: प्राइवेट कंपनियों (निजीकरण) के बढ़ने और सरकारी मदद (सब्सिडी) में कटौती होने के कारण गरीबों के लिए चलाई जाने वाली सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का असर कम हो गया।

प्रश्न 5. भारतीय समाज के सन्दर्भ में कृषक समाज की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: भारतीय समाज में 'कृषक समाज' (Farmers' Society) का मतलब गाँव के सभी लोगों से नहीं होता है, क्योंकि गाँवों में व्यापारी, लोहार-बढ़ई जैसे दस्तकार और भूमिहीन मजदूर भी रहते हैं। कृषक समाज का असली मतलब उन लोगों से है जो खुद अपनी जमीन के मालिक होते हैं और अपने खेतों पर खुद खेती करके अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं।

विद्वानों के अनुसार इसकी परिभाषा इस प्रकार है:

  • रॉबर्ट रेडफील्ड के अनुसार: कृषक समाज वह ग्रामीण समाज है जिसकी पूरी जिंदगी, संस्कृति और अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती पर ही टिकी होती है। इस समाज में खेती करने का मुख्य उद्देश्य व्यापार करना नहीं बल्कि खुद के खाने (स्व-उपभोग) के लिए अनाज उगाना होता है और इनका जीवन जीने का तरीका पुराना और पारंपरिक होता है।

  • आन्द्रे बेतेई के अनुसार: भारतीय कृषक समाज उन लोगों का समूह है जो अपनी खुद की जमीन पर खुद मेहनत (श्रम) करते हैं और समाज में उन सभी की सामाजिक और आर्थिक स्थिति लगभग एक जैसी (बराबर) होती है।



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