12th Geography Book 2 chapter- 8 subjective
लघु उत्तरीय प्रश्न:-
1. आधारभूत उद्योग क्या है? उदाहरण दीजिए। (BSEB, 2015)
उत्तर:- आधारभूत उद्योग वे उद्योग होते हैं जो अन्य उद्योगों के लिए कच्चा माल या बुनियादी संसाधन प्रदान करते हैं और जिनके उत्पादों का उपयोग अन्य उत्पादों के निर्माण में किया जाता है।
जैसे - लौह-इस्पात उद्योग, सीमेंट उद्योग आदि।
2. कच्चे माल के आधार पर उद्योगों को वर्गीकृत कीजिए। (BSEB, 2015, 18) । अथवा, कच्चे माल पर आधारित उद्योग के कोई दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:- कच्चे माल के आधार पर उद्योगों के निम्नलिखित चार (नोट: इमेज के टेक्स्ट में आगे पांच प्रकार दिए गए हैं) वर्ग होते हैं-
(i) कृषि पर आधारित उद्योग- सूती वस्त्र, जूट, रेशमी वस्त्र, चीनी एवं वनस्पति तेल उद्योग कृषि पर आधारित उद्योग हैं।
(ii) खनिजों पर आधारित उद्योग - वे उद्योग जो खनिजों पर आधारित होते हैं, खनिज उद्योग कहलाते हैं।
जैसे - लोहा, इस्पात तथा ऐलुमिनियम उद्योग।
(iii) वनों पर आधारित उद्योग- इन उद्योगों के लिए कच्चा माल वनों से प्राप्त होता है ।
जैसे - कागज, गत्ता आदि।
(iv) पशुओं पर आधारित उद्योग- ये वे उद्योग हैं जो पशुओं पर आधारित होते हैं,
जैसे - डेयरी उद्योग तथा चमड़ा उद्योग आदि।
(v) मध्यवर्ती वस्तु पर आधारित उद्योग- इस वर्ग के उद्योग अन्य उद्योगों द्वारा तैयार उत्पादों को कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त करते हैं।
जैसे - इन्जीनियरिंग उद्योग, धातु बर्तन निर्माण उद्योग।
3. स्वामित्व के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए। (BSEB, 2019)
उत्तर:- स्वामित्व के आधार पर उद्योगों के निम्नलिखित 4 वर्ग होते हैं-
(i) सार्वजनिक उद्योग- ये उद्योग स्वामित्व, वित्त, प्रबन्ध एवं नियन्त्रण की दृष्टि से केन्द्र सरकार, राज्य सरकार के अधीन रहते हैं।
(ii) निजी उद्योग- ये उद्योग वे हैं जिसका मालिकाना हक, प्रबन्ध एवं नियन्त्रण की दृष्टि से सरकार के अधीन नहीं रहते और सेवाएँ तथा उपभोक्ता वस्तुएँ जनसाधारण को उपलब्ध कराते रहते हैं।
(iii) मिश्रित उद्योग - कोई उद्योग, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र तथा निजी क्षेत्र दोनों मौजूद हों, उसे मिश्रित उद्योग कहते हैं।
(iv) संयुक्त तथा सहकारी उद्योग- जब उद्योगों में दो या दो से अधिक व्यक्तियों या सहकारी समिति का योगदान हो तो उन्हें संयुक्त अथवा सहकारी उद्योग कहा जाता है।
4. भारत के चार प्रमुख लौह-इस्पात उद्योग केन्द्रों के नाम लिखिए। (BSEB, 2020) अथवा, उत्तर भारत के दो लौह इस्पात उद्योग केन्द्रों के नाम लिखिए। (BSEB, 2023)
उत्तर:- उत्तर भारत में भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (SAIL) के स्वामित्व में सार्वजनिक क्षेत्र के निम्नांकित संयंत्र हैं-
(i) दुर्गापुर एकीकृत इस्पात संयंत्र, दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल),
(ii) राउरकेला एकीकृत इस्पात संयंत्र, राउरकेला (ओडिशा),
(iii) भिलाई एकीकृत इस्पात संयंत्र, भिलाई (छत्तीसगढ़),
(iv) बोकारो एकीकृत इस्पात संयंत्र, बोकारो (झारखण्ड),
(v) इण्डियन आयरन एण्ड स्टील कम्पनी, बर्नपुर (पश्चिम बंगाल)।
5. गुजरात के चार प्रमुख सूती वस्त्र उद्योग केन्द्रों के नाम बताइए। (BSEB, 2019, 23) अथवा भारत में सूती वस्त्र उद्योग के वितरण का वर्णन कीजिए।
उत्तर:-
उत्पादक राज्य | सूती वस्त्र उद्योग के प्रमुख केन्द्र |
(1) महाराष्ट्र | मुम्बई, शोलापुर तथा नागपुर |
(2) गुजरात | अहमदाबाद, वड़ोदरा, सूरत, राजकोट, पोरबन्दर। |
(3) तमिलनाडु | कोयम्बटूर, सलेम, मदुरै तथा तूतीकोरिन। |
(4) उत्तर प्रदेश | कानपुर, लखनऊ, वाराणसी तथा आगरा। |
(5) कर्नाटक | बैंगलुरु, मैसूरूर, हुब्बली तथा बेल्लारी |
6. चीनी उद्योग एक मौसमी उद्योग क्यों है?
उत्तर:- चीनी उद्योग का सर्वप्रमुख कच्चा माल गन्ना है। गन्ना वर्ष के एक निश्चित मौसम में उत्पादित किया जाता है। वस्तुतः कच्चे माल (गन्ना) के मौसमी होने के कारण चीनी उद्योग एक मौसमी उद्योग है।
7. पेट्रो-रासायनिक उद्योग के लिए कच्चा माल क्या है? इस उद्योग के कुछ उत्पादों के नाम बताइए।
उत्तर:- पेट्रो-रासायनिक उद्योग का कच्चा माल अशोधित पेट्रोल (खनिज तेल) होता है। प्लास्टिक, पॉलिमर रेशे तथा रेशों से निर्मित पदार्थ, संश्लिष्ट तन्तु (कृत्रिम रेशे) तथा कृत्रिम रबड़ इस उद्योग के प्रमुख उत्पाद हैं।
8. भारत में चीनी उद्योग के स्थानीयकरण कारकों को समझाइए ।
उत्तर:- चीनी उद्योग की स्थानीयकरण के कारक - यदि गन्ने को काटने के 24 घण्टे के अन्दर चीनी मिलों में इसका रस निकाल लिया जाता है तो इससे चीनी की मात्रा अधिक प्राप्त होती है। इसके बाद जैसे-जैसे समय बीतता चला जाता है, वैसे-वैसे गन्ने में चीनी का प्रतिशत कम होता चला जाता है। यही कारण है कि भारत की अधिकांश चीनी मिलें गन्ना उत्पादक क्षेत्रों के समीप ही स्थापित मिलती हैं।
9. पेट्रो रसायन क्या है?
उत्तर:- पेट्रो रसायन वे होते हैं जो पेट्रोलियम से प्राप्त किए जाते हैं। इस उद्योग के लिए खनिज तेल तथा प्राकृतिक गैस कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त होते हैं। विभिन्न प्रकार की चिकनाई (नोट: यहाँ वाक्य अधूरा है)।
10. भारत में सॉफ्टवेयर उद्योग के प्रमुख केन्द्रों के नाम लिखिए।
उत्तर:- भारत सरकार ने सॉफ्टवेयर उद्योग के विकास के लिए अनेक सॉफ्टवेयर पार्क बनाए हैं, जिनमें - श्रीनगर, शिमला, मोहाली, देहरादून, दिल्ली, नोएडा, जयपुर, लखनऊ, कानपुर, गुवाहाटी, इन्दौर, गाँधीनगर, नवी मुम्बई, पुणे, भुवनेश्वर, हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, मनिपाल, मैसूरू तथा तिरुवन्तपुरम् कुछ प्रमुख केंद्र हैं।
11. "तीव्र व सक्षम परिवहन प्रणाली औद्योगिक विकास के लिए अत्यावश्यक है।" इस कथन का विश्लेषण कीजिए। (BSEB, 2023)
उत्तर:- प्रत्येक उद्योग में कच्चे माल की आपूर्ति को स्रोतों से कारखानों तक तथा निर्मित वस्तुओं को कारखानों से बाजार या उपभोग केन्द्रों तक लाने-ले जाने के लिए तीव्र और सक्षम परिवहन की आवश्यकता होती है। अतः उद्योगों का विकास उन्हीं स्थानों पर होता है, जहाँ यातायात की पर्याप्त सुविधाएँ उपलब्ध हैं। रेल या सड़क एवं पत्तन उद्योग की स्थापना के लिए बहुत उपयुक्त केन्द्र माने जाते हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न:-
1. भारत के किसी प्रदेश विशेष में उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारकों का उदाहरणों सहित वर्णन कीजिए। (BSEB, 2018)
उत्तर:-
(I) कच्चा माल - वैसे उद्योग जो भारह्रास वाले कच्चे माल का उपयोग करते हैं उसके लिए कच्चे माल की निकट उपलब्धता अति आवश्यक है। चीनी मिलें, लुगदी उद्योग, ताँबा प्रगलन, आइरन उद्योग अपने कच्चे माल प्राप्ति के स्थानों के निकट स्थापित किए जाते हैं।
(II) शक्ति - किसी भी उद्योग के लिए शक्ति एक महत्वपूर्ण कारक है। इसलिए उद्योगों की स्थापना के लिए शक्ति की आपूर्ति पहले ही सुनिश्चित कर दी जाती है। ऐलुमिनियम और कृत्रिम नाइट्रोजन निर्माण उद्योग की स्थापना शक्ति के स्रोत के निकट ही की जाती है। ये अधिक शक्ति उपयोग करने वाले उद्योग हैं।
(III) बाजार - निर्मित माल की खपत बाजारों के माध्यम से होती है। बाजार की निकटता मूल्य के निर्धारण को भी प्रभावित करती है। भारी मशीन, मशीन के औजार, भारी रसायन उद्योगों की स्थापना उच्च माँग वाले क्षेत्रों के निकट की जाती है।
(IV) परिवहन - विकसित परिवहन साधन के बिना कोई भी किसी भी प्रदेश में उद्योग की स्थापना नहीं की जा सकती है।
(V) श्रम - उद्योगों को कुशल और अकुशल दोनों प्रकार के श्रमिकों की आवश्यकता होती है। भारत में श्रम बहुत गतिशील है तथा अधिक जनसंख्या होने के कारण बड़ी संख्या में उपलब्ध है।
2. भारत में सूती वस्त्र उद्योग के स्थानीयकरण को प्रभावित करने वाले कारकों की संक्षेप में विवेचना करते हुए प्रमुख सूती वस्त्र उत्पादक केन्द्रों का विवरण दीजिए। (BSEB, 2019)
उत्तर:- भारत में सूती वस्त्र उद्योग के स्थानीयकरण को प्रभावित करने वाले कारकों में - कच्चे माल की स्थानीय उपलब्धता, सस्ते कुशल श्रमिकों की स्थानीय उपलब्धता, बाजार, सस्ती जल विद्युत शक्ति की उपलब्धता, स्थानिक निवेश तथा पत्तन की सुविधा जैसे कारक प्रमुख हैं।
✓ कपास एक शुद्ध कच्चा माल है जिसका वजन निर्माण प्रक्रिया में घटता नहीं है। इसलिए भारत के अधिकांश सूती वस्त्र उद्योग कपास उत्पादक क्षेत्रों के समीप ही स्थापित किए गए हैं।
✓ वर्तमान में सूती वस्त्र उद्योग को बाजार में या बाजार के समीप स्थापित करने की प्रवृत्ति मिलती है तथा बाजार की माँग यह निर्धारित करती है कि उद्योग में किस प्रकार की कपड़े का उत्पादन होना चाहिए।
✓ जल विद्युत शक्ति के विकास से सूती वस्त्र मिलों को कपास उत्पादक क्षेत्रों से दूर स्थापित करने में सहयोग मिला। तमिलनाडु राज्य की अधिकांश सूती मिलें सस्ती जलविद्युत के उपलब्धता के कारण ही स्थापित हुई हैं।
✓ सस्ते कुशल श्रमिकों की स्थानीय उपलब्धता के आधार पर उज्जैन, भरूच, आगरा, कोयम्बटूर तथा तिरुनेलवेली नामक स्थानों पर सूती मिलों की स्थापना की गई।
✓ स्थानिक निवेश ने मुम्बई तथा कानपुर नगरों में सूती मिलों की स्थापना को बल प्रदान किया, जबकि पत्तन की सुविधा के कारण कोलकाता में सूती वस्त्र उद्योग स्थापित की गई।
✓ वर्तमान में भारत के प्रमुख सूती वस्त्र उत्पादक राज्यों के निम्नलिखित केंद्रों पर सूती वस्त्र उद्योग कार्यरत हैं-
(i) गुजरात - अहमदाबाद, बड़ोदरा, सूरत, राजकोट तथा पोरबंदर,
(ii) महाराष्ट्र - मुम्बई, पुणे, जलगाँव, औरंगाबाद, सांगली, कोल्हापुर, शोलापुर, नागपुर
(iii) कर्नाटक - हुब्बली, मैसूरू, बेंगलुरु, देवानगिरी तथा बेल्लारी,
(iv) मध्य प्रदेश - इन्दौर, उज्जैन, देवास, बरहानपुर तथा ग्वालियर,
(v) तमिलनाडु - चेन्नई, कोयम्बटूर, तिरुनेलवेली तथा तूतीकोरिन
(vi) आन्ध्र प्रदेश - हैदराबाद, वारंगल तथा गुंटूर
(vii) पश्चिम बंगाल - मुर्शिदाबाद, हावड़ा, हुगली तथा कोलकाता।
(viii) उत्तर प्रदेश - कानपुर, लखनऊ, अलीगढ़, आगरा, मुरादाबाद तथा सहारनपुर एवं
(ix) दिल्ली।
3. भारत में लौह इस्पात के स्थानीयकरण के कारण लिखिए। अथवा, भारत में लौह इस्पात उद्योग का माल, ऊर्जा, बाजार एवं परिवहन के सन्दर्भ में वर्णन कीजिए। (BSEB, 2012)
उत्तर:- भारत में लौह-इस्पात उद्योग के स्थानीयकरण को मुख्यतः कच्चा माल, ऊर्जा, बाजार और परिवहन जैसे कारक प्रभावित करते हैं। लौह अयस्क और कोयला इस उद्योग के मुख्य कच्चे पदार्थ हैं, जो भारी होते हैं और इनके लंबी दूरी तक परिवहन में अधिक लागत आती है। इसलिए इस उद्योग को उन क्षेत्रों में स्थापित किया जाता है जहाँ ये संसाधन पास में उपलब्ध हों, जैसे झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़।
बाजार की निकटता भी आवश्यक होती है ताकि उत्पादों को कम लागत में उपभोक्ताओं तक पहुँचाया जा सके। परिवहन साधनों की सुविधा जैसे रेलवे, सड़क और बंदरगाह भी स्थानीयकरण को प्रभावित करते हैं। इसके अतिरिक्त सस्ती भूमि, स्वच्छ जल, कुशल श्रमिक, पूंजी और सहायक खनिज (जैसे चूना पत्थर) की उपलब्धता भी उद्योग की अवस्थिति निर्धारित करने में सहायक होती है।
Extra:- औद्योगिक प्रदेश और जिले
मुख्य औद्योगिक प्रदेश-8
(1) मुंबई-पुणे प्रदेश
(2) हुगली प्रदेश
(3) बेंगलुरु-तमिलनाडु प्रदेश
(4) गुजरात प्रदेश
(5) छोटानागपुर प्रदेश
(6) विशाखापट्नम-गुंटूर प्रदेश
(7) गुरुग्राम-दिल्ली-मेरठ
(8) कोलम-तिरुवनंतपुरम प्रदेश।
लघु औद्योगिक प्रदेश (13)
(1) अंबाला-अमृतसर
(2) सहारनपुर-मुजफ्फरनगर-बिजनौर
(3) इंदौर-देवास-उज्जैन
(4) जयपुर-अजमेर
(5) कोल्हापुर-दक्षिणी कन्नड़
(6) उत्तरी मालाबार
(7) मध्य मालाबार
(8) अदीलाबाद-निजामाबाद
(9) इलाहाबाद-वाराणसी-मिर्जापुर
(10) भोजपुर-मुंगेर
(11) दुर्ग-रायपुर
(12) बिलासपुर-कोरबा
(13) ब्रह्मपुत्र घाटी।
औद्योगिक जिले (15)
(1) कानपुर
(2) हैदराबाद
(3) आगरा
(4) नागपुर
(5) ग्वालियर
(6) भोपाल
(7) लखनऊ
(8) जलपाई गुड़ी
(9) कटक
(10) गोरखपुर
(11) अलीगढ़
(12) कोटा
(13) पूर्णिया
(14) जबलपुर
(15) बरेली।
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