12th Home science chapter 2 स्वच्छता subjective

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अध्याय - 2. स्वच्छता

Q17. प्रदूषित जल / जल प्रदूषण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

  • उत्तर: जल ही जीवन है, लेकिन जब नदियों, झीलों और तालाबों के साफ पानी में फैक्ट्रियों के गंदे पदार्थ, हानिकारक रसायन, सीवर का पानी और फसलों में डाली जाने वाली कीटनाशक दवाइयाँ मिल जाती हैं, तो पानी गंदा और जहरीला हो जाता है। इसी को जल प्रदूषण कहते हैं।

  • असर: प्रदूषित जल पीने से पानी की गुणवत्ता खराब हो जाती है। इससे इंसानों में हैजा, टाइफाइड और पीलिया जैसी बीमारियाँ फैलती हैं और जलीय जीवों को भारी नुकसान पहुँचता है।

Q18. वायु प्रदूषण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

  • उत्तर: हवा में कई गैसें सही अनुपात में मौजूद रहती हैं जिससे वायु शुद्ध रहती है। लेकिन जब गाड़ियों और फैक्ट्रियों का धुँआ, हानिकारक गैसें और धूल-मिट्टी के कण हवा में मिलकर इस संतुलन को बिगाड़ देते हैं, तो वायु प्रदूषित हो जाती है।

  • असर: इससे हवा में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है, जिससे सांस लेने में दिक्कत, दमा (Asthma), आँखों में जलन और स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

Q19. जल पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

  • उत्तर: जल पृथ्वी पर जीवन के लिए सबसे आवश्यक और अनमोल प्राकृतिक संसाधन है।

  • विशेषता: शुद्ध जल पूरी तरह से रंगहीन, गंधहीन और स्वादहीन होता है। हमारे शरीर का लगभग 70% हिस्सा पानी से ही बना है।

  • उपयोगिता: जीवित रहने के लिए पानी पीना बेहद जरूरी है। इसके अलावा खाना पकाने, नहाने, कपड़े साफ करने, और खेती के कामों के लिए भी जल की आवश्यकता होती है। पानी के बिना जीवन संभव नहीं है।



Q20. रेडियोधर्मी प्रदूषण के कारण एवं उसे रोकने के उपायों पर प्रकाश डालिए।

  • उत्तर: रेडियोधर्मी प्रदूषण तब होता है जब परमाणु पदार्थों से निकलने वाली खतरनाक किरणें (जैसे अल्फा, बीटा, गामा) हवा, पानी और मिट्टी में मिल जाती हैं। ये किरणें इंसानों और जीवों के शरीर के अंदर तक बुरा असर डालती हैं, जिससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियाँ और आनुवंशिक बदलाव हो सकते हैं।

  • मुख्य कारण:

  • परमाणु बमों का परीक्षण और विस्फोट होना।

  • परमाणु बिजलीघरों में हथियारों या ईंधनों का निर्माण।

  • परमाणु कचरे को बिना सही सुरक्षा के खुले में फेंक देना।

  • रोकने के उपाय:

  • परमाणु परीक्षणों पर पूरी दुनिया में रोक लगनी चाहिए।

  • परमाणु हथियारों को बनाने पर पाबंदी हो।

  • रेडियोधर्मी कचरे को गहरे गड्ढों या सुरक्षित बक्सों में बंद करके जमीन के नीचे सही तरीके से दबाना चाहिए।

Q21. शुद्ध जल के गुणों का उल्लेख कीजिए।

  • उत्तर: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार पीने के साफ और शुद्ध जल में निम्नलिखित खूबियाँ होनी चाहिए:

  • जल में किसी भी तरह के बीमारी फैलाने वाले कीटाणु या बैक्टीरिया नहीं होने चाहिए।

  • पानी में आर्सेनिक, सीसा (लेड) और पारा (मरकरी) जैसे जहरीले तत्व तय मात्रा से ज्यादा नहीं होने चाहिए।

  • जल में किसी भी प्रकार के वायरस नहीं होने चाहिए।

  • पानी देखने में बिल्कुल साफ होना चाहिए और उसमें कोई गंदगी या कचरा नहीं तैरना चाहिए।

  • पानी में कोई भी नुकसानदेह रसायन नहीं मिले होने चाहिए।

  • पीने के पानी में ज्यादा खारापन (कड़वाहट) नहीं होना चाहिए, वह स्वाद में सामान्य हो।

Q22. ग्रामीण स्वच्छता योजना तैयार करने के चरण बताइए।

  • उत्तर: ग्राम पंचायत द्वारा अपने गाँव को साफ-सुथरा बनाने के लिए योजना तैयार करने के मुख्य चरण इस प्रकार हैं:

  • गाँव की स्थिति जानना: सबसे पहले गाँव का सर्वे करके यह पता लगाना कि कहाँ ज्यादा गंदगी है और समस्या कितनी बड़ी है।

  • सही योजना बनाना: स्वच्छता में सुधार करने के लिए सही नीतियां और तरीके तय करना (जैसे कहाँ कूड़ेदान रखना है, कहाँ नाली बनानी है)।

  • बजट का अनुमान: इन सब कामों को करने में कितना पैसा खर्च होगा, इसका एक अंदाजा लगाना।

  • संसाधन और धन जुटाना: योजना को शुरू करने के लिए जरूरी सामान, मजदूर और सरकारी फंड या पैसों का इंतजाम करना।

Q23. ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।

  • उत्तर: ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गाँवों में साफ-सफाई को बढ़ावा देना और ग्रामीणों को बीमारियों से बचाकर स्वस्थ रखना है।

  • इस कार्यक्रम के तहत कम खर्च में बनने वाले घरेलू शौचालयों (लैट्रिन) के निर्माण पर जोर दिया गया ताकि कोई भी बाहर शौच न जाए।

  • ग्राम पंचायतों को गाँव में शुद्ध पीने का पानी और नालियों की सफाई रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

  • लोगों को स्वच्छता के फायदों के बारे में समझाया गया और पुराने गंदे शौचालयों को नए साफ शौचालयों में बदला गया, जिससे गाँवों में बीमारियाँ बहुत कम हो गईं।

Q24. पर्यावरण का परिभाषा लिखे।

  • उत्तर: हमारे चारों तरफ का वह प्राकृतिक वातावरण, जो हमें चारों ओर से घेरे हुए है और जो हमारे जीवन, रहन-सहन और कार्य करने की क्षमता को प्रभावित करता है, उसे ही हम पर्यावरण कहते हैं। इसमें हवा, पानी, मिट्टी, पेड़-पौधे और जीव-जंतु सब शामिल हैं।

Q25. पर्यावरण प्रदूषण किसे कहते हैं।

  • उत्तर: जब हमारे पर्यावरण के मुख्य तत्वों (जैसे हवा, पानी और मिट्टी) में कुछ अनचाहे और हानिकारक तत्व मिल जाते हैं, जिससे उनकी शुद्धता खत्म हो जाती है, तो उसे पर्यावरण प्रदूषण कहते हैं। यह प्रदूषण इंसानों, जानवरों और पेड़-पौधों सभी के स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसानदायक होता है।

Q26. स्वच्छता पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

  • उत्तर: स्वच्छता का सीधा मतलब है— अपने शरीर, अपने घर और अपने आसपास के माहौल को बिल्कुल साफ और कीटाणुरहित रखना।

  • स्वच्छता का मतलब सिर्फ झाड़ू लगाना या गंदगी हटाना नहीं है, बल्कि अपनी अच्छी आदतें अपनाना भी है।

  • जैसे रोज़ नहाना, साफ कपड़े पहनना, खाना खाने से पहले हाथ धोना, साफ पानी पीना और घर का कचरा सही जगह फेंकना।

  • ये अच्छी आदतें हमें खतरनाक कीटाणुओं और बीमारियों से बचाती हैं और हमारे जीवन को खुशहाल बनाती हैं।

Q27. व्यक्तिगत स्वच्छता पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

  • उत्तर: व्यक्तिगत स्वच्छता (Personal Hygiene) का मतलब है अपने खुद के शरीर को साफ और स्वस्थ रखना।

  • इसके तहत रोज़ अच्छी तरह नहाना, अपने चेहरे, बालों, नाखूनों और दांतों की सफाई करना और हमेशा साफ-सुथरे कपड़े पहनना शामिल है।

  • कोई भी काम करने के बाद या बाहर से घर आने पर हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना बहुत जरूरी होता है, ताकि हाथों के जरिए कीटाणु हमारे पेट में न जाएं और हम बीमार न पड़ें।

Q28. ग्रामीण स्वच्छता पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

  • उत्तर: ग्रामीण स्वच्छता का मतलब पूरे गाँव को साफ-सुथरा रखना और ग्रामीणों में स्वच्छता की अच्छी आदतें डालना है ताकि गाँव का हर व्यक्ति स्वस्थ रहे।

  • इसका मुख्य मकसद गाँव के लोगों को गंदगी से होने वाली बीमारियों (जैसे मलेरिया, हैजा) से बचाना, गाँव के पर्यावरण को सुरक्षित रखना और सबको एक बेहतर और सुंदर जीवन देना है।

Q29. ग्रामीण स्वच्छता की विशेषता का वर्णन करें।

  • उत्तर: एक साफ-सुथरे और आदर्श स्वच्छ गाँव की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित होती हैं:

  • गाँव के सभी लोग शौचालय का इस्तेमाल करते हैं और कोई भी खुले में या बाहर शौच करने नहीं जाता।

  • गाँव के हर परिवार को पीने और खाना पकाने के लिए साफ और सुरक्षित पानी मिलता है।

  • घरों और गलियों का कचरा इधर-उधर फेंकने के बजाय एक निश्चित और सही जगह पर जमा किया जाता है और उसका निपटारा होता है।

  • गाँव के लोग व्यक्तिगत सफाई पर ध्यान देते हैं, जैसे भोजन से पहले हाथ धोना, अपने घर और आसपास की नालियों को साफ रखना।

Q30. स्वच्छ भारत अभियान पर टिप्पणी लिखिए।

  • उत्तर: स्वच्छ भारत अभियान भारत सरकार की एक बहुत बड़ी राष्ट्रीय स्वच्छता योजना है, जिसे 2 अक्टूबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर शुरू किया था।

  • उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य साल 2019 तक पूरे देश को साफ-सुथरा और खुले में शौच से मुक्त (ODF) बनाना था।

  • उपलब्धि: इस अभियान के तहत पूरे देश में 10 करोड़ से भी ज्यादा शौचालयों का निर्माण करके भारत को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया गया।


लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

प्रश्न् 1. पर्यावरण की परिभाषा लिखिए।

  • उत्तर: हमारे चारों तरफ का वह प्राकृतिक वातावरण (जैसे- हवा, पानी, मिट्टी, पेड़-पौधे और जीव-जंतु) जो हमें चारों ओर से घेरे हुए है और हमारे जीवन को प्रभावित करता है, उसे पर्यावरण कहते हैं।

प्रश्न 2. पर्यावरण प्रदूषण किसे कहते हैं?

  • उत्तर: जब पर्यावरण में हवा, पानी या मिट्टी जैसी चीजों में हानिकारक और गंदे तत्व मिल जाते हैं, जिससे वे इस्तेमाल करने लायक नहीं रहते, तो उसे पर्यावरण प्रदूषण कहते हैं। यह प्रदूषण इंसानों, जानवरों और पेड़-पौधों के स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसानदायक होता है।

प्रश्न 3. स्वच्छता पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

  • उत्तर: स्वच्छता का मतलब अपने शरीर, अपने घर और अपने आसपास के माहौल को साफ-सुथरा और सुरक्षित रखना है। स्वच्छता केवल गंदगी हटाना ही नहीं है, बल्कि अच्छी आदतें अपनाना भी है; जैसे- रोज नहाना, खाना खाने से पहले हाथ धोना, साफ पानी पीना और घर-आंगन को साफ रखना। ये आदतें हमें बीमारियों से बचाती हैं।

प्रश्न 4. व्यक्तिगत स्वच्छता पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

  • उत्तर: व्यक्तिगत स्वच्छता (Personal Hygiene) का मतलब है अपने खुद के शरीर को साफ और तंदुरुस्त रखना। इसके तहत रोज़ नहाना, चेहरे और बालों को साफ रखना, समय पर नाखून काटना और साफ-सुथरे कपड़े पहनना आता है। बाहर से आने या कोई काम करने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना बहुत जरूरी है ताकि कीटाणु शरीर में न जा सकें।

प्रश्न 5. ग्रामीण स्वच्छता पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

  • उत्तर: ग्रामीण स्वच्छता का मतलब है गाँवों में साफ-सफाई की अच्छी आदतें और सुविधाएं विकसित करना। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को बीमारियों से बचाना, शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना और खुले में शौच को रोकना है। इससे गाँव का पर्यावरण सुरक्षित रहता है और लोगों का जीवन खुशहाल बनता है।

प्रश्न 6. ग्रामीण स्वच्छता की विशेषता का वर्णन करें।

  • उत्तर: एक स्वच्छ और आदर्श गाँव की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित होती हैं:

  • गाँव के सभी लोग शौचालय का उपयोग करते हैं और कोई भी खुले में शौच नहीं जाता।

  • सभी ग्रामीणों को पीने के लिए साफ और सुरक्षित पानी मिलता है।

  • घर और गलियों का कचरा इधर-उधर फेंकने के बजाय एक सही जगह पर जमा किया जाता है।

  • लोग रोज हाथ धोते हैं, भोजन को ढककर रखते हैं और अपने घरों की नियमित सफाई करते हैं।

  • गाँव की सड़कें, नालियाँ और सार्वजनिक स्थान हमेशा साफ-सुथरे रहते हैं।

प्रश्न 7. स्वच्छ भारत अभियान पर टिप्पणी लिखिए।

  • उत्तर: स्वच्छ भारत अभियान भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक बहुत बड़ी सफाई योजना है। इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर की थी। इसका मुख्य उद्देश्य पूरे देश को साफ-सुथरा बनाना और खुले में शौच की प्रथा को पूरी तरह खत्म करना था। इस अभियान के तहत देश भर में 10 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण करके भारत को खुले में शौच मुक्त (ODF) घोषित किया गया।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

प्रश्न 1. पर्यावरण प्रदूषण के कितने प्रकार होते हैं? सभी का वर्णन करें।

  • उत्तर: पर्यावरण प्रदूषण मुख्य रूप से पाँच प्रकार के होते हैं, जो निम्नलिखित हैं:

  • वायु प्रदूषण (Air Pollution): कारखानों और गाड़ियों से निकलने वाले धुएँ, और कचरा जलाने से हवा में जहरीली गैसें मिल जाती हैं, जिससे वायु प्रदूषित होती है। इससे सांस की बीमारियाँ होती हैं।

  • जल प्रदूषण (Water Pollution): घरों की नालियों का गंदा पानी, प्लास्टिक और कारखानों का रासायनिक कचरा जब नदियों, तालाबों या समुद्र में डाल दिया जाता है, तो पानी दूषित हो जाता है। इसे पीने से पीलिया और हैजा जैसी बीमारियाँ होती हैं।

  • भूमि/मृदा प्रदूषण (Soil Pollution): खेतों में बहुत अधिक रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल करने से या प्लास्टिक का कचरा मिट्टी में फेंकने से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता कम हो जाती है, इसे भूमि प्रदूषण कहते हैं।

  • ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution): गाड़ियों के तेज हॉर्न, लाउडस्पीकर और कारखानों की मशीनों से निकलने वाली अत्यधिक तेज आवाज को ध्वनि प्रदूषण कहते हैं। इससे मानसिक तनाव और सुनने की क्षमता कमजोर होने जैसी समस्याएँ होती हैं।

  • आहार/भोजन प्रदूषण (Food Pollution): खाने-पीने की चीजों में धूल-मिट्टी, मक्खियाँ, हानिकारक रसायन या मिलावटी चीजें मिल जाने से भोजन दूषित हो जाता है। ऐसा भोजन खाने से फूड पॉइजनिंग और पेट की बीमारियाँ होती हैं।

यहाँ आपकी नई इमेज के सभी बचे हुए प्रश्नों, कारणों और पैराग्राफ को बहुत ही सरल, आसान और याद करने योग्य हिंदी भाषा में लिखा गया है:

1. पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार (Types of Environmental Pollution)

वायु प्रदूषण (Air Pollution): जब हवा में धूल, धुआँ, हानिकारक गैसें और विषैले पदार्थ मिल जाते हैं, तो उसे वायु प्रदूषण कहते हैं।

जल प्रदूषण (Water Pollution): जब नदियों, तालाबों, सागरों या अन्य पानी के स्रोतों में गंदगी, कारखानों के रसायन और कचरा मिल जाते हैं, तो पानी दूषित हो जाता है, इसे जल प्रदूषण कहते हैं।

मृदा प्रदूषण (Soil Pollution): जब जमीन या मिट्टी में प्लास्टिक, रासायनिक खाद, कचरा या अन्य नुकसानदायक तत्व मिलकर उसकी उपजाऊ शक्ति और गुणवत्ता को कम कर देते हैं, तो उसे मृदा/मिट्टी प्रदूषण कहते हैं।

ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution): जब हमारे आसपास का शोर (गाड़ियों, लाउडस्पीकर या मशीनों की आवाज) जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है, तो उसे ध्वनि प्रदूषण कहते हैं।

रेडियोधर्मी प्रदूषण (Radioactive Pollution): जब पर्यावरण में परमाणु कचरे या हानिकारक किरणों (X-rays, UV rays) के तत्व फैल जाते हैं, तो उसे रेडियोधर्मी या विकिरण प्रदूषण कहते हैं।

2. वायु प्रदूषण के मुख्य कारण (Causes of Air Pollution)

  • दहन (जलना): कोयला, पेट्रोल और डीजल जैसे जीवाश्म ईंधनों के जलने से हवा में जहरीली गैसें फैलती हैं।

  • वनों की कटाई (Deforestation): पेड़ हवा से कार्बन डाइऑक्साइड सोखते हैं और ऑक्सीजन देते हैं। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से हवा में कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ रही है।

  • वाहनों का धुआँ: सड़कों पर चलने वाली गाड़ियों से निकलने वाला जहरीला धुआँ हवा को सबसे ज्यादा गंदा करता है।

  • जनसंख्या वृद्धि: आबादी बढ़ने के कारण फैक्ट्रियों, गाड़ियों और ऊर्जा की मांग बढ़ रही है, जिससे प्रदूषण भी बढ़ रहा है।

  • रासायनिक कारखाने: फैक्ट्रियों से निकलने वाली गैसें और धूल-कण सीधे हवा में मिलकर उसे जहरीला बना देते हैं।

  • खनन और रेडियोधर्मी पदार्थ: जमीनी खुदाई (खनन) के दौरान उड़ने वाली धूल और परमाणु कचरे का सही निपटान न होना भी हवा को प्रदूषित करता है।

3. पर्यावरण प्रदूषण के अन्य बड़े कारण

  • फैक्ट्रियों का कचरा: फैक्ट्रियों से निकलने वाले गंदे रसायन और कचरे को जब नदियों में बहाया जाता है या जमीन पर फेंका जाता है, तो पानी और मिट्टी दोनों गंदे हो जाते हैं।

  • रसायनों का अधिक उपयोग: खेती में फसलों को बचाने के लिए बहुत ज्यादा रासायनिक खादों और कीटनाशकों का इस्तेमाल करना मिट्टी और भूजल (जमीन के नीचे के पानी) को खराब करता है।

  • कचरा प्रबंधन में लापरवाही: जब सूखे और गीले कचरे या ठोस कचरे को सही तरीके से नष्ट नहीं किया जाता, तो वह सड़कर पर्यावरण को प्रदूषित करता है।

  • जंगलों की कटाई: इससे प्रकृति का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे वायु, जल और भूमि प्रदूषण तेजी से बढ़ता है।

4. ग्राम पंचायत द्वारा ग्रामीण स्वच्छता योजना तैयार करने के चरण (Steps for Village Sanitation Plan)

गाँव को साफ-सुथरा बनाने के लिए ग्राम पंचायत 4 मुख्य चरणों में काम करती है:

जानकारी इकट्ठा करना (समस्या को समझना): सबसे पहले यह पता लगाया जाता है कि गाँव में कितने लोग हैं, कितने घरों में शौचालय नहीं है, कचरा कहाँ फेंका जाता है और स्कूल-बाजारों में सफाई की क्या स्थिति है।

समाधान की योजना बनाना: इसके बाद प्लानिंग की जाती है कि शौचालय कहाँ बनेंगे, कचरा कहाँ जमा किया जाएगा और लोगों को सफाई के प्रति कैसे जागरूक किया जाएगा।

खर्च का अनुमान लगाना: योजना को पूरा करने में कुल कितना पैसा लगेगा, इसका एक बजट (अनुमान) तैयार किया जाता है।

संसाधन जुटाना: काम के लिए पैसे और जरूरी सामान कहाँ से आएंगे (जैसे- सरकारी योजनाओं से कितनी मदद मिलेगी और गाँव के लोगों का क्या सहयोग रहेगा), यह तय किया जाता है।

5. ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रमों का इतिहास (History of Rural Sanitation Programs)

भारत में गाँवों की सफाई के लिए समय-समय पर कई कार्यक्रम चलाए गए:

केंद्रीय ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम (1986-1999):

शुरुआत: राजीव गांधी सरकार द्वारा।

उद्देश्य: ग्रामीणों के जीवन स्तर को सुधारना, महिलाओं को सम्मान देना और गरीब परिवारों के लिए शौचालयों का निर्माण करना।

संपूर्ण स्वच्छता अभियान (1999-2012):

शुरुआत: अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा।

उद्देश्य: 2012 तक पूरे देश को खुले में शौच से मुक्त बनाना।

निर्मल भारत अभियान (2012-2014):

शुरुआत: मनमोहन सिंह सरकार द्वारा।

उद्देश्य: खुले में शौच की प्रथा को पूरी तरह समाप्त करना। (नोट: 2014 में इसका विलय 'स्वच्छ भारत अभियान' में कर दिया गया)।



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