12th History Chapter 6 भक्ति और सूफी परंपराएं subjective
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन का प्रारंभ किसने किया था? उनका जीवन परिचय दें।
उत्तर: उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन के प्रवर्तन का श्रेय स्वामी रामानंद को जाता है।
जन्म: उनका जन्म 1299 ई. में प्रयाग के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था।
शिक्षा: उनकी शिक्षा प्रयाग और वाराणसी में संपन्न हुई।
गुरु: उनके गुरु का नाम राघवानंद था।
शिष्य: उनके प्रमुख शिष्यों में कबीर और रैदास जैसे महान संत शामिल थे।
2. सगुण भक्ति परम्परा क्या है?
उत्तर: भक्ति की वह शाखा जिसमें ईश्वर के साकार रूप (निश्चित आकार) की उपासना की जाती है, उसे 'सगुण भक्ति' कहते हैं। इस परम्परा के अनुयायी मूर्ति पूजा, धार्मिक कर्मकांड और ईश्वर के अवतारों (जैसे राम, कृष्ण) में विश्वास रखते हैं।
प्रमुख संत: रामानंद, मीराबाई, सूरदास और तुलसीदास आदि।
3. सगुण एवं निर्गुण भक्ति में क्या अंतर है?
उत्तर: सगुण और निर्गुण भक्ति के बीच के मुख्य अंतर निम्नलिखित तालिका में दिए गए हैं:
विशेषता | सगुण भक्ति | निर्गुण भक्ति |
ईश्वर का स्वरूप | इसमें ईश्वर के साकार रूप (आकार) की पूजा की जाती है। | इसमें ईश्वर के निराकार रूप (बिना आकार) की उपासना की जाती है। |
मान्यताएँ | ये लोग मूर्ति पूजा, कर्मकांड और अवतारवाद में विश्वास करते हैं। | ये मूर्ति पूजा और अवतारवाद को नहीं मानते हैं। |
प्रमुख संत | रामानंद, सूरदास, मीराबाई, तुलसीदास। | कबीर दास, गुरु नानक देव, रैदास। |
4. नयनार कौन थे?
उत्तर: दक्षिण भारत में भगवान शिव के अनन्य भक्तों और अनुयायियों को नयनार कहा जाता था। दक्षिण भारत में भक्ति आंदोलन की शुरुआत मुख्य रूप से नयनार संतों के द्वारा ही की गई थी।
5. दो भक्ति स्त्री संतों के नाम बताइए।
उत्तर: भक्ति आंदोलन की दो प्रमुख स्त्री संत निम्नलिखित हैं:
अंडाल 2. कराइक्काल अम्मइयार
6. अंडाल और कराइक्काल अम्मइयार कौन थी?
उत्तर: * अंडाल: यह एक प्रसिद्ध अलवार (विष्णु भक्त) स्त्री संत थीं, जो स्वयं को भगवान विष्णु की प्रेयसी मानती थीं।
कराइक्काल अम्मइयार: यह एक प्रसिद्ध नयनार (शिव भक्त) स्त्री संत थीं, जिन्होंने कठिन तपस्या के माध्यम से भगवान शिव की आराधना की थी।
7. किन्हीं चार अलवार संतों के नाम लिखें?
उत्तर: प्रमुख अलवार (विष्णु भक्त) संतों के नाम इस प्रकार हैं:
अंडाल
तिरुमलीसई
नम्माल्वार
पेरियाल्वार (या कुलशेखर)
8. चार नयनार संतों के नाम लिखें?
अप्पार
संबंदर
सुंदरार
कराइक्काल अम्मइयार
9. वीर शैव/लिंगायत कौन थे?
12वीं शताब्दी में कर्नाटक में बसपन्ना नामक ब्राह्मण द्वारा चलाए गए नवीन भक्ति आंदोलन के अनुयायी 'वीरशैव' या 'लिंगायत' कहलाते हैं।
10. मीराबाई का संक्षिप्त परिचय दें।
जन्म: मीराबाई का जन्म 1498 ईस्वी में राजस्थान के मेड़ता में हुआ था।
पिता: उनके पिता मेड़ता के शासक रतन सिंह राठौड़ थे।
भक्ति: वे भगवान श्री कृष्ण की अनन्य भक्त थीं और उन्हें अपना पति मानती थीं।
विवाह: उनका विवाह भोजराज से हुआ था, परंतु असमय मृत्यु के कारण वे विधवा हो गईं।
गुरु: उनके गुरु संत रविदास थे।
11. खालसा पंथ की स्थापना किसने और कब की?
खालसा पंथ की स्थापना सिखों के 10वें गुरु गुरु गोविंद सिंह ने 1699 में बैसाखी के दिन आनंदपुर साहिब में की थी।
12. महाराष्ट्र में भक्ति आंदोलन के किन्हीं दो संतों के नाम लिखें।
नामदेव
तुकाराम
13. सूफीवाद से क्या तात्पर्य है?
सूफीवाद इस्लाम का एक आध्यात्मिक रहस्यवाद है। यह एक ऐसा धार्मिक संप्रदाय है जो ईश्वर की आध्यात्मिक खोज और ध्यान पर केंद्रित रहता है और भौतिकवाद (दुनियावी सुख-सुविधाओं) को नकारता है। प्रेम इनका मूल भाव है और संगीत, नृत्य व कविता इनकी आराधना के साधन हैं।
14. चार प्रमुख सूफी सिलसिलों के नाम लिखें।
चिश्ती सिलसिला
सुहरावर्दी सिलसिला
कादिरी सिलसिला
नक्सबंदी सिलसिला
15. सूफी सिलसिले के कितने वर्ग थे?
सूफी सिलसिले के दो मुख्य वर्ग थे:
बे-शरिया: वे सिलसिले जो इस्लामिक कानून (शरिया) का कड़ाई से पालन नहीं करते थे।
बा-शरिया: वे सिलसिले जो शरिया का पूरी तरह पालन करते थे।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. भक्ति आंदोलन पर एक लेख लिखें।
भक्ति आंदोलन मध्यकाल में भारत के सामाजिक और धार्मिक जीवन में सुधार लाने के लिए शुरू किया गया एक व्यापक आंदोलन था।
शुरुआत: इसकी शुरुआत दक्षिण भारत में नयनार (शिव भक्त) और अलवार (वैष्णव भक्त) संतों द्वारा की गई थी।
प्रसार: दक्षिण भारत से उत्तर भारत में इस आंदोलन को लाने का श्रेय स्वामी रामानंद को जाता है।
प्रमुख संत: रामानुज, रामानंद, चैतन्य महाप्रभु, कबीर, गुरुनानक, दादू, रैदास और वल्लभाचार्य जैसे संतों ने अपने उपदेशों से इसे आगे बढ़ाया।
मुख्य विशेषताएँ:
इस आंदोलन में धार्मिक सरलता और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण पर बल दिया गया।
जाति-पाति, ऊँच-नीच और छुआछूत जैसी सामाजिक कुरीतियों की कडी आलोचना की गई।
सती प्रथा, दास प्रथा और स्त्रियों की दयनीय स्थिति का विरोध किया गया।
उपदेशों के लिए जनसाधारण की भाषा का प्रयोग किया गया, जिससे आम जनता इससे जुड़ सकी।
2. भक्ति आंदोलन के प्रमुख प्रभावों/परिणामों का वर्णन कीजिए।
भक्ति आंदोलन के प्रमुख परिणाम निम्नलिखित रहे:
इससे हिंदू-मुस्लिम एकता को काफी बढ़ावा मिला।
समाज में व्याप्त भेदभाव और रूढ़िवादिता में कमी आई।
क्षेत्रीय भाषाओं और साहित्य का विकास हुआ।
4. सूफी आंदोलन पर प्रकाश डालो? या, सूफीवाद पर संक्षिप्त लेख लिखें।
सूफीवाद इस्लाम के भीतर एक आध्यात्मिक और उदारवादी विचारधारा है।
विचारधारा: यह ईश्वर की आंतरिक खोज और रूहानी सुकून पर जोर देता है। सूफी संत सादगीपूर्ण जीवन और भौतिक सुखों के त्याग में विश्वास रखते थे।
गुरु परंपरा: इसमें 'पीर' (गुरु) और 'मुरीद' (शिष्य) के संबंध का अत्यधिक महत्व है।
मानवीय संदेश: सूफीवाद ने प्रेम, भाईचारा और धार्मिक सहिष्णुता का संदेश दिया, जिससे समाज के सभी वर्गों में सद्भाव बढ़ा।
2. भक्ति आंदोलन के प्रमुख प्रभावों/परिणामों का वर्णन कीजिए?
उत्तर: भक्ति आंदोलन ने भारतीय समाज पर गहरा प्रभाव डाला, जिसके मुख्य परिणाम निम्नलिखित हैं:
हिंदू-मुस्लिम एकता: इस आंदोलन ने दोनों धर्मों के बीच आपसी समझ और एकता को बढ़ावा दिया।
स्त्रियों का सम्मान: समाज में महिलाओं की स्थिति में सुधार हुआ और उन्हें भक्ति मार्ग में बराबर का स्थान मिला।
जाति प्रथा में सुधार: जातिवाद की कठोरता में कमी आई और मानवीय समानता पर बल दिया गया।
हिंदुओं में नई आशा: विदेशी आक्रमणों के समय इस आंदोलन ने हिंदू समाज में एक नई उम्मीद और आत्मविश्वास का संचार किया।
गुरु का महत्व: समाज में गुरु के स्थान और उनके मार्गदर्शन के महत्व को पुनः स्थापित किया गया।
कर्मकांडों का विरोध: ब्राह्मणों के जटिल कर्मकांडों और आडंबरों को धक्का लगा और सरल भक्ति पर जोर दिया गया।
धार्मिक सहिष्णुता: विभिन्न धर्मों के प्रति उदारता और सहिष्णुता की भावना का विकास हुआ।
सिख धर्म का उदय: पंजाब में सिख धर्म की स्थापना हुई, जिसने समाज की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
साहित्यिक विकास: हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं का अत्यधिक विकास हुआ। तुलसीदास, कबीर और मीरा जैसे कवियों ने जनभाषा में रचनाएँ कीं।
3. गुरु नानक देव पर एक लेख लिखें।
उत्तर: गुरु नानक देव सिख धर्म के संस्थापक और एक महान समाज सुधारक थे।
जन्म: उनका जन्म 1469 ई. में पंजाब के गुजरांवाला जिले के तलवंडी (अब ननकाना साहिब) नामक ग्राम में हुआ था।
शिक्षा: उन्होंने सिख धर्म की नींव रखी और अपने शिष्य गुरु अंगद को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया।
उपदेश: उनके विचार 'अदि ग्रंथ साहिब' में संकलित हैं, जिन्हें 'गुरु बानी' कहा जाता है।
सिद्धांत: उन्होंने धार्मिक आडंबरों, मूर्ति पूजा और जाति-पाति का कड़ा विरोध किया। उन्होंने 'निर्गुण' (निराकार) ईश्वर की उपासना पर बल दिया और हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रबल समर्थक रहे।
4. सूफी मत के प्रमुख सिद्धांत क्या हैं?
उत्तर: सूफी विचारधारा के मुख्य सिद्धांत निम्नलिखित हैं:
सूफी संत रहस्यवादी होते हैं और बाहरी आडंबरों के बजाय आंतरिक शुद्धि पर जोर देते हैं।
ये लोग सांसारिक सुख-सुविधाओं और धन-दौलत के घोर विरोधी होते हैं।
मनुष्य के अच्छे कर्म, सरल जीवन और संयम को ही ईश्वर प्राप्ति का साधन माना जाता है।
सूफी संप्रदाय एकेश्वरवादी है (एक ही ईश्वर में विश्वास)।
मानवता की सेवा और परोपकार पर विशेष बल दिया जाता है।
सूफी मार्ग में 'पीर' (गुरु) का स्थान सर्वोपरि होता है।
ध्यान (Zikr) और संगीत (Sama) के माध्यम से ईश्वर से जुड़ने का प्रयास किया जाता है।
सूफियों ने अपने निजी अनुभवों के आधार पर कुरान की व्याख्या की।
वे पैगंबर मोहम्मद को 'इंसान-ए-कामिल' (पूर्ण मानव) मानकर उनकी शिक्षाओं का पालन करते हैं।
उनके अनुसार सभी जीवों में ईश्वर का वास है, इसलिए जीवों से प्रेम करना ही ईश्वर से प्रेम है।
5. चिश्ती संप्रदाय के प्रमुख संतों का परिचय दीजिए?
उत्तर: चिश्ती संप्रदाय के कुछ महान संत निम्नलिखित हैं:
ख्वाजा मुइनद्दीन चिश्ती: भारत में चिश्ती सिलसिले की शुरुआत इन्होंने ही की थी। इनकी प्रसिद्ध दरगाह अजमेर में है। इन्हें 'सुल्तान-उल-हिंद' (हिंद का आध्यात्मिक गुरु) की उपाधि दी गई।
शेख कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी: ये ख्वाजा मुइनद्दीन चिश्ती के प्रमुख शिष्य थे। ये इल्तुतमिश के शासनकाल के दौरान भारत आए थे। इनका जन्म 1173 ई. में हुआ था।
शेख निजामुद्दीन औलिया: इनका वास्तविक नाम मोहम्मद बिन अहमद था। अमीर खुसरो इनके सबसे प्रिय शिष्य थे। इन्हें 'महबूब-ए-इलाही' (ईश्वर का प्रिय) और 'सुल्तान-उल-औलिया' (संतों का राजा) कहा जाता है।
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