Sociology book 1 chapter 5 सामाजिक विषमता और बहिष्कार subjective

 Sociology book 1 chapter 5 सामाजिक विषमता और बहिष्कार subjective

अध्याय – 5: सामाजिक विषमता और बहिष्कार

प्रश्न 1. सीमान्तीकरण का क्या अर्थ है?

उत्तर: सीमान्तीकरण (Marginalization) एक ऐसी सामाजिक प्रक्रिया है जिसमें समाज के किसी विशेष समूह या वर्ग को मुख्य धारा से अलग कर हाशिये (किनारे) पर धकेल दिया जाता है। ऐसे लोग आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक लाभों से वंचित रह जाते हैं। यह एक नकारात्मक प्रक्रिया है जो भेदभाव को बढ़ावा देती है।

प्रश्न 2. साम्प्रदायिकता क्या है?

उत्तर: जब कोई व्यक्ति या समूह अपने धर्म या भाषा को अन्य सभी से श्रेष्ठ मानने लगता है और दूसरे धर्मों को अपना विरोधी या दुश्मन समझने लगता है, तो इस संकीर्ण मानसिकता को साम्प्रदायिकता कहते हैं। इसके कारण समाज में आपसी टकराव, अविश्वास और अलगाव पैदा होता है, जो सामाजिक एकता के लिए हानिकारक है।

प्रश्न 3. अल्पसंख्यक किसे कहा जाता है?

उत्तर: समाज में जिस समुदाय की जनसंख्या बहुमत (बहुसंख्यक) की तुलना में कम होती है, उसे अल्पसंख्यक कहा जाता है। भारत में मुख्य रूप से 6 समुदायों को अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त है: मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी।

प्रश्न 4. तीन तलाक की अवधारणा को स्पष्ट करें।

उत्तर: तीन तलाक एक ऐसी प्रथा थी जिसमें पति अपनी पत्नी को केवल तीन बार 'तलाक' बोलकर वैवाहिक संबंध समाप्त कर देता था। महिलाओं के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने 2019 में इस प्रथा को गैरकानूनी घोषित कर दिया है। अब इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध है और ऐसा करना दंडनीय अपराध है।

प्रश्न 5. अल्पसंख्यक समुदाय की चार समस्याओं का वर्णन करें।

उत्तर: अल्पसंख्यक समुदायों को समाज में मुख्य रूप से निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ता है:

सांस्कृतिक पहचान: अपनी विशिष्ट भाषा और संस्कृति को बचाए रखने में कठिनाई महसूस होना।

्धर्मिक बाधाएँ: अपने धर्म का पालन करने या रीति-रिवाजों को निभाने में कभी-कभी बाधाओं का आना।

कम राजनीतिक प्रतिनिधित्व: देश की राजनीति और निर्णय लेने वाली प्रक्रियाओं में उनकी संख्या या भागीदारी का कम होना।

सामाजिक टकराव: बहुसंख्यक समाज की परंपराओं के साथ सामंजस्य बिठाने में कभी-कभी तनाव या संघर्ष की स्थिति उत्पन्न होना।

प्रश्न 6. भारत के किन्हीं दो अल्पसंख्यक समुदाय के नाम को लिखें।

उत्तर: भारत के दो प्रमुख अल्पसंख्यक समुदाय निम्नलिखित हैं:

  • (i) मुस्लिम

  • (ii) सिख

प्रश्न 7. बिहार में अनुसूचित जातियों की संख्या कितनी है?

उत्तर: वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, बिहार राज्य में अनुसूचित जाति (SC) के अंतर्गत कुल 22 जातियाँ अधिसूचित हैं।


8. महिला सशक्तिकरण से आप क्या समझते हैं?

उत्तर:- महिला सशक्तिकरण का अर्थ है महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से इतना सक्षम बनाना कि वे अपने जीवन के निर्णय स्वयं ले सकें। इसका मुख्य उद्देश्य उनके मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करना है ताकि वे शिक्षा, रोजगार और समान अधिकारों के माध्यम से समाज में अपनी पहचान बना सकें और आत्मनिर्भर बन सकें।

9. बिहार की चार अनुसूचित जनजातियों के नाम लिखें।

उत्तर:- बिहार की चार प्रमुख अनुसूचित जनजातियाँ निम्नलिखित हैं:

(i) थारू, (ii) गोंड, (iii) संथाल, (iv) खड़िया।

10. मुस्लिम अल्पसंख्यकों की दो समस्याओं का उल्लेख करें।

उत्तर:- मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय की दो प्रमुख समस्याएँ इस प्रकार हैं:

  • शिक्षा का अभाव: आर्थिक तंगी और जागरूकता की कमी के कारण इस समुदाय का एक बड़ा हिस्सा उच्च और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित रह जाता है, जिससे उनके विकास के अवसर सीमित हो जाते हैं।

  • आधुनिकता एवं तार्किक सोच की कमी: समाज के कुछ हिस्सों में आधुनिक शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रति उदासीनता देखी जाती है, जिसके परिणामस्वरूप वे तकनीकी प्रगति की मुख्यधारा से पीछे रह जाते हैं।

11. लिंग समानता क्या है?

उत्तर:- लिंग समानता एक ऐसी स्थिति है जहाँ समाज में स्त्री और पुरुष दोनों को समान अधिकार, अवसर और सम्मान प्राप्त होता है। इसमें लिंग के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता और दोनों को विकास के बराबर मौके दिए जाते हैं।

12. लिंग असमानता क्या है? अथवा, लैंगिक विषमता का क्या अर्थ है?

उत्तर:- जब समाज में पुरुषों की तुलना में महिलाओं को कम महत्व दिया जाता है और उनके साथ अधिकारों या अवसरों के स्तर पर भेदभाव किया जाता है, तो उसे लिंग असमानता या लैंगिक विषमता कहते हैं। यह समाज में व्याप्त एक कुरीति है जो विकास में बाधा डालती है।

13. जनजातियों में बहुपत्नी विवाह के तीन कारणों का वर्णन करें।

उत्तर:- जनजातीय समाजों में बहुपत्नी विवाह (एक पुरुष की एक से अधिक पत्नियाँ) के तीन मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  1. लिंग अनुपात में अंतर: कुछ जनजातियों में स्त्रियों की संख्या पुरुषों की तुलना में अधिक होती है, जिससे सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए एक पुरुष एक से अधिक विवाह करता है।

  2. कामेच्छा की अधिकता: कुछ संस्कृतियों और जीवनशैली के प्रभाव स्वरूप पुरुषों में बहु-विवाह की प्रवृत्ति पाई जाती है।

  3. सामाजिक प्रतिष्ठा: कई जनजातीय समुदायों में अधिक पत्नियाँ होना व्यक्ति की आर्थिक संपन्नता, शक्ति और उच्च सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है।

14. जनजातीय धर्म की दो प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालें।

उत्तर:- जनजातीय धर्म की दो मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • प्रकृति और पूर्वजों की पूजा: जनजातीय लोग प्राकृतिक शक्तियों (जैसे सूर्य, चंद्रमा, पहाड़, नदियाँ) और अपने पूर्वजों को देवता मानकर उनकी आराधना करते हैं।

  • मौखिक एवं सरल परंपराएँ: इनका धर्म लिखित ग्रंथों के बजाय कहानियों, गीतों और मौखिक परंपराओं पर आधारित होता है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थानांतरित होती रहती हैं।

15. मंडल आयोग के दो प्रावधानों को लिखें।

उत्तर:- मंडल आयोग के दो प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:

OBC आरक्षण: अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के उम्मीदवारों के लिए केंद्र सरकार की नौकरियों में 27% आरक्षण का प्रावधान किया गया।

आरक्षण की सीमा: यह स्पष्ट किया गया कि कुल आरक्षण (SC, ST और OBC मिलाकर) की सीमा 50% से अधिक नहीं होनी चाहिए।

16. जनजातीय समाज में परिहास संबंधों की प्रकृति को लिखें।

उत्तर:- परिहास संबंध (Joking Relationships) जनजातीय समाज की एक अनूठी विशेषता है जिसमें विशिष्ट रिश्तेदारों के बीच हँसी-मजाक और छेड़खानी की सामाजिक अनुमति होती है।

  • यह रिश्ता आपसी प्रेम, घनिष्ठता और अनौपचारिकता को दर्शाता है।

  • ऐसे संबंध सामान्यतः देवर-भाभी, जीजा-साली या दादा-पोते के बीच देखे जाते हैं।

17. जनजातियों में प्रचलित किन्हीं दो निषेधों का वर्णन करें।

उत्तर:- जनजातियों में 'निषेध' (Taboo) का अर्थ उन कार्यों से है जिन्हें करना वर्जित माना जाता है:

  1. अन्तर्विवाही निषेध: अपनी ही उपजाति या गोत्र के भीतर विवाह करना कई जनजातियों में कड़ाई से वर्जित होता है।

  2. खाद्य निषेध: विशिष्ट पशुओं या पौधों (जो उनके 'टोटम' से जुड़े हों) को मारना या खाना धार्मिक रूप से निषेध माना जाता है।


17. जनजातियों में प्रचलित किन्हीं दो निषेधों का वर्णन करें।

उत्तर:- जनजातीय समाज में सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ दूरियाँ (निषेध) अनिवार्य मानी जाती हैं:

  • पुत्रवधू और श्वसुर का निषेध: कई जनजातियों में बहू और ससुर के बीच सीधा संवाद या अधिक निकटता को सामाजिक रूप से वर्जित माना जाता है।

  • दामाद और सास-ससुर का निषेध: दामाद और उसके सास-ससुर के बीच हंसी-मजाक की मनाही होती है और एक औपचारिक दूरी बनाए रखी जाती है।

18. जनजातीय परिवार की दो विशेषताओं का उल्लेख करें।

उत्तर:- जनजातीय परिवार की दो प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  1. निश्चित क्षेत्र और भाषा: प्रत्येक जनजातीय परिवार एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र में निवास करता है और उनकी अपनी विशिष्ट बोली या भाषा होती है।

  2. सांस्कृतिक पहचान: हर जनजाति (जैसे- गोंड, संथाल, मुंडा आदि) की अपनी अनूठी परंपराएँ, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक विरासत होती है जो उन्हें दूसरों से अलग बनाती है।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. प्राचीन काल में महिलाओं की निम्न परिस्थिति के तीन कारणों को लिखें।

उत्तर:- प्राचीन काल (विशेषकर उत्तर-वैदिक काल) में महिलाओं की स्थिति में गिरावट के तीन मुख्य कारण ये थे:

  • बाल विवाह: धर्मशास्त्रों में कम उम्र में विवाह के नियम बना दिए गए, जिससे लड़कियों की शिक्षा रुक गई और वे पूरी तरह पुरुषों पर निर्भर हो गईं।

  • विधवा पुनर्विवाह पर रोक: समाज में विधवाओं के दोबारा विवाह पर प्रतिबंध लगा दिया गया, जिससे उनका जीवन कष्टदायक, असुरक्षित और अपमानजनक हो गया।

  • धार्मिक और सामाजिक संकीर्णता: मनुस्मृति और अन्य ग्रंथों के कठोर नियमों के कारण महिलाओं के अधिकार सीमित कर दिए गए और उन्हें पुरुषों के अधीन माना जाने लगा।

2. जनजाति क्या है? जनजाति की प्रमुख समस्याओं की व्याख्या करें।

उत्तर:- जनजाति: जनजाति उन लोगों का एक समूह है जो एक ही क्षेत्र में रहते हैं, समान भाषा बोलते हैं और जिनके रीति-रिवाज व परंपराएँ एक जैसी होती हैं। ये लोग आधुनिक सभ्यता से दूर अपनी प्राचीन व्यवस्था में जीवन जीते हैं।

जनजातियों की प्रमुख समस्याएँ:

भूमि से अलगाव: साहूकारों और ज़मींदारों ने चालाकी से जनजातियों की पुश्तैनी ज़मीनें छीन लीं, जिससे वे भूमिहीन हो गए।

झूम खेती की समस्या: वनों की कटाई पर सरकारी रोक और झूम खेती की अस्थिर प्रकृति के कारण उनकी आर्थिक स्थिति खराब होती गई।

आर्थिक शोषण: व्यापारी और बिचौलिए उनकी उपज को बहुत कम दामों पर खरीदते हैं और उन्हें कर्ज के जाल में फँसा देते हैं।

बंधुआ मजदूरी: गरीबी के कारण कई जनजातीय परिवारों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी बंधुआ मजदूर बनकर रहना पड़ता है।

वन कानून: सरकार के कड़े वन कानूनों के कारण उनका जंगल पर अधिकार खत्म हो गया, जिससे उनकी आजीविका (फल, लकड़ी, शिकार) छिन गई।

सांस्कृतिक और धार्मिक संकट: आधुनिक समाज के संपर्क में आने से उनकी प्राचीन मान्यताएँ और मूल्य कमज़ोर पड़ रहे हैं।

शिक्षा का अभाव: घोर गरीबी और दुर्गम इलाकों में रहने के कारण ये लोग प्राथमिक शिक्षा से भी वंचित रह जाते हैं।

3. जनजातीय समाज की विशेषताओं पर प्रकाश डालें।

उत्तर:- जनजातीय समाज की एक प्रमुख विशेषता उनका राजनैतिक संगठन है। प्रत्येक जनजाति का अपना एक स्वतंत्र राजनैतिक ढांचा होता है। इनका मुखिया या पंचायत समाज में एकता बनाए रखने, विवादों को सुलझाने और सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण निर्णय लेने का कार्य करते हैं।

4. जनजातियों के कल्याण हेतु सरकार द्वारा चलाये गये उपायों की समीक्षा करें।

उत्तर:- भारत सरकार ने जनजातियों के उत्थान के लिए कई विशेष कदम उठाए हैं:

  • विशेष केंद्रीय सहायता: जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, शिक्षा और स्वास्थ्य के विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

  • आरक्षण और संरक्षण: सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में उनके लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है ताकि उन्हें विकास के समान अवसर मिल सकें।

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