12th Maithili subjective kavita chapter 4

 12th Maithili subjective kavita chapter 4

जानकी-परिणय : लालदास

  • प्र. 19. पत्र पढ़ि राजा दशरथक मानमे जे प्रसन्नता भेलनि, हुनकर अभिव्यक्तिक वर्णन करू।

  • उत्तर: राजा दशरथ केँ पत्र पढ़ि कऽ बहुत पैघ खुशी भेलनि। ओ ओहि आनन्दमे रानिवास (अन्तःपुर) जा कऽ सब रानि लोकनिकेँ ई समाचार सुनाओलनि। खुशीक मारे सब कियो भावुक भऽ गेलाह आ सबहक आँखि सँ खुशीक नोर बहय लगलैन्हि।

  • प्र. 20. पाठ्यांशक अनुसार मिथिला बरियातीक स्वागत कोना कयल जाइत अछि? [2022]

  • उत्तर: राजा दशरथ बहुत रास बरियाती लऽ कऽ मिथिला अएलाह। राजा जनक सबहक आदर-सत्कार कऽ कऽ जनवासमे अनलनि। मिथिला नरेश जनक स्वयं उठि-уठि कऽ शिष्टाचार कएलनि, सबहक हाल-चाल पुछलनि आ गले लगौलनि। सब केँ आसन पर बैसायल गेल आ गोड़ धोएल गेल। सीतातक प्रभाव सँ ओतय ऋद्धि-सिद्धि आ अपार धन-सम्पति आबि गेल। सब बरियाती केँ ओहन दिव्य भोजन आ आवास भेटलनि जे देवता लोकनि केँ सेहो दुर्लभ होइत अछि। एहि तरहेँ बरियातीक स्वागत एकदम मिथिलाक परम्परा अनुसार कएल गेल।


  • प्र. 21. दशरथक दरबारक चित्रण दूत कोन तरहेँ कयलक अछि, तकर वर्णन विस्तारपूर्वक करू।

  • उत्तर: महाराज जनकक आदेश सँ दूत पत्र लऽ कऽ अयोध्या पहुँचल। अयोध्याक सुंदर आ मनमोहक रूप देखि कऽ दूत दंग रहि गेल। ओतय कऽ सभ्य आ संस्कारी समाज केँ देखि ओकरा लागल जेना ओ देवलोक आबि गेल हो। राजा दशरथ साक्षात् इन्द्र सन आ हुनकर राजसभा अमरावती (इन्द्रक सभा) सन लगैत छलैन्हि। ई सब देखि दूत मोनहि मोन बहुत प्रसन्न भेल।

  • प्र. 22. मिथिलाक विवाह पद्धतिमे गोत्राध्यायकेँ चर्चा कयल गेल अछि, एहिताम गोत्राध्याय के सब कयलनि ओ कोना कयलनि?

  • उत्तर: विवाहक समय ई परम्परा रहल अछि जे पुरोहित लोकनि गोत्राध्याय (वंशक परिचय) पढ़ैत छथि। सूर्यवंशक राजा (दशरथ) कऽ वंशक कीर्ति वशिष्ठ मुनि कहलनि आ चन्द्रवंशक राजा (जनक) कऽ वंशक गुण शतानन्द जी कहलनि। दुनू पैघ वंशक सुंदर यश सुनि कऽ ओतय उपस्थित सब मुनि आ लोक प्रसन्न भऽ कऽ जयकार करय लगलाह।


  • प्र. 23. मिथिलाेशक पत्रमे की सब लिखल छल, तकर वर्णन करू।

  • उत्तर: विश्वामित्रक सहमति पाबि कऽ जनक जी दूत केँ हाथ राजा दशरथक दरबार मे पत्र पठाओने छलाह। पत्रमे लिखल छल जे, "हम (जनक) शिव धनुषक यज्ञ कएने छलहुँ। हम प्रतिज्ञा कएने छलहुँ जे जे शिवक एहि भारी धनुष केँ तोड़त, ओकरे संग सीताक विवाह करब। एहि पृथ्वी पर कोनो राजा एकरा तोड़ि नहि सकलाह। अन्तमे, अपनेक बालक राम एहि धनुष केँ तोड़लनि, जाहि सँ चौदह भुवनमे हुनकर नाम प्रसिद्ध भऽ गेल। आब सीतैक विवाह अहाँक अनुमति बिना नहि भऽ सकैत अछि, तैं हमर आग्रह अछि जे अहाँ मिथिला आबि कऽ कन्यादानक काज सम्पन्न करू।"

  • प्र. 24. राम-जानकीक पाणिग्रहण संस्कार कोना सम्पन्न भेल? तदुपरान्त ओहितामक दृश्यक वर्णन करू।

  • उत्तर: आगि (अग्निदेव) केँ साक्षी राखि कऽ श्रीराम आ माता सीताक पाणिग्रहण (विवाह) संस्कार सम्पन्न भेल। विवाहक समय आकाश सँ रंग-बिरंगक फूलक वर्षा भेल, जेकरा ओतय उपस्थित सब लोक अपन आँखि सँ देखलनि।



  • प्र. 25. जनक की प्रतिज्ञा कएने छलाह एवं ओकर निवारण कोना भेलन्हि ? [2020A, 2018A]

  • उत्तर: जनक जीक प्रतिज्ञा छलन्हि जे जे शिव धनुष केँ तोड़त, ओकरे संग सीताक विवाह कएल जाएत। जखन श्रीराम ओहि धनुष केँ तोड़ि देलनि, तखने एहि प्रतिज्ञाक निवारण भेल।

  • प्र. 26. बरियाती सब अबाक किएक रहि गेलाह ?

  • उत्तर: मिथिलाक अपार धन-दौलत, वैभव आ ऐश्वर्य देखि कऽ बरियाती लोकनि एकदम चकित (अबाक) रहि गेलाह।

  • प्र. 27. लालदास जनक नन्दिनी जानकीक प्रभावसँ उत्पन्न होमय बला दृश्यकेँ कोना व्यक्त कयलनि अछि?

  • उत्तर: कवि लालदास कहैत छथि जे बरियातीक ऐला कऽ बाद, जनक नन्दिनी माता जानकी (सीता) कऽ दिव्य प्रभाव सँ जनवासा सब तरहक सुख-सुविधा आ कीमती वस्तु सँ परिपूर्ण भऽ गेल।





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