12th Maithili Poem 7-14 subjective

 12th Maithili Poem 7-14 subjective

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आवाहन : भुवनेश्वर सिंह 'भुवन'

प्र. 39. 'आवाहन' शीर्षक कविताक भावार्थ लिखू।

  • उत्तर: एहि कविता मे कवि कहैत छथि जे एखनुक मिथिला पहिने जकां गौरवशाली नहि रहल। एहि लेल कवि माता सीता (जानकी) कें गोहारि लगा रहल छथि जे ओ आबथु आ मिथिला कें फेर सँ पहिने जकां महान बनाबथु।

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बाढ़िक हकरोसः आरसी प्रसाद सिंह

प्र. 40. बाढ़िक हकरोस कविताक सारांश लिखू।

(या, बाढ़िक विभीषिकाक वर्णन पठित कविताक आधार पर करू।)

  • उत्तर: आरसी प्रसाद सिंहक लिखल एहि कविता मे मिथिला मे हर साल आबय बला बाढ़ि क भयानक रूप कें देखाओल गेल अछि। बाढ़ि मिथिला कें गरीब बनेबाक सबसँ बड़का कारण अछि। बाढ़ि आबय छै आ सब कुछ तबाह कऽ कऽ चलि जाइत छै। लोक एहि दुख सँ उबरिहू नहि पबैत छथि कि अगला साल फेर बाढ़ि आबि जाइत छै। एहि समस्या क कोनो पक्का समाधान एखन धरि नहि भऽ सकल अछि।

प्र. 41. बाढ़िक प्रभाव पशु-पक्षी पर कौन रूपेँ पड़ैत अछि?

  • उत्तर: बाढ़ि क कारणे पशु-पक्षी कें बहुत कष्ट होइत छनि। सभक घर-दुआर बहि जाइत छैक। मानुषक बात तँ छोड़ू, कुकुर सभ कें सेहो खाय लेल भोजन नहि भेटैत छैक। ज्यान बचवेक लेल साँप आ मूस (जे एक दोसर कें कट्टर दुश्मन छथि) ओहो एक्के ठाम बैसल रहैत छथि। सभ भूख-प्यास सँ बेहाल भऽ जाइत छथि।

प्र. 42. बाढ़िक विभीषिका सँ महँगी कोना बढ़ैत अछि। अपन शब्दमे लिखू।

  • उत्तर: बाढ़ि अइला सँ खेतक सभ फसल बर्बाद भऽ जाइत अछि। एकरा संगहि, रास्ता-घाट टूटि जाइत अछि जाहि सँ बाहर सँ सामान गाम मे नहि आबि पबैत अछि। बजार मे सामानक कमी भेला क कारणे महँगी बहुत बढ़ि जाइत अछि।

प्र. 43. बाढ़िक हकरोस कविता मे आयल नदी सभक नाम लिखू।

(या, एहि कवितामे कोन-कोन नदीक नाम आयल अछि। ओहि नदीक बाढ़िमे की स्थिति रहैत अछि? वर्णन करू?)

  • उत्तर: एहि कविता मे कोसी, गण्डक, कमला, बागमती आ बलान नदी क नाम अछि। बाढ़ि अइला पर एहि नदी सभक कात (किनारे) मे रहबला लोकक जीवन बहुत मुश्किल आ कष्टकारी भऽ जाइत अछि।

प्र. 44. विपत्ति समयमे शत्रुताक भाव कोना समाप्त भऽ जाइत अछि? अपन शब्दमे लिखू।

  • उत्तर: मुसकिल वा आफत क समय मे लोक अपन पुरान दुश्मनी बिसरि जाइत अछि। जेना बाढ़िक समय मे साँप आ मूस अपन ज्यान बचवेक लेल एक्के ठाम शान्त भऽ कऽ बैसल रहैत छथि। एहि प्रलय मे अमीर (राजा) आ गरीब (रंक) सभक हालत एक्के रँगा भऽ जाइत अछि।

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गोबर थिकहुँ हम : वैद्यनाथ मल्लिक 'विधु'

प्र. 45. 'गोबर थिकहुँ हम' पाठक आधार पर गोबरक गुणक वर्णन करू।

  • उत्तर: गोबर सँ हमरा सभ कें अन्न, फूल, फल आ चीनी (शर्करा) भेटैत अछि। ई खेतक माटि कें उपजाऊ बनबैत अछि जाहि सँ धरती हरी-भरी रहैत अछि। गोबर सँ पूजा-पाठ आ यज्ञक भूमि कें पवित्र कएल जाइत अछि। एकरा बिना खेतक माटि बंजर (उसर) भऽ जाइत अछि।

प्र. 46. पठित कविताक आधार पर गोबरक गुणक वर्णन करू।

(या, गोबर की विनती करैत अछि? या, 'गोबर थिकहुँ हम' कविताक भावार्थ स्पष्ट करू।)

  • उत्तर: एहि कविता मे कवि गोबरक माध्यम सँ पर्यावरण कें बचवेक आ प्राकृतिक चीजक सही उपयोग करबाक संदेश देलखिन अछि। आजुक समय मे रासायनिक खाद् कऽ बेसी उपयोग सँ माटि आ जनजीवन संकट मे अछि। कविताक मूल भाव अछि जे रासायनिक खाद् कऽ जगह गोबरक उपयोग कएल जाए, क्येंकि गोबर कखनो ककरो नुकसान नहि पहुँचाबैत अछि।

प्र. 47. गोबर की विनती करैत अछि? सोद्देश्य लिखू।

  • उत्तर: गोबर विनती करैत अछि जे ओकरा चूल्हा मे जला कऽ गोइठा वा चिपड़ी नहि बनाओल जाए। ओकर उपयोग खेत मे खाद् कऽ रूप मे कएल जाए जाहि सँ धरती खूब उपजाऊ बनल रहय आ लोक कें खाय लेल खूब अन्न भेटय। ओ चूल्हाक आगि मे जरबा सँ बचबाक लेल विनती करैत अछि।

प्र. 48. गोबरक तिरस्कार कोन रूपमे होइत अछि?

  • उत्तर: किसान सभ गोबर कें जला कऽ ओकर राख बना दैत छथि आ ओहि राख कें पृथ्वी पर बिछा दैत छथि, एही रूप मे गोबरक अनादर वा तिरस्कार होइत अछि।

प्र. 49. गोवरौड़ केकरा कहल जाइत अछि ?

  • उत्तर: गोबर आ माटि रखबाक लेल जे बरतन (पात्र वा बासन) कऽ उपयोग होइत अछि, ओकरा गोवरौड़ कहल जाइत अछि।

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हम संस्कृति भारतवर्षक : उपेन्द्र ठाकुर 'मोहन'

प्र. 50. 'हमर संस्कृति भारतवर्षक' भावार्थ लिखू।

  • उत्तर: भारतक संस्कृति पूरे संसार मे सबसँ अलग आ खास अछि। एही संस्कृति कऽ बल पर हमर देशक सभ काज चलैत अछि। जँ हमर संस्कृति मिटि जाएत तँ हमर अस्तित्व सेहो खतम भऽ जाएत। एकरा खतम करबाक बहुत कोसिस कएल गेल, मुदा ई अजर-अमर अछि। कवि चाहैत छथि जे हमर संस्कृति हमेशा भलाई कऽ रास्ता पर आगू बढ़ैत रहय।

प्र. 51. भारतवर्षक सांस्कृतिक मुख्य पहचान की थिक?

  • उत्तर: पूरे विश्व मे भारतक संस्कृति सबसँ अनोखा आ बेजोड़ अछि। एहि पर कतेको बेर हमला भेल मुदा एकरा कोई मिटा नहि सकल। भारतीय संस्कृतिक मुख्य लक्ष्य अछि मानवता (मानव जाति) कऽ रक्षा करब आ नीक विचार देब, जे दुनियाक आन कोनो संस्कृति मे देखबा कें नहि भेटैत अछि।

प्र. 52. देव-मुनिक दुलरैतिन अपन आभा कतय-कतय खिरौलनि ?

  • उत्तर: देव-मुनियों कऽ दुलारी हमर भारतीय संस्कृति अपन चमक (आभा) पूरा संसार मे बिना कोनो भेदभाव कऽ बिखेरने अछि। हमर संस्कृति शास्त्र (ज्ञान) आ शस्त्र (वीरता) दुनू पर निर्भर अछि।

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नूतन स्वर : पं० गोविन्द झा

प्र. 53. नूतन स्वर किनकर कविता अछि?

  • उत्तर: नूतन स्वर कविताक लेखक (रचयिता) पं० गोविन्द झा छथि।

प्र. 54. 'नूतन स्वर' कवितामे कोन नूतन स्वरक समावेश अछि?

  • उत्तर: एहि कविता मे अज्ञानता कें दूर करबाक लेल ज्ञान क स्वर, सच क ताकत कम भेला पर श्रीराम क शक्ति रूपी स्वर, आ समाज मे हिंसा आ अत्याचार कें खतम करबाक लेल शान्ति क नया स्वरक समावेश कएल गेल अछि।

प्र. 55. केहन अवस्थामे रामक शरक आवश्यकता भेलैक?

  • उत्तर: जखन दुनिया मे सच क ताकत घटि गेल, पाप आ अन्याय बढ़ि गेल आ सब जगह हाहाकार मचि गेल, तब अत्याचार कें खतम करबाक लेल श्रीराम क तीर (शर) क जरूरत पड़ल।

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उठह कृषक : सोमदेव

प्रश्न 56. 'उठह कृषक' कवितामे कवि की कहैत छथि?

  • उत्तर: एहि कविता मे कवि सोमदेव किसान सभ सँ कहैत छथि जे भोर होइते सबेरे उठू आ आलस छोड़ि कऽ अपन खेती-बारीक काज मे लागि जाउ।

प्र. 57. 'उठह कृषक' कविताक आधार पर प्रातः कालक प्राकृतिक सौन्दर्यक वर्णन करू।

  • उत्तर: भोर क समय प्रकृति बहुत सुंदर आ मनमोहक लगैत अछि। सब जीव-जन्तु सबेरे उठि कऽ अपन काम मे लागि जाइत छथि। गाछ-वृक्ष पर चड़ै सभक मधुर आवाज मन कें खुश कऽ दैत अछि आ घास-पत्ता सभ पर ओसक बूँद मोती जकां चमकैत देखाइत अछि।

प्र 58. 'उठह कृषक' कविताक प्रतिपाद्य स्पष्ट करू।

  • उत्तर: एहि कविताक मुख्य उद्देश्य अछि जे दुनियाक सब जीवक दिनचर्या भोर सँ शुरू होइत अछि। हर भोर एकटा नया उमंग आ ताकत लऽ कऽ आबय अछि। कवि गामक भोर क सुंदर रूप देखा कऽ किसान आ समाज कें सुतले नहि रहबाक आ जागल रहबाक संदेश दैत छथि।

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शरद-संगीत : गौरीकान्त चौधरी 'कान्त'

प्र. 59. शरद् पूर्णिमाक महत्ताकें मिथिलाक दृष्टिएँ लिखू।

  • उत्तर: मिथिला मे शरद पूर्णिमा क बहुत बड़का महत्व अछि। एही दिन मिथिलाक प्रसिद्ध पावनि 'कोजागरा' मनाओल जाइत अछि, जाहि मे मखान आ पान खायब आ सभ कें बाँटब बहुत शुभ मानल जाइत अछि।

प्र. 60. पान-मखान खयबाक चर्चा कवि किएक कऽ रहल छथि?

  • उत्तर: शरद पूर्णिमा क दिन मिथिला मे कोजागरा पावनि होइत अछि। एहि पावनि मे लोक कें पान आ मखान खवाबैत छथि आ एकर सबसँ बेसी महत्व छैक, एही लेल कवि एकर चर्चा कएने छथि।

प्र. 61. मिथिलामे शरद् पूर्णिमाक राति कोन तरहें मनाओल जाइत अछि?

  • उत्तर: मिथिला मे शरद पूर्णिमा क राति कें 'कोजागरा' कऽ रूप मे धूमधाम सँ मनाओल जाइत अछि। एहि राति मे लोक मखान-पान खाइत छथि आ खुशी मनावैत छथि।

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मनुक्खक जीवन : मन्त्रेश्वर झा

प्र. 62. मनुक्खक जीवन कविताक भावार्थ स्पष्ट करू।

  • उत्तर: एहि कविता मे कवि आजुक मानुषक जीवनक कड़वा सच कें देखाउने छथि। आजुक लोक खाली दिखावा, ऐश-आराम आ भोग-विलास मे लागल अछि, जाहि सँ ओकर पतन भऽ रहल अछि। कवि एहि दिखावा कऽ विरोध कऽ कऽ समाज कें एकटा नीक, सीधा-साधा आ मर्यादा मे रहि कऽ जीवन जिएबाक संदेश देलखिन अछि।

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