12th Sociology Book 1 chapter 1 Subjective

 12th Sociology Book 1 chapter 1 Subjective 



लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

1. शीत युद्ध क्या है?

उत्तर- दूसरे महायुद्ध के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका तथा सोवियत संघ दो महाशक्तियाँ बन गए। अमेरिका पूँजीवाद की विचारधारा का समर्थक था तो सोवियत संघ समाजवाद की विचारधारा का पक्षधर था। दोनों के बीच घृणा, द्वेष व टकराव की स्थिति पैदा हुई। इसी को शीत युद्ध कहा गया।

2. दो ध्रुवीयता से आप क्या समझते हैं?

उत्तर- दूसरे विश्वयुद्ध के बाद दुनिया दो गुटों में बँट गई। एक का नेतृत्व संयुक्त राज्य अमेरिका कर रहा था और दूसरे का नेतृत्व सोवियत संघ। इसे ही 'दो ध्रुवीयता' कहा जाता है।

3. तीसरी दुनिया से आप क्या समझते हैं?

उत्तर- द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया दो गुटों में बँट गई—एक अमेरिका के नेतृत्व में (पहली दुनिया) और दूसरा रूस के नेतृत्व में (दूसरी दुनिया)। इस दौरान एशिया, अफ्रीका और लातिनी अमेरिका के जो नव-स्वतंत्र देश किसी भी गुट में शामिल नहीं हुए, उन्हें 'तीसरी दुनिया' का देश कहा जाता है।

4. गुटनिरपेक्ष आंदोलन के दो उद्देश्य लिखें?

उत्तर- गुटनिरपेक्ष आंदोलन के दो मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  • अंतर्राष्ट्रीय विवादों को शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाना।

  • दोनों गुटों (अमेरिका और सोवियत संघ) से समान दूरी बनाए रखना।

5. गुटनिरपेक्ष आंदोलन की कोई दो विशेषताएं लिखें बताएं।

उत्तर- गुटनिरपेक्ष आंदोलन की दो प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • गुटनिरपेक्ष देश किसी भी सैन्य गुट में शामिल नहीं हुए।

  • इन देशों ने एक स्वतंत्र विदेश नीति का अनुसरण किया।

6. गुटनिरपेक्षता संबंधी भारतीय नीति क्या है?

उत्तर- गुटनिरपेक्षता की भारतीय नीति के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • दोनों गुटों से दूरी बनाए रखना।

  • स्वतंत्र विदेश नीति अपनाना।

  • मित्रता और परस्पर लाभ की नीति अपनाना।

  • विश्व में शांति बनाए रखने का प्रयास करना।

  • विवादों का शांतिपूर्ण रूप से निपटारा करना।

7. भारत ने गुटनिरपेक्षता की नीति क्यों अपनाई?

उत्तर- 1945 में द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद अमेरिका और रूस के बीच शीतयुद्ध की शुरुआत हुई। इसी बीच 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ। आजादी के बाद भारत किसी गुट में शामिल न होकर गुटनिरपेक्ष रहा, क्योंकि भारत को फिर से गुलाम होने का डर सता रहा था और वह अपनी स्वतंत्रता बनाए रखना चाहता था।

8. क्या गुटनिरपेक्षता एक नकारात्मक नीति है?

उत्तर- नहीं, गुटनिरपेक्षता एक नकारात्मक नीति नहीं है। गुटनिरपेक्ष देश मिलकर काम करें तो एक बड़ी ताकत बन सकते हैं। ये देश संगठित होकर एकध्रुवीय विश्व की चुनौतियों का सामना कर सकते हैं और अंतर्राष्ट्रीय शांति, सुरक्षा तथा समृद्धि के लिए एकजुट होकर सामूहिक रूप से कार्य कर सकते हैं।

9. गुटनिरपेक्षता, तटस्थता से कैसे अलग है?

उत्तर- गुटनिरपेक्षता तटस्थता नहीं है। तटस्थ देश वह होता है जो युद्ध में शामिल नहीं होता और न ही युद्ध को समाप्त करने का प्रयास करता है। इसके विपरीत, गुटनिरपेक्ष देश केवल सैन्य गुटों से दूरी बनाए रखते हैं, वे अंतरराष्ट्रीय मामलों में सक्रिय रहते हैं।

10. नई अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था क्या है?

उत्तर- गुटनिरपेक्ष देशों में अधिकांश देश अल्पविकसित थे। इसलिए 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ के व्यापार और विकास से संबंधित सम्मेलन (UNCTAD) में 'टुवर्ड्स अ न्यू ट्रेड पॉलिसी फॉर डेवलपमेंट' शीर्षक से एक रिपोर्ट पेश की गई, ताकि विकासशील देशों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके।



11. संक्षेप में परमाणु युद्ध के प्रभाव का वर्णन करें।

उत्तर- परमाणु युद्ध के निम्नलिखित प्रभाव होते हैं:

  • परमाणु युद्ध से बहुत बड़े पैमाने पर जान-माल का भारी नुकसान होता है।

  • इससे अनेक प्रकार की बीमारियाँ, जलवायु परिवर्तन और फसलों का नष्ट होना जैसे प्रभाव लंबे समय तक बने रहते हैं।

12. शक्ति संतुलन से आप क्या समझते हैं?

उत्तर- शक्ति संतुलन व्यवस्था किसी भी राष्ट्र को इतना शक्तिशाली बनने से रोकती है कि वह अपनी इच्छा को दूसरे देशों पर थोप सके। यह मुख्य रूप से निकटवर्ती राष्ट्रों के बीच की एक व्यवस्था है।

13. निशस्त्रीकरण की परिभाषा दीजिए।

उत्तर- विनाशकारी अस्त्र-शस्त्रों के निर्माण पर रोक लगाना तथा पहले से उपलब्ध विनाशकारी हथियारों को नष्ट करना ही निशस्त्रीकरण कहलाता है।

14. NPT क्या है अथवा परमाणु अप्रसार संधि क्या है?

उत्तर- NPT का पूरा नाम Nuclear Non-Proliferation Treaty (परमाणु अप्रसार संधि) है। इसे 1968 ई. में लाया गया था। इस संधि के अनुसार केवल वही देश परमाणु हथियार रख सकते हैं जिन्होंने 1968 से पहले परीक्षण कर लिया है। अन्य किसी भी देश को परमाणु संपन्न देश का दर्जा नहीं दिया जा सकता। भारत इस संधि को भेदभावपूर्ण मानता है और इसका विरोध करता है।

15. NATO क्या है?

उत्तर- नाटो (NATO) अमेरिका का एक सैनिक गठबंधन है। इसका पूर्ण रूप North Atlantic Treaty Organisation (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) है। इसकी स्थापना 4 अप्रैल, 1949 को हुई थी और इसका मुख्यालय बेल्जियम में है। शुरुआत में इसमें 12 सदस्य देश थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 32 हो गई है।

16. मार्शल योजना क्या था?

उत्तर- मार्शल योजना की घोषणा 5 जून, 1947 को तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री मार्शल द्वारा की गई थी। इस योजना का मुख्य लक्ष्य यूरोप के उन राज्यों को वित्तीय सहायता देना था जो इसके लिए तैयार थे, ताकि उनका पुनर्निर्माण किया जा सके। सोवियत संघ ने इसे अमेरिका का 'साम्राज्यवादी जाल' कहकर इसकी आलोचना की थी।

17. मार्शल योजना का उद्देश्य क्या था?

उत्तर- मार्शल योजना के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित थे:

  • युद्ध में तबाह हो चुके यूरोप का पुनर्निर्माण करना।

  • यूरोप को आर्थिक रूप से फिर से समृद्ध बनाना।

  • व्यापारिक अवरोधों को दूर करना और उद्योगों का आधुनिकीकरण करना।

  • यूरोप में रूस के साम्यवादी प्रसार को रोकना।

18. उत्तर दक्षिण संवाद का क्या ध्येय था?

उत्तर- विश्व के विकसित देश 'उत्तर' में और विकासशील देश 'दक्षिण' में माने जाते हैं। 1960 के बाद विकासशील देशों ने यह अभियान चलाया कि विकसित देशों का यह दायित्व है कि वे अविकसित राष्ट्रों को वित्तीय सहायता और नई तकनीक प्रदान करें। इसी संदर्भ में 1972 में नई अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था का प्रस्ताव पास हुआ, जिसे उत्तर-दक्षिण संवाद कहा जाता है।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Question)

1. शीत युद्ध का अर्थ एवं उसके उदय का कारण बताईये-

उत्तर- अर्थ: दूसरे विश्वयुद्ध के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका (पूँजीवादी विचारधारा) और सोवियत संघ (समाजवादी विचारधारा) दो महाशक्तियाँ बनकर उभरे। इन दोनों के बीच घृणा, द्वेष और वैचारिक टकराव की जो स्थिति बनी, उसे ही 'शीत युद्ध' कहा जाता है।

शीत युद्ध के उदय के कारण निम्नलिखित हैं:

(i) महाशक्ति बनने की होड़: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका और रूस के बीच विश्व में सबसे अधिक शक्तिशाली दिखने और वर्चस्व स्थापित करने की होड़ लग गई। यही प्रतिस्पर्धा शीत युद्ध का मुख्य कारण बनी।



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