12th Sociology Book 2 chapter 2 भारत में सांस्कृतिक परिवर्तन की प्रक्रियाएँ Subjective
अध्याय – 2: भारत में सांस्कृतिक परिवर्तन की प्रक्रियाएँ
1. आधुनिकीकरण (Modernization) की परिभाषा दें।
उत्तर: आधुनिकीकरण वह सामाजिक प्रक्रिया है जिसमें समाज पुरानी परंपराओं को छोड़कर तर्क, विज्ञान, नई तकनीक और आधुनिक विचारों को प्राथमिकता देता है।
2. संस्कृतिकरण (Sanskritization) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: यह वह प्रक्रिया है जिसमें निम्न जातियाँ अपनी सामाजिक स्थिति को सुधारने के लिए उच्च या प्रभुत्वशाली जातियों के रीति-रिवाजों, खान-पान और जीवनशैली को अपनाती हैं।
3. धर्मनिरपेक्षीकरण (Secularization) की परिभाषा बताइए।
उत्तर: वह प्रक्रिया जिसमें धार्मिक मान्यताओं के स्थान पर तर्क और सांसारिक (लौकिक) जीवन को अधिक महत्व दिया जाता है, उसे धर्मनिरपेक्षीकरण कहते हैं।
4. पश्चिमीकरण (Westernization) की प्रक्रिया को परिभाषित करें।
उत्तर: पश्चिमी देशों के संपर्क में आने से भारतीय समाज की शिक्षा, पहनावे, संस्थाओं और विचारधारा में जो बदलाव आए, उन्हें पश्चिमीकरण कहा जाता है। भारत में यह मुख्य रूप से ब्रिटिश शासन के दौरान प्रभावी हुआ।
5. संस्कृतिकरण की तीन प्रमुख विशेषताओं का वर्णन करें।
अनुकूलन: इसमें निम्न जातियाँ उच्च जातियों की जीवनशैली का अनुसरण करती हैं।
पद में परिवर्तन: इससे किसी जाति की केवल सामाजिक स्थिति (पद) में सुधार होता है।
स्थिर ढांचा: इससे जाति व्यवस्था की मूल संरचना में कोई बड़ा बदलाव नहीं आता।
6. धर्मनिरपेक्षता की चार मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
राज्य का अपना कोई आधिकारिक धर्म नहीं होता।
राज्य किसी भी विशेष धर्म का न तो समर्थन करता है और न ही विरोध।
सभी नागरिकों को अपनी पसंद के धर्म को मानने और उसका प्रचार करने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है।
धर्म के आधार पर किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं किया जाता।
7. आधुनिकीकरण की अवधारणा को उसकी कसौटियों के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: आधुनिकीकरण का अर्थ पुरानी परंपराओं का पूरी तरह अंत होना नहीं है, बल्कि परंपराओं को तर्क की कसौटी पर कसना है। इसमें विज्ञान, तकनीक, मानवतावादी सोच और लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोपरि माना जाता है।
8. भारतीय समाज में धर्मनिरपेक्षता की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर: भारत जैसे विविध धर्मों वाले देश में सामाजिक एकता, समानता और आपसी भाईचारा बनाए रखने के लिए धर्मनिरपेक्षता अनिवार्य है। यह धार्मिक भेदभाव को कम करती है और समाज में स्वस्थ परिवर्तन को बढ़ावा देती है।
9. सामाजिक विधान (Social Legislation) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: सामाजिक विधान वे कानूनी नियम होते हैं जिन्हें राज्य समाज की कुरीतियों को दूर करने और नागरिकों के जीवन को न्यायपूर्ण व व्यवस्थित बनाने के लिए लागू करता है।
10. विसंस्कृतिकरण की अवधारणा स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: विसंस्कृतिकरण वह प्रक्रिया है जिसमें कोई जाति अपनी मूल संस्कृति को छोड़कर स्थानीय प्रभुत्वशाली जाति की संस्कृति, रीति-रिवाजों और कर्मकांडों को अपना लेती है।
11. आर्य समाज क्या है? इसकी स्थापना किसके द्वारा की गई?
उत्तर: आर्य समाज एक हिंदू सुधार आंदोलन है जिसका मुख्य उद्देश्य वेदों की शिक्षाओं का प्रसार करना और समाज से कुरीतियों को मिटाना था। इसकी स्थापना स्वामी दयानंद सरस्वती ने की थी।
प्रश्न 12. संस्कृतिकरण की अवधारणा की कोई दो आलोचनाएँ कीजिए।
यह अवधारणा केवल जाति की सामाजिक स्थिति में होने वाले बदलावों को ही समझा पाती है।
यह आर्थिक, राजनीतिक और व्यापक संरचनात्मक परिवर्तनों की पूरी तरह से व्याख्या नहीं करती है।
प्रश्न 13. आधुनिकीकरण की प्रमुख विशेषताओं की चर्चा कीजिए।
इसमें अलौकिक के बजाय लौकिक (सांसारिक) मूल्यों को अधिक महत्व दिया जाता है।
तकनीकी और विज्ञान के विकास के साथ-साथ योग्यता के आधार पर सामाजिक गतिशीलता बढ़ती है।
प्रश्न 14. समाज सुधार आंदोलन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: समाज सुधार आंदोलन वे संगठित प्रयास थे जिनके माध्यम से भारतीय समाज में व्याप्त सती प्रथा, बाल विवाह, छुआछूत और स्त्री अशिक्षा जैसी कुरीतियों को समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया था।
प्रश्न 15. समाज सुधार आंदोलनों की आवश्यकता क्यों पड़ी?
उत्तर: समाज में गहराई तक समाए अंधविश्वास, जातिगत भेदभाव, महिलाओं की दयनीय स्थिति और धार्मिक बुराइयों को खत्म कर समानता, शिक्षा और सामाजिक न्याय की स्थापना के लिए इन आंदोलनों की आवश्यकता हुई।
प्रश्न 16. सती प्रथा उन्मूलन में राजा राममोहन राय का योगदान बताइए।
उत्तर: राजा राममोहन राय ने सती प्रथा के विरुद्ध व्यापक जन-आंदोलन चलाया। उनके प्रयासों के फलस्वरूप ही 1829 ई. में लॉर्ड विलियम बेंटिक ने सती प्रथा को कानूनी रूप से प्रतिबंधित कर दिया।
प्रश्न 17. आर्य समाज क्या है? इसके दो उद्देश्य लिखिए।
उत्तर: आर्य समाज की स्थापना 1875 ई. में स्वामी दयानंद सरस्वती ने की थी। इसके दो प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित थे:
वैदिक धर्म और प्राचीन मूल्यों का प्रचार-प्रसार करना।
सामाजिक कुरीतियों जैसे मूर्ति पूजा और जातिगत भेदभाव का कड़ा विरोध करना।
प्रश्न 18. समाज सुधार आंदोलनों के दो प्रमुख प्रभाव लिखिए।
महिलाओं की सामाजिक स्थिति में सुधार हुआ और स्त्री शिक्षा को बढ़ावा मिला।
समाज में समानता, जागरूकता और मानवतावादी विचारों का विकास हुआ।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तरी
अध्याय – 2. भारत में सांस्कृतिक परिवर्तन की प्रक्रियाएँ
प्रश्न 1. संस्कृतिकरण क्या है? भारतीय जाति व्यवस्था में परिवर्तन लाने में इसकी भूमिका की चर्चा कीजिए। अथवा (Or) संस्कृतिकरण क्या है? भारतीय समाज में संस्कृतिकरण में उत्पन्न होने वाले परिवर्तनों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर (सरल भाषा में): * संस्कृतिकरण का अर्थ: संस्कृतिकरण वह सामाजिक प्रक्रिया है जिसमें समाज की निचली या पिछड़ी जातियाँ अपनी सामाजिक स्थिति को ऊँचा उठाने के लिए ऊँची जातियों (विशेषकर द्विज जातियों) के रीति-रिवाज, पूजा-पाठ की पद्धति, खान-पान, पहनावा और जीने के तौर-तरीकों को अपनाने लगती हैं। इसका मुख्य उद्देश्य समाज और जाति व्यवस्था में अपनी प्रतिष्ठा या सम्मान को बढ़ाना होता है।
भारतीय समाज/जाति व्यवस्था में संस्कृतिकरण से आए प्रमुख बदलाव:
जीवन-शैली (जीने के तरीके) में सुधार: संस्कृतिकरण के प्रभाव से निचली जातियों में शिक्षा, साफ-सफाई, शाकाहारी भोजन, धार्मिक आचरण और सभ्य व्यवहार को अपनाने की प्रवृत्ति बढ़ी। इससे उनमें आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और सामाजिक चेतना का विकास हुआ।
जातिगत कठोरता में कमी: पुराने समय में जाति व्यवस्था के नियम बहुत कड़े थे, जैसे—छुआछूत, खान-पान में भेदभाव और सामाजिक दूरी। संस्कृतिकरण के कारण इन कड़े नियमों में ढील (नर्मी) आई और अलग-अलग जातियों के बीच आपसी मेलजोल और सामाजिक संपर्क बढ़ा।
शक्ति-संरचना (Power Structure) में बदलाव: पहले सामाजिक और राजनीतिक ताकत केवल ऊँची जातियों के पास होती थी। लेकिन संस्कृतिकरण और शिक्षा के प्रसार से निचली जातियाँ भी राजनीति, प्रशासन, शिक्षा और नौकरियों में आगे बढ़ीं, जिससे समाज की पुरानी शक्ति-संरचना में बड़ा बदलाव आया।
अन्तर्जातीय संपर्क में वृद्धि: जब अलग-अलग जातियों के रहन-सहन और सांस्कृतिक व्यवहार में समानता आने लगी, तो उनके बीच आपसी मेल-जोल, सहयोग और संपर्क भी बढ़ा। इससे जातियों के बीच की पुरानी सामाजिक दूरी कम हुई।
सामाजिक एवं भौगोलिक गतिशीलता: अपनी सामाजिक स्थिति को और बेहतर बनाने के लिए कई लोग गाँव छोड़कर कस्बों और शहरों में जाकर रहने लगे। इससे लोगों को काम-धंधे और तरक्की के नए और बेहतर अवसर मिले।
प्रश्न 2. धर्मनिरपेक्षीकरण का अर्थ एवं विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर (सरल भाषा में):
धर्मनिरपेक्षीकरण का अर्थ: धर्मनिरपेक्षीकरण का सीधा मतलब यह है कि समाज में लोगों के सोचने-समझने, व्यवहार करने और फैसले लेने का आधार अब 'धर्म' या 'अंधविश्वास' नहीं रह गया है, बल्कि तर्क (Logic), विज्ञान, अनुभव और व्यावहारिक जरूरतें बन गई हैं। जो बातें पहले पूरी तरह भगवान, पुरानी परंपरा या धर्म से जुड़ी मानी जाती थीं, अब उन्हें सामाजिक कारणों, इंसानी जरूरतों और विज्ञान के तराजू पर तौला और समझा जाने लगा है।
धर्मनिरपेक्षीकरण की प्रमुख विशेषता:
लौकिक (सांसारिक/वैज्ञानिक) दृष्टिकोण का विकास: इसके तहत जीवन की समस्याओं को किसी चमत्कार या धार्मिक भाग्य के भरोसे छोड़ने के बजाय, तर्क, इंसान के अनुभव और व्यावहारिक सोच से समझा और सुलझाया जाता है। यानी लोग अब अंधविश्वास से दूर होकर वास्तविक और वैज्ञानिक सोच को अपनाते हैं।
धार्मिकता में कमी: लोगों के रोजमर्रा के विचारों और व्यवहारों में धर्म का अंधा प्रभाव कम होने लगता है। समाज में व्यावहारिक और सामाजिक काम (जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास) ज्यादा जरूरी हो जाते हैं।
तार्किक एवं वैज्ञानिक सोच: अंधविश्वासों और पुरानी रूढ़ियों की जगह लोग अब बुद्धि, तर्क और विज्ञान की बातों को ज्यादा महत्व देते हैं।
धर्म और सामाजिक संस्थाओं का अलग होना (विभेदीकरण): राजनीति, शिक्षा, कानून और सरकारी प्रशासन जैसे जरूरी क्षेत्र अब धर्म के नियंत्रण से अलग होकर पूरी तरह स्वतंत्र रूप से काम करने लगते हैं।
समानता एवं मानवीय मूल्यों पर बल: जाति, धर्म, लिंग या संप्रदाय के आधार पर होने वाला भेदभाव कम होता है। समाज में सभी को न्याय, स्वतंत्रता और बराबरी जैसे इंसानी हक मजबूत मिलते हैं।
प्रश्न 3. आधुनिकीकरण क्या है? भारतीय समाज पर आधुनिकीकरण के प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर (सरल भाषा में): * आधुनिकीकरण का अर्थ: आधुनिकीकरण समाज में होने वाला वह बदलाव है जिसके तहत पुराना या परंपरागत समाज धीरे-धीरे नए और आधुनिक समाज की अच्छी सोच, व्यवहार, संस्थाओं और जीने के तरीकों (Lifestyle) को अपनाने लगता है।
भारतीय समाज पर आधुनिकीकरण के मुख्य प्रभाव:
खेती (कृषि) का आधुनिकीकरण: भारतीय गाँवों में खेती के तरीके पूरी तरह बदल गए हैं। अब किसान पुराने हलों की जगह ट्रैक्टर, पंपसेट, अच्छे बीज, खाद और कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल करने लगे हैं, जिससे फसलों का उत्पादन बहुत बढ़ गया है।
शिक्षा का तेजी से प्रसार: आधुनिकीकरण के आने से देश में शिक्षा का बहुत तेजी से विकास हुआ है। आजादी के समय पढ़े-लिखे लोग बहुत कम थे, लेकिन आज गाँवों और शहरों, दोनों जगहों पर स्कूल-कॉलेज खुल गए हैं और शिक्षा का दायरा बढ़ा है।
सामाजिक मूल्यों और विचारों में बदलाव: अब लोग सब कुछ भाग्य (किस्मत) के भरोसे छोड़ने के बजाय अपनी मेहनत, योग्यता और शिक्षा को सफलता का असली आधार मानने लगे हैं। जाति, लिंग और धर्म के आधार पर होने वाला भेदभाव घटा है।
जाति व्यवस्था और अन्तर्जातीय संबंधों में बदलाव: जाति व्यवस्था के पुराने कड़े नियम कमजोर हुए हैं। अब अलग-अलग जातियों के बीच आपसी संपर्क बढ़ा है और अन्तर्जातीय विवाह (दूसरी जाति में शादी) को पहले की तरह गलत नहीं माना जाता।
लोकतांत्रिक नेतृत्व का विकास: आधुनिकीकरण के प्रभाव से हमारा लोकतंत्र और मजबूत हुआ है। अब ग्राम पंचायत से लेकर देश की संसद तक, पिछड़ी और निचली जातियों के लोगों की भागीदारी बढ़ी है और उनमें नए नेताओं का विकास हुआ है।
प्रश्न 4. पश्चिमीकरण के मुख्य आधार क्या हैं? भारतीय समाज पर पश्चिमीकरण के प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर (सरल भाषा में):
पश्चिमीकरण का अर्थ: जब भारतीय समाज पश्चिमी देशों (जैसे- इंग्लैंड, अमेरिका आदि) के सोचने के तरीके, रहन-सहन, पहनावे, शिक्षा, विज्ञान, कानून और उनके सामाजिक मूल्यों को धीरे-धीरे अपनाने लगता है, तो इस बदलाव को पश्चिमीकरण कहते हैं।
पश्चिमीकरण के मुख्य आधार (विशेषताएँ):
यह सिर्फ एक बदलाव है (न अच्छा, न बुरा): पश्चिमीकरण यह नहीं कहता कि पुरानी चीजें खराब थीं और नई अच्छी हैं, यह सिर्फ समाज में आ रहे बदलाव के तरीके को दिखाता है।
हर क्षेत्र में असर: इसका असर सिर्फ कपड़ों या खान-पान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी सोच, शिक्षा, विज्ञान, कानून और जीने के नजरिए तक फैला हुआ है।
किसी एक देश की नकल नहीं: भारत ने सिर्फ अंग्रेजों (इंग्लैंड) की नकल नहीं की, बल्कि अमेरिका और यूरोप के दूसरे देशों की भी अच्छी और आधुनिक बातों को सीखा है।
नए विचार और मूल्य: इसके प्रभाव से समाज में समानता, स्वतंत्रता, मानवाधिकार (Human Rights) और हर बात को तर्क की कसौटी पर परखने को महत्व मिला।
सोच-समझकर अपनाई गई प्रक्रिया: यह बदलाव अचानक नहीं आया, बल्कि आधुनिक शिक्षा, स्वतंत्रता आंदोलन और विचारकों के सामाजिक प्रयासों की वजह से आया है।
भारतीय समाज पर पश्चिमीकरण के प्रमुख प्रभाव:
धार्मिक जीवन में बदलाव: लोग अब अंधविश्वासों से दूर होने लगे हैं। समाज से सती प्रथा, बाल विवाह और छुआछूत जैसी पुरानी सामाजिक बुराइयों (कुरीतियों) का विरोध तेज हुआ है।
जाति व्यवस्था का कमजोर होना: जाति के आधार पर होने वाला पुराना भेदभाव बहुत कम हुआ है। समाज की निचली जातियों को भी पढ़ाई-लिखाई और नौकरियों में बराबर के अवसर मिलने लगे हैं।
रहन-सहन और खान-पान में बदलाव: लोगों के कपड़े पहनने का तरीका, खान-पान, त्योहार मनाने का ढंग और सामाजिक संस्कार पहले की तुलना में ज्यादा सरल और आधुनिक हो गए हैं।
आधुनिक शिक्षा की शुरुआत: पुरानी धार्मिक या पारंपरिक शिक्षा के स्थान पर अब स्कूलों-कॉलेजों में वैज्ञानिक, तकनीकी और व्यावसायिक (रोजगार देने वाली) शिक्षा को बढ़ावा मिला है।
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