12th psychology chapter– 5: चिकित्सा उपागम subjective

 


12th psychology chapter– 5: चिकित्सा उपागम subjective

प्रश्न 1. संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा (CBT) क्या है?

उत्तर: संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा (Cognitive Behavioral Therapy - CBT) एक मनोवैज्ञानिक उपचार पद्धति है। यह इस सिद्धांत पर आधारित है कि हमारी सोच (thoughts), भावनाओं (feelings) और व्यवहार (behaviors) के बीच एक गहरा संबंध होता है। यह पद्धति व्यक्ति को उसकी नकारात्मक और दोषपूर्ण सोच को पहचानने और उसे अधिक सकारात्मक व व्यावहारिक सोच में बदलने में मदद करती है। इससे तनाव, डर (फोबिया) और उदासी (डिप्रेशन) जैसी मानसिक समस्याओं को प्रभावी ढंग से कम किया जा सकता है।

प्रश्न 2. लोगो चिकित्सा (उद्धोधक चिकित्सा) की विशेषताओं का वर्णन करें।

उत्तर: लोगो चिकित्सा (Logotherapy) एक मनोचिकित्सा विधि है जिसे विक्टर फ्रैंकल द्वारा विकसित किया गया था। इसकी मुख्य विशेषताएँ और उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  • इसका प्राथमिक लक्ष्य व्यक्ति को उसके जीवन का अर्थ (meaning) और उद्देश्य खोजने में मदद करना है।

  • यह इस विश्वास पर आधारित है कि यदि व्यक्ति के पास जीने का कोई ठोस कारण या उद्देश्य हो, तो वह कठिन से कठिन मानसिक पीड़ा को भी सहन कर सकता है।

प्रश्न 3. व्यवहार चिकित्सा की 'मॉडलिंग' प्रविधि का संक्षेप में वर्णन करें।

उत्तर: मॉडलिंग प्रविधि (Modeling Technique) व्यवहार चिकित्सा की एक प्रमुख तकनीक है।

  • इसमें व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति (जिसे 'मॉडल' कहा जाता है) को देखकर सही और सकारात्मक व्यवहार करना सीखता है।

  • जब व्यक्ति मॉडल को किसी परिस्थिति में कुशलतापूर्वक व्यवहार करते हुए देखता है, तो वह उसी व्यवहार को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करता है।

  • इस प्रविधि का प्रयोग सबसे पहले प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक अल्बर्ट बैण्डुरा ने किया था।

प्रश्न 4. रोगी केंद्रित चिकित्सा (Client-Centered Therapy) क्या है?

उत्तर: यह एक ऐसी मनोचिकित्सा पद्धति है जिसमें रोगी की भावनाओं, जरूरतों और अनुभवों को पूरा सम्मान दिया जाता है। इसे कार्ल रोजर्स ने विकसित किया था। इस चिकित्सा में रोगी को अपनी समस्याओं का समाधान स्वयं खोजने और निर्णय लेने की आजादी दी जाती है। चिकित्सक यहाँ केवल एक सहायक की भूमिका निभाता है जो सहानुभूति और समझ के साथ रोगी का साथ देता है, उसे कोई निर्देश या सलाह नहीं देता।

प्रश्न 5. विद्युत आघात चिकित्सा (ECT) क्या है?

उत्तर: विद्युत आघात चिकित्सा (Electroconvulsive Therapy - ECT) एक उपचार विधि है जिसमें रोगी के सिर पर इलेक्ट्रोड लगाकर नियंत्रित मात्रा में हल्की विद्युत धारा दी जाती है। इससे मस्तिष्क में एक कृत्रिम दौरा उत्पन्न होता है जो मस्तिष्क के रसायनों को संतुलित करने में मदद करता है। यह प्रक्रिया रोगी की नकारात्मक यादों, अवसाद और तनाव को कम करने में सहायक होती है।

प्रश्न 6. क्या बायोफीडबैक चिकित्सा मानसिक विकारों के लिए उपयोगी है?

उत्तर: हाँ, बायोफीडबैक चिकित्सा में मशीनों की मदद से रोगी को उसके शरीर की आंतरिक गतिविधियों (जैसे दिल की धड़कन, मांसपेशियों का तनाव, मस्तिष्क तरंगें) की जानकारी दी जाती है। बार-बार अभ्यास से रोगी इन शारीरिक क्रियाओं को खुद नियंत्रित करना सीख जाता है।

  • उपयोग: यह मनोदैहिक रोगों (तनाव से होने वाली बीमारियाँ), उच्च रक्तचाप, तनाव-सिरदर्द और मिर्गी के दौरों को नियंत्रित करने में बहुत उपयोगी है।

प्रश्न 7. विद्युत-आक्षेपी चिकित्सा (ECT) किन मानसिक विकारों में उपयोगी है?

उत्तर: ECT में मस्तिष्क में नियंत्रित हल्की विद्युत तरंगें दी जाती हैं जिससे मस्तिष्क की असामान्य गतिविधि सामान्य होती है और न्यूरोट्रांसमीटर का संतुलन बनता है। यह निम्नलिखित विकारों में उपयोगी है:

  • गंभीर अवसाद (Severe Depression)

  • आत्महत्या की तीव्र प्रवृत्ति

  • उन्माद (Mania) और कैटाटोनिया (Catatonia)

  • जब दवाइयाँ प्रभावी न हों (दवा-प्रतिरोधी मामले)

प्रश्न 8. मनोविश्लेषणात्मक विधि के गुणों का वर्णन करें।

उत्तर: व्यक्ति के अचेतन मन (Unconscious Mind) में छिपी इच्छाओं, भावनाओं और मानसिक संघर्षों का विश्लेषण करके मानसिक विकारों का उपचार करना मनोविश्लेषणात्मक विधि कहलाती है।

  • गुण: यह विधि मानसिक रोगों के मूल कारणों की खोज करती है। इससे चिंता, हिस्टीरिया और विषाद का उपचार संभव है। इसमें रोगी के अचेतन मन का गहन अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 9. चिकित्सा के उद्देश्यों का उल्लेख करें।

उत्तर: मनोविज्ञान में चिकित्सा का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति की मानसिक समस्याओं को दूर कर उसे संतुलित और स्वस्थ बनाना है। इसके मुख्य उद्देश्य हैं:

  • व्यक्ति को अपने विचार, भावनाएँ और व्यवहार समझने में मदद करना।

  • समस्या के वास्तविक कारणों का बोध कराना और मानसिक तनाव व चिंता को कम करना।

  • दबे हुए भावों को बाहर निकालने का अवसर देना और गलत आदतों में सुधार करना।

  • नकारात्मक सोच को सकारात्मक बनाना और आत्मविश्वास व आत्मबल बढ़ाना।

  • परिवार और समाज के साथ बेहतर सामंजस्य बिठाना सिखाना।


प्रश्न 10 (जारी). योग क्या है?

उत्तर: योग मन और शरीर को संतुलित व स्वस्थ रखने की एक प्राचीन भारतीय पद्धति है। इसका वर्णन महर्षि पतंजलि के 'योगसूत्र' में अष्टांग योग के रूप में मिलता है। आसन और प्राणायाम के नियमित अभ्यास से मन शांत होता है और शरीर निरोगी रहता है।

प्रश्न 11. औषध चिकित्सा क्या है?

उत्तर: यह वह उपचार विधि है जिसमें मानसिक विकारों को ठीक करने के लिए चिकित्सक द्वारा दवाओं का प्रयोग किया जाता है। ये दवाएँ मस्तिष्क में रसायनों के असंतुलन को सुधारती हैं, जिससे अवसाद (Depression), चिंता और मनोविदलता (Schizophrenia) जैसे रोगों के लक्षणों में कमी आती है।

प्रश्न 12. स्वतंत्र साहचर्य (Free Association) से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: यह मनोचिकित्सा की एक तकनीक है जिसमें रोगी को बिना किसी झिझक या संकोच के अपने मन में आने वाले सभी विचारों, भावनाओं और अनुभवों को खुलकर बताने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

प्रश्न 13. ऋणात्मक अन्यारोपण (Negative Transference) क्या है?

उत्तर: यह वह स्थिति है जब रोगी अपने मनोचिकित्सक के प्रति नकारात्मक भावनाएँ जैसे घृणा, गुस्सा, विरोध या दूरी का भाव दिखाने लगता है।

प्रश्न 14. व्यवहार चिकित्सा क्या है?

उत्तर: इस चिकित्सा में व्यक्ति के गलत सीखे गए व्यवहारों को बदलकर उन्हें सही और सकारात्मक व्यवहार सिखाया जाता है। यह मुख्य रूप से जे. बी. वाटसन द्वारा प्रतिपादित सीखने के सिद्धांतों (अनुबंधन) पर आधारित है।

प्रश्न 15. मनोवैज्ञानिक कल्याण (Psychological Well-being) की परिभाषा दें।

उत्तर: इसका अर्थ है व्यक्ति का मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ और संतुलित होना। इसमें व्यक्ति में आत्मविश्वास और आत्मसम्मान जैसे सकारात्मक भाव होते हैं और वह चिंता व अवसाद जैसी नकारात्मक भावनाओं से मुक्त रहता है।


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