12th Maithili subjective kavita chapter 5

 12th Maithili subjective kavita chapter 5

अध्याय: छुतहर (काशीकान्त मिश्र 'मधुप')

  • प्र. 28. छुतहर शब्दक की अभिप्राय अछि ?

  • सरल उत्तर: छुतहर क मतलब ओकर घैला (घड़ा) सँ अछि जे अपवित्र रहैत अछि।

  • प्र. 29. छुतहर कें देखि लोक घृणा किएक करैत अछि ?

  • सरल उत्तर: लोक छुतहर कें अमंगल (अशुभ) मानैत अछि, तेइ लेल ओकरा देखि कऽ घृणा करैत अछि।

  • प्र. 30. घैल कखन मंगल आ कखन अमंगल होइछ ?

  • सरल उत्तर: पूजा-पाठ या नीक काज (अशौच) सँ पहिने घैला अमंगल होइछ, मुदा पवित्र कइला क बाद ओ मंगल (शुभ) भऽ जाइत अछि।

  • प्र. 31. छुतहर अस्पृश्य किएक बुझल जाइछ?

  • सरल उत्तर: छुतहर कें अपवित्र मानल जाइत अछि, तेइ लेल ओकरा छूबै योग्य (अस्पृश्य) नहि बुझल जाइत अछि।

  • प्र. 32. गोबरोड़ ककरा कहल जाइछ ? लिखू।

  • सरल उत्तर: जे बासन (बर्तन) मे गोबर, माटि आ नूड़ राखल जाइछ, ओकरा गोबरोड़ कहल जाइत अछि।

  • प्र. 33. छुतहर अपना कें शापित किएक मानैत अछि ?

  • सरल उत्तर: सब लोक छुतहर कें अमंगलक प्रतीक मानैत अछि, तेइ लेल ओ अपना आप कें शापित बुझैत अछि।

प्र. 34. 'छुतहर' कविताक भावार्थ लिखू।

या, छुतहर अपना कें शापित कोना बुझैत अछि ?

भावार्थ:

'छुतहर' कविताक रचयिता 'मधुप' जी छथि। ओ एहि कविता मे एकटा घैला (घड़ा) क माध्यम सँ समाजक भेदभाव कें देखौलनि अछि।

  • एकही माटि, दू रूप: कवि कहैत छथि जे कुम्हार एकही माटि सँ दू गोट घैला बनबैत अछि। ओहि मे सँ एकटा घैला नीक आ पवित्र काज मे उपयोग होइत अछि, मुदा दोसर घैला कें लोग 'छुतहर' (अपवित्र) मानि कऽ छोड़ि देइत अछि।

  • छुतहरक दुःख: जे घैला पवित्र मानल जाइत अछि, ओकरा सुंदर कनिया सभ अपन माथ आ डाँड़ पर कऽ कऽ कऽ पैन भरैत छथि। मुदा ओही ठाम छुतहर घैला सँ सब दूर रहैत छथि। छुतहर सोचैत अछि जे लोग कुत्ता-बिलाई सन अस्पृश्य जानवर कें तँ पलंग पर सुतबैत छथि, मुदा हमरा सँ दूर भागैत छथि।

  • भाग्यक विडम्बना: घैला आगि मे पकला क बाद खूब पवित्र भऽ जाइत अछि, मुदा तइयो छुतहर घैला क भाग्य खराब रहैत अछि। ओ विचार करैत अछि जे जँ संसारक कण-कण मे भगवान छथि, तँ ओकरा मे राखल पैन कें लोग अपवित्र किएक कहैत अछि?

  • कविक संदेश: अंत मे कवि कहैत छथि जे आब हमरा सभ कें एहि पुरान, रूढ़िवादी आ भेदभाव बला बात कें बिसरि कऽ पतित (पिछड़ल/शोषित) वर्गक उद्धार कऽ लेल आगे आबक चाही आ समाज कें नेतृत्व देबक चाही।


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