12th Maithili subjective kavita chapter 6
अध्याय: चिनगी (डॉ० काञ्चीनाथ झा 'किरण')
प्र. 35. 'चिनगी' कविताक भावार्थ लिखू।
या, चिनगी कें हमसभ कतय-कतय प्रयोग कऽ सकैत छी ?
भावार्थ:
'चिनगी' कविताक रचयिता डॉ० काञ्चीनाथ झा 'किरण' छथि। एहि कविता मे कवि समाज मे समानता आ क्रांति क संदेश देलनि अछि।
समानताक चाह: कवि एक तरफ समाज मे समतामूलक (जतय सब बराबर होए) समाजक स्थापना करबाक आग्रह करैत छथि।
शोषित वर्गक जागृति: दोसर तरफ, कवि समाजक उपेक्षित आ पीड़ित (पिछड़ल आ सताएल) लोकक मन मे धधकइत समाजिक असंतोष आ आक्रोश कें देखौलनि अछि। ओ पीड़ित वर्ग कें अपन हीन भावना सँ ऊपर उठि कऽ, एकजुट (सामूहिक शक्ति) भऽ कऽ अपन अधिकार क लेल लड़बाक आ अपन उर्जा कें सही दिशा मे लगबैबाक निर्देश देइत छथि।
उर्जाक सही उपयोग: कवि कहैत छथि जे जँ एहि सामूहिक उर्जा (एकता) क उपयोग सही आ सकारात्मक दृष्टि सँ कएल जाए, तँ एहि सँ देशक भला (देशहित) भऽ सकैत अछि।
कविक चेतावनी: मुदा कवि चेतावनी सेहो देइत छथि जे जँ एहि आक्रोश रूपी चिनगी क प्रवाह बहकि गेल, तँ ई समाज कें विनास (बरबाद) सेहो कऽ सकैत अछि। तेइ लेल एहि चिनगी रूपी शक्ति कें प्रज्वलित (जलाएबा) सँ पहिने ओकरा नियंत्रित करब आ एकटा सही आ संतुलित दिशा देब बहुत आवश्यक अछि।
प्र. 36. धधरा सँ की होइत अछि ?
उत्तर -धधरा (मशाल/आगि क लपट) सँ घर मे इजोत (अँधकार दूर आ प्रकाश) होइत अछि।
प्र. 37. चिनगी सँ नीक कोन काज होइत अछि। [2022]
उत्तर- चिनगी अधलाहो कैँ नीक बना दैत अछि।
प्र. 38. चिनगी गामक गामकैँ की करैत अछि ? [2023]
उत्तर- चिनगी गामक गाम कैँ जरा कऽ छाउर करैत अछि।
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