अध्याय 12. तिरिछ
महत्वपूर्ण तथ्य
- लेखक: उदय प्रकाश
- जन्म: 1 जनवरी 1952
- जन्म-स्थान: सीतापुर, अनूपपुर, मध्य प्रदेश
- माता: गंगा देवी
- पिता: प्रेम कुमार सिंह
- उदय प्रकाश के लेखन का तीसरा दशक चल रहा है।
- 1980 के आसपास वे एक कवि के रूप में पाठकों के बीच आए थे।
- यहाँ प्रस्तुत उनकी प्रसिद्ध कहानी 'तिरिछ' एक आधुनिक समय की बहुत दुखद कहानी है।
- तिरिछ एक विषैला और भयानक जन्तु है।
- इस कहानी को जादुई यथार्थ की कहानी भी कहा जाता है।
प्रश्न-उत्तर
लघु उत्तरीय प्रश्न
- तिरिछ क्या है? कहानी में वह किसका प्रतीक है? उत्तर: तिरिछ एक बहुत ही जहरीला जन्तु है जो जंगल में रहता है। उसमें काले नाग से भी सौ गुना ज्यादा जहर होता है। कहानी में यह डर और पुरानी रूढ़ियों का प्रतीक है। तिरिछ का जहर लेखक के पिता की मौत का कारण बनता है, इसलिए यह डर, आतंक और दुःख का प्रतीक भी है।
- क्या यहाँ तिरिछ केवल जानवर भर है? यदि नहीं तो उससे आँख क्यों नहीं मिलाना चाहिए? उत्तर: नहीं, यहाँ तिरिछ केवल जानवर नहीं है। बल्कि यह पुरानी रूढ़ियों का भी प्रतीक है। उससे सीधे आँख इसलिए नहीं मिलाना चाहिए क्योंकि वह जिसके पीछे एकबार पड़ जाता है उसे मारकर ही दम लेता है। अतः उससे सीधे आँख का टकराव मौत के बराबर है।
- तिरिछ लेखक के सपने में आता था और वह इतनी परिचित आँखों से देखता था कि लेखक अपने आपको रोक नहीं पाता था। यहाँ परिचित आँखों से क्या आशय है? उत्तर: परिचित आँखों का आशय ऐसी आँखों से है जो किसी को अच्छे से पहचानती हो। तिरिछ जब लेखक के सपने में आता है, तो वह उसे बहुत पहचाने वाली नजरों से देखता है। उसकी आँखों में दुश्मनी झलकती है, जैसे वह लेखक के बारे में सब कुछ जानता हो।
- तिरिछ को जलाने गए लेखक को पूरा जंगल परिचित क्यों लगता है? उत्तर: जब लेखक तिरिछ की लाश जलाने जंगल गया, तो उसे लगा कि वह जगह पहले भी देखी है। ऐसा इसलिए क्योंकि वह कई बार सपनों में तिरिछ के साथ हुए इस जगह को देख चुका था। इसलिए उसे जंगल की हर चीज जानी-पहचानी लगती है।
- इस घटना का सम्बन्ध पिताजी से है। मेरे सपने से है और शहर से भी है। शहर के प्रति जो एक जन्मजात भय होता है, उससे भी है यह भय क्यों है? अथवा, शहर के प्रति लेखक को जन्मजात भय क्यों था? तिरिछ कहानी के आधार पर उत्तर दें। उत्तर: लेखक के पिता को शहर पसंद नहीं था क्योंकि वहाँ के लोग निर्दयी और संवेदनशील थे। शहर में उनके साथ बहुत बुरा व्यवहार हुआ था किसी ने उनकी मदद नहीं की। यही अनुभव लेखक के मन में डर बन गया। उसे लगा कि शहर में इंसानियत नहीं, सिर्फ कठोरता है।
- तिरिछ कहानी में वर्णित 'शहर' के चरित्र से आप कितना सहमत हैं? उत्तर: तिरिछ कहानी में शहर को निर्दयी और स्वार्थी बताया गया है। वहाँ लोग दूसरों के दुःख से बेपरवाह हैं। सड़क पर किसी की मौत हो जाए या किसी पर अत्याचार हो, कोई मदद नहीं करता। मैं इससे सहमत हूँ, क्योंकि कहानी दिखाती है कि शहर में इंसानियत कम और संवेदनहीनता ज्यादा है।
- लेखक के पिता के साथ एक दिक्कत यह भी थी कि गाँव या जंगल की पगडंडियां तो उन्हें याद रहती थीं, कारण हो सकता है? आप क्या सोचते हैं लिखें। शहर की सड़कों को वे भूल जाते थे। इसके पीछे क्या हो? उत्तर: लेखक के पिता जी गाँव में पले-बढ़े थे, इसलिए उन्हें गाँव की हर पगडंडी याद थी। लेकिन शहर की भीड़, भगदड़ और डर उन्हें अच्छा नहीं लगता था। वहाँ वे घबराते थे, इसलिए शहर की सड़कों को याद नहीं रख पाते थे।
- लेखक के पिता अपना परिचय हमेशा 'राम स्वार्थ प्रसाद............एक्स स्कूल हेडमास्टर, विलेज हेड ऑफ बकेली के रूप में देते थे, ऐसा क्यों? स्कूल और गाँव के बिना वे अपना परिचय क्यों नहीं देते थे? उत्तर: क्योंकि, लेखक के पिता जी अपने गाँव और पद से जुड़ी पहचान पर गर्व करते थे। शहर में कोई उन्हें नहीं जानता था, इसलिए वे अपने नाम के साथ स्कूल और गाँव का नाम बताते थे। यही उनका सम्मान और पूरी पहचान थी।
- हालाँकि थानू कहता है कि अब तो वह तय हो गया कि तिरिछ के जहर से कोई नहीं बच सकता। ठीक चौबीस घंटे बाद उसने अपना करिश्मा दिखाया और पिताजी की मृत्यु हुई इस अवतरण का अभिप्राय स्पष्ट करिए। अथवा 'तिरिछ के जहर से कोई नहीं बच सकता' - इस पंक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए। उत्तर: थानू का मानना था कि तिरिछ का काटा इंसान मर जाता है, लेकिन वास्तव में पिता जी की मृत्यु जहर से नहीं, बल्कि प्यास, धतूरे के बीज और लोगों की बेहरमी से हुई थी। जो समाज की क्रूरता और संवेदनहीनता का प्रतीक है।
- अब लेखक को तिरिछ का सपना क्यों नहीं आता? उत्तर: क्योंकि अब लेखक समझ चुका है कि तिरिछ सिर्फ एक सपना नहीं, बल्कि डर और समाज के आतंक का प्रतीक था। जब वह उस डर से बाहर आ गया और सच्चाई जान गया, तो वह सपना भी खत्म हो गया।
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