Nun Hindi 10th All Subjective By NVSK Satish Classes Dwalakh
SHORT QUESTIONS ANSWER – 2 अंक
1. खेमा किस पर आधारित कहानी है? उत्तर: खेमा कहानी बाल श्रम (बाल मजदूरी) की समस्या और उसकी क्रूरता पर आधारित है।
2. 'मुक्ताकाशी' होटल का मालिक कौन है? उत्तर: 'मुक्ताकाशी' होटल का मालिक कसारा है।
3. खेमा कौन है? उत्तर: खेमा 'मुक्ताकाशी' होटल में काम करने वाला एक बाल मजदूर है।
4. संजू को डायरी लिखने की प्रेरणा किससे मिली? उत्तर: संजू को डायरी लिखने की प्रेरणा महात्मा गांधी ('बापू') की आत्मकथा 'सत्य के प्रयोग' से मिली।
5. 'ईदगाह' कहानी किस पर आधारित है? उत्तर: 'ईदगाह' कहानी बाल मनोविज्ञान, मानवीय संवेदना और त्याग पर आधारित है।
6. 'मुक्ताकाशी' होटल का मालिक कौन और कैसा था? उत्तर: 'मुक्ताकाशी' होटल का मालिक कसारा था। वह अत्यधिक कठोर, निर्दयी और असंवेदनशील स्वभाव का था।
7. 'खुशबू रचते हैं हाथ' किसकी रचना है? उत्तर: 'खुशबू रचते हैं हाथ' कवि अरुण कमल की रचना है।
8. खुशबू रचते हाथ कैसी परिस्थितियों में रह रहे हैं? उत्तर: खुशबू रचने वाले कारीगर अत्यधिक गंदी बस्तियों, बदबूदार नालियों और कूड़े-कचरे के ढेरों के बीच जीवन बिताने को मजबूर हैं।
9. पद्मा कौन थी? उत्तर: पद्मा कलिंग देश की राजकुमारी थी।
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10. हिरण शावक को लेखक क्या कहकर सांत्वना देता है? उत्तर: लेखक हिरण के बच्चे (शावक) को यह कहकर सांत्वना देता है कि "तुम्हारी माँ तुम्हें अवश्य मिलेगी, तुम निश्चिंत होकर सो जाओ।"
11. अशोक कलिंग पर क्यों आक्रमण किया? उत्तर: सम्राट अशोक कलिंग को जीतकर उसे अपने साम्राज्य में मिलाना चाहता था।
12. अशोक और कलिंग के बीच कितने दिनों से युद्ध जारी था? उत्तर: सम्राट अशोक और कलिंग के बीच चार वर्षों से युद्ध जारी था।
13. 'ईर्ष्या : तू न गई मेरे मन से' किसकी रचना है? उत्तर: यह निबंध राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' द्वारा रचित है।
14. ईर्ष्या का क्या काम है? उत्तर: ईर्ष्या का मुख्य काम मनुष्य के मन को जलाना और उसके अंदर असंतोष पैदा करना है।
15. आर्यभट्ट किस विद्या के क्षेत्र में विख्यात हैं? उत्तर: आर्यभट्ट खगोल विज्ञान और गणित के क्षेत्र में अत्यंत विख्यात हैं।
16. तिब्बत में बौद्धधर्म का प्रचार प्रसार किसने किया? उत्तर: तिब्बत में बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार अतीश दीपंकर ने किया था।
17. विक्रमशिला की प्रसिद्धि किस सदी तक फैल चुकी थी? उत्तर: विक्रमशिला विश्वविद्यालय की प्रसिद्धि 10वीं-11वीं सदी तक व्यापक रूप से फैल चुकी थी।
18. संजू कैसी लड़की थी? उसे किस चीज का शौक था? उत्तर: संजू एक हँसमुख और समझदार लड़की थी। उसे पुस्तकें और डायरी पढ़ने का गहरा शौक था।
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19. 'सत्य के प्रयोग' पुस्तक के रचयिता कौन हैं? उत्तर: 'सत्य के प्रयोग' (My Experiments with Truth) पुस्तक के रचयिता महात्मा गांधी हैं।
20. पीपल किसकी रचना है? उत्तर: 'पीपल' कविता गोपाल सिंह 'नेपाली' की रचना है।
21. दीनबंधु निराला के लेखक कौन हैं? उत्तर: 'दीनबंधु निराला' पाठ के लेखक आचार्य शिवपूजन सहाय हैं।
22. निराला कौन थे? उत्तर: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' हिंदी साहित्य के छायावादी युग के प्रमुख कवि थे।
23. सुदामा चरित किस भाषा में लिखी गई है? उत्तर: 'सुदामा चरित' ब्रजभाषा में रचित काव्य है।
24. ईद के दिन अमीना क्यों उदास थी? उत्तर: ईद के दिन अमीना इसलिए उदास थी क्योंकि उसके घर में खाने के लिए अनाज का एक दाना भी नहीं था और हामिद के लिए नए कपड़े या जूते खरीदने के पैसे नहीं थे।
25. सुदामा चरित के रचयिता कौन हैं? उत्तर: 'सुदामा चरित' के रचयिता नरोत्तम दास हैं।
26. हामिद ने चिमटा क्यों खरीदा? उत्तर: हामिद ने चिमटा इसलिए खरीदा क्योंकि तवे से रोटी उतारते समय उसकी दादी की उँगलियाँ जल जाती थीं।
27. तू जिन्दा है – शीर्षक कविता क्या प्रकट करती है? उत्तर: 'तू जिन्दा है' कविता जीवन के प्रति गहरे उत्साह, सकारात्मकता और संघर्षशील जीवन-राग को प्रकट करती है।
28. 'कनक' शब्द का प्रयोग किन-किन अर्थों में किया गया है? उत्तर: 'कनक' शब्द का प्रयोग मुख्य रूप से सोना (स्वर्ण), धतूरा और गेहूं/गुणवत्ता के अर्थ में किया जाता है।
29. 'बच्चे की दुआ' के रचयिता कौन हैं? उत्तर: 'बच्चे की दुआ' कविता के रचयिता मोहम्मद इक़बाल हैं।
30. 'बच्चे की दुआ' क्या है? उत्तर: 'बच्चे की दुआ' एक प्रार्थना गीत (प्रार्थना) है, जिसमें ईश्वर से नेक राह पर चलने और दूसरों की सेवा करने की कामना की गई है।
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LONG QUESTIONS ANSWER – 5 अंक
1. जमी के पेट में पली गन, पले हैं जलजले का भाव स्पष्ट करें। उत्तर: इस पंक्ति का भावार्थ यह है कि जिस प्रकार धरती के गर्भ में छिपी आग और उथल-पुथल से भूकंप या ज्वाला उत्पन्न होते हैं, ठीक उसी प्रकार जब समाज में शोषित और पीड़ित जनता पर अत्याचार बढ़ता है, तो उनके अंदर क्रांति की ज्वाला जन्म लेती है। अन्याय और शोषण को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता; जनता का असंतोष ही अंततः एक बड़े बदलाव या क्रांति का रूप ले लेता है।
2. कवि शंकर शैलेंद्र ने 'तू जिन्दा है तो..' के माध्यम से क्या कहा है? उत्तर: कवि शंकर शैलेंद्र ने इस कविता के माध्यम से मनुष्य को अपनी जिजीविषा (जीने की इच्छा) और स्वाभिमान को बनाए रखने का संदेश दिया है। कवि कहते हैं कि अतीत के दुखों, कठिनाइयों और असफलताओं को भूलकर व्यक्ति को वर्तमान में उत्साह और आशा के साथ जीना चाहिए। जीवन में चाहे कितनी भी बाधाएँ आएँ, निरंतर प्रयास और संघर्ष के बल पर ही एक नए और समृद्ध भारत/भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।
3. ईद के दिन अमीना क्यों उदास थी? उत्तर: ईद के दिन अमीना इसलिए उदास थी क्योंकि उसके घर में खाने के लिए अनाज का एक दाना भी नहीं था और न ही उसके पास पैसे थे। उसे दुख था कि वह अपने पोते हामिद के लिए नए कपड़े या जूते भी नहीं खरीद सकी थी।
4. मेला जाने से पहले हामिद दादी से क्या कहता है? उत्तर: मेला जाने से पहले हामिद अपनी दादी से कहता है, "अम्मा तुम डरना मत, मैं सबसे पहले मेला देखकर वापस आ जाऊँगा। तुम बिल्कुल चिंता मत करना।"
5. हामिद मिठाई या खिलौने के बदले चिमटा पसन्द करता है। क्यों? उत्तर: हामिद जानता था कि मिठाई या खिलौने से बस कुछ देर की खुशी मिलेगी। लेकिन रोटी बनाते समय उसकी दादी के हाथ तवे से जल जाते हैं। चिमटा खरीदने से दादी की उँगलियाँ नहीं जलेंगी, इसलिए उसने चिमटा पसंद किया।
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6. मेले में चिमटा खरीदने से पहले हामिद के मन में कौन-कौन से विचार आये? वर्णन कीजिए। उत्तर: मेले में हामिद के मन में पहले मिठाई और खिलौने खरीदने का विचार आया। लेकिन जब उसने लोहे की दुकान पर चिमटा देखा, तो उसे अपनी दादी की याद आई कि रोटी सेकते समय उनकी उँगलियाँ जल जाती हैं। उसने सोचा कि खिलौने तो टूट जाएँगे, पर चिमटा दादी के बहुत काम आएगा और वे उसे देखकर बहुत खुश होंगी।
7. चिमटा देखकर अमीना के मन में कैसा भाव आया? उत्तर: पहले तो चिमटा देखकर अमीना को गुस्सा आया कि इसने मेले में कुछ खाया-पिया नहीं और यह ले आया। लेकिन जब हामिद ने बताया कि उसने दादी की उँगलियाँ जलने से बचाने के लिए चिमटा खरीदा है, तो अमीना का गुस्सा प्यार में बदल गया और उसकी आँखों से खुशी के आँसू बहने लगे।
8. कर्मवीर की पहचान क्या है? उत्तर: कर्मवीर वे लोग होते हैं जो भाग्य पर नहीं, बल्कि अपनी मेहनत पर भरोसा करते हैं। वे किसी काम को कल पर नहीं टालते, बाधाओं से डरते नहीं हैं और जिस काम को शुरू करते हैं, उसे पूरा करके ही दम लेते हैं।
9. आप अपने को कर्मवीर कैसे साबित कर सकते हैं? उत्तर: हम अपनी पढ़ाई और काम को समय पर पूरा करके, कठिनाइयों से न घबराकर, आलस छोड़कर और ईमानदारी से मेहनत करके खुद को कर्मवीर साबित कर सकते हैं।
10. आप किसे अपना आदर्श मानते हैं और क्यों? उत्तर: मैं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को अपना आदर्श मानता हूँ। उन्होंने अहिंसा, सत्य और अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर देश को आजादी दिलाई और हमेशा कर्म करने पर जोर दिया।
11. बालगोबिन भगत गृहस्थ थे। फिर भी उन्हें साधु क्यों कहा जाता था? उत्तर: बालगोबिन भगत परिवार और खेती-बाड़ी वाले गृहस्थ इंसान थे, लेकिन उनका आचरण और व्यवहार संतों जैसा था। वे कभी झूठ नहीं बोलते थे, किसी से झगड़ा नहीं करते थे, कबीरदास के आदर्शों पर चलते थे और अपनी उपज का पहला हिस्सा मठ में समर्पित कर देते थे।
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12. पुत्रवधू द्वारा पुत्र की मुखाग्नि दिलवाना भगत के व्यक्तित्व की किस विशेषता को दर्शाता है? उत्तर: यह घटना दर्शाती है कि बालगोबिन भगत समाज में फैली पुरानी कुरीतियों और रुढ़िवादी सोच के विरोधी थे। वे स्त्री और पुरुष को समान मानते थे और अंधविश्वास पर भरोसा नहीं करते थे।
13. बालगोबिन भगत ने अपने पुत्र को मृत्यु पर भी शोक प्रकट नहीं किया। उनके इस व्यवहार पर अपनी तर्कपूर्ण प्रतिक्रिया व्यक्त कीजिए। उत्तर: बालगोबिन भगत मानते थे कि आत्मा अमर है और शरीर नश्वर है। मृत्यु के बाद आत्मा परमात्मा में लीन हो जाती है। इसलिए बेटे की मृत्यु को वे दुख का नहीं बल्कि आत्मा के परमात्मा से मिलन का अवसर मानते थे, इसी कारण उन्होंने शोक नहीं मनाया।
14. 'बालगोबिन भगत' का सारांश लिखें। उत्तर: यह पाठ रामवृक्ष बेनीपुरी द्वारा लिखित एक सुंदर रेखाचित्र है। बालगोबिन भगत एक गृहस्थ साधु थे जो कबीर को अपना साहेब मानते थे। वे खेती-बाड़ी करते थे और बहुत मधुर कबीर-पद गाते थे। जब उनके इकलौते बेटे की मृत्यु हुई, तो उन्होंने रोने के बजाय भजन गाए और अपनी बहू से बेटे की चिता को आग दिलवाई। बाद में उन्होंने अपनी बहु के पुनर्विवाह के लिए उसके भाई के साथ भेज दिया। वे पूरे जीवन सत्य, सादगी और कबीर के विचारों पर चले।
15. हुंडरू का झरना कैसे बना है? उत्तर: स्वर्णरेखा नदी जब पहाड़ों को पार करती हुई बहती है, तो उसकी कई धाराएँ एक साथ विशाल रूप में पहाड़ से नीचे गिरती हैं। इसी पानी के 243 फीट की ऊँचाई से गिरने के कारण हुंडरू का झरना बना है।
16. कामता प्रसाद सिंह 'काम' द्वारा रचित 'हुंडरू का जलप्रपात' का सारांश अपने शब्दों में दें। उत्तर: 'हुंडरू का जलप्रपात' एक यात्रा-वृत्तांत है जिसमें लेखक ने रांची के पास स्थित हुंडरू झरने की प्राकृतिक सुंदरता का वर्णन किया है। यह झरना 243 फीट ऊँचा है और चारों तरफ पहाड़, घने जंगल, नदियाँ तथा प्राकृतिक दृश्य इसकी सुंदरता बढ़ाते हैं। आसपास रहने वाले आदिवासियों का जीवन बहुत सरल है। यहाँ का प्राकृतिक दृश्य इतना मनमोहक है कि देखने वाले का मन मोह लेता है।
17. गाँव के किसान सिरचन को क्या समझते थे? उत्तर: गाँव के किसान सिरचन को कामचोर, बेकार और मुफ़्तखोर समझते थे। वे मानते थे कि वह मजदूरी का काम ढंग से नहीं कर सकता और बात-बात पर चिढ़ जाता है।
18. इस कहानी में आए हुए विभिन्न पात्रों के नाम लिखें। उत्तर: 'ठेस' कहानी के मुख्य पात्र हैं: सिरचन (नायक), लेखक, लेखक की माँ, चाची, मँझली भाभी, छोटी बहन मानू और पंचानन चौधरी।
19. सिरचन को पान का बीड़ा किसने दिया था? उत्तर: सिरचन को पान का बीड़ा लेखक की छोटी बहन मानू ने दिया था, ताकि सिरचन खुश होकर मन लगाकर काम करे।
20. फणीश्वर नाथ 'रेणु' द्वारा रचित 'ठेस' कहानी का सारांश अपने शब्दों में दें। उत्तर: 'ठेस' ग्रामीण जीवन और एक स्वाभिमानी कलाकार सिरचन की कहानी है। सिरचन मोथी घास, शीतलपाटी और चिक बनाने में माहिर कारीगर था। गाँव के लोग उसे कामचोर समझते थे। जब लेखक की बहन मानू की विदाई के लिए सामान बनाना था, तो चाची और भाभी के कड़वे वचनों से सिरचन को ठेस पहुँची और वह काम अधूरा छोड़कर चला गया। लेकिन विदाई के समय वह खुद स्टेशन आया और मानू को अपनी बनाई बेहतरीन शीतलपाटी और चिक भेंट की, जिससे साबित हुआ कि वह पैसों का नहीं बल्कि सम्मान का भूखा कलाकार था।
21. अल्लाह बुराई से बचाना मुझको तथा नेका राह में चलने की शक्ति प्रदान करना - नज्म की किन पंक्तियों में ऐसा भाव प्रकट किया गया है। नज्म की उन पंक्तियों को लिखें। उत्तर: "मेरे अल्लाह बुराई से बचाना मुझको, नेक जो राह हो, उस राह पे चलाना मुझको।"
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22. व्याख्या कीजिए:- (क) जिन्दगी हो मेरी परवाने का सूरत या रब। इल्म की शम्स से हो मुझकों मुहब्बत या रब। उत्तर: कवि ईश्वर से प्रार्थना करता है कि मेरा जीवन पतंगे जैसा समर्पित हो और मुझे विद्या (ज्ञान) रूपी मोमबत्ती से गहरा प्रेम हो।
(ख) हो मेरे दम से यू ही मेरे वतन की जीनत। जिस तरह फूल से होती है चमन की जीनत। उत्तर: कवि प्रार्थना करता है कि मेरे अच्छे कर्मों से मेरे देश की शोभा उसी तरह बढ़े, जैसे सुंदर फूलों से बगीचे की सुंदरता बढ़ती है।
(ग) मेरे अल्लाह बुराई से बचाना मुझको। नेक जो राह हो, उस राह पे चलाना मुझको। उत्तर: इन पंक्तियों में बच्चा भगवान से प्रार्थना करता है कि हे ईश्वर! मुझे हर प्रकार की बुराई से दूर रखना और हमेशा अच्छाई व सच्चाई के रास्ते पर चलाना।
23. 'बच्चे की दुआ' शीर्षक कविता में कवि क्या कहता है? उत्तर: 'बच्चे की दुआ' कविता में कवि मोहम्मद इक़बाल कहते हैं कि बच्चों को हमेशा समाज के गरीबों, दुखियों और असहायों की मदद करनी चाहिए। हमें बुराई से बचकर सच्चाई के रास्ते पर चलना चाहिए और मानवता की सेवा करनी चाहिए।
24. पद्मा के ललकारने पर भी अशोक ने युद्ध करना स्वीकार क्यों नहीं किया? उत्तर: पद्मा के ललकारने पर भी सम्राट अशोक ने युद्ध करना स्वीकार नहीं किया, क्योंकि पद्मा महिलाओं की सेना का नेतृत्व कर रही थीं। अशोक जानते थे कि स्त्रियों पर अस्त्र-शस्त्र उठाना धर्म और शास्त्र के नियमों के पूरी तरह विरुद्ध है। स्त्रियों की रक्षा करना वे अपना परम धर्म मानते थे। यदि वे स्त्रियों से युद्ध करते, तो उनकी वीरता पर कलंक लगता और धर्म का उल्लंघन होता। इसलिए उन्होंने निहत्थी और शूरवीर स्त्रियों के सामने अपनी तलवार नीचे फेंक दी और युद्ध करने से मना कर दिया।
25. पद्मा को अशोक से बदला लेने का अच्छा अवसर था, तब भी उसने अशोक को जीवित क्यों छोड़ दिया? उत्तर: जब सम्राट अशोक ने अपनी तलवार ज़मीन पर फेंक दी और युद्ध न करने का निर्णय लिया, तब उनके सभी सैनिक भी निहत्थे हो गए। पद्मा कलिंग युद्ध का बदला ले सकती थी, लेकिन उसने अशोक पर वार नहीं किया। भारतीय संस्कृति और युद्ध-शास्त्र का नियम है कि किसी भी निहत्थे या आत्मसमर्पण करने वाले व्यक्ति पर वार नहीं किया जाता। पद्मा ने अपनी उच्च नैतिक मर्यादा और सच्चे वीर चरित्र का परिचय देते हुए अशोक को जीवित छोड़ दिया।
26. 'अशस्त्र' और 'सशस्त्र' के अंतर को लिखिए। उत्तर: 'सशस्त्र' और 'अशस्त्र' में मुख्य अंतर हथियारों की उपस्थिति का है। 'सशस्त्र' का अर्थ होता है - हथियारों या अस्त्र-शस्त्र के साथ होना। जो व्यक्ति सशस्त्र होता है, वह युद्ध करने या दूसरों की हत्या करने में सक्षम होता है। इसके विपरीत, 'अशस्त्र' का अर्थ होता है - बिना किसी हथियार या अस्त्र के होना। निहत्था व्यक्ति किसी पर हमला नहीं कर सकता और वह स्वयं असुरक्षित रहता है, किंतु वह किसी दूसरे जीव को चोट या हानि नहीं पहुँचा सकता।
27. इस एकांकी को कहानी के रूप में लिखें। उत्तर: मगध के सम्राट अशोक ने कलिंग पर आक्रमण किया। चार वर्षों के भीषण युद्ध के बाद भी जब कलिंग दुर्ग का फाटक नहीं खुला, तो अशोक स्वयं युद्ध भूमि में उतरे। वहाँ उनका सामना कलिंग की राजकुमारी पद्मा की महिला सेना से हुआ। स्त्रियों पर अस्त्र न उठाने के अपने धर्म-नियम के कारण अशोक ने अपनी तलवार फेंक दी और समर्पण कर दिया। पद्मा ने भी निहत्थे सम्राट पर वार नहीं किया। इस घटना से अशोक का हृदय परिवर्तन हुआ और उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया।
28. वकील साहब सुखी क्यों नहीं हैं? उत्तर: वकील साहब के पास धन-दौलत, मान-सम्मान और सुख-सुविधा के तमाम साधन मौजूद हैं, फिर भी वे सुखी नहीं हैं। इसका मुख्य कारण उनके मन में बसा ईर्ष्या का भाव है। वे अपनी वस्तुओं और जीवन से संतुष्ट होने के बजाय अपने पड़ोसी बीमा एजेंट की बढ़ती आमदनी और सुख-सुविधाओं को देखकर लगातार जलते रहते हैं। दूसरों के सुख को देखकर ईर्ष्या करना और खुद की तुलना उनसे करना ही वकील साहब के दुख का मूल कारण है।
29. ईर्ष्या को अनोखा वरदान क्यों कहा गया है? उत्तर: ईर्ष्या को अनोखा वरदान इसलिए कहा गया है, क्योंकि यह जिस व्यक्ति के हृदय में आ जाती है, वह अपनी चीज़ों के सुख का आनंद लेना छोड़ देता है। इसके बदले वह दूसरों के पास मौजूद सुख-सुविधाओं को देखकर मन ही मन दुखी होने लगता है। ईर्ष्यालु व्यक्ति स्वयं की प्रगति के लिए मेहनत करने के बजाय दूसरों को नुकसान पहुँचाने में अपनी ऊर्जा नष्ट करता है। यह एक ऐसा विचित्र अवगुण है जो इंसान को अंदर ही अंदर जलाता रहता है।
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30. ईर्ष्या की बेटी किसे और क्यों कहा गया है? उत्तर: ईर्ष्या की बेटी 'निंदा' (दूसरों की बुराई करना) को कहा गया है। जिस व्यक्ति के अंदर ईर्ष्या पैदा होती है, वह दूसरों की निंदा करना शुरू कर देता है। वह सोचता है कि दूसरों की बुराई करके वह उन्हें लोगों की नज़र में गिरा देगा, जिससे उनका स्थान उसे मिल जाएगा। जिस प्रकार माँ से बेटी का जन्म होता है, ठीक उसी प्रकार ईर्ष्या रूपी भावना से निंदा करने की प्रवृत्ति पैदा होती है, इसीलिए निंदा को ईर्ष्या की बेटी माना गया है।
31. ईर्ष्यालु से बचने का क्या उपाय है? उत्तर: प्रसिद्ध विचारक नीत्शे के अनुसार, ईर्ष्यालु व्यक्ति बाज़ार की उन मक्खियों के समान होते हैं जो बिना किसी वजह के इधर-उधर भिनभिनाती रहती हैं और दूसरों को तंग करती हैं। ऐसे ईर्ष्यालु लोगों से बचने का सबसे उत्तम उपाय यह है कि आप उनसे दूर रहें और एकांत में अपना काम करें। उनकी बेकार की बातों और आलोचनाओं पर ध्यान न दें। अपनी ऊर्जा को उनके साथ बहस में गंवाने के बजाय आत्म-सुधार और रचनात्मक कार्यों में लगाना ही समझदारी है।
32. इन पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए- (क) मैं कहता निर्मोही रहियो, तू जाता है मोही रे। उत्तर: प्रस्तुत पंक्ति में संत कबीरदास जी कहते हैं कि वे मनुष्य को बार-बार समझाते हैं कि इस नश्वर संसार की सांसारिक माया-मोह और धन-दौलत से दूर रहो और निर्मोही बनो। लेकिन इंसान जानते हुए भी इस सांसारिक आकर्षणों, रिश्तों और माया के जाल में लगातार फँसता चला जाता है। जब तक मनुष्य इस झूठे मोह-माया का त्याग नहीं करेगा, तब तक उसे सच्चे ज्ञान और आत्मा के कल्याण की प्राप्ति नहीं हो सकती है।
(ख) मोको कहाँ ढूँढे बंदे, मैं तो तेरे पास में। उत्तर: इस पंक्ति का भाव यह है कि ईश्वर मनुष्य से कहते हैं कि हे बंदे! तुम मुझे मंदिर, मस्जिद, काबा या तीर्थ स्थानों में क्यों भटककर खोज रहे हो? मैं तो हमेशा तुम्हारे पास ही हूँ। ईश्वर बाहरी आडंबरों, पूजा-पाठ या अनुष्ठानों में नहीं बसते, बल्कि वे प्रत्येक जीव की आत्मा और हृदय के अंदर मौजूद हैं। यदि कोई मनुष्य सच्चे और पवित्र मन से अपने अंदर खोजेगा, तो उसे ईश्वर के दर्शन तुरंत हो जाएँगे।
33. 'मोको' शब्द किसके लिए प्रयोग किया गया है? उत्तर: 'मोको' शब्द का प्रयोग कबीरदास जी द्वारा परमपिता परमेश्वर (ईश्वर) के लिए किया गया है। यहाँ ईश्वर स्वयं मनुष्य को संबोधित करते हुए कहते हैं कि उसे ईश्वर की खोज में बाहरी धार्मिक स्थलों पर जाने की आवश्यकता नहीं है। ईश्वर सृष्टि के कण-कण में और प्रत्येक मनुष्य के हृदय में समाए हुए हैं। इस प्रकार 'मोको' शब्द निर्गुण और सर्वव्यापी ईश्वर की उपस्थिति को दर्शाने के लिए उपयोग किया गया है।
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34. कबीर के अनुसार ईश्वर कहाँ निवास करता है? उत्तर: संत कबीरदास के अनुसार ईश्वर किसी मंदिर, मस्जिद, काबा या तीर्थ स्थल पर निवास नहीं करते हैं। वे कर्मकांडों, पूजा-पाठ या बाहरी दिखावों में भी नहीं मिलते। कबीर का मानना है कि ईश्वर सर्वव्यापी हैं और वे हर प्राणी के हृदय तथा आत्मा के अंदर बसते हैं। जो व्यक्ति सच्चे मन से, बिना किसी आडंबर के अपने अंदर झाँकता है, उसे ही ईश्वर की सच्ची अनुभूति और दर्शन प्राप्त होते हैं।
35. सगुण भक्तिधारा एवं निर्गुण भक्तिधारा के दो-दो कवियों के नाम लिखिए। उत्तर: हिंदी साहित्य की भक्ति धारा को मुख्य रूप से दो भागों में बाँटा गया है:
- सगुण भक्तिधारा के कवि: तुलसीदास और सूरदास। (ये ईश्वर के साकार रूप और अवतारों की पूजा पर बल देते हैं)।
- निर्गुण भक्तिधारा के कवि: कबीरदास और मलिक मोहम्मद जायसी। (ये ईश्वर को निराकार, सर्वव्यापी और बिना किसी रूप-रंग वाला मानते हैं)।
36. विक्रमशिला कहाँ अवस्थित है? उत्तर: ऐतिहासिक प्राचीन शिक्षा केंद्र 'विक्रमशिला' बिहार राज्य के भागलपुर जिले में स्थित है। यह भागलपुर के कहलगाँव थाना क्षेत्र के अंतर्गत 'अंतीचक' नामक एक छोटे और प्रसिद्ध गाँव में अवस्थित है। प्राचीन समय में यह बौद्ध शिक्षा का एक बहुत बड़ा और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय था, जहाँ देश-विदेश से हज़ारों छात्र-छात्राएँ उच्च शिक्षा प्राप्त करने और शोध कार्य करने के लिए आया करते थे।
37. यहाँ के पाठ्यक्रम में क्या-क्या शामिल है? उत्तर: विक्रमशिला विश्वविद्यालय का पाठ्यक्रम अत्यधिक विस्तृत और समृद्ध था। यहाँ तंत्रशास्त्र, व्याकरण, न्याय, सृष्टि-विज्ञान, शब्द-विद्या और शिल्प-विद्या की पढ़ाई होती थी। इसके अलावा चिकित्सा-शास्त्र, सांख्य, वैशेषिक, अध्यात्म-विद्या, विज्ञान और तंत्र-मंत्र जैसे गूढ़ विषयों का गहन अध्ययन कराया जाता था। विद्यार्थियों को नियमित कक्षाओं के साथ-साथ शोध कार्य करने और मौखिक परीक्षा (शास्त्रार्थ) में भाग लेने का अवसर भी दिया जाता था।
38. विक्रमशिला पाठ पर सारांश दें। उत्तर: यह पाठ प्राचीन भारत के गौरवशाली बौद्ध विश्वविद्यालय विक्रमशिला के इतिहास पर प्रकाश डालता है। इसकी स्थापना 8वीं शताब्दी में पाल वंश के राजा धर्मपाल ने भागलपुर के कहलगाँव में की थी। यहाँ तंत्र, न्याय, व्याकरण और विज्ञान की उच्च शिक्षा दी जाती थी और विदेशी छात्र भी पढ़ने आते थे। 13वीं सदी में तुर्कों के आक्रमण के कारण यह महान केंद्र नष्ट हो गया। यह पाठ भारत के ज्ञान और समृद्ध अतीत का परिचय देता है।
39. संजू कैसी लड़की थी? उसे किस चीज का शौक था? उत्तर: संजू कक्षा 8 में पढ़ने वाली एक बहुत ही हँसमुख, मेधावी और समझदार लड़की थी। वह अपने स्वभाव से सभी का दिल जीत लेती थी। संजू को तरह-तरह की किताबें पढ़ने का बहुत गहरा शौक था। वह कहानियों, कविताओं, कॉमिक्स और चुटकुलों की पुस्तकें बड़े चाव से पढ़ती थी। इसके अलावा उसे चुटकुले सुनाकर दूसरों को हँसाने और फुर्सत के समय में नई-नई ज्ञानवर्धक बातें सीखने का भी बहुत शौक़ था।
40. संजू को डायरी लिखने की प्रेरणा किससे मिली? उत्तर: संजू को डायरी लिखने की प्रेरणा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रसिद्ध आत्मकथा 'सत्य के प्रयोग' पढ़कर मिली। गांधी जी नियमित रूप से अपनी छोटी-बड़ी घटनाओं और विचारों को डायरी में लिखा करते थे। इस बात से प्रभावित होकर संजू के मन में भी अपनी दिनचर्या और अनुभवों को डायरी में दर्ज करने की तीव्र इच्छा जागी। दीदी और पिताजी के मार्गदर्शन से उसने नियमित रूप से डायरी लिखना शुरू किया।
41. 'सत्य के प्रयोग' नामक पुस्तक के रचयिता कौन थे? उत्तर: 'सत्य के प्रयोग' (My Experiments with Truth) नामक महान और प्रेरणादायक पुस्तक के रचयिता राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हैं। इस आत्मकथा में गांधी जी ने अपने जीवन के सच, आचरण, नैतिक मूल्यों और अपने विभिन्न प्रयोगों का बहुत ही ईमानदारी से वर्णन किया है। यह पुस्तक पूरी दुनिया के लोगों को सत्य, अहिंसा और अनुशासन के मार्ग पर चलने के लिए निरंतर प्रेरित करती है।
42. पीपल का पेड़ हमारे लिए किस प्रकार उपयोगी है? उत्तर: पीपल का पेड़ हमारे पर्यावरण और जीवन के लिए अत्यधिक उपयोगी है। यह निरंतर प्राणवायु (ऑक्सीजन) प्रदान करता है और वातावरण की दूषित गैसों को सोखता है। इसकी घनी छाया में राहगीर विश्राम करते हैं तथा अनेक पशु-पक्षी इस पर आश्रय पाते हैं। इसके छाल और पत्तों से औषधियाँ बनाई जाती हैं। धार्मिक दृष्टि से भी पीपल का बहुत महत्व है और लोग इसकी श्रद्धापूर्वक पूजा करते हैं।
43. कैसा वातावरण मिलने पर बुलबुल पंछी गाने लगती हैं? उत्तर: जब वर्षा ऋतु में वर्षा की हल्की फुहारें पड़ती हैं और मौसम सुहावना हो जाता है, तब बुलबुल पंछी खुशी से चहकने और गाने लगती है। शीतल हवा बहने से जब पीपल के पत्ते आपस में टकराकर मधुर ध्वनि उत्पन्न करते हैं, तो बुलबुल उस प्राकृतिक माहौल से प्रभावित हो जाती है। वनों की हरियाली और नदियाँ का कल-कल बहता पानी बुलबुल को गाने के लिए आकर्षित करता है।
44. निम्नलिखित पंक्तियों का भावार्थ लिखिए: (क) ऊपर विस्तृत नभ नील-नील... उत्तर: प्रस्तुत पंक्तियों का भावार्थ यह है कि जंगल का प्राकृतिक दृश्य अत्यंत सुंदर और आकर्षक है। ऊपर नीला-नीला आकाश फैला हुआ है और नीचे धरती पर सुंदर नदियाँ, झीलें तथा जामुन, तमाल व इमली के हरे-भरे पेड़ लहलहा रहे हैं। पानी में खिले हुए लाल-लाल कमल के फूल इस जंगल की प्राकृतिक सुंदरता को और अधिक बढ़ा रहे हैं, जिसे देखकर मन आनंदित हो उठता है।
(ख) हैं खड़े जहाँ पर शाल, बाँस... उत्तर: इन पंक्तियों में कवि शांत और निर्जन वनों के सुंदर वातावरण का वर्णन करते हैं। जहाँ शाल और बाँस के ऊँचे वृक्ष खड़े हैं, नदियाँ और झरने बह रहे हैं तथा पशु आराम से हरी घास चर रहे हैं। ऐसे शांत वनों में चकोर पक्षी अपनी प्रेमिका से अलग होने के दुख में रात भर रोता है और सुबह होते ही मोर खुशी से नाचने लगते हैं।
45. निराला सम्बन्धी बातें लोगों को अतिरंजित क्यों जान पड़ेगी? उत्तर: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जी का जीवन बेहद साधारण और महानता से भरा हुआ था। वे खुद मामूली कपड़े पहनते थे लेकिन गरीबों को अपने नए कपड़े, कंबल और यहाँ तक कि अपने हिस्से का भोजन भी दान कर देते थे। आज के स्वार्थी युग में जहाँ लोग केवल अपने बारे में सोचते हैं, वहाँ निराला जी जैसी निस्वार्थ दयालुता और त्याग की बातें सुनकर लोगों को अतिरंजित (झूठी या बढ़ा-चढ़ाकर कही गई) लगती हैं।
46. आचार्य शिवपूजन सहाय द्वारा लिखित दीनबंधु 'निराला' पाठ का सारांश दें। उत्तर: यह पाठ महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' के उदार, दयालु और निस्वार्थ व्यक्तित्व पर आधारित एक संस्मरण है। निराला जी साहित्याकाश के चमकते सितारे थे, लेकिन उनका जीवन बहुत सादगी भरा था। वे गरीबों, अनाथों और दुखियों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। अपने पास आए धन को वे ज़रूरतमंदों में बाँट देते थे। उनके इसी समाज-सेवा और बंधुत्व भाव के कारण उन्हें 'दीनबंधु' कहा गया।
47. खेमा कसारा के होटल पर काम क्यों करता था? उत्तर: खेमा की पारिवारिक और आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। उसके पिता अत्यंत गरीब थे और अपने बच्चों का पेट पालने में पूरी तरह असमर्थ थे। गरीबी से मजबूर होकर और अपने सिर से जिम्मेदारी हटाने के लिए उसके पिता ने बाल श्रमिक खेमा को होटल मालिक कसारा के हाथों बेच दिया था। इसी कारण से छोटा बच्चा खेमा अपनी इच्छा के विरुद्ध कसारा के होटल पर काम करने के लिए मजबूर था।
48. खेमा द्वारा चप्पल की माँग करने पर कसारा ने क्या जवाब दिया? उत्तर: जब खेमा ने कड़कती धूप में नंगे पैर जलने से बचने के लिए चप्पल माँगी, तो क्रूर होटल मालिक कसारा ने उसकी बात को डांटकर टाल दिया। उसने कहा, "अभी रखता हूँ चप्पल सिर पर, चल अपना काम कर! बड़ा आया चप्पल पहनने वाला!" कसारा का आशय यह था कि नौकरों को सुविधाएँ माँगने का कोई अधिकार नहीं है, और उसने खेमा को चुपचाप काम पर लगने की धमकी दी।
49. अपने पैरों पर पानी गिराने से खेमा को तसल्ली क्यों मिलती थी? उत्तर: भीषण गर्मी के मौसम में खेमा को नंगे पैर ही तपती हुई सड़क और जलती हुई ज़मीन पर दौड़-दौड़कर ग्राहकों को चाय पहुँचानी पड़ती थी। नंगे पैर होने के कारण उसके तलवे बुरी तरह जलने लगते थे और तेज दर्द होता था। इस जलन और पीड़ा से थोड़ी देर के लिए आराम पाने हेतु वह अपने पैरों पर ठंडा पानी गिरा लेता था, जिससे उसे तसल्ली मिलती थी।
50. किन परिस्थितियों में खेमा के पिता ने उसे बेच दिया था? उत्तर: खेमा के पिता बहुत ज़्यादा गरीब और असहाय थे। उनके पास न तो कोई ज़मीन-जायदाद थी और न ही कमाई का कोई निश्चित साधन था। वे अपने बड़े परिवार के बच्चों का भरण-पोषण करने और उनका पेट भरने में पूरी तरह असमर्थ थे। अपनी गरीबी के बोझ को कम करने और पालन-पोषण के दायित्व से मुक्त होने के लिए उन्होंने अपने छोटे से मासूम बेटे खेमा को कसारा के हाथों बेच दिया।
51. 'खेमा' शीर्षक पाठ का सारांश लिखें। उत्तर: 'खेमा' पाठ बाल श्रम की गंभीर समस्या और बाल मजदूरों के प्रति समाज व मालिकों की क्रूरता को उजागर करता है। आठ-नौ साल का खेमा गरीबी के कारण कसारा के होटल में काम करता है। वह दिन-रात ग्राहकों के झूठे बर्तन धोता है और कड़कती धूप में चाय पहुँचाता है। कसारा का व्यवहार उसके प्रति बहुत निर्दयी रहता है। यह कहानी बाल मजदूरी को समाप्त कर बच्चों को शिक्षा देने का संदेश देती है।
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52. खुशबू रचनेवाले हाथ कैसी परिस्थितियों में रह रहे हैं? उत्तर: 'खुशबू रचनेवाले हाथ' कविता में खुशबूदार अगरबत्तियाँ बनाने वाले कारीगरों की दयनीय स्थिति का वर्णन किया गया है। दूसरों के जीवन को महकाने वाले ये लोग स्वयं अत्यंत गंदी, बदबूदार नालियों और गंदे कचरे के ढेरों के बीच छोटी-छोटी झुग्गियों में रहने के लिए मजबूर हैं। जिस जगह से आम लोग नाक बंद करके गुज़रते हैं, वहाँ ये कारीगर दिन-रात अभाव, गरीबी और गंदगी के बीच अपना जीवन बिताते हैं।
53. खुशबू रचते हैं हाथ से क्या तात्पर्य है? उत्तर: 'खुशबू रचते हैं हाथ' से तात्पर्य उन परिश्रमी और हुनरमंद कारीगरों से है जो अपने हाथों से विभिन्न प्रकार की सुगंधित अगरबत्तियाँ बनाते हैं। इनके द्वारा बनाई गई अगरबत्तियों से पूरा संसार महकता है और लोगों के घर-आँगन खुशबूदार बनते हैं। यह शीर्षक उन मेहनतकश लोगों के श्रम और समाज में उनके महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाता है, जो खुद कड़े अभावों में रहकर भी दुनिया में खुशियाँ और महक फैलाते हैं।
54. कैंमूर के चेनारी प्रखण्ड के मयाही निवासी विष्णुशंकर तिवारी क्यों खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं? उत्तर: कैमूर जिले के चेनारी प्रखंड अंतर्गत मयाही गाँव के निवासी विष्णुशंकर तिवारी अपनी बेटी सोनी की शानदार और ऐतिहासिक सफलता के कारण अत्यधिक खुश हैं। उनकी बेटी सोनी ने एथलेटिक्स प्रतियोगिता में अपनी उत्कृष्ट प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए पूरे जिले और राज्य स्तर पर शीर्ष स्थान हासिल किया। बेटी की इस बहुत बड़ी उपलब्धि से पूरे परिवार तथा क्षेत्र का नाम रोशन हुआ, इसीलिए वे खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं।
55. सोनी पूरे प्रखण्ड की क्यों चहेती बन गई है? उत्तर: सोनी अपनी अद्भुत खेल प्रतिभा, कड़ी मेहनत और निरंतर प्रयासों के कारण पूरे प्रखंड की चहेती बन गई है। उसने जिला स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में 400 मीटर और 1600 मीटर की दौड़ में प्रथम स्थान प्राप्त करके अपनी योग्यता सिद्ध की। इसके बाद राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी उसने शानदार प्रदर्शन करके क्षेत्र का मान बढ़ाया। उसकी इस सफलता से प्रेरित होकर सभी लोग उसे अत्यंत प्यार और सम्मान देते हैं।
56. 'हौसले की उड़ान' पाठ का आशय स्पष्ट करें। उत्तर: 'हौसले की उड़ान' पाठ का मुख्य आशय यह दर्शाना है कि यदि मन में दृढ़ इच्छाशक्ति और आगे बढ़ने का हौसला हो, तो विषम परिस्थितियों और सामाजिक बंधनों के बावजूद कोई भी लक्ष्य पाया जा सकता है। यह पाठ बिहार की उन साहसी बेटियों की कहानियों पर आधारित है, जिन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से समाज की पुरानी रुढ़ियों, गरीबी और सामाजिक बाधाओं को तोड़कर शिक्षा व खेल के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई।
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57. 'हौसले की उड़ान' पाठ का सारांश लिखें। उत्तर: यह पाठ आधुनिक बिहार की संघर्षशील और प्रतिभावान बेटियों की प्रेरणादायक कहानियों का संग्रह है। पाठ में गुड़िया, सोनी, कदम और जैनब खान जैसी बेटियों के अदम्य साहस को दर्शाया गया है। इन बेटियों ने सामाजिक बंदिशों, बाल विवाह, अशिक्षा और गरीबी जैसी बड़ी रुकावटों का डटकर मुकाबला किया। इन्होंने पढ़ाई और खेलों में अपनी कड़ी मेहनत से उत्कृष्ट सफलता हासिल की। यह पाठ संदेश देता है कि दृढ़ संकल्प से हर बाधा को पार किया जा सकता है।
58. कर्पूरी ठाकुर परिजनों को प्रतीक्षा करने के लिए क्यों कहते हैं? उत्तर: जननायक कर्पूरी ठाकुर का जीवन व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर देश और समाज की सेवा के लिए समर्पित था। जब उनके परिजनों ने उनसे अपनी पारिवारिक आर्थिक स्थिति सुधारने और मदद की अपेक्षा रखी, तो उन्होंने परिजनों से प्रतीक्षा करने को कहा। उनका मानना था कि जब तक पूरा देश गुलामी, गरीबी और अन्याय से मुक्त नहीं हो जाता, तब तक वे केवल अपने परिवार के सुख-सुविधाओं के बारे में नहीं सोच सकते।
59. मैट्रिक के बाद उच्च शिक्षा के लिए उन्हें कहाँ और किस प्रकार जाना पड़ता था? उत्तर: मैट्रिक पास करने के बाद कर्पूरी ठाकुर ने उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए दरभंगा के चंद्रधारी मिथिला (सी.एम.) कॉलेज में नामांकन करवाया। अत्यधिक आर्थिक तंगी के कारण वे कॉलेज तक जाने के लिए परिवहन का खर्च नहीं उठा सकते थे। इसलिए वे प्रतिदिन अपने गाँव से लगभग 50-60 किलोमीटर की दूरी मुक्तापुर स्टेशन तक पैदल चलकर और फिर वहाँ से रेलगाड़ी से सफर करके दरभंगा पहुँचते थे और अपनी पढ़ाई पूरी करते थे।
60. 'जननायक कर्पूरी ठाकुर' का जीवन परिचय दें। उत्तर: जननायक कर्पूरी ठाकुर का जन्म 24 जनवरी 1921 को समस्तीपुर के पितौझिया (अब कर्पूरी ग्राम) गाँव में हुआ था। वे बचपन से ही अत्यंत प्रतिभाशाली, संवेदनशील और गरीब-शोषित वर्ग के प्रति दयालु थे। भारत के स्वतंत्रता संग्राम और भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा। स्वतंत्रता के बाद वे बिहार के मुख्यमंत्री बने। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन गरीबों, पिछड़ों और वंचितों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया।
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61. "बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी" उपर्युक्त पंक्ति में भारत को बूढ़ा कहा गया है, क्योंकि- (क) भारत गुलाम था। (ख) भारत में एकता नहीं थी। (ग) भारत का इतिहास प्राचीन है। (घ) भारत की दशा शिथिल और जर्जर हो चुकी थी। उत्तर: (घ) भारत की दशा शिथिल और जर्जर हो चुकी थी। (स्पष्टीकरण: सदियों की गुलामी, अन्याय और अत्याचारों के कारण भारतवासियों का स्वाभिमान नष्ट हो चुका था और देश कमजोर व चेतनाहीन हो गया था, इसीलिए कवि ने भारत को 'बूढ़ा' कहा है।)
62. लक्ष्मीबाई का बचपन किस प्रकार के खेलों में बीता? उत्तर: महारानी लक्ष्मीबाई का बचपन सामान्य लड़कियों के खेल-खिलौनों से बिल्कुल अलग और अनोखा था। उन्हें बचपन से ही अस्त्र-शस्त्र चलाने और सैन्य शिक्षा प्राप्त करने में गहरी रुचि थी। गुड़िया या खिलौनों से खेलने के बजाय उनके मुख्य खेल बर्छी, ढाल, तलवार, कृपाण और कतार चलाना था। वे नकली युद्ध रचना, व्यूह तोड़ना, किलेबंदी करना और घोड़े की सवारी जैसे युद्ध-अभ्यास वाले खेलों में अपना बचपन बिताती थीं।
63. भाव स्पष्ट कीजिए- (क) गुमी हुई आजादी की कीमत सबने पहचानी थी। उत्तर: इस पंक्ति का भाव यह है कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के समय भारतीय जनमानस को अपनी खोई हुई आजादी और गुलामी के दुखों का गहरा अहसास हो चुका था। अंग्रेजों के दमन और अत्याचारों से तंग आकर भारत के राजे-महाराजे, सैनिक और आम जनता को यह समझ आ गया था कि स्वतंत्रता से बढ़कर कोई धन नहीं है। इसलिए सभी भारतवासियों ने एकजुट होकर अंग्रेजों को देश से बाहर भगाने का दृढ़ संकल्प ले लिया था।
64. प्रथम भारतीय स्वाधीनता-संग्राम के क्या कारण थे? उत्तर: प्रथम भारतीय स्वाधीनता-संग्राम (1857) के पीछे मुख्य कारण अंग्रेजों की शोषणकारी नीतियाँ, हड़प नीति और भारतीय राजाओं के अधिकारों को छीनना था। जब अंग्रेजों ने झाँसी के राजा के निसंतान निधन के बाद झाँसी को अपने राज्य में मिलाने का प्रयास किया, तो रानी लक्ष्मीबाई ने इसका डटकर विरोध किया। अंग्रेजों के अत्याचारों से तंग आकर देश के विभिन्न राजाओं, सैनिकों और आम जनता ने एक साथ मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की मशाल जला दी।
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65. लेखक को बीमार पड़ने की क्यों इच्छा हुई? उत्तर: 'चिकित्सा का चक्कर' पाठ में लेखक को बीमार पड़ने की इच्छा इसलिए हुई क्योंकि वे बिना बीमार पड़े आराम करना चाहते थे। वे सोचते थे कि बीमार पड़ने पर रिश्तेदार और मित्र उनका हाल-चाल पूछने आएँगे, उनके लिए स्वादिष्ट बिस्कुट और फल लाएँगे। इसके अलावा, उनकी पत्नी दिन-रात प्रेम से उनकी सेवा करेगी और उनके सिर में तेल लगाएगी। इसी सुखद कल्पना और आवभगत का आनंद लेने के लिए लेखक बीमार पड़ना चाहते थे।
66. बेढब बनारसी द्वारा रचित 'चिकित्सा का चक्कर' शीर्षक पाठ का सारांश दें। उत्तर: यह पाठ बेढब बनारसी द्वारा लिखित एक बेहद हास्य-व्यंग्यपूर्ण रचना है। इसमें लेखक पेट दर्द से पीड़ित होकर विभिन्न प्रकार की चिकित्सा पद्धतियों (ऐलोपैथी, होम्योपैथी, आयुर्वेद, हकीम, ओझा आदि) के डॉक्टरों से अपना इलाज करवाते हैं। हर डॉक्टर अपनी अलग-अलग राय देता है और कई बेतुकी दवाइयाँ लिखता है, जिससे लेखक की बीमारी ठीक होने के बजाय और अधिक बढ़ती जाती है। अंत में, बिना दवाओं के ही वे स्वतः ठीक हो जाते हैं। यह पाठ चिकित्सा प्रणाली के ढोंग पर करारा व्यंग्य करता है।
67. सुदामा की दीन दशा देखकर श्रीकृष्ण किस प्रकार भाव-विह्वल हो गये? उत्तर: जब सुदामा श्रीकृष्ण के महल पहुँचे, तो उनकी अत्यंत फटीहाली, नंगे पैर और दुर्बल शरीर को देखकर श्रीकृष्ण का हृदय करुणा से भर गया। अपने बचपन के प्रिय मित्र की ऐसी कष्टदायी और दीन दशा देखकर श्रीकृष्ण अपने आँसू नहीं रोक सके और फूट-फूटकर रोने लगे। उनका दुख इतना गहरा था कि उन्होंने सुदामा के पैर धोने के लिए मँगाए गए परात के पानी को छुआ तक नहीं, बल्कि अपनी आँखों से बहने वाले आँसुओं की धारा से ही सुदामा के पैर धो डाले।
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68. अपने गाँव वापस आने पर सुदामा को क्यों भ्रम हो गया? उत्तर: जब सुदामा श्रीकृष्ण से मिलने के बाद अपने गाँव वापस लौटे, तो वे अपनी पुरानी टूटी-फूटी झोपड़ी की जगह विशाल महल देखकर आश्चर्यचकित रह गए। वहाँ द्वारका की तरह ही हाथी, घोड़े, नौकर-चाकर और राजसी ठाट-बाट थे। अपनी पत्नी को सुंदर आभूषणों और वस्त्रों में सजी देखकर उन्हें भ्रम होने लगा कि कहीं वे रास्ता भटककर गलती से वापस श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी में ही तो नहीं पहुँच गए हैं।
69. जाड़े की रात में कौन रो रहा है और क्यों रो रहा है? उत्तर: जाड़े की कड़कती रात में पहाड़ पर हिरण का एक छोटा सा बच्चा अकेला बैठकर रो रहा है। वह बहुत छोटा और कोमल है। घने जंगलों और पहाड़ों के बीच रास्ता भटक जाने के कारण वह अपनी माँ से बिछड़ गया है। रात के सन्नाटे, अत्यधिक ठंड और अपनी माँ से दूर होने के डर तथा पीड़ा के कारण हिरण का नन्हा बच्चा जंगल में अकेला रो रहा है।
70. हिरण का नन्हा बच्चा क्यों दुःखी है? उत्तर: हिरण का नन्हा बच्चा इसलिए अत्यधिक दुखी है क्योंकि वह जंगल में अपनी माँ से बिछड़ गया है और अकेला रह गया है। चारों तरफ फैले घने अंधेरे, जाड़े की भीषण ठंड और निर्जन पहाड़ के माहौल ने उसे डरा दिया है। उसकी कोमल आँखों में माँ के पास न होने की वेदना और आँसू हैं। माँ के बिना असुरक्षा की भावना ही उसके गहरे दुख और रोने का मुख्य कारण है।
71. "राह भटके हिरण के बच्चे को" कविता का भावार्थ लिखें। उत्तर: यह कविता वात्सल्य और अपार करुणा से भरी एक अत्यंत मार्मिक रचना है। इसमें कवि जंगल में रास्ता भटके हुए हिरण के एक रोते हुए छोटे बच्चे को सांत्वना और दिलासा देते हैं। कवि कहते हैं कि हे नन्हे हिरण! तुम बिना किसी डर के निश्चिंत होकर सो जाओ। सुबह होते ही सुनहरी किरणों के साथ तुम्हारी माँ तुम्हें अवश्य मिल जाएगी और बाँस के जंगल तुम्हें लोरियाँ सुनाएँगे।
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