12th Political science book 2 chapter 7 क्षेत्रीय आकांक्षाएँ
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
1. क्षेत्रवाद की राजनीति का क्या अर्थ है?
उत्तर: जब किसी राज्य (या इलाके) के लोग पूरे देश के बजाय सिर्फ अपने क्षेत्र के हितों, पहचान और विकास को ज़्यादा महत्व देने लगते हैं और उसके लिए संघर्ष करते हैं, तो इसे क्षेत्रवाद की राजनीति कहते हैं।
2. क्षेत्रीय असंतुलन का क्या अभिप्राय है?
उत्तर: इसका मतलब है कि देश या राज्य के सभी हिस्सों का बराबर विकास न होना। जब कोई एक इलाका बहुत आगे बढ़ जाता है (अमीर हो जाता है) और दूसरा इलाका पिछड़ा (ग़रीब) रह जाता है, तो उसे क्षेत्रीय असंतुलन कहते हैं।
3. भारतीय भू-भाग में किस क्षेत्र को सात बहनों का भाग कहा जाता है?
उत्तर: भारत के उत्तर-पूर्व (North-East) हिस्से के सात राज्यों को 'सात बहनें' (Seven Sisters) कहा जाता है। ये राज्य संस्कृति में लगभग एक जैसे हैं। इनके नाम हैं: असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा।
4. क्षेत्रीय दल किसे कहते हैं?
उत्तर: ऐसा राजनीतिक दल (पार्टी) जो पूरे देश में चुनाव नहीं लड़ता, बल्कि उसका काम और प्रभाव सिर्फ किसी एक राज्य या छोटे से इलाके तक ही सीमित होता है, उसे क्षेत्रीय दल कहते हैं।
5. क्षेत्रीय संगठनों की स्थापना के कोई दो उद्देश्य बताइए।
उत्तर:
(a) भाषा के आधार पर नए राज्यों को बनवाना या पहचान दिलाना।
(b) अपने क्षेत्र के लोगों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए काम करना।
6. ऑपरेशन ब्लू स्टार क्या था? लिखिए।
उत्तर: अमृतसर के स्वर्ण मंदिर (गोल्डन टेम्पल) में छुपे उग्रवादियों को बाहर निकालने के लिए जून 1984 में भारतीय सेना द्वारा चलाई गई सैन्य कार्रवाई को 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' कहा जाता है।
7. चारू मजूमदार कौन थे?
उत्तर: चारू मजूमदार एक कम्युनिस्ट क्रांतिकारी और भारत के नक्सलवादी आंदोलन के मुख्य नेता थे। उन्होंने 'कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया' (CPI) से अलग होकर 'भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी)' की स्थापना की थी।
8. असम आंदोलन के मुख्य मुद्दे क्या थे?
उत्तर: असम आंदोलन के तीन मुख्य मुद्दे थे:
(i) बाहरी राज्यों या दूसरे देशों (जैसे बांग्लादेश) से आकर असम में बसे लोगों का विरोध करना, क्योंकि स्थानीय लोग उन्हें रोजगार और राजनीति में अपना प्रतिस्पर्धी मानते थे।
(ii) असम में तेल, चाय और कोयले जैसे प्राकृतिक संसाधन होने के बावजूद वहां फैली गरीबी को दूर करना और तेजी से विकास करना।
(iii) असम के लिए सरकार से ज़्यादा स्वायत्तता (फैसले लेने की आज़ादी) की मांग करना।
9. क्षेत्रवाद क्या है?
उत्तर: अपने क्षेत्र या इलाके के प्रति विशेष लगाव और जुड़ाव महसूस करना ही क्षेत्रवाद है। इसमें एक ही क्षेत्र के लोग खुद को एक मानते हैं और अपने इलाके के विकास के लिए सरकार के सामने अपनी मांगें रखते हैं।
10. आनन्दपुर साहिब प्रस्ताव क्या है?
उत्तर: साल 1973 में पंजाब के आनंदपुर साहिब में अकाली दल (एक राजनीतिक पार्टी) की बैठक हुई। इस बैठक में सिखों और पंजाब के लिए कुछ प्रमुख मांगें रखी गईं, जिसे 'आनन्दपुर साहिब प्रस्ताव' कहा जाता है।
11. पंजाब समझौते के मुख्य प्रावधान क्या थे?
उत्तर: साल 1985 में अकाली दल के अध्यक्ष हरचंद सिंह लोंगोवाल और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बीच पंजाब में शांति बहाली के लिए एक समझौता हुआ, जिसे पंजाब समझौता (या राजीव-लोंगोवाल समझौता) कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य पंजाब में जारी हिंसा को खत्म करना था।
12. सिक्किम का विलय समझाइए।
उत्तर: आज़ादी के समय सिक्किम में चोग्याल वंश का राज था और भारत इसकी रक्षा व विदेश मामले देखता था। 1974 में सिक्किम की जनता ने राजा के खिलाफ विद्रोह कर दिया। 1975 में वहां जनमत संग्रह (वोटिंग) कराया गया, जिसमें 97% जनता ने भारत में मिलने का फैसला किया। इस तरह 16 मई 1975 को सिक्किम भारत का 22वां राज्य बन गया।
13. स्वायत्तता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: स्वायत्तता (Autonomy) का सरल अर्थ है 'अपने फैसले खुद लेने की आज़ादी'। जब किसी राज्य या क्षेत्र को केंद्र सरकार के नियंत्रण से हटकर अपने स्थानीय मामलों में खुद नियम और कानून बनाने की छूट मिलती है, तो उसे स्वायत्तता कहते हैं।
14. मिजोरम के नेता लालडेंगा का परिचय दीजिए।
उत्तर: लालडेंगा मिजोरम के एक बड़े और प्रसिद्ध नेता थे, जिन्होंने 'मिजो नेशनल फ्रंट' (MNF) की स्थापना की थी। 1959 में मिजोरम में भारी अकाल पड़ा था, लेकिन असम सरकार की मदद से वे संतुष्ट नहीं हुए। इस वजह से वे सरकार के खिलाफ हो गए और लगभग 20 सालों तक भारत सरकार के विरुद्ध हथियारों के साथ संघर्ष किया। वे कुछ समय पाकिस्तान में शरणार्थी बनकर भी रहे और मिजोरम को अलग देश बनाने की मांग की। आखिरकार, 1986 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी और लालडेंगा के बीच एक शांति समझौता हुआ, जिसके बाद मिजोरम में शांति स्थापित हुई और लालडेंगा वहां के पहले मुख्यमंत्री बने।
15. अंगमी जापू फिजो कौन थे? संक्षेप में परिचय दीजिए।
उत्तर: अंगमी जापू फिजो नागालैंड के एक प्रमुख नेता थे, जिन्होंने नागालैंड को भारत से अलग करने के आंदोलन का नेतृत्व किया था। वे 'नागा नेशनल काउंसिल' के अध्यक्ष बने और नागालैंड को एक स्वतंत्र देश बनाने के लिए कई सालों तक भारत सरकार के खिलाफ सशस्त्र (हथियारों के साथ) लड़ाई लड़ी। बाद में उन्होंने पाकिस्तान में शरण ली और अपने जीवन के आखिरी तीन साल ब्रिटेन में बिताए, जहाँ 1990 में उनका निधन हो गया।
16. काजी लैंडुप दोरजी खांगसरपा का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर: काजी लैंडुप दोरजी सिक्किम के इतिहास के एक महान नेता थे, जिन्होंने वहां लोकतंत्र (जनता का शासन) लाने के लिए आंदोलन किया। वे सिक्किम प्रजामंडल और सिक्किम राज्य कांग्रेस के संस्थापक थे। 1962 में उन्होंने 'सिक्किम नेशनल कांग्रेस' बनाई। सिक्किम में हुए चुनावों में उन्हें भारी जीत मिली। वे सिक्किम को भारत का हिस्सा बनाने के बहुत बड़े समर्थक थे। उनके प्रयासों और वहां की विधानसभा द्वारा कराए गए जनमत संग्रह के बाद ही सिक्किम का भारत में पूरी तरह विलय हो सका।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
1. जम्मू-कश्मीर की अंदरूनी विभिन्नताओं की व्याख्या कीजिए?
उत्तर: जम्मू-कश्मीर सामाजिक और भौगोलिक (इलाके के) रूप से कई भागों में बंटा हुआ है। इसकी मुख्य अंदरूनी विभिन्नताएं इस प्रकार हैं:
क्षेत्रीय बनावट: यह क्षेत्र मुख्य रूप से जम्मू, कश्मीर और लद्दाख (अब अलग केंद्र शासित प्रदेश) के हिस्सों में बंटा है।
कश्मीर क्षेत्र: कश्मीरी घाटी में मुख्य रूप से कश्मीरी बोलने वाले मुस्लिम रहते हैं, और वहां बहुत कम संख्या में कश्मीरी हिंदू (अल्पसंख्यक) भी रहते हैं।
जम्मू क्षेत्र: जम्मू का इलाका पहाड़ी और मैदानी दोनों है। यहाँ हिंदू, मुस्लिम और सिख धर्म के लोग मिलकर रहते हैं।
लद्दाख क्षेत्र: लद्दाख का इलाका बहुत बड़ा है लेकिन यहाँ आबादी बहुत कम है। यहाँ मुख्य रूप से बौद्ध और मुस्लिम धर्म के लोग रहते हैं।
अनेक आकांक्षाओं (मांगों) के जन्म होने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
आज़ादी के समय की स्थिति: 1947 में जब भारत आज़ाद हुआ, तब जम्मू-कश्मीर में राजा का शासन था। वहां के हिंदू राजा हरि सिंह इसे एक स्वतंत्र देश बनाकर रखना चाहते थे।
पाकिस्तान और कश्मीरियों की सोच: राज्य में मुस्लिम आबादी ज़्यादा होने के कारण पाकिस्तान को लगता था कि कश्मीर उसका हिस्सा होना चाहिए। वहीं दूसरी ओर, कश्मीर के आम लोगों का मानना था कि वे पहले कश्मीरी हैं, उनकी क्षेत्रीय पहचान सबसे ऊपर है।
जन-आंदोलन: 'नेशनल कॉन्फ्रेंस' के नेता शेख अब्दुल्ला ने राज्य में राजा के खिलाफ जन-आंदोलन चलाया। वे राजा को गद्दी से हटाना चाहते थे, लेकिन वे पाकिस्तान में भी शामिल नहीं होना चाहते थे।
कबायली हमला और विलय: 1947 में पाकिस्तान ने कबायली घुसपैठियों के ज़रिए कश्मीर पर कब्ज़ा करने की कोशिश की। तब राजा हरि सिंह ने भारत से मदद मांगी। भारत सरकार ने मदद करने से पहले राजा से 'भारत संघ में विलय' के दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर कराए और फिर भारतीय सेना ने घुसपैठियों को खदेड़ दिया।
विशेष दर्जा: भारत इस बात पर भी सहमत हुआ था कि स्थिति सामान्य होने पर वहां जनता की राय (जनमत संग्रह) ली जाएगी। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर को भारतीय संविधान की धारा-370 के तहत एक विशेष राज्य का दर्जा दिया गया था।
2. जम्मू और कश्मीर की राजनीति को निरंतर विवादास्पद बनाने के लिए उत्तरदायी बाह्य तथा आंतरिक विवादों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: जम्मू-कश्मीर की राजनीति हमेशा से विवादों और संघर्षों से घिरी रही है। इसके लिए बाहरी और अंदरूनी दोनों कारण ज़िम्मेदार हैं, जो इस प्रकार हैं:
बाह्य (बाहरी) कारण: पाकिस्तान का लगातार दखल देना, कश्मीर पर अपना दावा ठोकना, सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देना और घुसपैठ कराना इसके मुख्य बाहरी कारण हैं।
आंतरिक (अंदरूनी) कारण: राज्य के भीतर अलग-अलग क्षेत्रों (जम्मू, कश्मीर घाटी और लद्दाख) के लोगों की अलग-अलग मांगें, धारा-370 को लेकर मतभेद, केंद्र सरकार और राज्य के नेताओं के बीच तालमेल की कमी और वहां के युवाओं में रोज़गार व विकास की कमी के कारण असंतोष होना इसके मुख्य अंदरूनी कारण हैं।
क्षेत्रीय दल स्थानीय मुद्दों के लिए बेहतर प्रतिनिधित्व के लिए एक स्थान प्रदान किया।
क्षेत्रीय दल राज्य की आवाज और सौदेवाजी की शक्तियाँ प्रदान लोकतंत्र की धुरी मजबूत किया है।
क्षेत्रीय दल राजनीतिक प्रक्रिया को अधिक प्रतियोगी बना दिया है और नेतृत्व की भूमिका को प्रमुख दलों के चंगुल से बाहर निकाला है। क्षेत्रीय दल एक दल की प्रभुत्व को समाप्त किया है।
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