12rh Political Science Chapter 5 Book 2 Subjective अध्याय - 5 कांग्रेस प्रणालीः चुनौतियाँ और पुनर्स्थापन

 12rh Political Science Chapter 5 Book 2 Subjective अध्याय - 5 कांग्रेस प्रणालीः चुनौतियाँ और पुनर्स्थापन

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1. कांग्रेस विरोधवाद का अर्थ बताइए।

  • उत्तर: जवाहरलाल नेहरू जी की मृत्यु के बाद देश की अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों ने मिलकर कांग्रेस पार्टी का विरोध करना शुरू कर दिया। इसी विरोधी राजनीति को 'कांग्रेस विरोधवाद' कहा जाता है।

प्रश्न 2. गरीबी हटाओ का नारा किसने दिया?

  • उत्तर: 'गरीबी हटाओ' का प्रसिद्ध नारा इंदिरा गांधी ने 1971 के लोकसभा चुनाव के दौरान दिया था।

प्रश्न 3. कांग्रेस व्यवस्था की पुनः स्थापना का क्या अर्थ है?

  • उत्तर: 1967 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी कई राज्यों में हार गई और कमजोर हो गई थी। लेकिन 1971 के चुनाव में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस को फिर से भारी बहुमत मिला और वह दोबारा मजबूत स्थिति में आ गई। इसे ही 'कांग्रेस व्यवस्था की पुनः स्थापना' (फिर से स्थापित होना) कहते हैं।

प्रश्न 4. गैर कांग्रेसवाद से आप क्या समझते हैं?

  • उत्तर: 1967 के चुनाव से पहले समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया ने सभी विपक्षी (गैर-कांग्रेसी) पार्टियों को एक साथ आने को कहा, ताकि मिलकर कांग्रेस को चुनाव में हराया जा सके। कांग्रेस के खिलाफ सभी विपक्षी दलों के एकजुट होने के इसी विचार को 'गैर-कांग्रेसवाद' कहा जाता है।

प्रश्न 5. गठबंधन किसे कहते हैं?

  • उत्तर: जब दो या दो से अधिक राजनीतिक पार्टियाँ मिलकर चुनाव लड़ती हैं या चुनाव जीतने के बाद मिलकर सरकार बनाती हैं, तो उसे 'गठबंधन' (Coalition) कहा जाता है।

प्रश्न 6. कांग्रेस सिंडिकेट किसे कहा जाता था?

  • उत्तर: कांग्रेस पार्टी के अंदर जो पुराने, अनुभवी और ताकतवर (वरिष्ठ) नेताओं का एक समूह था, उसे ही 'कांग्रेस सिंडिकेट' कहा जाता था। इस गुट का पार्टी के फैसलों पर बहुत बड़ा प्रभाव और दबाव रहता था।

प्रश्न 7. प्रिवी पर्स क्या था?

  • उत्तर: आजादी के बाद जब देसी रियासतों यानी राजा-रजवाड़ों को भारत में शामिल किया गया, तब उन्हें सरकार की तरफ से कुछ विशेष अधिकार, अपनी निजी संपत्ति रखने की छूट और हर साल एक निश्चित मात्रा में जेब खर्च (भत्ता) देने की गारंटी दी गई थी। इसी विशेष भत्ते को 'प्रिवी पर्स' कहा जाता था। इंदिरा गांधी ने 1971 में इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया।

प्रश्न 8. कांग्रेस व्यवस्था की बहाली किसे कहा गया?

  • उत्तर: 1967 के चुनावों में कांग्रेस पार्टी पहले की तुलना में बहुत कमजोर हो गई थी। लेकिन इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने कड़ी मेहनत की और 1971 के चुनावों में फिर से भारी जीत हासिल करके अपनी पुरानी मजबूत स्थिति वापस पा ली। इसे ही 'कांग्रेस व्यवस्था की बहाली' कहते हैं।

प्रश्न 9. युवा तुर्क कौन थे?

  • उत्तर: यह कांग्रेस पार्टी के भीतर नए और युवा सोच वाले नेताओं का एक समूह था। इन युवा नेताओं ने पुरानी विचारधारा वाले वरिष्ठ नेताओं को चुनौती दी और इंदिरा गांधी को हर संघर्ष में खुलकर साथ देकर विजयी बनाया।

प्रश्न 10. बीमारू राज्यों का क्या अर्थ है?

  • उत्तर: बीमारू राज्यों से मतलब देश के उन राज्यों से है जो आर्थिक रूप से बहुत पिछड़े हुए हैं, जहाँ गरीबी बहुत ज्यादा है और लोगों को जीने के लिए जरूरी भोजन, कपड़ा और रहने के लिए पक्का मकान भी मुश्किल से मिल पाता है।

प्रश्न 11. सन् 1967 के चुनावों में कांग्रेस के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ कौन था?

  • उत्तर: 1967 के चुनाव में कांग्रेस के सामने ये मुख्य चुनौतियाँ थीं:

  • कांग्रेस पार्टी के अंदरूनी नेताओं में आपसी मतभेद बढ़ रहा था।

  • विपक्ष में 'गैर-कांग्रेसवाद' (सभी विरोधी दलों का एकजुट होना) का प्रभाव बढ़ रहा था।

  • पूर्व राजा-महाराजाओं का स्वतंत्र पार्टी में शामिल होकर कांग्रेस के खिलाफ खड़े होना।

प्रश्न 12. प्रथम तीन आम चुनावों में कांग्रेस दल के प्रभुत्व के कोई चार कारण बताइए।

(अथवा 1980 के आम चुनावों में कांग्रेस क्यों विजयी रही? अथवा सन् 1952 से 1967 तक एक दल कांग्रेस के प्रभुत्व के कारणों को स्पष्ट कीजिए।)

  • उत्तर: शुरुआत के तीन आम चुनावों में कांग्रेस की लगातार जीत के 4 मुख्य कारण ये थे:

  • आजादी के आंदोलन की विरासत: कांग्रेस को देश को आजाद कराने वाली मुख्य पार्टी माना जाता था।

  • जवाहरलाल नेहरू का नेतृत्व: नेहरू जी जैसे महान और लोकप्रिय नेता का मार्गदर्शन हासिल था।

  • विपक्षी दलों की कमजोरी: उस समय बाकी विपक्षी पार्टियाँ बहुत छोटी और कमजोर थीं।

  • सबको साथ लेकर चलना: कांग्रेस का चरित्र राष्ट्रवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक था, जिसमें हर वर्ग के लोग शामिल थे।

प्रश्न 13. लाल बहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्री कार्यकाल में देश को किन दो चुनौतियों का सामना करना पड़ा?

  • उत्तर: नेहरू जी के बाद जब लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बने (1964 से 1966 तक), तब देश के सामने ये दो बड़ी मुसीबतें आईं:

  • देश के कई हिस्सों में भयंकर सूखा (अकाल) पड़ा, जिससे अनाज का भारी संकट पैदा हो गया।

  • सन् 1965 में अचानक भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध शुरू हो गया।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1. 1969 ईस्वी में कांग्रेस में विभाजन के क्या कारण थे?

  • उत्तर: कांग्रेस पार्टी के टूटने (विभाजन) के मुख्य कारण निम्नलिखित थे:

  • नेताओं की आपसी अनबन: 1966 में लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद 'कांग्रेस सिंडिकेट' (वरिष्ठ नेताओं) ने इंदिरा गांधी को इस सोच के साथ प्रधानमंत्री बनाया था कि वे उनके कहे अनुसार चलेंगी। लेकिन इंदिरा गांधी ने अपने फैसले खुद लेना शुरू कर दिए, जिससे दोनों के रिश्ते बिगड़ गए।

  • राष्ट्रपति चुनाव का विवाद (1969): असली झगड़ा तब बढ़ा जब 1969 के राष्ट्रपति चुनाव में सिंडिकेट ने 'नीलम संजीव रेड्डी' को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया, जबकि इंदिरा गांधी ने उनके खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार 'वी. वी. गिरी' का समर्थन किया।

  • नतीजा: इंदिरा गांधी ने कांग्रेस के सांसदों और विधायकों से अपनी 'अंतरात्मा की आवाज' सुनकर वोट देने को कहा। चुनाव में वी. वी. गिरी जीत गए। इस बगावत के कारण 1969 में कांग्रेस दो भागों में टूट गई—कांग्रेस (ओ) यानी पुरानी कांग्रेस और कांग्रेस (आर) यानी इंदिरा गांधी की नई कांग्रेस।

प्रश्न 2. राजनीतिक दल बदल क्या है? इस पर रोक के लिए क्या उपाय किये गए हैं?

  • उत्तर:

  • दल-बदल का अर्थ: जब कोई विधायक या सांसद किसी एक पार्टी के टिकट और चुनाव चिन्ह पर चुनाव जीतता है, और जीत जाने के बाद स्वार्थ या किसी कारण से उस पार्टी को छोड़कर किसी दूसरी पार्टी में शामिल हो जाता है, तो उसे 'राजनीतिक दल-बदल' कहते हैं। 1967 के चुनावों के बाद भारतीय राजनीति में यह बहुत ज्यादा होने लगा था।

  • रोकने के उपाय (कानून): इस गलत परंपरा को रोकने के लिए सरकार ने 1985 में 52वाँ संविधान संशोधन करके 'दल-बदल विरोधी कानून' बनाया। इस कानून के तहत अगर कोई नेता अपनी पार्टी के नियमों को तोड़ता है या पार्टी के अध्यक्ष के आदेश का उल्लंघन करके दूसरी पार्टी में जाता है, तो उसकी संसद या विधानसभा की सदस्यता रद्द (खत्म) कर दी जाती है।

प्रश्न 6. कांग्रेस सिंडिकेट किसे कहा जाता था?

  • उत्तर: कांग्रेस पार्टी के अंदर जो पुराने, अनुभवी और ताकतवर (वरिष्ठ) नेताओं का एक समूह था, उसे ही 'कांग्रेस सिंडिकेट' कहा जाता था। इस गुट का पार्टी के फैसलों पर बहुत बड़ा प्रभाव और दबाव रहता था।

प्रश्न 7. प्रिवी पर्स क्या था?

  • उत्तर: आजादी के बाद जब देसी रियासतों (राजा-रजवाड़ों) को भारत में शामिल किया गया, तब उन्हें सरकार की तरफ से कुछ विशेष अधिकार, अपनी निजी संपत्ति रखने की छूट और हर साल एक निश्चित मात्रा में जेब खर्च (भत्ता) देने की गारंटी दी गई थी। इसी विशेष भत्ते को 'प्रिवी पर्स' कहा जाता था। इंदिरा गांधी ने 1971 में इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया।

प्रश्न 8. कांग्रेस व्यवस्था की बहाली किसे कहा गया?

  • उत्तर: 1967 के चुनावों में कांग्रेस पार्टी पहले की तुलना में बहुत कमजोर हो गई थी। लेकिन इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने कड़ी मेहनत की और 1971 के चुनावों में फिर से भारी जीत हासिल करके अपनी पुरानी मजबूत स्थिति वापस पा ली। इसे ही 'कांग्रेस व्यवस्था की बहाली' कहते हैं।

प्रश्न 9. युवा तुर्क कौन थे?

  • उत्तर: यह कांग्रेस पार्टी के भीतर नए और युवा सोच वाले नेताओं का एक समूह था। इन युवा नेताओं ने पुरानी विचारधारा वाले वरिष्ठ नेताओं को चुनौती दी और इंदिरा गांधी को हर संघर्ष में खुलकर साथ देकर विजयी बनाया।

प्रश्न 10. बीमारू राज्यों का क्या अर्थ है?

  • उत्तर: बीमारू राज्यों से मतलब देश के उन राज्यों से है जो आर्थिक रूप से बहुत पिछड़े हुए हैं, जहाँ गरीबी बहुत ज्यादा है और लोगों को जीने के लिए जरूरी भोजन, कपड़ा और रहने के लिए पक्का मकान भी मुश्किल से मिल पाता है।

प्रश्न 11. सन् 1967 के चुनावों में कांग्रेस के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ कौन था?

  • उत्तर: 1967 के चुनाव में कांग्रेस के सामने ये मुख्य चुनौतियाँ थीं:

  • कांग्रेस पार्टी के अंदरूनी नेताओं में आपसी मतभेद बढ़ रहा था।

  • विपक्ष में 'गैर-कांग्रेसवाद' (सभी विरोधी दलों का एकजुट होना) का प्रभाव बढ़ रहा था।

  • पूर्व राजा-महाराजाओं का स्वतंत्र पार्टी में शामिल होकर कांग्रेस के खिलाफ खड़े होना।

प्रश्न 12. प्रथम तीन आम चुनावों में कांग्रेस दल के प्रभुत्व के कोई चार कारण बताइए।

(अथवा 1980 के आम चुनावों में कांग्रेस क्यों विजयी रही? अथवा सन् 1952 से 1967 तक एक दल कांग्रेस के प्रभुत्व के कारणों को स्पष्ट कीजिए।)

  • उत्तर: शुरुआत के तीन आम चुनावों में कांग्रेस की लगातार जीत के 4 मुख्य कारण ये थे:

  • आजादी के आंदोलन की विरासत: कांग्रेस को देश को आजाद कराने वाली मुख्य पार्टी माना जाता था।

  • जवाहरलाल नेहरू का नेतृत्व: नेहरू जी जैसे महान और लोकप्रिय नेता का मार्गदर्शन हासिल था।

  • विपक्षी दलों की कमजोरी: उस समय बाकी विपक्षी पार्टियाँ बहुत छोटी और कमजोर थीं।

  • सबको साथ लेकर चलना: कांग्रेस का चरित्र राष्ट्रवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक था, जिसमें हर वर्ग के लोग शामिल थे।

प्रश्न 13. लाल बहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्री कार्यकाल में देश को किन दो चुनौतियों का सामना करना पड़ा?

  • उत्तर: नेहरू जी के बाद जब लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बने (1964 से 1966 तक), तब देश के सामने ये दो बड़ी मुसीबतें आईं:

  • देश के कई हिस्सों में भयंकर सूखा (अकाल) पड़ा, जिससे अनाज का भारी संकट पैदा हो गया।

  • सन् 1965 में अचानक भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध शुरू हो गया।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1. 1969 ईस्वी में कांग्रेस में विभाजन के क्या कारण थे?

  • उत्तर: कांग्रेस पार्टी के टूटने (विभाजन) के मुख्य कारण निम्नलिखित थे:

  • नेताओं की आपसी अनबन: 1966 में लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद 'कांग्रेस सिंडिकेट' (वरिष्ठ नेताओं) ने इंदिरा गांधी को इस सोच के साथ प्रधानमंत्री बनाया था कि वे उनके कहे अनुसार चलेंगी। लेकिन इंदिरा गांधी ने अपने फैसले खुद लेना शुरू कर दिए, जिससे दोनों के रिश्ते बिगड़ गए।

  • राष्ट्रपति चुनाव का विवाद (1969): असली झगड़ा तब बढ़ा जब 1969 के राष्ट्रपति चुनाव में सिंडिकेट ने 'नीलम संजीव रेड्डी' को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया, जबकि इंदिरा गांधी ने उनके खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार 'वी. वी. गिरी' का समर्थन किया।

  • नतीजा: इंदिरा गांधी ने कांग्रेस के सांसदों और विधायकों से अपनी 'अंतरात्मा की आवाज' सुनकर वोट देने को कहा। चुनाव में वी. वी. गिरी जीत गए। इस बगावत के कारण 1969 में कांग्रेस दो भागों में टूट गई—कांग्रेस (ओ) यानी पुरानी कांग्रेस और कांग्रेस (आर) यानी इंदिरा गांधी की नई कांग्रेस।

प्रश्न 2. राजनीतिक दल बदल क्या है? इस पर रोक के लिए क्या उपाय किये गए हैं?

  • उत्तर:

  • दल-बदल का अर्थ: जब कोई विधायक या सांसद किसी एक पार्टी के टिकट और चुनाव चिन्ह पर चुनाव जीतता है, और जीत जाने के बाद स्वार्थ या किसी कारण से उस पार्टी को छोड़कर किसी दूसरी पार्टी में शामिल हो जाता है, तो उसे 'राजनीतिक दल-बदल' कहते हैं। 1967 के चुनावों के बाद भारतीय राजनीति में यह बहुत ज्यादा होने लगा था।

  • रोकने के उपाय (कानून): इस गलत परंपरा को रोकने के लिए सरकार ने 1985 में 52वाँ संविधान संशोधन करके 'दल-बदल विरोधी कानून' बनाया। इस कानून के तहत अगर कोई नेता अपनी पार्टी के नियमों को तोड़ता है या पार्टी के अध्यक्ष के आदेश का उल्लंघन करके दूसरी पार्टी में जाता है, तो उसकी संसद या विधानसभा की सदस्यता रद्द (खत्म) कर दी जाती है।




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