12th Maithili subjective kavita chapter 2
बाल-लीला : मनबोध
प्र. 9. कृष्णकेँ हरि दामोदर क पदवी कोना भेटलनि। अपन शब्दमे लिखू? [2020A]
उत्तर: जखन यमलार्जुनक गाछ खसला कऽ बाद माता यशोदा कृष्ण केँ ओतय नहि देखलन्हि, तऽ ओ ब्याकुल भऽ कऽ ओतय ओनाहि दउड़ली जेना बछरु हेराएला पर कोनो गाए दउड़ैत अछि। एहि लीला कऽ बाद कृष्ण केँ दामोदरक पदवी भेटलनि।
प्र. 10. कनईत जसोमति पहुँकलि जायनेरु हेराएने जेहने धेनु गाय। एहि पाँतिक भाव स्पष्ट करू। [2021]
उत्तर: एहि पँक्तिक भाव ई अछि जे गाछ खसबाक आवाज सुनि कऽ जखन यशोदा अँगनामे बान्हल कृष्ण केँ ओतय नहि देखलन्हि, तऽ ओ डर सँ रोइत भेल ओतय ओनाहि दउड़ली जेना बछरु हेराएला पर कोनो ब्याकुल गाए दउड़ैत अछि।
प्र. 11. बाल लीला मे कोन देवताक बाल लीला अछि?
उत्तर: बाल लीला शीर्षक कवितामे भगवान श्री कृष्णक बाल लीलाक सुन्दर चित्रण कएल गेल अछि।
प्र. 12. नन्दबाबा कोन तरहेँ उत्साहित छलाह, वर्णन करू।
उत्तर: कृष्ण जन्माहोत्सवक नीक अवसर पर नन्द भवनक आगू पूरा खुशीक संग घोड़ा, हाथी, रथ, सोनाक गहना आ कतेको तरहक कीमती रत्न-मणि उदारतापूर्वक दान कएल जा रहल अछि।
प्र. 13. बाल-लीलाक आधार पर कृष्णक चरित्र लिखू।
उत्तर: मनबोधक 'कृष्णजन्म' अठारहम शताब्दीक रचना थिक। एहिमे कवि कृष्णक बाल रूपक सुंदर वर्णन कएने छथि। धरतीक भार कम करबाक लेल कृष्ण देवकीक गर्भ सँ जन्म लेलन्हि। कुछ दिनक बाद जखन ओ हाथ-पैर चलेबाक योग्य भेलाह, तऽ कतेको बेर अँगना सँ बाहर चल जाइत छलाह। ओ कखनो आगि छुइ लैत छलाह तऽ कखनो चून केँ दही बुझि कऽ खा लैत छलाह। हुनकर एहन चंचलता आ नटखट आदत सँ परेशान भऽ यशोदा हुनका उखरि सँ बान्हि देलन्हि। कृष्ण ओहि उखरि केँ घिसिया कऽ दुइटा यमलार्जुन गाछक बीच ले गेलाह आ ओकरा खसा कऽ हुनकर उद्धार कएने छथि।
प्र. 14. कृष्णकेँ हरि दामोदर पदवी कोना भेटलनि ? [2018A, 2019A, 2020]
उत्तर: श्रीकृष्णक बाल-सुलभ चंचलता सँ तंग आबि कऽ माता यशोदा हुनका उखरि सँ बान्हि दैत छथिन। कृष्ण ओहि उखरि केँ घिसिया कऽ यमलार्जुन गाछक जड़ि मे फँसा दैत छथि, जाहि सँ ओ गाछ खसि पड़ैत अछि। गाछ खसबाक आवाज सुनि कऽ सब लोक ओतय दउड़ैत अछि आ जखन कृष्ण केँ सही-सलामत देखैत अछि तऽ सब प्रसन्न भऽ जाइत अछि। एहि तरहेँ यमलार्जुन गाछ केँ उखाड़बाक कारणेँ कृष्ण केँ 'हरि दामोदर'क उपाधि भेटलनि।
प्र. 15. मनबोधक कविताक आधार पर यशोदा किएक अपना केँ कौसैत छथि। [2018A]
उत्तर: यशोदा केँ जखन ई थाह भेटैत छन्हि जे गाछ कृष्ण पर खसि पड़ल, तऽ ओ ई सुनि कऽ अपना केँ कोसैत ब्याकुल भऽ दउड़ैत छथि। ओ सब काज छोड़ि कऽ कृष्ण कऽ देखबाक लेल भागैत छथि आ सोचैत छथि जे एतेक जतन सँ पोसल बच्चा गाछक नीचा आबि गेल। ओ जोर-जोर सँ चिनवारि पारैत व्याकुल भऽ अपन बालक केँ देखबाक लेल दउड़ैत छथि।
प्र. 16. कृष्णक जन्सक उपरान्त देवता लोकनिक हर्षक वर्णन करू ? [2021]
उत्तर: जखन कृष्णक जन्म भेल, तऽ नन्दक दरबार मे नाच-गान आ उत्सव शुरू भऽ गेल। गोपी सभ झुमरि गाबय लगलीह आ पूरा माहौल मङ्गल गान सँ गुँजित भऽ गेल। स्वर्ग सँ देवता लोकनि सेहो एहि दृश्य केँ देखि कऽ बहुत प्रसन्न भेलाह आ आकाश सँ फूलक वर्षा करय लगलाह।
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