12th History Chapter 13 Subjective महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आंदोलन
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. कांग्रेस में उग्रवादियों की भूमिका का परीक्षण करें।
उत्तर: कांग्रेस में उग्रवादी विचारधारा (गरम दल) के मुख्य नेता लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल थे, जिन्हें मुख्य रूप से 'लाल, बाल, पाल' कहा जाता था। इनमें लाला लाजपत राय पंजाब से, बाल गंगाधर तिलक महाराष्ट्र से और बिपिन चंद्र पाल बंगाल से थे।
भूमिका: ये नेता अंग्रेजों की खुशामद करने के बजाय उनके खिलाफ सख्त और असरदार कदम उठाने के पक्ष में थे।
उग्रवादी नेताओं का मानना था कि ब्रिटिश शासन के खिलाफ हथियार उठाना या कड़ा विरोध करना पूरी तरह सही है। उनके इस कड़े संघर्ष और बलिदान ने देश में आज़ादी की माँग को और तेज कर दिया।
2. चार उग्रवादी नेताओं के नाम लिखें।
उत्तर: चार प्रमुख उग्रवादी (गरम दल) नेताओं के नाम इस प्रकार हैं:
लाला लाजपत राय
बाल गंगाधर तिलक
बिपिन चंद्र पाल
अरविन्द घोष
3. महात्मा गाँधी के आरंभिक जीवन का संक्षिप्त विवरण दें।
उत्तर: महात्मा गाँधी का शुरुआती जीवन इस प्रकार रहा:
जन्म और परिवार: महात्मा गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनके पिता का नाम करमचंद गाँधी था, जो राजकोट के दीवान थे, और माता का नाम पुतलीबाई था। गाँधी जी का विवाह कस्तूरबा से हुआ था।
शिक्षा: उनकी शुरुआती पढ़ाई राजकोट के अल्फ्रेड हाईस्कूल में हुई। इसके बाद, साल 1888 में वे कानून (वकालत) की पढ़ाई करने इंग्लैंड चले गए और 1891 में बैरिस्टर (वकील) बनकर भारत वापस लौटे।
दक्षिण अफ्रीका यात्रा: साल 1893 में एक मुकदमे के सिलसिले में वे दक्षिण अफ्रीका गए। वहाँ उन्होंने अंग्रेजों की रंगभेद (काले-गोरे के भेद) नीति का कड़ा विरोध किया और साल 1915 में वे वापस भारत लौट आए।
4. गाँधी जी के प्रारंभिक आंदोलन कहाँ-कहाँ हुए थे और क्यों?
उत्तर: भारत लौटने के बाद गाँधी जी के शुरुआती तीन प्रमुख आंदोलन इस प्रकार थे:
चंपारण आंदोलन (1917): बिहार के चंपारण में अंग्रेजों की जबरन नील की खेती कराने वाली 'तीनकठिया व्यवस्था' के खिलाफ उन्होंने पहला सत्याग्रह किया।
खेड़ा आंदोलन (1918): गुजरात के खेड़ा में फसल खराब हो जाने के कारण किसान लगान (टैक्स) नहीं दे पा रहे थे। गाँधी जी ने किसानों का लगान माफ कराने के लिए यह आंदोलन चलाया।
अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन (1918): अहमदाबाद के कपड़ा मिल मजदूरों की तनख्वाह (प्लेग बोनस/वेतन) बढ़ाने के लिए गाँधी जी ने यह आंदोलन किया और भूख हड़ताल की।
5. चम्पारण आन्दोलन के क्या कारण थे?
उत्तर: चंपारण आंदोलन का मुख्य कारण बिहार के चंपारण में लागू 'तीनकठिया व्यवस्था' थी।
इस व्यवस्था के तहत किसानों को अपनी जमीन के 3/20 हिस्से पर (यानी हर एक बीघा में 3 कट्ठा जमीन पर) अनिवार्य रूप से नील की खेती करनी पड़ती थी।
किसान नील की खेती नहीं करना चाहते थे क्योंकि इससे जमीन बंजर हो जाती थी और अंग्रेजों द्वारा इसके बहुत कम दाम मिलते थे। इसी मजबूरी और शोषण को खत्म करने के लिए चंपारण आंदोलन हुआ था।
चंपारण के किसान राजकुमार शुक्ल के बुलावे पर गाँधी जी 1917 में चंपारण पहुँचे और सत्याग्रह के जरिए किसानों को इस तीनकठिया व्यवस्था से आज़ादी दिलाई।
6. स्वतंत्रता आंदोलन में महात्मा गाँधी की भूमिका पर प्रकाश डालिए।
(अथवा) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गाँधी के योगदान किस प्रकार महत्वपूर्ण थे?
उत्तर: भारत की आज़ादी की लड़ाई में महात्मा गाँधी का योगदान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
गाँधी जी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे। इसके बाद उन्होंने 1917 में चंपारण सत्याग्रह, 1918 में खेड़ा आंदोलन और अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन का सफल नेतृत्व किया।
देश को आज़ाद कराने के लिए उन्होंने पूरे देश के स्तर पर तीन बड़े आंदोलन चलाए: 1920 में असहयोग आंदोलन, 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन (दांडी यात्रा) और 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन। उनके इन प्रयासों ने पूरे देश को एकजुट कर दिया।
7. असहयोग आंदोलन के कारणों का प्रकाश डालें।
उत्तर: अंग्रेजों की दमनकारी (अत्याचारी) नीतियों के खिलाफ गाँधी जी ने 1920 में असहयोग आंदोलन शुरू किया था। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
रॉलेट एक्ट: अंग्रेजों का काला कानून, जिसके तहत किसी को भी बिना वजह जेल में डाला जा सकता था।
जलियांवाला बाग हत्याकांड: अमृतसर में बेकसूर लोगों पर गोलियाँ चलवाना।
खिलाफत आंदोलन: तुर्की के खलीफा के समर्थन में भारतीय मुसलमानों का आंदोलन, जिसे गाँधी जी ने अपना समर्थन दिया।इन सभी अत्याचारों के कारण गाँधी जी ने अंग्रेजों का सहयोग न करने (असहयोग) का फैसला किया।
8. रॉलेट एक्ट पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर: भारत में बढ़ रही क्रांतिकारी गतिविधियों और अंग्रेजों के प्रति गुस्से को दबाने के लिए लॉर्ड चेम्सफोर्ड ने जज सिडनी रॉलेट की अगुवाई में एक कानून बनाया, जिसे 1919 का रॉलेट एक्ट कहा जाता है।
इस कानून के तहत पुलिस किसी भी भारतीय को बिना किसी वारंट, बिना सबूत और बिना मुकदमा चलाए सीधे जेल में बंद कर सकती थी।
इस कानून के खिलाफ कोई अपील, कोई दलील या कोई वकील रखने की इजाजत नहीं थी, इसीलिए भारतीयों ने इसे 'काला कानून' कहा।
9. जलियाँवाला बाग हत्याकांड क्यों हुआ?
उत्तर: रॉलेट एक्ट कानून के विरोध में पूरे देश में हड़तालें हो रही थीं। इसी दौरान 9 अप्रैल 1919 को पंजाब के दो बड़े नेताओं—डॉक्टर सत्यपाल और डॉ. सैफुद्दीन किचलू को अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया।
इस गिरफ्तारी के विरोध में 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियाँवाला बाग में एक शांतिपूर्ण सभा बुलाई गई थी।
वहाँ के जिला मजिस्ट्रेट जनरल ओ. डायर ने बिना किसी चेतावनी के सभा पर अंधाधुंध गोलियाँ चलवा दीं। इस दर्दनाक घटना में लगभग 1000 लोग मारे गए और हजारों घायल हो गए।
10. चौरी चौरा घटना क्या थी?
उत्तर: असहयोग आंदोलन के दौरान 5 फरवरी 1922 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा नामक स्थान पर आंदोलनकारियों का एक जुलूस निकल रहा था। पुलिस ने इस जुलूस पर फायरिंग कर दी, जिससे गुस्साए लोगों ने पुलिस थाने में आग लगा दी। इस घटना में 22 पुलिसकर्मी जिंदा जलकर मर गए। हिंसा से दुखी होकर गाँधी जी ने 12 फरवरी 1922 को असहयोग आंदोलन वापस ले लिया।
11. स्वराज पार्टी की स्थापना कब हुई और किसने की?
उत्तर: स्वराज पार्टी की स्थापना 1 जनवरी 1923 को मोतीलाल नेहरू और चित्तरंजन दास (सी. आर. दास) ने इलाहाबाद (प्रयागराज) में की थी।
12. सविनय अवज्ञा आंदोलन के दो कारण लिखें।
उत्तर: सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) शुरू होने के दो मुख्य कारण ये थे:
साइमन कमीशन: 1928 में भारत आए इस कमीशन में एक भी भारतीय सदस्य नहीं था, जिससे भारतीयों में बहुत गुस्सा था।
नमक कानून: अंग्रेजों ने नमक बनाने पर सरकारी एकाधिकार लागू कर दिया था, जिसके तहत कोई भी भारतीय समुद्र के पानी से खुद नमक नहीं बना सकता था। गाँधी जी ने इसके खिलाफ दांडी यात्रा शुरू की।
13. साइमन कमीशन पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
(अथवा) कब और क्यों साइमन कमीशन भारत आया?
उत्तर: ब्रिटिश सरकार ने 1919 के सरकारी अधिनियम (कानून) के कामकाज की समीक्षा करने के लिए 1927 में एक कमीशन बनाया, जिसे इसके अध्यक्ष सर जॉन साइमन के नाम पर 'साइमन कमीशन' कहा गया।
यह कमीशन 3 फरवरी 1928 को मुंबई पहुँचा।
विरोध का कारण: इस कमीशन में कुल 7 सदस्य थे और सातों के सात अंग्रेज थे। इसमें एक भी भारतीय को शामिल नहीं किया गया था। इसीलिए पूरे भारत में इसका विरोध हुआ, लोगों ने काले झंडे दिखाए और "साइमन वापस जाओ" (Simon Go Back) के नारे लगाए।
14. 1929 ई० में आयोजित कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन किन दो कारणों से महत्त्वपूर्ण माना जाता है?
उत्तर: 1929 का कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन (जिसके अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू थे) इन दो मुख्य कारणों से बहुत महत्वपूर्ण है:
पूर्ण स्वराज की माँग: इस अधिवेशन में कांग्रेस ने पहली बार अंग्रेजों से आधी आज़ादी के बजाय 'पूर्ण स्वराज' (पूरी तरह आज़ादी) को अपना मुख्य लक्ष्य घोषित किया।
प्रथम स्वतंत्रता दिवस की घोषणा: इसी अधिवेशन में फैसला लिया गया कि हर साल 26 जनवरी को 'स्वतंत्रता दिवस' के रूप में मनाया जाएगा, और पहली बार 26 जनवरी 1930 को पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था।
15. पूना पैक्ट के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर: पूना पैक्ट (Poona Pact) साल 1932 में महात्मा गाँधी और डॉ. बी. आर. अम्बेडकर के बीच पुणे की यरवदा जेल में हुआ एक समझौता था।
यह समझौता दलित वर्ग (पिछड़े वर्गों) के लिए प्रांतीय और केंद्रीय व्यवस्थापिका (विधायिकाओं) में सीटें आरक्षित (Reserve) करने के लिए किया गया था।
16. क्रिप्स मिशन भारत कब आया? इस मिशन के अध्यक्ष कौन थे?
उत्तर: क्रिप्स मिशन मार्च 1942 में भारत आया था। इस मिशन के अध्यक्ष ब्रिटिश मंत्री सर स्टैफोर्ड क्रिप्स थे।
17. दूसरा गोलमेज सम्मेलन क्यों असफल हुआ?
उत्तर: साल 1931 के अंत में लंदन में दूसरा गोलमेज सम्मेलन हुआ, जिसमें कांग्रेस की तरफ से गाँधी जी शामिल हुए थे। गाँधी जी का मानना था कि कांग्रेस पूरे भारत की जनता का प्रतिनिधित्व करती है, लेकिन तीन अलग-अलग पक्षों की चुनौतियों के कारण यह सम्मेलन बिना किसी नतीजे (असफल) के खत्म हो गया:
मुस्लिम लीग का दावा था कि वह भारत के सभी मुसलमानों के हक के लिए बोलती है।
राजे-रजवाड़ों (देशी रियासतों) का कहना था कि उनके इलाकों पर कांग्रेस का कोई हक या नियंत्रण नहीं है।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर का मानना था कि कांग्रेस दलितों और समाज के निचले वर्गों का प्रतिनिधित्व नहीं करती, इसलिए उन्होंने दलितों के लिए अलग चुनाव क्षेत्र (पृथक निर्वाचन) की माँग की।
18. कम्यूनल अवार्ड क्या था?
उत्तर: दूसरे गोलमेज सम्मेलन में जब भारतीय नेता आपस में किसी बात पर सहमत नहीं हो पाए, तब ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्जे मैक्डोनाल्ड ने 16 अगस्त 1932 को एक घोषणा की, जिसे 'कम्यूनल अवार्ड' (साम्प्रदायिक पंचाट) कहा जाता है।
इसके तहत उन्होंने मुसलमानों, सिखों, भारतीय ईसाइयों और दलितों (हरिजनों) के लिए अलग चुनाव क्षेत्र (पृथक निर्वाचन) की व्यवस्था कर दी।
गाँधी जी इसके सख्त खिलाफ थे क्योंकि इससे हिंदू समाज और पूरा देश आपस में बंट जाता।
19. भारत छोड़ो आंदोलन के दो कारण बताइए।
उत्तर: 1942 में शुरू हुए भारत छोड़ो आंदोलन के दो मुख्य कारण ये थे:
क्रिप्स मिशन की असफलता: अंग्रेजों द्वारा भेजा गया क्रिप्स मिशन भारतीयों को कोई वास्तविक अधिकार या आज़ादी देने को तैयार नहीं था, जिससे देश में निराशा और गुस्सा फैल गया।
द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण महंगाई: दूसरे विश्वयुद्ध की वजह से भारत में खाने-पीने की चीज़ों और रोजमर्रा के सामानों के दाम बहुत बढ़ गए थे, जिससे आम जनता में अंग्रेजों के खिलाफ भारी असंतोष था।
20. अंग्रेजों ने भारत क्यों छोड़ा? किन्हीं दो कारणों की चर्चा करें।
उत्तर: अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर करने वाले दो मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
भारत छोड़ो आंदोलन: महात्मा गाँधी के नेतृत्व में 1942 में शुरू हुए इस आंदोलन ने "करो या मरो" के नारे के साथ पूरे देश को अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा कर दिया। जनता अब किसी भी कीमत पर गुलामी सहने को तैयार नहीं थी।
द्वितीय विश्वयुद्ध का असर: दूसरे विश्वयुद्ध में अंग्रेजों का बहुत ज्यादा पैसा और आर्थिक नुकसान हुआ था। युद्ध के बाद ब्रिटेन इतना कमजोर हो गया था कि उसके लिए भारत जैसे बड़े देश पर अपना नियंत्रण बनाए रखना और शासन चलाना नामुमकिन हो गया।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. गाँधीजी के जीवन एवं कार्यों का संक्षिप्त विवरण दें।
(अथवा) भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महात्मा गाँधी के योगदान का वर्णन करें।
उत्तर: महात्मा गाँधी भारतीय आज़ादी की लड़ाई के सबसे प्रमुख नेता थे। उनके जीवन और मुख्य योगदान को हम इस प्रकार समझ सकते हैं:
शुरुआती जीवन: महात्मा गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनके पिता करमचंद गाँधी और माता पुतलीबाई थीं। उनकी शुरुआती शिक्षा राजकोट में हुई और 1888 में वे कानून की पढ़ाई करने इंग्लैंड चले गए। 1891 में बैरिस्टर बनकर लौटे और 1893 में एक मुकदमे के लिए दक्षिण अफ्रीका गए, जहाँ उन्होंने काले-गोरे के भेदभाव के खिलाफ पहली बार लड़ाई लड़ी।
भारत वापसी और शुरुआती आंदोलन: साल 1915 में भारत लौटने के बाद उन्होंने देश की स्थिति को समझा। उन्होंने 1917 में चंपारण सत्याग्रह, 1918 में खेड़ा आंदोलन और अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन का सफल नेतृत्व करके भारतीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई।
मुख्य राष्ट्रीय आंदोलन: देश को आज़ाद कराने के लिए उन्होंने सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह को अपना मुख्य हथियार बनाया और तीन बड़े आंदोलन किए:
1920 में असहयोग आंदोलन: अंग्रेजों की हर व्यवस्था का बहिष्कार करना।
1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन: नमक कानून तोड़कर अंग्रेजों के नियमों की शांतिपूर्वक अवहेलना करना।
1942 में भारत छोड़ो आंदोलन: अंग्रेजों को देश से बाहर निकालने के लिए आखिरी देशव्यापी लड़ाई।
निष्कर्ष: गाँधी जी के इन लगातार प्रयासों और आंदोलनों के कारण ब्रिटिश सरकार पूरी तरह लाचार हो गई और अंततः 15 अगस्त 1947 को भारत आज़ाद हुआ। 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी।
2. असहयोग आंदोलन की प्रकृति एवं परिणामों का वर्णन करें।
उत्तर:
आंदोलन की प्रकृति (स्वरूप): यह आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण और अहिंसक था। इसका मुख्य उद्देश्य अंग्रेजों के साथ किसी भी तरह का सहयोग न करना (Non-cooperation) था। इसके तहत वकीलों ने अदालतें छोड़ीं, छात्रों ने सरकारी स्कूल-कॉलेज छोड़े, और लोगों ने विदेशी कपड़ों व सामानों का बहिष्कार करके स्वदेशी (खादी) को अपनाया। यह भारत का पहला ऐसा आंदोलन था जिसमें देश की आम जनता, किसान और मजदूरों ने इतनी बड़ी संख्या में भाग लिया।
परिणाम (असर): भले ही 1922 में चौरी-चौरा की हिंसक घटना के बाद गाँधी जी ने इसे वापस ले लिया, लेकिन इसके परिणाम बहुत दूरगामी रहे:
इसके कारण पहली बार आम जनता के मन से अंग्रेजों का डर पूरी तरह निकल गया।
इसने राष्ट्रीय आंदोलन को चंद नेताओं के कमरों से निकालकर एक जन-आंदोलन (पूरे देश का आंदोलन) बना दिया।
देश में हिंदू-मुस्लिम एकता बहुत मजबूत हुई और लोगों में देशप्रेम की भावना का भारी विकास हुआ।
3 अंग्रेजों ने भारत क्यों छोड़ा? कारणों की विवेचना करें। (अथवा) भारतीय स्वतंत्रता की प्राप्ति में सहायक तत्वों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: भारत को आज़ादी मिलने और अंग्रेजों के भारत छोड़ने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण (सहायक तत्व) थे, जो निम्नलिखित हैं:
राष्ट्रवाद की भावना का उदय: दूसरे विश्वयुद्ध के बाद भारतीयों में अपने देश को आज़ाद कराने की भावना (राष्ट्रीय चेतना) बहुत तेजी से बढ़ी। महात्मा गाँधी के नेतृत्व में हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन ने आज़ादी की इस लड़ाई को बहुत मजबूत कर दिया था।
इंग्लैंड की कमजोर स्थिति: दूसरे विश्वयुद्ध के कारण ब्रिटेन (इंग्लैंड) की हालत बहुत खराब हो गई थी। वह आर्थिक और सैन्य रूप से इतना कमजोर हो चुका था कि भारत जैसे बड़े देश पर अब अपना शासन और नियंत्रण बनाए रखना उसके बस में नहीं था।
भारत के पक्ष में ब्रिटिश जनमत: विश्वयुद्ध के मुश्किल समय में भारत ने ब्रिटेन की बहुत मदद की थी। इस वजह से खुद ब्रिटेन की जनता और वहाँ के नेताओं का एक बड़ा वर्ग भारत को आज़ाद करने के पक्ष में था। यही कारण था कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री एटली ने सत्ता में आते ही भारत की आज़ादी की घोषणा कर दी।
ब्रिटेन पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव: विश्वयुद्ध के बाद दुनिया की महाशक्तियां—अमेरिका और चीन, ब्रिटेन पर लगातार यह दबाव बना रहे थे कि वह भारत की समस्या को सुलझाए और उसे आज़ाद करे।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री एटली का योगदान: 1945 में ब्रिटेन में क्लीमेंट एटली प्रधानमंत्री बने। उन्होंने भारत की आज़ादी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पहले 'कैबिनेट मिशन' भेजा और बाद में 'लॉर्ड माउंटबेटन' को भारत का आखिरी वायसराय बनाकर भेजा ताकि सत्ता भारतीयों को सौंपी जा सके।
ब्रिटिश अजेयता का भ्रम टूटना: अंग्रेज खुद को दुनिया में सबसे शक्तिशाली और अजेय (जिन्हें कोई हरा न सके) समझते थे। लेकिन दूसरे विश्वयुद्ध में जब शुरुआत में जापानियों ने अंग्रेजों को बुरी तरह हराया, तो भारतीयों के मन से अंग्रेजों का यह खौफ हमेशा के लिए खत्म हो गया।
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