12th Maithili Chapter 1 Gadya ऋतु-वर्णना : ज्योतिरीश्वर Subjective

 12th Maithili Chapter 1 Gadya ऋतु-वर्णना : ज्योतिरीश्वर Subjective

ऋतु-वर्णना : ज्योतिरीश्वर

प्रश्न 1. वसन्त ऋतुिक विशेषताक वर्णन करू।

  • उत्तर: वसन्त ऋतु प्राकृतिक रूप सँ आनंद दैबला होइत अछि। एहि समय प्रकृतिमे हर तरफ नव रूप देखबामे मिलैत अछि। गाछ-वृक्ष सबमे नव आ कोमल पत्ता (किसलय) आब जाइत अछि। आमक गाछमे मँजर (मोजर) लगैत अछि। कोइली आमक रस पी कए अपन मीठ आवाज (पंचम स्वर) मे गीत गाबय लगैत अछि। एहि ऋतुमे बहबला हवा न त बेसी गरम होइत अछि आ न बेसी ठंढा, ई हवा मन के बहुत नीक लगैत अछि। सब गाछ-वृक्ष नव पत्ता आ मँजर सँ भरि जाइत अछि।

प्रश्न 2. वसन्त ऋतु मे नायक ओ नायिकाक मानसिक भावनाक वर्णन लिखू?

  • उत्तर: वसन्त के कामदेव क दूत मानल जाइत अछि, जे प्रेम बढ़ाबैत अछि। एहि ऋतुमे नायक आ नायिका के मनमे एक-दोसरा सँ मिलबक इच्छा (अभिसार) जागत होइत अछि। मुदा, जे नायिका अपन पति या प्रेमी सँ दूर अछि (विरहनी), ओकर स्थिति बहुत दयनीय आ कष्टदायक भ' जाइत अछि। ओ अपन प्रियतम सँ मिलबाक लेल बहुत व्याकुल आ परेशान रहैत अछि। नायकक दशा सेहो चिन्ताजनक भ' जाइत अछि। संक्षेपमे कहल जाए तँ, विरहमे जी रहल प्रेमी-प्रेमिकाक लेल ई ऋतु बहुत कष्टकारी होइत अछि।

प्रश्न 3. ऋतु-वर्णना कें वर्षा-वर्णनाक वर्णन करू।

  • उत्तर: वर्षा ऋतुमे आकाशमे मेघ खूब गजरैत (कड़कइत) रहैत अछि। बादल कखनो एक जगह स्थिर रहैत अछि तँ कखनो बहुत तेज हवाक साथ बहय लगैत अछि। कखनो-कखनो बिजली चमकैत अछि आ अझरका (बज्र) खसइत अछि, जेना इंद्रदेव धरती पर गुस्सा भ' कए प्रहार क' रहल होथि। कदम्बक गाछमे खूब फूल फुलाइत अछि, जाहि सँ बड्ड नीक सुगन्ध फैलैत अछि। साँप सब सेहो एतय-ओतय डोलय लगैत अछि।

  • बैंग (दादुर) लगातार टर-टर करैत रहैत अछि, जेना सब मिल कए कोनो बाजाक धुन पर गीत गाबय। बेसी पानि पड़बाक कारणे धरती पर चारू कात कादो-माटि भ' जाइत अछि। मुदा, एहि मौसममे बहुत रास औषधीय गाछ-बिरछ (जड़ी-बूटी) सेहो उगैत अछि। नदी-नाला सब पानि सँ भरि जाइत अछि।

  • जे नायिका अपन प्रेमी सँ दूर अछि, ओकर मनमे मिलबक इच्छा और तेज भ' जाइत अछि। रास्तामे कादो आ पानि भेला सँ बटोहिया (यात्री) आ तीर्थयात्री सभक आबब-जायब मुश्किल भ' जाइत अछि। साधु-सँन्यासी लोकनि एक जगह रुकि कए चारि महिनाक चातुर्मास व्रत शुरू करैत छथि। प्रेमी लोकनिक मनमे प्रेम बढ़ि जाइत अछि। एहि तरहे, वर्षा ऋतुमे अपन किछु नीक तँ किछु खराब गुण सेहो होइत अछि।

प्रश्न 4. ग्रीष्म ऋतुिक विशेषताक ओ अपन अनुभवक वर्णन करू ?

  • उत्तर: जेठ-असाढ़ (गर्मी) क महिनामे पानि क बड्ड किल्लत भ' जाइत अछि। पोखरि, इनार, गढ़ा आ चहचा सब सुखय लगैत अछि। घाम (धूप) बहुत तेज भ' जाइत अछि, जाहि सँ लोक परेशान भ' कए गाछक ठंढा छाहरि खोजय लगैत छथि। लोक के घर सँ बाहर निकलनाइ नीक नहि लगैत अछि, घरहि मे आराम करब नीक लगैत अछि। एहि मौसममे बेल पाकैत अछि।

  • गर्मीक मौसमक अपन अनुभव बहुत कड़वा होइत अछि। तेज आ गरम हवा (लूर) क कारणे बाहर घूमब बहुत कठिन भ' जाइत अछि। कड़क धूप सँ शरीर जरय लगैत अछि आ धरती सेहो पूरा तप जाइत अछि। गर्मीक कारणे तरह-तरह के खाना सेहो नीक नहि लगैत अछि। अतः, गर्मीक ऋतु के अनुभव नीक नहि कहल जा सकैत अछि।

प्रश्न 5. ऋतु-वर्णना कें 'हेमन्त ऋतुिक' वर्णन करू।

  • उत्तर: हेमन्त ऋतु (हल्का जाड़) मे ठंढाक कारणे गाछ-वृक्ष क पत्ता सब झड़य लगैत अछि। चारू कात धानक गमक (सुगंध) फैलल रहैत अछि। एहि समय लोकक लग धन-दउलत क कमी भ' जाइत अछि, मुदा सब गोदाम आ भँड़ार अनाज सँ भरल रहैत अछि। लोक नव अनाज खाय लगैत छथि। ठंढा सँ बचबाक लेल लोक गरम कपड़ा क इंतजाम करैत छथि। दिन छोट भ' जाइत अछि आ घाम (धूप) मीठ आ कोमल लगय लगैत अछि।

  • लोकक स्वभाव सेहो शांत भ' जाइत अछि आ पानि बड्ड ठंढा भ' जाइत अछि। विद्यार्थी सभक लेल ई मौसम पढ़बा-लिखबाक लेल बहुत नीक होइत अछि। रातिक समय भोजन कएलाक बाद ओ आसानी सँ पचि जाइत अछि। ठंढा बेसी भेला सँ कमल क फूल कुम्हला जाइत अछि आ दोसर फूल सभक कमी भ' जाइत अछि।

प्रश्न 6. ऋतु-वर्णना मे वर्णित 'शिशिर वर्णनाक' वर्णन करू।

उत्तर: शिशिर ऋतु (कड़ाके क जाड़) मे सूर्यदेव दक्षिण दिशा क तरफ झुकि जाइत छथि (दक्षिणायन)। एहि मौसममे पाला (बर्फबारी या कनकनी) बड्ड बढ़ि जाइत अछि। कमल क फूल क चमक आ सुगंध एकदम कम भ' जाइत अछि। मरुआ नियर एक खास रँग क फूल सब उगैत अछि। राति बहुत पैघ (लाम्बा) होइत अछि, जाहि सँ लोक के नीनक महत्व बुझि पड़ैत अछि। पानि मे बड्ड ठंढापन आब जाइत अछि। तेज आ ठंढा हवा लोक के खराब लगैत अछि, तैं लोक आगि तापैत छथि। एहि मौसममे दही खानाइ ठीक नहि मानल जाइत अछि। जमीन पर सूतनाइ नीक नहि लगैत अछि आ अपन पत्नी क साथ रहब नीक लगैत अछि। शिशिर ऋतु सब गुण सँ भरल होइत अछि।

प्रश्न 7. मैथिली साहित्यक आदि गद्यकार के छथि ?

  • उत्तर: मैथिली साहित्यक सबसे पहला गद्य लेखक (आदि गद्यकार) ज्योतिरीश्वर छथि।

प्रश्न 8. मैथिली मे कोन पोथीक रचना ज्योतिरीश्वर केलन्हि।

  • उत्तर: ज्योतिरीश्वर मैथिलीमे 'वर्णरत्नाकर' नामक प्रसिद्ध किताब (पोथी) लिखने छथि।

प्रश्न 9. गाछ कोन ऋतु मे पल्लब दैत अछि ?

  • उत्तर: गाछ-वृक्ष सब वसन्त ऋतु मे नव पत्ता (पल्लब) दैत अछि।

प्रश्न 10. कोइलीक स्वर कोन ऋतुिक परिचय दैछ।

  • उत्तर: कोइलीक मीठ आवाज वसन्त ऋतु क आबबक परिचय दैत अछि।

प्रश्न 11. ज्योतिरीश्वर पढ़बायोग्य कोन ऋतुिक राति कें कहैत छथि।

  • उत्तर: ज्योतिरीश्वर हेमन्त ऋतु क राति के पढ़बा-लिखबाक लेल सबसे उत्तम कहैत छथि।


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