Chapter - 1. शरीर क्रिया विज्ञान Subjective
महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर
Q.1 पीयूष ग्रंथि पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें। Ans- पीयूष ग्रंथि एक महत्वपूर्ण अंत:स्रावी ग्रंथि है, जो मस्तिष्क के आधार पर हाइपोथैलेमस के नीचे स्थित होती है। इसका आकार मटर के दाने के समान होता है। इसे "मास्टर ग्रंथि" कहा जाता है क्योंकि यह शरीर की अन्य अंत:स्रावी ग्रंथियों को नियंत्रित करती है।
Q.2 हार्मोन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें। Ans- हार्मोन एक रासायनिक संदेशवाहक होते हैं, जो अंत:स्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित होकर रक्त प्रवाह के माध्यम से शरीर के विभिन्न अंगों और ऊतकों तक पहुँचते हैं। ये शरीर की वृद्धि, विकास, चयापचय (Metabolism), प्रजनन, भावनात्मक प्रतिक्रियाओं और अन्य शारीरिक कार्यों को नियंत्रित और संतुलित करते हैं।
Q.3 मानव अंत:स्रावी ग्रंथियाँ किसे कहते हैं? Ans- वे ग्रंथियाँ जो अपने स्राव (हार्मोन) को सीधे रक्त प्रवाह में छोड़ती हैं और जिनमें नलिकाएँ (ducts) नहीं होती हैं, उन्हें अंत:स्रावी ग्रंथि कहा जाता है।
उदाहरण: पीयूष ग्रंथि, थायरॉयड ग्रंथि, अधिवृक्क ग्रंथि, अग्न्याशय आदि।
जैसे: ग्रोथ हार्मोन (GH), थायरॉक्सिन, इंसुलिन, एड्रेनालिन, एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन।
Q.4 इंसुलिन का संक्षिप्त वर्णन करें। Ans- इंसुलिन एक हार्मोन है जो अग्न्याशय (पैनक्रियाज) से स्रावित होता है। यह रक्त में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करता है। इसकी कमी से मधुमेह (डायबिटीज) रोग हो जाता है।
Q.5 निषेचन किसे कहते हैं? Ans- जब शुक्राणु और अंडाणु आपस में मिलते हैं, तो इसे निषेचन कहा जाता है। निषेचन के बाद जायगोट का निर्माण होता है और यही जायगोट आगे भ्रूण में विकसित होकर एक नए जीवन की शुरुआत करता है।
Q.6 रजोनिवृत्ति पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। Ans- रजोनिवृत्ति (Menopause) महिलाओं में मासिक धर्म के स्थायी रूप से बंद होने की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो आमतौर पर 45-55 वर्ष की उम्र के बीच होती है। यह मुख्य रूप से एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन की कमी के कारण होती है। इस दौरान गर्मी लगना, थकान, मूड बदलना और नींद की समस्या जैसी परेशानियाँ हो सकती हैं।
Q.7 मासिक धर्म पर टिप्पणी लिखिए। Ans- मासिक धर्म महिलाओं में होने वाली एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो आमतौर पर 12 से 50 वर्ष की उम्र के बीच होती है। हर 28 दिनों में गर्भाशय की परत टूटकर रक्त के रूप में बाहर निकलती है। इसे रजोनिवृत्ति (Menopause) आने तक एक चक्र के रूप में देखा जाता है। यदि गर्भधारण नहीं होता, तो यह चक्र दोबारा शुरू हो जाता है।
Q.8 पुरुष के द्वितीयक लैंगिक लक्षण क्या-क्या हैं? संक्षेप में बताएँ। Ans- पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के प्रभाव से 15-18 वर्ष की आयु में द्वितीयक लैंगिक लक्षण विकसित होते हैं, जो इस प्रकार हैं:
शरीर का सुडौल एवं शक्तिशाली होना।
बाह्य जनन अंगों का विकास।
आवाज का भारी होना।
कंधों का चौड़ा होना।
दाढ़ी-मूंछ का उगना।
Q.9 पैराथायराइड ग्रंथि के बारे में लिखिए। Ans- पैराथायराइड ग्रंथियाँ थायरॉयड ग्रंथि की पिछली सतह पर स्थित चार छोटी, अंडाकार ग्रंथियाँ होती हैं। इनका आकार बहुत छोटा होता है और ये शरीर में कैल्शियम संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये ग्रंथियाँ पैराथॉर्मोन नामक हार्मोन का स्राव करती हैं। यह विटामिन-D के साथ मिलकर कैल्शियम की मात्रा को नियंत्रित करता है। इसकी कमी से टिटैनी रोग हो जाता है।
Q.10 जनन ग्रंथियों में बनने वाले हॉर्मोन्स पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। Ans- मानव शरीर में जनन ग्रंथियाँ (Gonads) दो प्रकार की होती हैं— पुरुषों में वृषण (Testis) और स्त्रियों में अंडाशय (Ovary)। ये ग्रंथियाँ ऐसे हार्मोन बनाती हैं जो जननांगों की वृद्धि, लैंगिक लक्षणों का विकास तथा प्रजनन क्रियाओं का नियंत्रण करते हैं।
Q.12 वृषण का अर्थ स्पष्ट कीजिए। Ans- वृषण पुरुष का जनन अंग है, जो शरीर के बाहर थैलीनुमा अंडकोष में होता है। इसका मुख्य काम शुक्राणुओं का निर्माण करना और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन उत्पन्न करना है।
Q.13 जनन ग्रंथियों में बनने वाले हॉर्मोन्स पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। Ans- मानव शरीर में जनन ग्रंथियाँ (Gonads) दो प्रकार की होती हैं— पुरुषों में वृषण (Testis) और स्त्रियों में अंडाशय (Ovary)। ये ग्रंथियाँ ऐसे हॉर्मोन बनाती हैं जो जननांगों की वृद्धि, लैंगिक लक्षणों का विकास तथा प्रजनन क्रियाओं का नियंत्रण करते हैं।
(क) नर हॉर्मोन एवं वृषण: पुरुषों की जनन ग्रंथि वृषण है। यह मुख्य रूप से टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन का स्राव करता है।
(ख) मादा हॉर्मोन एवं अण्डाशय: स्त्रियों में जनन ग्रंथि अण्डाशय है। अण्डाशय तीन प्रमुख हॉर्मोन स्रावित करता है: (i) रिलैक्सिन (ii) एस्ट्रोजेन्स (iii) प्रोजेस्ट्रोन।
Q.14 थायरॉयड ग्रंथि से स्रावित हार्मोन का क्या कार्य है? Ans- थायरॉयड ग्रंथि गर्दन के सामने स्थित होती है। यह मुख्य रूप से दो प्रमुख हॉर्मोन स्रावित करती है— (i) ट्राईआयोडोथायरोनिन (T3) और (ii) थायरॉक्सिन (T4)। इनके मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:
ये हॉर्मोन शरीर के मेटाबोलिज्म, ऊर्जा उत्पादन और विकास को नियंत्रित करते हैं।
वसा, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट के टूटने की गति बढ़ाकर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाते हैं।
शरीर के तापमान को सामान्य बनाए रखते हैं।
शरीर की वृद्धि और विकास में सहायक होते हैं।
रक्त में शर्करा और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम करने में सहायक।
लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) के निर्माण को बढ़ाकर रक्ताल्पता (Anemia) की रोकथाम में मदद करते हैं।
Q.16 ग्लूकागॉन तथा इंसुलिन हार्मोन्स कौन स्रावित करता है? Ans- ग्लूकागॉन और इंसुलिन दोनों अग्न्याशय (Pancreas) द्वारा स्रावित होते हैं।
इंसुलिन – अग्न्याशय की बीटा कोशिकाएँ बनाती हैं। इसका कार्य रक्त में शुगर (ग्लूकोज) को कम करना है।
ग्लूकागॉन – अग्न्याशय की अल्फा कोशिकाएँ बनाती हैं। इसका कार्य रक्त में शुगर को बढ़ाना है, ताकि शुगर बहुत कम न हो जाए।
Q.17 प्रजनन अंग पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। Ans- मनुष्य के शरीर में वे सभी अंग जो नई संतान पैदा करने में मदद करते हैं, प्रजनन अंग कहलाते हैं।
नर में: अंडकोष, शुक्रावहिनी नलिका और लिंग आदि।
स्त्री में: डिंबग्रंथि, डिंबवाही नली, गर्भाशय और योनि आदि।
ये सभी अंग मिलकर प्रजनन तंत्र बनाते हैं।
Q.18 वृषण का अर्थ स्पष्ट कीजिए। Ans- वृषण पुरुष का जनन अंग है, जो शरीर के बाहर थैलीनुमा अंडकोष में होता है। इसका मुख्य काम शुक्राणु बनाना और पुरुष हॉर्मोन (टेस्टोस्टेरोन) बनाना है।
Q.19 शुक्राणु की संरचना किस प्रकार से होती है? Ans- शुक्राणु पुरुष की छोटी जनन कोशिका है। इसकी संरचना तीन भागों में होती है—
सिर: इसमें आनुवंशिक पदार्थ (जीन) होता है।
मध्य भाग: यह ऊर्जा देता है।
पूँछ: इससे शुक्राणु तैरकर आगे बढ़ता है।
Q.20 डिम्बवाहिनी नलिका पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। Ans- डिम्बवाहिनी नलिका (Fallopian Tube) दो पतली नलिकाएँ होती हैं, जो अंडाशय को गर्भाशय से जोड़ती हैं। अंडा इसी नलिका से होकर गर्भाशय तक पहुँचता है। नलिका के अंदर छोटे-छोटे रोएँ (Cilia) होते हैं जो अंडे को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं।

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